स्वच्छन्दत्वं धनार्थित्वं प्रेमभावोऽथ भोगिता |
अविनीतत्वमालस्यं
विद्याविघ्नकराणि षट ||
‘स्वच्छंदता अर्थात मनमुखता, धन
की इच्छा, किसीके (विकारी) प्रेम में पड़ जाना, भोगप्रिय होना, अनम्रता, आलस्य – ये
६ विद्या के विघ्न है |’
ऋषिप्रसाद – जनवरी
२०२२ से
Tips for an all round Success in Life from His Holiness Saint Shri Asharamji Bapu.
स्वच्छन्दत्वं धनार्थित्वं प्रेमभावोऽथ भोगिता |
अविनीतत्वमालस्यं
विद्याविघ्नकराणि षट ||
‘स्वच्छंदता अर्थात मनमुखता, धन
की इच्छा, किसीके (विकारी) प्रेम में पड़ जाना, भोगप्रिय होना, अनम्रता, आलस्य – ये
६ विद्या के विघ्न है |’
ऋषिप्रसाद – जनवरी
२०२२ से
बल ही जीवन है, दुर्बलता मौत है | जो नकारात्मक विचार करनेवाले हैं वे दुर्बल हैं, जो विषय-विकारों के विचार में उलझता है वह दुर्बल होता है लेकिन जो निर्विकार नारायण का चिंतन, ध्यान करंता है और अंतरात्मा का माधुर्य पाता है उसका मनोबल, बुद्धिबल और आत्मज्ञान बढ़ता है |
ऋषिप्रसाद – जनवरी
२०२२ से
बुद्धि का नाश कैसे होता है और विकास कैसे होता है ? विद्यार्थियों को तो ख़ास समझना चाहिए न ! बुद्धि नष्ट कैसे होती है ? बुद्धि: शोकेन नश्यति | भूतकाल कि बातें याद क्रेक ‘ऐसा नहीं हुआ, वैसा नही हुआ...’ ऐसा करके जो चिंता करते हैं न , उनकी बुद्धि का नाश होता है | और ‘मैं ऐसा करके ऐसा बनूँगा, ऐसा बनूँगा....’ यह चिंतन बुद्धि-नाश तो नहीं करता लेकिन बुद्धि को भ्रमित कर देता है | और ‘मैं कौन हूँ ? सुख-दुःख को देखनेवाला कौन ? बचपन बीत गया फिर भी जो नहीं बीता बह कौन ? जवानी बदल रही है, सुख-दुःख बदल रहा है , सब बदल रहा है इसको जाननेवाला मैं कौन हूँ ? प्रभु ! मुझे बताओ ...’ इस प्रकार का चिंतन, थोडा अपने को खोजना, भगवान के नाम का जप और शास्त्र का पठन करना- इससे बुद्धि ऐसी बढ़ेगी, ऐसी बढ़ेगी कि दुनिया का प्रसिद्द बुद्धिमान भी उसके चरणों में सिर झुकायेगा |
बुद्धि बढाने के ४ तरीके
१] शास्त्र का पठन
२] भगवन्नाम-जप, भगवद-ध्यान
३] आश्रम आदि पवित्र स्थानों में
जाना
४] ब्रह्मवेत्ता महापुरुष का
सत्संग-सान्निध्य
जप करने से, ध्यान करने से बुद्धि
का विकास होता है | जरा – जरा बात में दु:खी काहे को होना ? जरा – जरा बात में
प्रभावित काहे को होना? ‘यह मिल गया, यह
मिल गया...’ मिल गया तो क्या है !
ज्यादा सुखी - दु:खी होना यह कम
बुद्धिवाले का काम है | जैसे बच्चे कि कम बुद्धि होती है तो जरा- से चॉकलेट में,
जरा-सी चीज में खुश हो जाता है और जरा-सी चीज हटी तो दु:खी हो जाता है लेकिन जब
बड़ा होता है तो चार आने का चॉकलेट आया तो क्या, गया तो क्या ! ऐसे ही संसार की
जरा-जरा सुबिधा में जो अपने को भाग्यशाली मानता है उसकी बुद्धि का विकास नहीं होता
और जो जरा-से नुकसान में आपने को अभागा मानता है उसकी बुद्धि मारी जाती है | अरे !
यह सब सपना है, आता-जाता है | जो रहता है उस नित्य तत्त्व में जो टिके उसकी बुद्धि
तो गजब की विकसित होती है ! सुख-दुःख में, लाभ-हानि में, मान-अपमान में सम रहना तो
बुद्धि परमात्मा में स्थित रहेगी और स्थित बुद्धि ही महान हो जायेगी |
ऋषिप्रसाद – जनवरी
२०२२ से
बालकों को विद्याध्ययन में पाँच बाधाओं से सावधान रहना चाहिए :
१) अभियान,
२) क्रोध,
३) प्रमाद ,
४) असंयम,
५) आलस्य
ये पाँच दोष शिक्षा में बाधक बनते हैं |
ऋषिप्रसाद – नवम्बर २०२१ से
सुबह नींद में से उठे तो थोड़ी देर चुप बैठे | फिर ऐसा चिंतन करें : ‘आज मै कभी भी फरियाद का चिंतन नहीं करूँगा, अपने मन को दृढ़ रखूँगा क्योंकि मेरे मन की गहराई में मेरे भगवान हैं | भगवान सदा एकरस हैं, दृढ़ हैं तो मन दृढ़ होगा तो उसमें भगवान की सत्ता आयेगी | मेरी बुद्धि को दृढ़ करूँगा, बुरी संगति नहीं करूँगा, बुरे विचारों में नहीं गिरूँगा | मैं भगवान का हूँ, भगवान मेरे हैं | प्रभु ! आप मेरे हैं न ! आप चेतनस्वरूप हैं, आनंदस्वरूप हैं, ज्ञानस्वरूप हैं, आप शांत आत्मा हैं |
इस प्रकार का चिंतन करने से बुद्धि बढ़ेगी | क्या करूँ, कैसे करूँ, मेरा ऐसा हो गया
| .... फिर जो पढ़ा है अथवा जो पढना है उसका थोडा चिंतन करो | चिंतन से बुद्धि का
विकास होता है और चिंता से बुद्धि का विनाश होता है |
सूर्यनारायण को अर्घ्य देना, भगवन्नाम का जप करना, भगवान को एकटक देखते-देखते
फिर उनको आज्ञाचक्र में देखना | इनसे बुद्धि का विकास होता है |
ऋषिप्रसाद – सितम्बर २०२१ से
‘ॐ ऐं ह्रीं श्रीं क्लीं वाग्वादिनि सरस्वति मम जिह्रागे वद वद ॐ ऐं ह्रीं
श्रीं क्लीं नम: स्वाहा |’
यह मंत्र २६ जून २०२१ को प्रात: ४:२६ से रात्रि ११:४५ बजे के बीच अथवा २३
जुलाई २०२१ को दोपहर २:२६ से रात्रि ११:४५ बजे के बीच १०८ बार जप लें और फिर
मंत्रजप के बाद जीभ पर लाल चंदन से ‘ह्रीं’ मंत्र लिख दें | जिसकी जीभ पर यह मंत्र
इस विधि से लिखा जायेगा उसे विद्यालाभ व अदभुत विद्वत्ता की प्राप्ति होगी |
(ध्यान दें : गुजरात व महाराष्ट्र में यह योग केवल २३ जुलाई को हैं )
ऋषिप्रसाद – जून २०२१
से
सुबह – सुबह बच्चों को चाय कभी नहीं देना | डबलरोटी, टोस्ट-वोस्ट, बिस्कुट-विस्कुट के चक्कर में
मत पड़ना | सुबह-सुबह बच्चों को अगर खिलाना चाहते हो तो सेब खिलाओ, जिससे दिल-दिमाग को शक्ति मिलती है | उसके आधा-एक घंटे पहले तुलसी के ५ –
७ पत्ते खिलाकर एक गिलास पानी पिलाओ | उस पानी में भी अमृत का गुण आ जाय इसकी एक
युक्ति है | वह युक्ति योगी लोग अपने ख़ास शिष्यों को ही बताते हैं | हम आपको बता देते
हैं | पानी पीते समय दायाँ नथुना बंद करके बायें नथुने से श्वास चलाकर पानी पियोगे
तो वह पानी तुम्हारे आरोग्य और बुद्धि में बड़ी मदद करेगा और स्मरणशक्ति बढ़ाने में
भी मदद करेगा |
ऋषिप्रसाद – मई २०२१ से
(अक्षय तृतीया :
१४ मई )
अक्षय तृतीया
त्रेतायुग का प्रारम्भ दिवस, नर-नारायण का प्राकट्य दिवस, परशुरामजी का प्राकट्य
दिवस, भगवान हयग्रीव का अवतार दिवस, किसानों के कृषि-कार्य का आरम्भ दिवस, नूतन
वर्ष का प्रारम्भ दिवस है | किसान इस दिन को वर्ष के प्रारम्भ का शुभ दिन मानकर
खेत-खलियान में प्रवेश करे तो उसे बरकत आने के शकुन मानते हैं |
अक्षय तृतीया
भगवान बद्रीनाथ के पट खुलने का दिवस है तो आपके दिल के दिलबर के पट खुलने का दिवस
भी है | हरि हमारे ह्रदय के पट खोलें | ‘हरि ॐ शांति...’ जितना प्रीतिपूर्वक होठों
में जपते जाओगे, जप के अर्थ में शांत होए जाओंगे, उतना ही जो ह्रदय में छुपा बद्रीनाथ
भगवान है उसके पट भी खुलने के दिन निकट आ जायेंगे |
इस दिन छाता, मटकी
और भी चीज-वस्तुओं का दान करने का अक्षय फल तो होता है किंतु भगवान का ध्यान, जप
करके अपना अहंकार दान करना तो महाराज ! उसका असीम फल होता है | अक्षय तृतीया को जो
- जो करो उसका फल अनंत गुना होता है |
बच्चे-बच्चियाँ !
ध्यान देना बेटे ! अक्षय तृतीया के दिन किसी भी इच्छा से तुम जप करोगे तो वह अनंत
गुना फल देगा | चाहे भगवान की प्रीति के लिए करो, चाहे भगवान के ज्ञान के लिए करो,
चाहे भगवदरस के लिए करो, चाहे ब्रह्मचर्य पालने के लिए करो, चाहे कुटुम्ब में
सुख-शांति के लिए करो.... जिसके लिए भी जप करोगे वह फलेगा |
ऋषिप्रसाद
– अप्रैल २०२१ से
जिन बच्चों का पढाई
की और रुझान नहीं होता अथवा कम होता है या काफी परिश्रम करके भी जिन्हें अध्ययन
में पर्याप्त सफलता नहीं मिलती उनके लिए लाभदायी प्रयोग :
१ ग्राम कपूर और
मौलसिरी का एक बीज पीसकर देशी गाय के २०० ग्राम घी में मिला दें | नित्य किसी भी
समय ५ से १० मिनट तक संबंधित बच्चे के शयनकक्ष में इस मिश्रण से दीपक जलायें |
अथवा उसके तकिये में मौलसिरी के ३ बीज रख दें |
डर को जड़-मूल से
उखाड़ने हेतु
जिस बच्चे को
बार-बार नजर लगती हो या वह रात्रि में डरता हो तो उससे पलाश के वृक्ष का स्पर्श
कराते हुए उसकी ७ परिक्रमा करवायें तथा रात को उसके सिरहाने पलाश के ३ बीजों को
रखें तो शीघ्र ही वह समस्या दूर होती है | यदि सफेद पलाश हो तो और भी तीव्र तथा
अत्यंत ही सटीक परिणाम प्राप्त होते हैं | साथ ही पूज्य बापूजी द्वारा कराये गये ‘ॐकार’ कीर्तन का ट्रैक चलाकर कीर्तन करायें , ‘ॐकार’का जप करायें एवं ‘निर्भय
नाद’ पुस्तक प्रतिदिन थोड़ी-थोड़ी पढने हेतु बताये | निर्भय
नाद पुस्तक पढने से आंतरिक निर्भयता का सामर्थ्य जगता है | इससे डर जड़ – मूल से
उखडकर भाग जायेगा |
सुख – शांति व धनवृद्धि हेतु
सफेद पलाश के एक या
अधिक पुष्पों को किसी शुभ महूर्त में लाकर तिजोरी में सुरुक्षित रखने से उस घ में
सुख-शांति रहती है, धन-आगमन में बहुत वृद्धि
होती है |
ऋषिप्रसाद
– मार्च २०२१ से
विभिन्न स्वास्थ्य-समस्याओं के उपाय
१] भूख तथा चुस्ती,
फुर्ती और शक्ति बढाने हेतु : २ काली मिर्च, १ लौंग और
थोडा-सा काला नमक १ कप पानी में डालकर मंद आँच पर उबालें | उबालते समय ढककर रखें
ताकि इसकी भाप बाहर ज्यादा न निकले | आधा कप पानी बचे तो उतार लें | इसे शाम के
भोजन के आधा घंटे बाद १५ दिन तक पियें | इससे भूख और पाचनशक्ति बढ़ेगी, शरीर में चुस्ती, फुर्ती और शक्ति आयेगी, गैस बनाना बंद होगा और खाया-पिया भलीभाँति हजम होने से शरीर पुष्ट और
सुडौल होगा |
२] ऊँचाई बढाने के लिए : प्रात:काल दौड़ लगायें, पुल-अप्स व ताड़ासन करें तथा १ काली मिर्च के टुकड़े करके मक्खन में मिलाकर निगल जायें | पाद्पश्चिमोत्तासन का नियमित अभ्यास करें | ( पाद्पश्चिमोत्तासन की विधि दिव्य प्रेरणा-प्रकाश पुस्तक में पढ़ें |)
३] नींद में डरना :
१-२ राम सौंफ १ कप पानी में डाल के उबालें तथा पानी आधा शेष बचने पर उतार के छान
लें | इसे बच्चे को रात को सोने से पहले पिलाने से उसकी नींद में डरने की शिकायत
दूर होती है |
स्मरणशक्ति बढाने
हेतु
१] सिर में देशी
गोघृत अथवा बादाम रोगन की मालिश स्मरणशक्ति को तीव्र करें में सहायक है | ललाट के
आसपास दोनों और कनपटीवाले हिस्से में
गोघृत से मालिश करने से सिरदर्द वसिर के अन्य रोग तथा नींद न आने की समस्या भी दूर
होती है |
२] शंखावली, गिलोय व यष्टिमधु चूर्ण को समभाग लेकर मिश्रण बना लें | आधा से २ ग्राम
चूर्ण शहद के साथ खाने से स्मरणशक्ति बढती है | २ ग्राम सौंफ का चूर्ण शहद के साथ
खाने से भी स्मरणशक्ति बढती है |
३] गुलकंद खाने से
शरीर में शीतलता व मस्तिष्क में ताजगी आती है, साथ ही स्मरणशक्ति को बल मिलता है |
ऋषिप्रसाद
– मार्च २०२१ से
पीपल के पत्ते पर
गाय का घी लगाकर उसमें पके हुए गर्म-गर्म चावल रखें | दुसरे पीपल के पत्ते पर घी
लगा के उससे चावल को १०-१५ मिनट तक थाली या कटोरी से दबा के ढक दें | बाद में पत्ता हटाकर यह चावल खिलाने से
मानसिक रोग, जैसे – उन्माद,मिर्गी
आदि में लाभ होता है | अनेक उपायों से जो रोगी ठिक नहीं हो सके वे भी इसके नियमित
प्रयोग से ठीक होते देखे गये हैं | यह प्रयोग बुद्धिवर्धक होने से विद्यार्थी भी इसका लाभ ले सकते हैं |
ऋषिप्रसाद
– दिसम्बर २०२० से
(सोमवती अमावस्या : १४ दिसम्बर )
दरिद्रता मिटाने हेतु
जिनको रोजी – रोटी
में बरकत न पडती हो वे सोमवती अमावस्या के दिन मौन रहकर प्रात: स्नान करें तो १०००
गोदान का फल मिलेगा और पीपल देवता की १०८ परिक्रमा
करें तथा प्रार्थना करें : ‘हे वृक्षराज ! आपकी जड़ में ब्रह्मा, मध्य में विष्णु और शिखर में शिव
तत्व हैं, आपको मेरा नमस्कार है | आप मेरे द्वारा की हुई
पूजा को स्वीकार करें और मेरे पापों का हरण करें |’ इससे आरोग्य भी प्राप्त होगा |
ऐसे ही तुलसी की १०८
परिक्रमा करें और प्रार्थना करें : ‘हे तुलसी माँ ! आप मेरे घर की दरिद्रता –
दीनता नष्ट करें |’
दरिद्रता मिटाने के
लिए तथा जो नौकरीवाले लोग हैं याजो काम-धंदे में विफल हुए हैं अथवा जिनको किसीसे
कुछ लेना बनता है और रुका हुआ है उनके लिए यह बहुत जरूरी है |
पायें जप का दस लाख
गुना लाभ
सोमवती अमावस्या को
किया हुआ जप सूर्यग्रहण के समान १० लाख गुना फलदायी होता है | चौदस की रात्रि को
जप करते-करते सोना और सुबह उठकर थोडा शांतमय जप में बैठना | जप की संख्या बढ़ाना
नहीं, जप के अर्थ में शांत होते जाना |
करोड़ काम छोडकर
सोमवती अमावस्या को हरि का भजन और तुलसी की परिक्रमा तुम्हे करनी ही चाहिए | कोई
महिला मासिक धर्म में हो तो उसको छुट है , बाकी के लोग यह जरुर करना | इससे आपको
बहुत लाभ होगा | आर्थिक लाभ होगा, बुद्धिलाभ होगा और पुण्यलाभ भी होगा |
ऋषिप्रसाद
– नवम्बर २०२० से
बच्चों ! आपको जीभ बाहर निकालकर आवाज करने की शरारत सूझती है एवं ऐसा करने
पर सभी आपको डाँटते है न ? हम आपको एक ऐसी
युक्ति बताते हैं जिसे अपनाने पर आपको डाँट भी नहीं पड़ेगी और खूब-खूब लाभ होंगे |
इतना ही नहीं, हो सकता है आपके माता-पिता भी आपकी इस क्रिया का अनुकरण करने लग
जायें |
लाभ : १] इस आसन से गला, नाक, कान,
मुख, जबड़ा, जिव्हा व दाँतों के रोगों में तथा तुतलाकर या हकला के
बोलनेवालों को भी बड़ा लाभ होता है |
२] बहुत जल्दी निर्भयता आती है | जो छोटी-छोटी बातों में घबरा जाते हैं
उन्हें इस आसन का अभ्यास अवश्य करना चाहिए |
३] जिन्हें अपनी आवाज को स्पष्ट बनाना हो वे भी इसका अभ्यास करके इसके
चमत्कारिक प्रभाव का अनुभव कर सकते हैं |
विधि : सूर्योदय के कुछ मिनटों के बाद (लालिमा समाप्त होने पर ) सूर्य की
ओर मुख करके वज्रासन में बैठे अर्थात पैरों को घुटनों से मोडकर इस प्रकार बैठे कि
एडियाँ नितम्ब को स्पर्श करें एवं पैरों के अँगूठे परस्पर जुड़े रहें |फिर घुटनों को
लगभग यथासम्भव फैला लें | हथेलियाँ जमीन पर पैरों के बीच इस प्रकार रखें की
उँगलियाँ आपकी ओर रहें | शरीर का वजन हाथ के पंजो पर डालें | पीठ पीछे की ओर ले
जायें और धीरे से सिर को भी यथासम्भव पीछे की ओर इस तरह से ले जाए कि गर्दन में
सहन हो सके ऐसा हल्का तनाव बने | शाम्भवी मुद्रा करें अर्थात आख्ने आधी खुली रखकर
पुतलियाँ ऊपर चढ़ा दें तथा दृष्टि भौहों के मध्य में ले आयें |शरीर को ढीला छोड़ दें
| मुँह बदन रखे | नाक से धीरे- धीरे खूब गहरा श्वास लें | फिर मुँह खोल के
यथासम्भव जीभ बाहर निकालें ताकि जीभ, महूँ बंद करें और
श्वास लें | यह एक बार हुआ | प्रय्तेक बार पूरी प्रक्रिया के अंत में आँख, और मुँह
को सामान्य श्थिति में ला सकते है |
सामान्य स्वास्थ्य में इस प्रकार ५ बार तथा उपरोक्त बीमारियों में १० से २०
बार तक अभ्यास कर सकते है |
ऋषिप्रसाद – अक्टूबर २०२० से
एक ख़ास तोहफा ! बुद्धि के विलक्षण लक्षण विकसित हो जायें ऐसी बढिया बात है | अपने घर के इर्द- गिर्द तुलसी के कई पौधे लगा दें | तुलसी के पौधे में विद्युत् तत्त्व का बाहुल्य होता है , जिससे हवामान तो बढिया रहेगा, साथ ही उसके औषधीय लाभ भी मिलेंगे | तुलसी के इतने पत्ते तोड़ें जिससे १०-२० ग्राम रस बन जाय | फिर उन्हें घोंट के थोडा पानी डालकर मिक्सी में घुमाये और थोडा फल का रस भी हो इसलिए साथ में पपीते का टुकड़ा या सेव डाल दें अथवा तो थोडा चम्मच भर के च्यवनप्राश डाल दें | बाजारू च्यवनप्राश नहीं, जो आश्रम में और समितियों के सेवाकेन्द्रों पर मिलता है वह सात्तिव्क च्यवनप्राश हो |
तुलसी का रस फल के या च्यवनप्राश के रस फल के साथ ४० दिन लें, बुद्धि गजब की
सात्त्विक और विकसित होगी और शरीर के रोग भाग जायेंगे | बच्चों के लिए तो यह बड़ा
कल्याणकारी वरदान है | जिन बच्चों ने सारस्वत्य मन्त्र या गुरुमंत्र लिया है वे
उसका जप करें अथवा जिन साधकों ने मन्त्र लिया है वे उसका जप करके पीनेवाले को
देवें और इसमें भी पीनेवाले भगवान सूर्य का थोडा मानसिक ध्यान कर ले फिर उसमें
दृष्टि डालें और ‘हे बुद्धि के अधिष्ठाता देव ! मैं यह मिश्रण पीता हूँ, मेरी
बुद्धि में ज्ञान का अद्भुत प्रकाश हो |’ ऐसा संकल्प करके पियें तो बहुत लाभ होगा
|
ऋषिप्रसाद – अक्टूबर २०२० से
१] दिव्य प्रेरणा-प्रकाश पुस्तक में (पृष्ठ २ पर ) एक मंत्र लिखा है , उसको
पढ़कर दूध में देखोगे और वह दूध पियोगे तो बुद्धि बढ़ेगी,
बल बढ़ेगा |
२] मंत्रजप और अनुष्ठान से बुद्धि विकसित होती है |
३] भगवच्चिंतन करके ॐकार का गुंजन करके शांत होओगे तो बुद्धि बढ़ेगी |
४] श्वासोच्छवास में भगवान् सूर्यनारायण का ध्यान करने से भी फायदा होगा |
५] श्रद्धा, भक्ति और गुरुजनों के सत्संग से भी बुद्धि उन्नत होती है |
७] भगवद-ध्यान से तो बुद्धि को बढना ही है |
८] स्मृतिशक्ति बढानी है तो कानों में अँगूठे के पासवाली पहली उँगलियाँ
डालकर लम्बा श्वास लो फिर होंठ बंद रख के कंठ से ‘ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ....’ ऐसा उच्चारण करो
| इस प्रकार १० बार करो | इस भ्रामरी प्राणायाम से स्मृति बढ़ेगी,
बुद्धू विद्यार्थी भी अच्छे अंक लायेंगे |
ऋषिप्रसाद – अक्टूबर २०२० से
पुस्तक उलटी नहीं
रखनी चाहिए | इससे उसका निरादर होता है | वास्तव में सभी वस्तुएँ भगवत्स्वरूप होने
से चिन्मय है | अत: किसी भी वस्तु को जड समझकर उसका निरादर नहीं करना चाहिए |
ऋषिप्रसाद
– अक्टूबर २०२० से
हे विद्यार्थी ! तू अपने जीवन में दैवी सद्गुणों को भर दें, तभी तू इस लोक और परलोक – दोनों जगह सुखी रह सकेगा | दैवी गुणों में पहला गुण है – निर्भयता | जरा -जरा बात में डरो नहीं | जरा- जरा बात में घबराओ नहीं | डरना है , घबराना है तो पाप से डरो | ‘दोस्त की हाँ में हाँ नहीं मिलाऊँगा तो वह नाराज हो जाएगा’ – इससे मत डरो |
दुराचारी, पापी, हिंसक लोग भले भयभीत रहें, सदाचारी, श्रेष्ठ लोग तो निर्भय बने रहें | निर्भयता शक्ति को विकसित करती है |
निर्भय व्यक्ति का स्वास्थ्य अच्छा रहता है, मन-बुद्धि भी
बढिया रहते हैं | निर्भय व्यक्ति हर क्षेत्र में सफल होता है | भी के कारण बहुत
साड़ी मुसीबतें आती है |
ऋषिप्रसाद
– सितम्बर २०२० से
जो केवल विद्याध्ययन करना चाहता है उसको विद्यार्थी कहते हैं | ‘विद्यार्थी’ शब्द का अर्थ है – विद्या का अर्थी अर्थात केवल विद्या चाहनेवाला | कौन-सी विद्या ? विद्याओं में श्रेष्ठ ब्रह्मविद्या – अध्यात्मविद्या विद्यानाम | (गीता:१०.३२)
ऋषिप्रसाद
– अगस्त २०२० से