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Friday, February 28, 2020

नामकरण क्यों और कैसे हो ?



नामकरण संस्कार में बच्चे को शहद चटाकर भगवान सूर्यनारायण के दर्शन कराये जाते हैं और शुभ संकल्प किया जाता है कि ‘बालक सूर्य की प्रखरता, तेजस्विता धारण करें |’ इसके साथ ही भूमि को नमन करके देव-संस्कृति के प्रति श्रद्धापूर्वक समर्पण किया जाता है | बच्चे का नाम रखकर सब लोग उसके चिंरजीवी, धर्मवान, स्वस्थ एवं लौकिक, आध्यात्मिक – सर्व प्रकार से उन्नतिशील होने, समृद्ध होने का सदभाव करते हैं |

मनोवैज्ञानिक तथ्य है कि जिस तरह के नाम से व्यक्ति को पुकारा जाता है, उसे उसी प्रकार के गुणों की अनुभूति होती है | अत: नाम की सार्थकता समझते हुए ऐसा नाम रखना चाहिए जिससे आगे  चलकर बालक को लगे कि मुझे बड़े होकर मेरे नाम के गुणानुसार बनना है |

हमारे लाडलों के नाम कैसे हों इस बारे में पूज्य बापूजी के सत्संग में आता है : “बालक का नाम ऐसा पवित्र रखो कि पवित्र भगवान का सुमिरन हो | आजकल लोग बच्चों के नाम गजब के रखते हैं | लडकियों के नाम रखते हैं – लेष्मा, श्लेष्मा.... अब श्लेष्मा तो नाक से निकली हुई गंदगी को बोलते हैं | लडकों के नाम रखते हैं – टिन्नू, मिन्नू, बंकी, विक्की, पुम्बू.... ये कोई नाम हैं | अभिनेत्रियों के नाम लडकियों के रखेंगे, अभिनेताओं के नाम लडकों के रखेंगे – यह तो बहुत हो गया | वे बेचारे अंदर से खुद ही अशांत हैं तो अपने बच्चों को उनके नाम से क्या शांति मिलेगी, क्या ज्ञान मिलेगा ?

अरे हरिदास रखो, गोविन्द, अम्बादास, हरिप्रसाद, शिवप्रसाद ..... भगवान की स्मृति आये ऐसे नाम रखो | अभिनेता के नाम रखोगे तो लड़का अभिनेता जैसा होगा और भक्तों व भगवान के नाम रखोगे तो कुछ तो नाम का भी प्रभाव पड़ेगा उसके चित्त पर | ‘रावण’ नाम नहीं रखते, किसका नाम ‘रावण’ रखे तो कैसा मन हो जाय ? रावण, कुम्भकर्ण, हिटलर नाम नहीं रखते, अच्छे – अच्छे नाम रखते हैं |

सावित्री, गार्गी, अनसूया, मदालसा, अम्बा, अम्बिका नाम रख दें अपनी कन्या का.... शबरी नाम रख दें तो भक्त शबरी की याद या जायेगी, भगवान श्रीरामजी की याद आ जायेगी | स्वयंप्रभा, सुलभा, ज्योति, सीता, पार्वती रख दें ..... ऐसे-ऐसे और भी कई पावन-पवित्र नाम हैं | चिंता न करें कि नाम कम पड जायेंगे | भारत के ऋषियों ने श्रीविष्णुसहस्रनाम, श्रीशिवसहस्रनाम, श्रीदुर्गासहस्रनाम आदि की रचना करके आपके लिए भगवन्नामों का भंडार खोल रखा है  अपने सत्शास्त्रों में | तो ऐसे पवित्र-पावन नाम रखो ताकि भगवान की स्मृति आ जाय | और बच्चों में दैवी गुण आ जायें तथा माता-पिता में उच्च विचार आ जायें |


        लोककल्याणसेतु – फरवरी २०२० से  

अरंडी तेल से कैसे उठायें लाभ




आयुर्वेद के अनुसार अरंडी का तेल केवल विरेचक ही नहीं अपितु शरीर की सभी धातुओं पर उत्तम कार्य करनेवाला भी है | यह उष्ण, तीक्ष्ण, तीखा, कसैला, उत्तम वातनाशक व पचने में भारी है | यह जठराग्नि, स्मृति, मेधा, कांति, बल-वीर्य और आयुष्य को बढ़ानेवाला एवं युवावस्था को प्रदीर्घ रखनेवाला तथा रसायन और ह्रदय के लिए हितकर है |

नियमित सेवन से होनेवाले लाभ

१] रात को १०० मि.ली.पानी में १ से २ ग्राम सोंठ डालकर उबलने रख दें | ५० मि.ली. रहने पर उतार लें | गुनगुना रहने पर इसमें २ – ४ चम्मच अरंडी तेल मिला के पियें | अथवा रोटी बनाते समय १ व्यक्ति के लिए १ से २ चम्मच अरंडी तेल आटे में मिलाकर आटा गूँधें | इस प्रकार बनी रोटियाँ खायें |

उपरोक्त प्रयोग कई बीमारियों में लाभकारी है, विशेषरूप से आमवात (गठिया), कमरदर्द एवं कब्ज वालों के लिए यह बहुत उपयोगी है |

२] अरंडी तेल के नियमित सेवन से मुत्रावरोध, अंडवृद्धि, अफरा, वायुगोला, दमा, चर्मरोग, रक्ताल्पता, कमरदर्द आदि रोगों में लाभ होता है |

३] यह योनिगत व शुक्रगत दोषों, मलाशय व मूत्राशय के दोषों तथा रक्तदोषों को हरता है |

४] घाव को जल्दी भरकर संक्रमण होने से बचाता है |

५] सिरदर्द अथवा तलवों में होनेवाली जलन में अरंडी तेल की प्रभावित स्थान पर मालिश लाभदायी है |

स्वास्थ्यप्रद सरल घरेलू नुस्खे

१] जोड़ों की तकलीफें व आमवात : १० से २० मि.ली. गोमूत्र अर्क में समभाग पानी तथा २ – ४ चम्मच अरंडी तेल मिलाकर सुबह खाली पेट लेने से आमवात में लाभ होता है | जोड़ों की अकडन, सूजन और दर्द कम होते है |

२] गृध्रसी (सायटिका) : १० से २० मि.ली. गोमूत्र अर्क में समभाग पानी तथा एक चम्मच अरंडी का तेल मिलाकर रोज सुबह-शाम लेने से आराम होता है |

३] बवासीर, कब्जियत व अपेंडिसाइटिस : ५ ग्राम त्रिफला चूर्ण को १ कटोरी पानी में उबालें | चौथाई भाग पानी शेष रहने पर छान के उसमें २ – ४ चम्मच अरंडी तेल मिला के पियें | इससे कब्जियत दूर होकर बवासीर में आराम मिलता है | इस प्रयोग से पाचक रस बनता है और अपेंडिक्स के दर्द में भी राहत मिलती है | 


अरंडी तेल में घृतकुमारी का रस मिलाकर लगाने से बवासीर की जलन व दर्द कम होते हैं |

सावधानी : अरंडी तेल का सेवन अल्प मात्रा में ही करना चाहिए | छोटे बच्चे, गर्भवती तथा स्तनपान करानेवाली महिलाएँ अरंडी तेल का सेवन न करें |


लोककल्याणसेतु – फरवरी २०२० से

विष्णुसहस्त्रनाम –पवित्रम्



श्रीविष्णुसहस्रनाम में भगवान का ६२ वाँ नाम आता है ‘पवित्रम्’ अर्थात सबको पवित्र करनेवाले |
ऋग्वेद (मंडल ९, सूक्त ८३, मंत्र १) में आता है : ‘हे वेदों के पति परमात्मन ! तुम्हारा स्वरूप पवित्र है और विस्तृत है |’

परमात्मा में अज्ञान का अंशमात्र भी नहीं है इसलिए उनमें मलिनता का कोई प्रश्न ही नहीं है | परमात्मा तो पवित्रता के स्वरूप हैं ही, उनका नाम, स्मरण, उपासना, ज्ञान, ध्यान, मनन आदि भी पावनकारी हैं |

पवित्राणां पवित्रं ..... भगवान पवित्र करनेवाले तीर्थादिकों में परम पवित्र हैं |

अग्नि, वायु, सूर्य, चन्द्र आदि पवित्र समुदाय है | इसे भी पवित्र करनेवाले वे ‘पवित्र’ नामक भगवान हैं | उनकी कृपा से संसार में पवित्रता है | रोग शरीर को चारों ओर से सताते हैं, दोष शरीर को दूषित बनाते हैं और उन दोषों से दूषित को भी भगवान अपने सहस्त्र नामों के जप से स्वयं पवित्र कर देते हैं |

आचार्य चरकजी ने भी कहा है : “हजार मस्तकवाले, चर-अचर के स्वामी, व्यापक भगवान विष्णु की सहस्त्र नाम से स्तुति करने से अर्थात विष्णुसहस्त्रनाम का पाठ करने से सब प्रकार के ज्वर छुट जाते हैं |”


लोककल्याणसेतु – फरवरी २०२० से

Sunday, February 9, 2020

पुण्यदायी तिथियाँ



६ मार्च : आमलकी एकादशी (व्रत करके आँवले के वृक्ष के पास रात्रि – जागरण, उसकी १०८ या 
२८ परिक्रमा करनेवाला सब पापों से छूट जाता है और १००० गोदान का फल प्राप्त करता है |)

९ मार्च : होलिका दहन (रात्रि – जागरण, जप, मौन और ध्यान बहुत ही फलदायी होता है |)

१४ मार्च : षडशीति संक्रांति (पुण्यकाल: दोपहर ११:५५ से शाम ६:१९ तक) (ध्यान, जप व पुण्यकर्म का फल ८६,००० गुना होता है | - पद्म पुराण )

१५ मार्च : रविवारी सप्तमी ( सूर्योदय से १६ मार्च प्रात: ३:२० तक )


१६ मार्च : भगवत्पाद साँई श्री लीलाशाहजी महाराज का प्राकट्य दिवस

२० मार्च : पापमोचनी एकादशी (व्रत करने पर पापराशि का विनाश हो जाता है |)


ऋषिप्रसाद – फरवरी २०२० से  

परमात्मा से एकाकारता के लिए


दुःखों में अप्रभावित रहने के लिए आकाश की तरफ देखें, भगवन्नाम – जप का रोज थोड़ा – थोड़ा अभ्यास करें | इससे मन व्यापक हो जायेगा, दुःख का प्रभाव नहीं पड़ेगा | 

ऐसे ही सुख का प्रभाव भी कम पड़ेगा तो आप सुख और दुःख के सिर पर पैर रख के परमात्मा के साथ एकाकार होने में सफल हो जाओगे | - पूज्य बापूजी


ऋषिप्रसाद – फरवरी २०२० से

कार्य में विजयप्राप्ति हेतु


कार्य में विजयप्राप्ति हेतु नियमितरूप से संध्या के समय पीपल के नीचे मिट्टी का घी से भरा दीपक लगाने तथा कुछ देर गुरुमंत्र या भगवन्नाम का जप करके थोड़ी देर शांत बैठने से अभीष्ट सिद्धि होती है | (दीपक ६ घंटे पानी में भिगोकर रखें, फिर उपयोग करें ताकि घी न सोखें |)

ऋषिप्रसाद – फरवरी २०२० से

लक्ष्मी की चाहवाले किनसे बचें ?


भगवान श्रीहरि कहते हैं : “जो अशुद्ध ह्रदयवाला, क्रूर, हिंसक, दूसरों की निंदा करनेवाला होता है, उसके घर से भगवती लक्ष्मी चली जाती हैं |

जो नखों से निष्प्रयोजन तिनका तोड़ता है अथवा नखों से भूमि को कुरेदता रहता है उसके घर से मेरी प्रिय लक्ष्मी चली जाती हैं |

जो सूर्योदय के समय भोजन, दिन में शयन तथा दिन में मैथुन करता है उसके यहाँ से मेरी प्रिया लक्ष्मी चली जाती हैं |”          (श्रीमद् देवी भागवत )


ऋषिप्रसाद – फरवरी २०२० से

धन – सम्पदा के स्थायी निवास हेतु


‘ॐ ह्रीं गौर्यै नम: |’ 

– इस मंत्र से ७ बार अभिमंत्रित करके अन्न का भोजन करनेवाले के पास सदा श्री ( धन – सम्पदा ) बनी रहती है |  
(अग्नि पुराण :३१३.१९,२४ )


ऋषिप्रसाद – फरवरी २०२० से

स्वास्थ्यरक्षक व पुष्टिवर्धक – गाजर


ग्राही गृज्जनकस्तीक्ष्णो वातश्लेष्मार्शसां हित: |
(चरक संहिता, सूत्रस्थान : २७.१७४)

गाजर स्वाद में मधुर, कसैली तथा स्निग्ध, तीक्ष्ण, उष्णवीर्य, मल को बाँधनेवाली, मूत्रल, ह्रदय – हितकर, रक्तशुद्धिकर, वातदोषनाशक, कफ निकालनेवाली, पुष्टिवर्धक, बवासीरवालों के लिए हितकारी तथा दिमाग एवं नस – नाड़ियों के लिए बलप्रद है |

गाजर के विभिन्न लाभ

१)    विटामिन ‘ए’ प्रचुर मात्रा में होने से यह नेत्रज्योतिवर्धक है | दृष्टिमंदता, रतौंधी, पढ़ते समय आँखों में तकलीफ होना आदि रोगों में कच्ची गाजर या उसके रस का सेवन लाभप्रद है | यह प्रयोग चश्मे का नम्बर घटा सकता है |

२)    गाजर को खूब चबाकर खाने से दाँत मजबूत, स्वच्छ एवं चमकदार होते हैं तथा मसूड़े मजबूत बनते हैं |

३)    गाजर के रस का नित्य सेवन करने से दिमागी कमजोरी दूर होती है | गाजर का हलवा भी मस्तिष्क को पुष्ट करता है |

४)    गाजर का रस पीने से पेशाब खुलकर आता है, रक्तशर्करा भी कम होती है | इसमें लौह तत्त्व भी प्रचुर मात्रा में पाया जाता है |

५)    यह कफ व वात के रोगियों के लिए हितकारी है | कफशामक होने से यह वसंत ऋतू ( १९ फरवरी से १८ अप्रैल ) में विशेष लाभकारी है |

सावधानीयाँ : तीक्ष्ण, उष्णवीर्य होने के कारण पित्त प्रकृति के लोग गाजर का सेवन कम करें | गाजर को भीतर का पीला भाग निकालकर खाना चाहिए क्योंकि वह अत्यधिक गर्म प्रकृति का होने से पित्तदोष, वीर्यदोष एवं छाती में जलन उत्पन्न करता है |

ऋषिप्रसाद – फरवरी २०२० से

१९ फरवरी से १८ अप्रैल तक क्या करें


१९ फरवरी से १८ अप्रैल तक क्या करें 

१] कड़वे, तीखे, कसैले, शीघ्र पचनेवाले, रुक्ष (चिकनाईरहित) व उष्ण पदार्थों का सेवन करें | (अष्टांगह्रदय, योगरत्नाकर )

२] पुराने जौ तथा गेहूँ की रोटी, मूँग, साठी चावल, करेला, लहसुन, अदरक, सूरन, कच्ची मूली, लौकी, तोरई, बैंगन, सोंठ, काली मिर्च, पीपर, अजवायन, राई, हींग, मेथी, गिलोय, हरड, बहेड़ा, आँवला आदि का सेवन हितकारी है |

३] सूर्योदय से पूर्व उठकर प्रात:कालीन वायु का सेवन, प्राणायाम, योगासन - व्यायाम, मालिश, उबटन से स्नान तथा जलनेति करें |

४] अंगारों पर थोड़ी-सी अजवायन डालकर उसके धूएँ का सेवन करने से सर्दी, जुकाम, कफजन्य सिरदर्द आदि में लाभ होता है |

५] २ से ३ ग्राम हरड चूर्ण में समभाग शहद मिलाकर सुबह खाली पेट लेने से रसायन के लाभ प्राप्त होते हैं |


१९ फरवरी से १८ अप्रैल तक क्या न करें

१] खट्टे, मधुर, खारे, स्निग्ध (घी – तेल से बने), देर से पचनेवाले व शीतल पदार्थो का सेवन हितकर नहीं है, अत: इनका सेवन अधिक न करें | (अष्टांगह्रदय, चरक संहिता )

२] नया गेहूँ व चावल, खट्टे फल, आलू, उड़द की दाल, कमल – ककड़ी, अरवी, पनीर, पिस्ता, काजू, शरीफा, नारंगी, दही, गन्ना, नया गुड़, भैस का दूध, सिंघाड़े, कटहल आदि का सेवन अहितकर है |

३] दिन में सोना, ओस में सोना, रात्रि – जागरण, परिश्रम न करना हानिकारक है | अति परिश्रम या अति व्यायाम भी न करें |

४] आइसक्रीम, कोल्ड ड्रिंक्स व फ्रिज के ठंडे पानी का सेवन न करें |

५] एक साथ लम्बे समय तक बैठे या सोयें नहीं तथा अधिक देर तक व ठंडे पानी से स्नान न करें |

ऋषिप्रसाद – फरवरी २०२० से


घुटनों के दर्द हो तो


मेथी घुटनों के दर्द को मिटाती है और खजूर शक्ति देता है | 

२ – २ करेले और बैंगन हफ्ते में दोनों एक – एक बार खायें | - पूज्य बापूजी


ऋषिप्रसाद – फरवरी २०२० से

कफ – शमन हेतु विशेष


खाँसी, सर्दी – कफ होने पर अंग्रेजी गोलियाँ लेकर जो कफ मिटाते हैं उनका कफ सूख जाता है | फिर उसके बारीक कण इकट्टे हो जाते हैं, जो नाड़ियों में अवरोध (blockage), ह्रदयाघात (heart attack), ब्रेन ट्यूमर, कमर या शरीर के अन्य किसी भाग का ट्यूमर आदि का कारण बनता है | यह भविष्य में टी. बी., दमा, कैंसर जैसे गम्भीर रोग भी उत्पन्न कर सकता है | सर्दी मिटाने के लिए ली जानेवाली अंग्रेजी गोली भविष्य में भयंकर बीमारियों को जन्म देती है तथा असहनीय पीड़ाएँ पैदा करती है | भूलकर भी बच्चों को इन गोलियों के गुलाम मत बनाओ, न स्वयं बनो |

यौगिक प्रयोग : सूर्यभेदी प्राणायाम

कफ मिटाना हो तो दायें नथुने से श्वास लेकर रोकें और ‘रं... रं... रं... रं...’ इस प्रकार मन में जप करें और ‘कफनाशक अग्नि देवता का प्राकट्य हो रहा है’ ऐसी भावना करें | श्वास ६० से १०० सेकंड तक रोक सकते हैं फिर बायें नथुने से धीरे – धीरे छोड़ दें | यह प्रयोग खाली पेट सुबह – शाम ३ से ५ बार करें | कफ – संबंधी गडबड छू हो जायेगी !  

गजकरणी

सुबह एक से सवा लिटर गुनगुना पानी लो | उसमें १० – १२ ग्राम सेंधा नमक डाल दो | वह पानी पंजों के बल बैठकर पियो और दाहिने हाथ की दो बड़ी उँगलियाँ मुँह में डाल के वमन करो, पानी बाहर निकाल दो | इससे कफ का शमन होता है |

कफशमन हेतु आयुर्वेदिक उपाय

बच्चों को कफ – संबंधी बीमारियाँ ज्यादा होती हैं | साल में तीन बार बच्चों की बीमारियों का मौसम होता है | कफ की समस्या है तो कफ सिरप पिला दो १ – २ दिन, ३ दिन बस, ठीक हो जायेगा बच्चा | डॉक्टर के यहाँ जाना नहीं पड़ेगा | कोई अंग्रेजी दवा की जरूरत नहीं है | तुलसी बीज टेबलेट सुबह – शाम १ – १ गोली दो | एकदम छोटा बच्चा है तो १ – १ गोली और १२ साल से बड़ा है तो २ – २ गोली भी दे सकते हैं |

और एक बहुत अच्छा उपाय है और बिल्कुल कारगर है | १० ग्राम लहसुन और १ ग्राम तुलसी-बीज पीस के ५० ग्राम शहद में डाल दो, चटनी बन गयी | बच्चे को सुबह – शाम ५ – ५ ग्राम थोड़ा – थोड़ा करके चटाओ | ह्रदय भी मजबूत हो जायेगा, कफ भी नष्ट हो जायेगा | ऐसे ही बच्चों के लिए तुलसी टॉफी बनवायी है | उसमें तुलसी के बीज और त्रिकटु (सोंठ, काली मिर्च व पीपर ) डलवाये हैं ताकि कफ शांत हो जाय |

उष्णोदक – पान

एक लीटर पानी को इतना उबालें कि २५० मि.ली. बचे | गुनगुना रहने पर पिलायें | बच्चों को एकदम जादुई फायदा कर देगा | कोई दवा की जरूरत नहीं, कफ सिरप की भी जरूरत नहीं |

विशेष सावधानी : खाँसते हैं तो कफ आता है और फिर कई लोग उसको निकल जाते हैं | कफ आये तो निगलना नहीं चाहिए, नुकसान करता है | जिसको कफ आता हो उसको कुछ दिन तक लस्सी, छाछ, दही, दूध व मिठाइयों का सेवन नहीं करना चाहिए |

ऋषिप्रसाद – फरवरी २०२० से

गोदुग्ध – सेवन करनेवाले ध्यान दें !


क्या है ‘ए – १’ व ‘ए – २’ दूध ?

गोदुग्ध में पाये गये प्रोटीन में लगभग एक तिहाई ‘बीटा कैसीन’ नामक प्रोटीन है | बीटा कैसीन के १२ प्रकार ज्ञात हैं, जिनमें ‘ए -१’ और ‘ए – २’ प्रमुख हैं | जर्सी, होल्सटीन आदि विदेशी तथाकथित गायों के दूध में ‘ए -१’ प्रोटीन होता है, जिसकी एमिनो एसिड श्रृंखला में ६७ वें स्थान पर हिस्टिडीन होने के कारण इसकी पाचनक्रिया में बीटा-केसोंमाँर्फीन – ७ (BCM-7) का निर्माण होता ही, जो विभिन्न प्रकार के स्वास्थ्य – विकारो को निमंत्रण देता ही | ‘इंटरनेशनल जर्नल ऑफ साइंस एंड नेचर’ मी छपे एक शोध के अनुसार ‘ए-१’ प्रोटीन से मानसिक रोग, टाईप – १ मधुमेह, ह्रदयरोग आदि हो सकते हैं | परंतु भारतीय नस्ल की गायों के दूध में ‘ए – २’ प्रकार का विषरहित प्रोटीन पाया जाता है, जो ऐसे किन्हीं रोगों को उत्पन्न नहीं करता | अत: भारतीय नस्ल की गायों का ही दूध पीना हितकारी है |

कही आप धीमा जहर तो नहीं पी रहे है !

कंज्यूमर गाइडेंस सोसायटी ऑफ़ इंडिया के महाराष्ट्र में हुए हालिया अध्ययन में पाया गया कि बेचे जा रहे ७८.१२% दूध FSSAI के आवश्यक गुणवत्ता मानकों को पूरा नहीं करते हैं |

देश में अन्यत्र भी दूध में मिलावटें होती हैं | शोधकर्ताओं के अनुसार दूध में अधिक मात्रा में  हाइड्रोजन परॉक्साइड व अमोनियम सल्फेट की मिलावट ह्रदयरोग, पेट व आँतों में जलन, उलटी, दस्त जैसी समस्याएँ पैदा कर सकती है | हमारे स्वास्थ्य से खिलवाड़ करते हुए डिटर्जेंट, यूरिया, स्टार्च, शर्करा, न्यूट्रलाइजर आदि अनेक पदार्थ मिला के कृत्रिम दूध तैयार कर बेचा जाता है डेयरियों आदि के द्वारा, जिसे पीने से पेटदर्द, आँखों व त्वचा की जलन, कैंसर, शुक्राणुओं की कमी आदि रोग होते हैं तथा यकृत व गुर्दों को हानि होती है | अत: सावधान !

अपनी स्वास्थ्य-रक्षा हेतु देशी गाय का शुद्ध दूध ही पियें एवं विदेशी तथा संकरित पशुओं के दूध एवं कृत्रिम दूध के सेवन से बचें और बचायें |

ऋषिप्रसाद – फरवरी २०२० से

होली की ४ महत्त्वपूर्ण बातें


१] पलाश के फूलों के रंग से होली खेलनी चाहिए | होली के बाद धरती पर सूर्य की सीधी तीखी किरणें पडती हैं, जिससे सप्तरंग और सप्तधातुओं में हलचल मच जाती है | अत: पलाश और गेंदे के फूलों का रंग हम होली पूर्णिमा और धुलेंडी को एक – दूसरे पर छिडकें तो वह सप्तरंग, सप्तधातुओं को संतुलित करेगा और हमें सूर्य की सीधी तीखी धूप पचाने की शक्ति मिलेगी | अब दुर्भाग्य यह हो गया कि विकृति आ गयी | लोग जहरी रासायनिक रंगों से होली खेलने लगे, जिनका बड़ा दुष्प्रभाव होता है |

२] होली के बाद के २० - २५ दिन नीम के २० - २५ कोमल पत्ते व १ - २ काली मिर्च खा लो या नीम के फूलों का रस १ – २ काली मिर्च का चूर्ण डालकर पी लो | इससे शरीर में ठंडक रहेगी और गर्मी झेलने की शक्ति आयेगी, पित्त-शमन होगा और व्यक्ति वर्षभर निरोग रहेगा |

३] होली के बाद १५ – २० दिनों तक बिना नमक का भोजन करें तो आपके स्वास्थ्य में चार चाँद लग जायें | बिना नमक का नहीं कर सकते तो कम नमकवाला भोजन करो |

४] अपने सिर को धूप से बचाना चाहिए | जो सिर पर धूप सहते हैं उनकी स्मरणशक्ति, नेत्रज्योति और कानों की सुनने की शक्ति क्षीण होने लगती है | ४२ साल के बाद बुढापा शुरू होता है, असंयमी और असावधानीवालों का दिमाग कमजोर हो जाता है | गर्मियों में नंगे सिर धूप में घूमने से पित्त बढ़ जाता है, आँखें जलती हैं | अत: सिर को धूप से बचाओं, अपने को दुःखों से बचाओ, मन को अहंकार से बचाओ और जीवात्मा को जन्म-मरण से बचा के परमात्मा से प्रेम करना सिखा दो !

ऋषिप्रसाद – फरवरी २०२० से

होली की रात्रि-जागरण और जप आदि हैं बहुत फलदायी


(होली – ९ मार्च २०२० , धुलेंडी – १० मार्च २०२० )

पूनम और अमावस्या को समुद्र में ज्वार – भाटा विशेष आता है, जल – तत्त्व उद्वेलित होता है तो हमारे शरीर की सप्तधातुओं का जलीय अंश भी उद्वेलित होता है | सभी जल तथा जलीय पदार्थों पर चन्द्रमा का प्रभाव अधिक पड़ता है | व्यक्ति इन दिनों संसार-व्यवहार करे तो उसकी शक्तियों का ज्यादा ह्रास होगा | अगर गर्भधान हो गया तो संतान विकलांग पैदा होती ही है | 

इन दिनों में जैसे सम्भोग का कुप्रभाव ज्यादा पड़ता है ऐसे ही ध्यान, जप, तीर्थ-सेवन और महापुरुषों के सत्संग – सान्निध्य से सुप्रभाव भी ज्यादा पड़ता है | होली की रात्रि का जागरण और जप बहुत फलदायी होता है | एक जप हजार गुना फलदायी है |

मंत्रशक्ति तमोगुणी, रजोगुणी, सत्त्वगुणी और गुणातीत व्यक्ति के लिए भी हितकारी है | मंत्रजप से दैवी तत्त्व जागृत होता है, जन्म-जन्मांतरो के कुसंस्कार नष्ट होते हैं | श्रद्धा, तत्परता, संयम और एकाग्रता से ध्यान व जप कई जन्मों के कुसंस्कारों का नाश तथा कई गोहत्या के एवं अन्य अनगिनत पापों का शमन करके ह्रदय में शांति व आनंद ले आते हैं |


ऋषिप्रसाद – फरवरी २०२० से