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Saturday 14 August 2010

वैदिक रक्षाबंधन

प्रतिवर्ष श्रावणी-पूर्णिमा को रक्षाबंधन का त्यौहार होता है, इस दिन बहनें अपने भाई को रक्षा-सूत्र बांधती हैं । यह रक्षा सूत्र यदि वैदिक रीति से बनाई जाए तो शास्त्रों में उसका बड़ा महत्व है ।

वैदिक रक्षा सूत्र बनाने की विधि :

इसके लिए ५ वस्तुओं की आवश्यकता होती है -
(१) दूर्वा (घास) (२) अक्षत (चावल) (३) केसर (४) चन्दन (५) सरसों के दाने ।

इन ५ वस्तुओं को रेशम के कपड़े में लेकर उसे बांध दें या सिलाई कर दें, फिर उसे कलावा में पिरो दें, इस प्रकार वैदिक राखी तैयार हो जाएगी ।

इन पांच वस्तुओं का महत्त्व -

(१) दूर्वा - जिस प्रकार दूर्वा का एक अंकुर बो देने पर तेज़ी से फैलता है और हज़ारों की संख्या में उग जाता है, उसी प्रकार मेरे भाई का वंश और उसमे सदगुणों का विकास तेज़ी से हो । सदाचार, मन की पवित्रता तीव्रता से बदता जाए । दूर्वा गणेश जी को प्रिय है अर्थात हम जिसे राखी बाँध रहे हैं, उनके जीवन में विघ्नों का नाश हो जाए ।
(२) अक्षत - हमारी गुरुदेव के प्रति श्रद्धा कभी क्षत-विक्षत ना हो सदा अक्षत रहे ।
(३) केसर - केसर की प्रकृति तेज़ होती है अर्थात हम जिसे राखी बाँध रहे हैं, वह तेजस्वी हो । उनके जीवन में आध्यात्मिकता का तेज, भक्ति का तेज कभी कम ना हो ।
(४) चन्दन - चन्दन की प्रकृति तेज होती है और यह सुगंध देता है । उसी प्रकार उनके जीवन में शीतलता बनी रहे, कभी मानसिक तनाव ना हो । साथ ही उनके जीवन में परोपकार, सदाचार और संयम की सुगंध फैलती रहे ।
(५) सरसों के दाने - सरसों की प्रकृति तीक्ष्ण होती है अर्थात इससे यह संकेत मिलता है कि समाज के दुर्गुणों को, कंटकों को समाप्त करने में हम तीक्ष्ण बनें ।

इस प्रकार इन पांच वस्तुओं से बनी हुई एक राखी को सर्वप्रथम गुरुदेव के श्री-चित्र पर अर्पित करें । फिर बहनें अपने भाई को, माता अपने बच्चों को, दादी अपने पोते को शुभ संकल्प करके बांधे ।

महाभारत में यह रक्षा सूत्र माता कुंती ने अपने पोते अभिमन्यु को बाँधी थी । जब तक यह धागा अभिमन्यु के हाथ में था तब तक उसकी रक्षा हुई, धागा टूटने पर अभिमन्यु की मृत्यु हुई ।

इस प्रकार इन पांच वस्तुओं से बनी हुई वैदिक राखी को शास्त्रोक्त नियमानुसार बांधते हैं हम पुत्र-पौत्र एवं बंधुजनों सहित वर्ष भर सूखी रहते हैं ।

रक्षा सूत्र बांधते समय ये श्लोक बोलें -

येन बद्धो बलि राजा, दानवेन्द्रो महाबलः
तेन त्वाम रक्ष बध्नामि, रक्षे माचल माचल: ।


सुरेशानंदजी

काल सर्प योग

आज नाग पंचमी है , जिन को काल सर्प योग है , वे शांति के लिए ये उपाय करे .
पंचमी के दिन पीपल के नीचे, एक दोने में कच्चा दूध रख दीजिये , घी का
दीप जलाए , कच्चा आटा , घी और गुड मिला कर एक छोटा लड्डू बना के रख
दे और ये मन्त्र बोला कर प्रार्थना करें :-

ॐ अनंताय नमः
ॐ वासुकाय नमः
ॐ शंख पालाय नमः
ॐ तक्षकाय नमः
ॐ कर्कोटकाय नमः
ॐ धनंजयाय नमः
ॐ ऐरावताय नमः
ॐ मणि भद्राय नमः
ॐ धृतराष्ट्राय नमः
ॐ कालियाये नमः

काल सर्प योग है तो उस का प्रभाव निकल जाएगा .. तकलीफ दूर होगी
..काल सर्प योग की शांति होगी ...



Shivpur(M. P.) Shri Sureshmaharaj 14 August 2010

Friday 13 August 2010

बेहोश होने पर

कोई बेहोश हो गया हो तो उसके सिर पर तेल की मालिश करो, पैरों पर तिल का तेल रगड़ो । उस के कानों में "ऐं ऐं" अथवा "ॐ ॐ" बोलें ।

Pushkar 9th Aug 2010

नेत्र ज्योति बढाने के लिए

दोनों हाथों के नाखूनों को आपस में रगड़ने से नेत्र ज्योति बदती है ।

Pushkar 9th Aug 2010

Monday 9 August 2010

विघ्न नाश, रोग नाश एवं कार्य सिद्धि के लिए

गेहूं, चावल , उड़द , मूंग और तिल का आटा गूंधकर, घी डाल के दिया जला दें | हनुमानजी या बरगद या पीपल के पेड़ के नीचे दिया जलाये ।

हनुमानजी के आगे सरसों से ऊपर का दीया जलाये तो रोगों का नाश करने मे मदद मिलेगी |

गणपति जी के प्रतिमा के निकट जलाएंगे तो विघ्न नाश करने में मदद मिलेगी |

पीपल या वट वृक्ष के नीचे हनुमानजी का सुमिरन करके ऊपर युक्त दीया जलाया जाए तो कार्यसिद्धि करने मे मदद मिलेगी |

Sureshanandji -Faridabad

गर्भ की रक्षा

किसी महिला को बार बार गर्भ पात हो जाता हो या बच्चा होने के बाद तुरंत मर जाता हो तो ऐसी महिला डेढ़ – दो महीने तक ऐसा करे :- दोनों टाइम सात्विक भोजन करे, तीखा मिर्च मसाला वाला नहीं खाएरोज सुबह देसी गाय का दूध पिए..ऐसा नहीं की दूध पहले से निकाल के रखा और ग्वाला घर पे ला कर देगा फिर उस महिला ने पिया ऐसा नहीं..वो महिला गौशाला में जाए, साथ में मिश्री का पाउडर तैयार रखेगौशाला में जैसे ही दूध निकाला, तुरंत छाना और मिश्री पाउडर डाल के पी ले, ऐसा डेढ़-दो महीना करे…..रोज भगवान श्रीकृष्ण का ध्यान करे और प्रार्थना करें कि आप ने उत्तरा के गर्भ का रक्षण किया, ऐसे मेरे भी गर्भ की रक्षा करे.. गाय का ताज़ा दूध बिना गरम किया हुआ पीना- ये सर्वोत्तम उपाय है।


Sureshanandji Jodhpur 6th Aug. 2010

किस महीने में क्या नहीं खाना

सावन में साग नहीं ।
भादो में दही-छाछ नहीं ।
आश्विन में दूध नहीं ।
कार्तिक में दालें नहीं ।

Jodhpur 5th Aug. 2010

Thursday 5 August 2010

कमज़ोर बच्चों के लिए

अगर कमज़ोर बच्चे हैं, तो पपीते के बीज छाया में सूखा दो और कूट के पाउडर बना दो- पपीते के बीज का पाउडर और आधा चम्मच नीम का रस, बच्चे को दिन तक पिलाओपेट में कृमि या और कोई तकलीफ है, वो दूर होगी

CD-Naujavan Bharat ki Shan