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Wednesday 28 October 2009

कार्तिक मास में स्नान की महिमा

परम पूज्य गुरुदेव ने सत्संग में बताया है कि कार्तिक मास में सूर्योदय से पहले स्नान करने की बड़ी भारी महिमा है और ये स्नान तीर्थ स्नान के समान होता है l साथ ही अगर कोई व्यक्ति, कार्तिक के पूरे महीने ये पुण्य स्नान ना कर सके, तो कार्तिक मास के आखिरी तीन दिन (त्रियोदशी, चतुर्दशी और पूनम) को भी अगर सूर्योदय से पूर्व स्नान करता है, तो उसे पूरे मास के पुण्य स्नान का फल होता हैl
इस वर्ष कार्तिक मास के आखिरी तीन दिन हैं : 31st Oct. 09 (Saturday), Ist Nov. 09 (Sunday) and 2nd Nov. 09 (Monday)



Vadodara – Nov. 2007


Saturday 24 October 2009

कुत्ता, बिल्ली व मुर्गा ना पालें

महाभारत में लिखा है.....टूटे फूटे बर्तनों में कलह का व कलियुग का वास होता है l कुत्ता, बिल्ली या मुर्गा जिस घर में रहते हैं, वहां का देवत्व चला जाता है l उस घर के लोग ज़रा ज़रा बात में खिन्न होते हैं...अशांत होते हैं l उनकी बुद्धि मारी जाती है.....उनकी बुद्धि के निर्णय गलत होते हैं l वे लोग शुभ को अशुभ मानते हैं और बुरे को अच्छा मानते हैं l कुत्ते और बिल्ली के पैरो की धूलि घर में न आये
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Ahemdabaad - 18th Oct. 2009

वर्ष भर निरोग रहने के लिए

वर्ष के प्रथम दिन आसोपाल (अशोक के पेड़ के पत्ते) के और नीम के पत्तों का तोरण लगायें और वहां से गुजरें तो वर्षभर खुशहाली और निरोगता रहेगी l

Ahemdabaad - 18th Oct. 2009

Wednesday 21 October 2009

सभी बीमारियों में तुलसी प्रयोग

बड़े लोगों के लिए २५ से १०० तुलसी के पान और छोटों के लिए ५ से २५ तुलसी के पान, उसका रस निकाला, फिर गुड़ अथवा शहद मिला दें और सुबह खाली पेट ले लो l २ से २ १/२ घंटे तक दूसरा कुछ ना लो l ऐसा २-३ महीने करो l तुम्हारे शरीर को जैसे गोदाम में बिल्ली भर दिया, तो चूहों को खोज - खोज के उनका सफाया करती है, ऐसे ही शरीर की, मन की, मति की, गति की जो बीमारियाँ हैं, उन्हें खोज-खोज के ये तुलसी का प्रयोग निकाल देगा l
अगर और बढ़िया स्वास्थ्य लेना हो तो दही ३.५ से ४ घंटे में दही जम जायेगी, इस बोलते हैं मीठी दही (खटास रहित दही) फिर दोपहर को और शाम को, दिन में ३ बार और भी ले सकते हैं l २५ से १०० तुलसी के पान का रस.......... कैसा भी भयंकर कैंसर हो भाग जायेगा l

Ahemdabaad - 19th Oct. 2009

अश्विनी मुद्रा(थलबस्ती)



बिस्तर से उतरें, नीचे धरती पर चटाई-कम्बल आदि बिछा दिया l पूर्व की तरफ सिर कर दिया l श्वास बाहर फेंक दिए, पेट को अन्दर-बाहर २-५ बार किया l योनी को संकोचन-विस्तरण २५ बार करो l फिर श्वास ले लो l फिर श्वास बाहर फेंको और शौच जाने की जगह को, जैसे घोड़ा लीद छोड़ता है, संकोचन-विस्तरण करता है, ऐसे करो l ऐसे ४ श्वास लेकर करो तो १०० बार हो जायेगा l इसे बोलते हैं अश्विनी मुद्रा जो की त्रिदोषनाशक है l बवासीर और कब्ज़ में अदभुद लाभ होता है l स्वप्नदोष आदि में भी फायदा करता है l इससे बुद्धि में इजाफा होगा l कर्तित्व में आप सक्रिय हो जायेंगे l आपका मूलाधार केंद्र प्रभावशाली होगा l स्वाधिष्ठान केंद्र विकसित होगा l कुण्डलिनी जागरण में मदद मिलेगी l ध्यान भजन में बरकत होगी l


दाढ़ी (ठोडी) के बीच में जो खड्डा है, उसे दबाने पर भी कब्ज़ में फायदा होगा l




Baroda – 1st Nov. 2009

जीवन से शुष्कता मिटाने के लिए व ख़ुशी लाने के लिए

तृप्ति प्राणायाम - इसकी खोज महर्षि च्यवन ने की है

पहले दायें बायें से श्वास लिया छोड़ा 10 बार (अनुलोम विलोम); बाद में दोनो नथूनों से शुद्ध हवामान में श्वास भरा; और गुरु मंत्र एक बार जपा और आनंद आनंद चिंतन किया और फूँक मार के अशांति, अतृप्ति को बाहर फेंक दिया; पूरा श्वास भरा और एक दो बार गुरु मंत्र जपा और श्वास मुँह से निकाल दिया, 50-100 बार ऐसा करो; आपके जीवन में उसी समय तृप्ति प्रसन्नता होने लगेगी ।
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Ahemdabaad - 19th Oct. 2009

शारीरिक कमजोरी, बल वृद्धि व अन्य रोगों में

1. 10 ग्राम काले तिल चबा लो, और ठंडा पानी पियो; 2 घंटे तक कुछ खाओ पियो नहीं l इससे शरीर के कमजोरी मिटकर शरीर मजबूत होगा l दांत व मसूड़े मज़बूत होंगे, मस्तक मज़बूत होगा

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2.चना, मूँग, मोठ यह सब मिलाकर एक कटोरी, एक मुट्ठी भर मूँगफली व एक चम्मच तिल (काले हों तो उत्तम) रात भर पानी में भिगोकर रखें। सुबह नमक मिलाकर भाप लें, उबाल लें। इसमें हरा धनिया, पालक व पत्तागोभी काटकर तथा चुकंदर, मूली एवं गाजर कद्दूकश करके मिला दें। ऊपर से काली मिर्च बुरककर नींबू निचोड़ दें। चार व्यक्तियों के लिए नाश्ता तैयार है। इसे खूब चबा-चबाकर खायें। यह नाश्ता सभी प्रकार खनिज-द्रव्यों, प्रोटीन्स, विटामिन्स व आवश्यक कैलरीज की पूर्ति करता है। जिनकी उम्र 60 साल से अधिक है व जिनकी पाचनशक्ति कमजोर है, उनको नाश्ता नहीं करना चाहिए।


दोपहर के भोजन के बाद एक या दो पके केले खायें, बच्चे मजबूत होंगे l


नोट: केले खाने के बाद, केले के छिलके पर जो गिरी होती हैं (सफ़ेद) उसे खाने से केला हज़म होता है ।




3. लोहे के बर्तन में पानी गरम करो, फिर पीने लायक हो वो पिया करो; इस से haemoglobin बढ़ेगा; दूध भी उसी में उबालो, दाल भी उसी में बनाओ; इस से भी खून बनेगा;

4. दो छुआरे (एक व्यक्ति के लिए) धो के, बीज निकाल के, दूध में डाल दो l दूध में पानी डालो l धीमी आँच पर दूध उबालें l धीमी आँच में वो छुआरे उबलेंगे l
हेमंत ऋतु: 23 अक्टूबर - 20 दिसम्बर तक है; इन दिनों शरीर को बनाने वाले भोजन करना चाहिए l
200 ग्राम दूध है (छुआरे वाला),

उसमें अगर 200 ग्राम पानी डालो तो वो दूध पित्त-नाशक हो जाएगा;
उसमें अगर 100 ग्राम पानी डालते हो तो वायु नाशक हो जाएगा;
उसमें अगर 300 ग्राम पानी डालते हो तो कफ नाशक बन जाएगा;

धीमी आँच पर छुआरे वाला दूध आप उबालो; वो छुआरे खा लो और दूध पी लो l

आपके चेहरे पर सौन्दर्य, कांति, वीर्य की पुष्टि, हृदय और फेफड़े का बल, और महिलाएँ पियें तो अनियमित मासिक धर्म की गड़बड़ी दूर होगी और भाई पियें तो स्वप्न दोष, रक्तचाप (ब्लड प्रेशर), कमर का दर्द, मनकों की गड़बड़, मनकों की गैप, कब्जियत आदि की शिकायत दूर हो जाएगी, बाल घने और लंबे होने लगेंगे l अगर रात को ऐसा दूध पीते हो तो स्वर सुरीला होगा और रात्रि को कुछ बच्चे बिस्तर बिस्तर गीला कर देते हैं - ऐसे बच्चे या ऐसे लोगों के लिए भी यह छुआरे वाला दूध आशीर्वाद रूप हो जाएगा l




Ahemdabaad - 19th Oct. 2009

ग़रीबी - दरिद्रता मिटाने के लिए

सोमवती अमावस्या के दिन 108 बार अगर तुलसी की परिक्रमा करते हो, ओंकार का थोड़ा जप करते हो, सूर्य नारायण को अर्घ्य देते हो; यह सब साथ में करो तो अच्छा है, नहीं तो खाली तुलसी को 108 बार प्रदक्षिणा करने से तुम्हारे घर से दरिद्रता भाग जाएगी l


2012 की सोमवती अमावस्या - 23rdJan'12, 18th June'12, 15th Oct'12

Ahemdabaad - 19th Oct. 2009

Tuesday 20 October 2009

शिशु व बालक सम्बन्धी बातें

बालक जन्मते ही दाई या नर्स बच्चे को नहलाकर पिता की गोद में बचे को दे और पिता बच्चे के कान में निम्नलिखित मंत्र बोले -


७ बार का उच्चारण करके "अस्मा भव" तू चटान की नाई अडिग रहना l


७ बार का उच्चारण करके "परशु भव" तू कुल्हाड़े की नाई विघ्न बाधा को काटने वाला बनना l


७ बार का उच्चारण करके "हिरन्यस्तुम भव" तू चैतन्य अमर आत्मा है, तुझे कोई दोष ना लगे l


फिर माँ दूध पिलाने से पहले शहद और घी विमिश्रण करके सोने की सलाई से बच्चे की जीभ पर "ॐ" लिखे, फिर उसे दूध पिलाये l



जन्म से २ साल तक शैशव अवस्था होती है - शैशव काल में बच्चा जब हाथ-पैर हिलाने लगे तो उसे गोद में ज्यादा नहीं लेना चाहिए, इससे बच्चों के विकास में बड़ी हानि होती है l हाथ पैर चलने दें, बच्चा मजबूत बने l उसकी प्रतिभा विकसित करने के लिए उसे हँसते-खेलते रखना चाहिए l उसकी अनुकूल वस्तुएं दिलानी चाहिए, नहीं दे सकते तो बोलना चाहिए, चिंता नहीं, आ जायेगी, उसको निषेधात्मक नहीं बोलना चाहिए l उसे पेट की बीमारियाँ ना हों, ये ध्यान रखना चाहिए, अगर पेट की तकलीफ है तो पपीते के बीज २-३ कूट के पिलायें अथवा तुलसी के बीज कूट दें फिर १/४ चुटकी चूर्ण, रात को भिगो कर सुबह पिलायें l



२-५ साल तक उसके मन में जिज्ञासा (जानने की वृति) फूटती है l जो वह पूछे उसे उत्साह से उत्तर दें और उसके सामने प्रश्न लायें जिससे उसकी प्रतिभा विकसित हो l उसे रात को कहानियों के माध्यम से जानने की वृति और विचार की शक्ति पैदा करें


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Mathura 1st Oct. 2009

Saturday 10 October 2009

दूध-माखन व त्रिफला प्रयोग

त्वचा में खुजली की बीमारी होती है तो त्रिफला ५-७ ग्राम रात को थोड़ा पानी से फांक लें l कई लोगों को गाल पे दाग-दाग हैं, तो १ ग्लास दूध और १०-२० ग्राम माखन (खारा नहीं होना चाहिए) l माखन को पानी में २-४ बार अच्छी तरह से धो के दूध में मिला दें l १-२ बार हिला दें और पियें तो चेहरे पर जो दाग-दागे होते हैं, बादल जैसे (झाइयाँ), वो सब ठीक हो जायेगा l गर्भिणी स्त्री ऐसा दूध पियें तो बालक एकदम लाल-लाल टमाटर जैसा पैदा होता हैl

Latur 25th Sep. 2009

नींबू-अदरक

फ्रिज में नींबू नहीं रखना चाहिए l अगर रखें भी तो जिस दिन काम में लाना है तो ६ घंटे पहले नींबू बाहर निकाल कर रखें, नहीं तो गर्म पानी में डालकर फिर रस निकालें तो ज्यादा रस निकलेगा l ठंडे नींबू में से रस इतना नहीं निकलता, जितना बाहर रखे नींबू से निकलता है l अदरक भी फ्रिज में रखने से उसका प्रभाव कम हो जाता है l

Hyderabad 27th Sep. 2009

ध्यान की महिमा

आज्ञाचक्र में ओंकार या गुरु का ध्यान करने से बुद्धि विकसित होती है और नाभि में ओंकार या गुरु का ध्यान करने से आरोग्य एवं रोग प्रतिकारक शक्ति विकसित होती है l

Hyderabad 26th Sep. 2009

Monday 5 October 2009

प्रसाद खाने का तरीका

प्रसाद कैसे खाते हैं ? ..... कुछ लोग प्रसाद एक साथ खाते हैं l जैसे चिड़िया थोड़ा-थोड़ा खाती है, ऐसे ही थोड़ा-थोड़ा प्रसाद खाने से रस बनता है और आनंद भी आता है l


Aurangabad 19th Sep. 2009