( Read Here:- In Hindi Or In English )
जिसका लोभी स्वभाव है "ईश्वर की ओर" पुस्तक पढ़ा करो
( Read Here :- In Hindi Or In English)
जिसका शरीर कमजोर है "जीवन विकास" पढ़ा करो
( Read Here:- In Hindi )
Listen Audio
- पूज्य बापूजी सूरत 25/12/2011
Tips for an all round Success in Life from His Holiness Saint Shri Asharamji Bapu.
श्वास भीतर जाए- बाहर आए उसको देखिये ... कि श्वास जा रही है बाहर ... आ रही है आती-जाती श्वास को जो देखते हैं उनका मन एकाग्र हो जाता है . और मन अगर चंचल हो ... कोई इधर-उधर की बात मन में आए तो ५ से १० सेकंड अंदाज़े से श्वास को रोक दीजियेगा जब श्वास को रोकेंगे कुछ सेकंड के लिए तो मन भी रुक जायेगा .... मन की चंचलता रुक जाएगी श्वास की गति को देखते रहे साक्षी हो कर.... द्रष्टा होकर
दूसरा प्रयोग दोनों हाथो की हथेली बंद आँखों पर रख दी...आँखों पर दबाव पड़े उस ढंग से हाथ की हथेली ... मात्र आँखों की पलकों को छू जाए बस ...दबाना नहीं और बंद आँखों से आज्ञाचक्र पर देखें और भावना करें कि मेरी शक्ति जो बाहर बिखर रही थी वो आज्ञाचक्र की और संचित हो रही है हाथ फिर हटा सकते हैं पर आँख बंद रहे और बंद आँखों से आज्ञा चक्र की और देखें ..हरि ॐ शांति ... हरि ॐ शांति ..पारमार्थिक शांति पानेवाला व्यक्ति अपने जीवन में सदैव सफल और सुखी रहता है
दोनों हाथ की उंगलियाँ मिला दी और बीचे गर्दन को पकड़ो दोनों हाथ की कोहनी आमने-सामने ला दीं और अपना सिर दायें-बाएं घुमाएँ ...अच्छी तरह से खींचो फिर ऊपर-नीचे, फिर से दायें से बाये.... ऐसे अश्वचालिनी मुद्रा करें रोज सुबह २-३ मिनट करें
दूसरा एक प्रयोग जब आप रात को सोने के लिए बिस्तर पर बैठें हों ... अब सोना ही है .. सब काम हो गया ..नींद लेनी है तो देखें कि नींद मेरे शरीर पर उतर रही है ...श्वास को देखें और नींद को भी देखें कि मेरे शरीर पर ये सुषुप्ति अवस्था आ रही है .. जो इष्ट मंत्र हो वो होठों में ... मन में बोलते हुए सो गये
Etah Shri Sureshanandji 4th Dec'11
कोई समस्या है आप अपने गुरु से पूछना चाहते हों तो सोते समय बिस्तर पे बैठें ..लाइट बंद है और एक छोटा सा दिया ... दिए की लौ बहुत छोटी ... ज्यादा बड़ी ज्योत न हो और उसकी तरफ देखते-देखते आप अपने इष्ट .... अपने गुरु का ध्यान करें और उनको मन में कहें कि हम आप की शरण में है ... आप हमारे स्वामी है ...गुरु हैं ...हमें आप प्रेरणा दीजिये हम क्या करें ... हमें सदा प्रेरणा दीजिये ... ऐसा करते करते सो जाएँ ....आपको उनका मार्गदर्शन निश्चित रूप से मिलेगा ..चाहे ध्यान में मिले... चाहे स्वप्ने में भी मिले
सोते समय और भी प्रयोग कर सकते हैं .. बिस्तर पे बैठे हों ...सीधे बैठे हों केवल ठोडी कंठकूप से लगा दी और भगवत गीता के दूसरे अध्याय का ७वां श्लोक का आखरी चरण मन में बोले ... बैठने की स्थिति ऐसी हो कंठ कूप पर दबाव पड़े .."शिष्यस्तेऽहं शाघि मां त्वां प्रपन्नम " वे श्लोक न याद रहे तो आखिरी में तीन बाते हैं .. अर्जुन ने भगवान कृष्ण को कहीं ... हम अपने इष्ट को ...अपने गुरु को कहें .. " हम आपके शिष्य है ....आपकी शरण में है ....मुझे प्रेरणा दो ... मुझे क्या करना चाहिए इस विषय में "
Etah Shri Sureshanandji 4th Dec'11
Lok Kalyan Setu- Nov. 2011
Rishi Prasad - November 2011
