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Thursday, July 8, 2010

मन को नियंत्रित करने के लिए


  1. ये मंत्र तीन बार बोलना है - " विश्वानि देव सवित दुरितानि परासुव, यद् भद्रं तन्न आसुव ।" (अर्थ -हे सकल विश्व के उत्त्पत्ति करता, हे ज्योति पुंज शुद्ध ऐश्वर्य स्वरुप, सुखों के दाता स्वरुप परमेश्वर आप मेरे सम्पूर्ण दोष दुर्गुण को दूर कर दीजिये") । एक बार बोलें और अपनी चोटी (शिखा) को गाँठ बांधे। शिका ना हो तो कोई पतला कपड़ा या रुमाल रख लें, उस को गाँठ बांधे। देवियाँ अपने साड़ी को या दुपट्टे को गाँठ बाँध सकती हैं । तीन बार मंत्र बोल कर शिखा को तीन बार गाँठ बांधे । ये मंत्र बोलने से मन में कोई भी बुरा विचार है तो दूर होगा........अपने में क्या दोष है, ये अपने को ही मालूम होता है....मंत्र बोलते समय ये विचार करें की भगवान मेरे सभी दोष दूर कर रहे हैं । (नोट : खाना खाते समय या सोते समय शिखा की गाँठ खोल देनी चाहिये)।

  2. आपके मन में अपने लिए या किसी व्यक्ति के लिए शुभ संकल्प है तो उपाय है कि तीन बार या -१० मिनट गायत्री मंत्र बोलते हुए उसी शुभ संकल्प को दोहराए । अपने आप संकल्प मंत्र के प्रभाव से पूरा होगा । (गायत्री मंत्र का अर्थ है - हे सर्व रक्षक परमेश्वर, हे सुखस्वरुप, वरण करने योग्य प्रकाशक, हम आपका ध्यान करते हैं)

  3. वेदों के ७ मंत्र हैं - " भूर्र, भुव, स्वः, महः, जनः, तपः, सत्यम ।" प्राणायाम करते समय शुभ संकल्प करें कि हे सच्चिदानंद स्वरुप, हम आपकी शरण हैं हम पर कृपा करो। अपना संकल्प बोलें .....प्राणायाम के समय श्वास लेकर रोकें और ये ७ मंत्र मन में दोहराएँ तो लाभ होगा ।

Sureshanandji Delhi 26th June 2010

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