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Friday, April 15, 2022

कुसंस्कार व पाप मिटानेवाला पुण्यमय स्नान

 

वैशाख मास के अंतिम ३ दिन : १४ से १६ मई

वैशाख मास में कोई तीर्थ का सेवन करता है अथवा प्रभातकाल में ( सूर्योदय के पूर्व) स्नान करता है तो उसके करोड़ो जन्मों के कुसंस्कार और पाप मिट जाते हैं | बड़े-बड़े यज्ञों – अश्वमेध यज्ञ आदि से जो पुण्य प्राप्त होता है वह वैशाख मास के सत्संग, स्नान, दान से प्राप्त हो जाता है | 

जिसने एक महिना वैशाख – स्नान नहीं किया वह महीने के आखिरी ३ दिन ( तेरस, चौदस और पूनम) अगर प्रभातकाल में स्नान कर लेता है तो भी भगवान उसका पूरा मास स्नान में गिन लेते हैं | ऐसे उदार परमात्मा को प्रणाम हो !


ऋषिप्रसाद – अप्रैल २०२२ से

Thursday, March 31, 2022

अमृतबिंदु

 

·       जो वाणी का, विचारों का और समय का सदुपयोग करता है वह सत्यस्वरूप को पा लेता है, चित्त के स्फुरणो से ऊपर उठ जाता है |

·       आप जो भी काम करते हो, अगर वह ईश्वर के रास्ते जाने के लिए सहयोग देता हैं तो पुण्यकर्म हैं और ईश्वर से विमुख करता है तो पापकर्म है |

·       जिनके पास जपरूपी शस्त्र होता है उनको काल का भय नही रहता, भूत -प्रेत का भय नहीं रहता और मेरा क्या होगा?’ यह चिंता भी नहीं रहती |

·       मन में हो भगवान के लिए प्रीति, व्यवहार में हो भगवान के लिए सदभाव और धर्म एवं इन्द्रियों में हो संयम तो छोटे-से-छोटा व्यक्ति भी साक्षात भगवदरूप हो जायेगा |

·       उत्तम शिष्य हनुमानजी जैसे होते हैं, वे गुरु की सेवा खोज लेते हैं |

·       आत्मा को निहारकर अपना बेडा पार कर लो, छोटी-छोटी बातों में कब तक उलझते रहोगे ?

·       विषय-विकारों में सुखाभास है, सच्चा सुख तो आत्मा में हैं |

·       परमात्मसुख के सिवाय जो भी सुख मिलेगा वह जीव को धोखे में ही डालता है बेचारा |

·       जिनका राग-द्वेष चला गया वे मानो परमेश्वर ही है |

·       हमारा लक्ष्य भारतीय संस्कृति की रक्षा करना है, इसकी ऊँचाइयों को छूना है |

·       संत-पुरुषों की वाणी, उनके दर्शन, सान्निध्य और उनकी दृष्टी से जीवों के ह्रदय पवित्र होते हैं |

·       जीवन का अंत होने से पहले सच्चिदानंद से आपका तालमेल हो जाना यह सच्ची उपलब्धि है |

·       जब तक जीवत्व है तब तक कर्तव्य है, जब चिदाकाश हो गये तब अंत:करण में कोई कर्तव्य नहीं रहता |

·       जो सतशिष्य है वह मान और मत्सर (ईर्ष्या, द्वेष) से रहित होता है |

·       सत्संग के बिना आत्मचिन्तामणि का प्रकाश नहीं होता |

·       जब ज्ञानवान पुरुषों की कृपा होती है तब जीवन, वास्तविक जीवन के रास्ते पर चलना शुरू करता है |

·       जिसको जल्दी उन्नति करनी हो वह गुरुओं की दृष्टी में रहे ताकि अपना मन दगा न दे पाये |

·       जो सत्संग करते, करवाते या उसमें साझेदार होते है उनकी ७ – ७ पीढ़ियों का उद्धार होता है |

·       सेवा में तत्परता है और स्वार्थ नहीं है, द्वेष नहीं है, राग नहीं है तो वह कर्मयोग बन जायेगा |

·       संकट या विघ्न दिखते भयंकर हैं लेकिन आते है आपके विकास के लिए, आत्मबल बढाने के लिए |

·       सच्चे संतो से समाज विमुख हो जाय तो समाज को शांति, भाईचारा और सदाचार कहाँ से मिलेगा ?

·       आप जहाँ हो वहाँ अगर प्रसन्न नहीं हो तो वैकुण्ठ में भी प्रसन्नता मिलना सम्भव नहीं है |

·       श्रद्धा के साथ वेदान्त-ज्ञान होगा तभी आप दूसरों का हित कर सकते है |

·       शुद्ध ज्ञान में जगने के लिए इन्द्रियों को विषय-विकारों के श्रम से बचाये |

·       वे ही दु:खी और विफल होते हैं जो ईश्वरीय सिद्धांत के खिलाफ काम करते हैं |

·       जो किसीकी निंदा करते हैं, सुनते हैं वे अपने साथ अनर्थ करते हैं |

·       भगवान का ज्ञान जिनके ह्रदय में हो जाता है उनका ह्रदय दाता के गुणों से अपने-आप भर जाता है |

·       उत्साह, मनोबल और आनंदबल बढाकर शरीर से काम लेनेवाले सदा जवान रहते है |

·       जब तक भक्ति का रंग नहीं लगता तब तक संसार का रंग छूटता नहीं |

·       ईश्वर का रास्ता इतना सुगम है कि जहाँ से तुम चलते हो वहीँ मंजिल है |

·       ईर्ष्यारहित व्यक्ति को अंतर का सुख प्राप्त होता है |

·       आवेश से हमारी शक्तियाँ क्षीण होती हैं और समता से उनका विकास होता है |

·       संत का सान्निध्य भगवान के सान्निध्य से भी बढकर माना गया है |

·       लोग अभाव से दु:खी नहीं होते, नासमझी से दु:खी होते हैं |

·       दूसरे के अधिकार की रक्षा करते हुए सेवा करते हैं तो वह भजन हो जाता है |


ऋषिप्रसाद – मार्च २०२२ से

Monday, February 14, 2022

किसकी आयु कम हो जाती है ?

 

  • जिनको अति अभिमान होता है, जो अधिक एवं व्यर्थ का बोलते हैं उनकी आयु कम हो जाती है | 
  • जो निंदा-ईर्ष्या करते है या दुर्व्यसन में फँसे हैं अथवा जो जरा-जरा बात में क्रुद्ध हो जाते हैं उनकी भी उम्र कम हो जाती है | 
  • जो अधिक खाना खाते हैं, रात को देर से खाते हैं, बिनजरूरी खाते हैं, चलते-चलते खाते हैं, खड़े-खड़े हैं उनका भी स्वास्थ्य लडखडा जाता है और आयु कम हो जाती है | 
  • जो मित्र, परिवार से द्रोह करते हैं, संतो, सज्जनों की निंदा करते है उनकी भी आयु कम होती है, जो ठाँस- ठाँस के खाता है, ब्रह्मचर्य का नाश करता रहता है वह जल्दी मरता है | 
  • जो प्राणायाम और भगवद-मंत्र का जप नहीं करता उसकी लम्बी आयु होने में संदेह रहता है और जो ब्रह्मचर्य पालते हैं, प्राणायाम करते हैं उनकी आयु बढती है |

 

ऋषिप्रसाद – फरवरी २०२२ से

कष्ट-बाधा और पितृदोष का उपाय

 

सदगुरु या इष्ट का ध्यान करते हुए निम्नलिखित शिव-गायत्री मंत्र की एक माला सुबह अथवा शाम की संध्याओं में कभी भी कुछ दिन जपने से पितृदोष, कष्ट-बाधा दूर हो जाते हैं तथा पितर भी प्रसन्न होते हैं | जब पितर प्रसन्न होते हैं तो घर में सुख-समृद्धि, वंशवृद्धि व सर्वत्र उन्नति देते हैं |

मंत्र : 

ॐ तत्पुरुषाय विद्महे महादेवाय धीमहि | तन्नो रुद्र: प्रचोदयात्  || 

(लिंग पुराण, उत्तर भाग :४८.७)


ऋषिप्रसाद – फरवरी २०२२ से

Friday, January 7, 2022

अर्घ्य देकर करें अभीष्ट की सिद्धि

 

(भीमाष्टमी : ८ फरवरी)

वसूनामवताराय शन्तनोरात्मजाय च |

अर्घ्य ददामि भीष्माय आबालब्रह्मचारिणे ||

इस मन्त्र से भीष्माष्टमी के दिन भीष्मजी को तिल, गंध, पुष्प, गंगाजल व कुश मिश्रित  अर्घ्य देने से अभीष्ट सिद्ध होता है |

ऋषिप्रसाद – जनवरी २०२२ से

कलह, धन-हानि व रोग-बाधा से परेशान हों तो ....

 

घर में कलहपूर्ण वातावरण, धन-हानि एवं रोग-बाधा से परेशानी होती हो तो आप अपने घर में मोरपंख कि झाड़ू या मोरपंख पूजा-स्थल में रखें | 

नित्य नियम के बाद मन-ही-मन भगवन्नाम या गुरुमंत्र का जप करते हुए इस पंख या झाड़ू को प्रत्येक कमरे में एवं रोग-पीड़ित के चारों तरफ गोल-गोल घुमाये |

कुछ देर ‘ॐकार ‘ का कीर्तन करें-करायें | ऐसा करने से समस्त प्रकार की नकारात्मक ऊर्जा समाप्त होती है तथा ऊपरी एवं बुरी शक्तियों का प्रभाव भी दूर हो जाता है |

ऋषिप्रसाद – जनवरी २०२२ से

विद्या के ६ विघ्न

 स्वच्छन्दत्वं धनार्थित्वं प्रेमभावोऽथ भोगिता |

अविनीतत्वमालस्यं विद्याविघ्नकराणि षट ||

‘स्वच्छंदता अर्थात मनमुखता, धन की इच्छा, किसीके (विकारी) प्रेम में पड़ जाना, भोगप्रिय होना, अनम्रता, आलस्य – ये ६ विद्या के विघ्न है |’

ऋषिप्रसाद – जनवरी २०२२ से

 

बल ही जीवन है

 बल ही जीवन है, दुर्बलता मौत है | जो नकारात्मक विचार करनेवाले हैं वे दुर्बल हैं, जो विषय-विकारों के विचार में उलझता है वह दुर्बल होता है लेकिन जो निर्विकार नारायण का चिंतन, ध्यान करंता है और अंतरात्मा का माधुर्य पाता है उसका मनोबल, बुद्धिबल और आत्मज्ञान बढ़ता है |

ऋषिप्रसाद – जनवरी २०२२ से

Saturday, December 11, 2021

चॉकलेट के घातक दुष्परिणामों से बचकर अपनायें स्वास्थ्य-हितकर तुलसी गोली !

 


पूज्य बापूजी के सत्संग वचनामृत में आता है : “चॉकलेट से बहुत हानि होती है | इसमें कई रसायन पड़ते हैं | इससे चॉकलेट खानेवाले बच्चों में मानसिक व्यग्रता, उत्तेजना, अवसाद, क्रोध, सिरदर्द, पेटदर्द, जोड़ों का दर्द और दाँतों के रोग बढ़ जाते हैं तथा स्वभाव चिडचिडा हो जाता है |

चॉकलेट बनानेवाले आपकी जेब के और आपके बच्चों के स्वास्थ्य के दुश्मन हैं | इसलिए चॉकलेट बच्चों को भूलकर भी नहीं खिलाना चाहिए | हमने एक टॉफ़ी ( तुलसी गोली) बनवायी, जिसमें त्रिकुट ( सोंठ, काली मिर्च व पीपर ) है | इसके सेवन से बच्चे के पेट के कृमि मिट जायेंगे, उसको कफ व खाँसी हो तो वे भी दूर हो जायेंगे, भूख भी अच्छी लगेगी और टॉफी खाने का स्वाद भी आयेगा |”

कई शोधों के बाद वैज्ञानिक भी अब यह बात बोलने लगे हैं कि चॉकलेट का सेवन कई घातक बीमारियों का कारण है |

चॉकलेट में पायें जानेवाले हानिकारक तत्त्व व उनके घातक दुष्परिणाम

चॉकलेट में कैफीन, सीसा, कैडनियम, थियोब्रोमाइन, वैसोएक्टिव एमाईस, सैच्युरेटेड फैट्स व अतिरिक्त शर्करा, थियोफिलिन, ट्रिप्तोफान जैसे हानिकारक तत्त्व पाये जाने से इसका सेवन कई प्रकार की विकृतियाँ पैदा करता है, जैसे –

१] बौद्धिक विकास में रुकावट होती है |

२] रक्तचाप बढ़ता है | यकृत, गुर्दों और हड्डियों को हानि पहुँचती हैं |

३] अपच, पेटदर्द, सिरदर्द, अरुचि, जी मिचलाना, उलटी, दस्त, अनिद्रा, चिडचिडापन, चक्कर आना, बेचैनी, ह्रदयरोग, मोटापा, दंतक्षय, त्वचा का लाल होना, पेशाब में कठिनाई, त्वचा पर चकत्ते, साँस लेने में तकलीफ, थकान आदि समस्याएँ होती है |

अत: हानिकारक द्रव्यों से युक्त चॉकलेट का सेवन करने की अपेक्षा स्वास्थ्य, स्मृति व बल वर्धक तुलसी गोलियों का सेवन करें | ये तुलसी के बीज, सोंठ, काली मिर्च, पीपर आदि बहुगुणी औषधियों से युक्त होने से सभीके लिए लाभदायी है |

       ऋषिप्रसाद – दिसम्बर २०२१ से

 

अपने घर को बनाइये मंगलमय

 



सुविचार के द्वारा आप अपने घर को भी मंगलमय बना सकते हैं | कुछ सात्त्विक प्रयोग भी है, जैसे – पर्व के दिन घर के मुख्य द्वार पर हल्दी और चावल के आटे का घोल बनाकर या केवल हल्दी से ‘ॐ’ या स्वस्तिक बना दो | यह घर को बाधाओं से सुरक्षित रखने में मदद करता है | पर्व के दिन द्वार पर अशोक और नीम के पत्तों का तोरण बाँध दें | उसके नीचे से आने-जानेवाले कि रोगप्रतिकारक शक्ति बढ़ेगी, जाते-आते उसमें ऊँचे विचारों का संचरण होगा, घर में सुख -शान्ति रहेगी |

घर में कभी गोमूत्र से पोंछा लगा लो तो हानिकारक जीवाणु तो चले जायेंगे, साथ ही गोमूत्र में जो गाय के सात्त्विक अंश का और सूर्य की दिव्य किरणों का प्रभाव होता है वह तुम्हारे फर्श को, तुम्हारे वातावरण को सुंदर और पवित्र रखेगा | थोडा खड़ा नमक लाकर घर में रख दो | ऐसा नहीं कि ‘आयोडीन-आयोडीन’ करके लुत्नेवालों का नमक खरीदकर खुद को लुटवाते रहो |अमावस्या को खड़े नमकवाले खारे पानी से घर में पोंछा लगा दो और घर में आश्रम से नि:शुल्क मिलनेवाला ग्रहदोषनिवारक स्वस्तिक रखो | इससे ऋणायन  बनेंगे, धनात्मक ऊर्जा बढ़ेगी और नकारात्मक ऊर्जा चली जायेगी |

ऋषिप्रसाद – दिसम्बर २०२१ से


आरती क्यों करते हैं ?

 

आरती को कैसे व कितनी बार घुमाये ?

पूज्य बापूजी के सत्संग – वचनामृत में आता है : जो भी देव हैं उनका एक बीजमन्त्र होता है | आरती करते हैं तो उनके बीजमन्त्र के अनुसार आकृति बनाते हैं ताकि उन देव कि ऊर्जा, स्वभाव हममें आयें और उनकी आभा में हमारी आभा का तालमेल हो और हमारी आभा देवत्व को उपलब्ध हो | इसलिए देवता, सद्गुरु, भगवान् कि आरती की जाती है |

जिस देवता का जो बीजमन्त्र होता है, आरती की थाली से उस प्रकार कि आकृति बना के आरती करते हैं तो ज्यादा लाभ होता है “ जैसे आप रामजी कि आरती करते हैं तो उनका ‘रां’ बीजमन्त्र है तो ‘रां’ शब्द आरती में बनाना ज्यादा लाभ करेगा | देवी की आरती करते हैं तो सरस्वतीजी का ‘ऐं’ अथवा लक्ष्मीजी का ‘श्रीं’ बना दें | गणपतिजी का बीजमंत्र है ‘गं’ तो थाली से उस प्रकार कि आकृति बना दें | अब कौन-से देव का कौन-सा बीजमन्त्र है यह पता नहीं है तो सब बीजमन्त्रो का एक मुख्य बीजमन्त्र है ‘ॐ’कार | आरती घुमाते – घुमाते आप ॐकार बना दें | सभी देवी-देबताओं के अंदर जो परब्रह्म-परमात्मा है उसकी स्वाभाविक ध्वनि ॐ है |

तो ‘ॐ’ बनाये अथवा देव के चरणों से घुटनों तक ( ४ बार) फिर नाभि के सामने (२ बार) फिर मुखारविंद के सामने (१ बार) फिर एक साथ सभी अंगो में (७ बार) आरती घुमाये| इमने देव के गुण व स्वभाव आरती घुमानेवाले के स्वभाव में थोड़े थोड़े आने लगते हैं |

आरती का वैज्ञानिक आधार

अभी तो बिज्ञानी भी दंग रह गये कि भारत की इस पूजा-पद्धति से कितना सारा लाभ होता है ! उनको भी आश्चर्यकारक परिणाम प्राप्त हुए | अब विज्ञानी बोलते हैं कि आरती करने से अगर विशेष व्यक्ति है तो उसकी विशेष ओरा और सामान्य व्यक्ति कि ओरा एकाकार होने लगती है | वैज्ञानिकों की दृष्टि में केवल आभा है तो भी धन्यवाद ! किन्तु आभा के साथ-साथ विचार भी समान होते हैं, साथ ही हमारे और सामनेवाले के शरीर से निकलनेवाली तरंगो का विपरीत स्वभाव मिटकर हमारे जीवन में प्रकाश का भाव पैदा होता है |

आयु-आरोग्य प्राप्ति व शत्रुवृद्धि शमन हेतु

आरती करने से इतने सारे लाभ होते हैं और आरती देखने से भी लाभ होता है : गुरुद्वार पर कि हुई आरती के दर्शन करने से आपके ऊपर शत्रुओं की डाली नही गलती | दीपज्योती आयु-आरोग्य प्रदायक और शत्रुओ कि वृद्धि का शमन करनेवाली है | पड़ोसी या प्रतिस्पर्धी एक-दूसरे के इतने शत्रु नहीं होते जितने मनुष्य जीवन में काम, क्रोध, लोभ आदि शत्रु हैं | तो आरती के दर्शन करने से शत्रुओ कि वृद्धि का शमन होता |

शास्त्रों के अनुसार जो धूप व आरती को देखता है और दोनों हाथों से आरती को लेता है वह अपनी अनेक पीढ़ियों का उद्धार करता है तथा भगवान विष्णु के परम पद को प्राप्त होता है |

ऋषिप्रसाद – दिसम्बर २०२१ से

५ आयु-आरोग्यवर्धक चीजें एवं ५ आयुनाशक चीजें

 

५ चीजों से आयुष्य और आरोग्य बढ़ता है :

१] संयम : पति – पत्नी हैं फिर भी अलग रहें, थोडा संयम से रहें |

२] उपवास : १५ दिन में एक उपवास करें |

३] सूर्यकिरणों का सेवन : रोज सुबह सिर को ढककर शरीर पर कम-से-कम वस्त्र धारण करके ८ मिनट सूर्य की ओर मुख व १० मिनट पीठ करके बैठे | सूर्य से आँखें न लडाये |

४] प्राणायाम : प्रात:काल ३ से ५ बजे के बीच प्राणायाम करना विशेष लाभकारी है | यह समय प्राणायाम द्वारा प्राणशक्ति, मन:शक्ति, बुद्धिशक्ति विकसित करने हेतु बेजोड़ है |

५] मंत्रजप :मंत्रजप से आयुष्य, आरोग्य बढ़ता है और भाग्य निखरता है |

इन ५ कारणों से आयुष्य नष्ट होता है :

१] अति शरीरिक परिश्रम

२] भय

३] चिंता

४] कामविकार का अधिक भोग     

५] अंग्रेजी दवाइयाँ, कैप्सूल, इंजेक्शन, ऑपरेशन आदि की गुलामी


ऋषिप्रसाद – दिसम्बर २०२१ से

Tuesday, November 30, 2021

बरकत लाने व सुखमय वातावरण बनाने हेतु

 

जिस घर में भगवान का, ब्रह्मवेत्ता संत का चित्र नहीं है वह घर स्मशान है | जिस घर में माँ-बाप, बुजुर्ग व बीमार का खयाल नहीं रखा जाता उस घर से लक्ष्मी रूठ जाती है |बिल्ली, बकरी व झाड़ू कि धूलि घर में आने से बरकत चली जाती है | गाय के खुर कि धूलि से, सुह्र्दयता से , ब्रह्मज्ञानी सत्पुरुष के सत्संग से घर का वातावरण स्वर्गमय, सुखमय, मुक्तिमय हो जाता है |


लोककल्याण सेतु – नवम्बर २०२१ से 

तुलसी से होते हैं ढेरों लाभ

 


सनातन धर्म के ऋषियों ने कितनी सुंदर व्यवस्था की है कि भोजन में तुलसीदल रखों तभी ठाकुरजी को भोग लगता है | तुलसी पुण्यदायी पौधा है | तुलसी पाप-शमन करती है | जैसे हरिनाम कि महिमा है  ऐसे ही हरिप्रिया तुलसी कि महिमा है | तुलसी को सींचता रहें और सोचे कि मुझे नरक मिले तो भी नहीं मिल सकता है |  केवल तुलसी का पौधा घर में लगा दें और सुबह-सुबह तुलसी का दर्शन करें, जल चढाये तो कंगाल-से-कंगाल व्यक्ति भी रोज सवा मासा ( करीब सवा ग्राम) सुवर्णदान का फल पा सकता है | घर में तुलसी के होने से धन, पुत्र, पुण्यदायी वातावरण के साथ हरिभक्ति प्राप्त होती है |

विज्ञान भी गा रहा है तुलसी कि महिमा

तुलसी को स्पर्श करके आती हुई हवा रोगप्रतिकारक शक्ति बढाती है और तमाम दु:खों व हानिकारक जीवाणुओं को दूर रखती हैं | आविष्कार इस बात को स्पष्ट करने में सफल हुआ है कि तुलसी में विद्युत तत्त्व उपजाने और शरीर में विद्युत तत्त्व को सजग रखने का अद्भुत सामर्थ्य है | जैसे तेल का हाथ घुमा के लोग मालिश करते हैं ऐसे ही तुलसी के रस कि थोड़ी मालिस करें तो शरीर में विद्युत-प्रवाह अच्छा चलेगा |

तुलसी माला के लाभ

तुलसी के काष्ठ के दानों की माला गले में पहनकर जो ध्यान, जप, पूजन, तर्पण करता है उसके उन शुभ कर्मों का फल करोड़ गुना हो जाता है | कितनी सारी बीमारियों कि जड़ें तो तुलसी कि कंठी धारण करनेमात्र से दूर हो जाती हैं | परंतु आजकल कई दूसरी लकड़ियों कि माला में तुलसी कि कृत्रिम सुगंध डालकर उसे तुलसी-माला के नाम से बेचा जाता है | तिलसी कि असली लकड़ी से बनी माला ही पहनें |

तुलसी के कुछ प्रयोग

१] ५-७ तुलसी-पत्ते सुबह खाली पेट चबाकर मुँह में थोड़े घुमा के पानी पी लें | दाँतों में कीड़े नहीं पड़ेंगे| बच्चों को दाँतों की तकलीफ जल्दी से नहीं होगी | मुँह कि दुर्गन्ध और कफ के दोषों व धातु के रोग में यह लाभदायी है | बाद में पानी से अच्छे-से कुल्ले कर लें ताकि तुलसी पत्तों के कण दाँतों में बिल्कुल नहीं रहें |

२] भोजन के पहले अथवा बाद में तुलसी पत्ते लेते हो तो स्वास्थ्य के लिए, वायु व कफ शमन के लिए यह औषधि का काम करता है |

३] तुलसी के बीज पीस के रखें और एक चुटकी ( आधा ग्राम) दोपहर को भोजन के बाद पान ( नागरवेल का पत्ता) में डाल के गुरुमंत्र जपकर खाया करें तो बुढापा जल्दी नहीं आयेगा |

सावधानी : सूर्योदय से पहले तुलसी के पत्ते नही तोड़े जाते हैं | दूध के साथ तुलसी सेवन वर्जित है, पानी, दही, भोजन आदि हर चीज के साथ तुलसी ले सकते हैं | रविवार को तुलसी ताप उत्पन्न करती है इसलिए रविवार को तुलसी न तोड़े, न खायें |

असली तुलसी काष्ठ कि माला संत श्री आशारामजी आश्रमों में सत्साहित्य सेवा केन्द्रों से तथा समितियों से प्राप्त हो सकती हैं |

लोककल्याण सेतु – नवम्बर २०२१ से 

Sunday, November 21, 2021

यदि पुण्यात्मा व उत्तम संतान चाहते हैं तो .....

 


महान आत्माएँ धरती पर आना चाहती हैं लेकिन उसके लिए संयमी पति- पत्नी की आवश्यकता होती हैं | अत: उत्तम संतान की इच्छावाले दम्पति गर्भाधान से पहले अधिक- से- अधिक ब्रह्मचर्य का पालन करें व गुरुमंत्र का जप करें | गर्भाधान के पहले और गर्भाधान के समय पति-पत्नी की मानसिक प्रसन्नता बहुत अच्छी होनी चाहिए | इसलिए अनुष्ठान करके उत्तम संतान हेतु सदगुरु या इष्टदेव से प्रार्थना करें, फिर गर्भाधान करें | २२ जून २०२२ तक का समय तो गर्भाधान के लिए अतिशय उत्तम हैं |

गर्भाधन के लिए अनुचित काल

पूर्णिमा, अमावस्या, प्रतिपदा, अष्टमी, एकादशी, चतुर्दशी, सूर्यग्रहण, चन्द्रग्रहण, पर्व या त्यौहार की रात्रि ( जन्माष्टमी, श्रीराम नवमी, होली, दिवाली, शिवरात्रि, नवरात्रि   आदि ), श्राद्ध के दिन, प्रदोषकाल ( १. सूर्यास्त का समय, २. सूर्यास्त से लेकर ढाई घंटे बाद तक का समय , ( क्षयतिथि दिखें आश्रम में सत्साहित्य सेवा केन्द्रों पर व समितियों में उपलब्ध कर्मयोग दैनंदिनी एवं मासिक धर्म के प्रथम ५ दिन , माता-पिता की मृत्युतिथि, स्वयं की जन्मतिथि, संध्या के समय एवं दिन में समागम या गर्भधान करना भयंकर हानिकारक है | दिन के गर्भाधान से उत्पन्न संतान दुराचारी और अधम होती है |

शास्त्रवर्णित मर्यादाओं का उल्लंघन नहीं करना चाहिए, नहीं तो आसुरी, कुसंस्कारी या विकलांग संतान पैदा होती है | संतान नही भी हुई तो भी दम्पति को कोई खतरनाक बीमारी हो जाती है |

गर्भधान के पूर्व विशेष सावधानी

अपने शरीर व घर में धनात्मक ऊर्जा आये इसका तथा पवित्रता का विशेष ध्यान रखना चाहिए | महिलाओं को मासिक धर्म में भोजन नहीं बनाना चाहिए तथा उन दिनों में अपने हाथ भोजन परिवारवालों को देकर उनका ओज, बल और बुद्धि क्षीण करने की गलती कदापि नहीं करनी चाहिए |

गर्भाधान घर के शयनकक्ष में ही हो, होटलों आदि ऐसी-वैसी जगहों पर न हो |

ध्यान दें : उत्तम समय के अलावा के समय में भी यदि गर्भाधान हो गया हो तो गर्भपात न करायें बल्कि गर्भस्थ शिशु में आदरपूर्वक उत्तम संस्कारो का सिंचन करें | गर्भपात महापाप हैं, जिसका प्रायश्चित मुश्किल है |

विशेष : उत्तम संतानप्राप्ति हेतु महिला उत्थान मंडल के दिव्य शिशु संस्कार केन्द्रों का भी लाभ ले सकते हैं |

सम्पर्क :  ९१५७३८९७०६, ९१५७३०६३१३

उत्तम सन्तानप्राप्ति में सहायक विस्तृत जानकारी हेतु पढ़े आश्रम में सत्साहित्य सेवा केन्द्रों पर व समितियों में उपलब्ध पुस्तक दिव्य शिशु संस्कार |

सम्पर्क : (०७९) ९१२१०७३०

ऋषिप्रसाद – नवम्बर २०२१ से