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Thursday, July 22, 2021

नेत्रज्योति की रक्षा हेतु प्रयोग

भोजन करने के बाद आँखों पर पानी छिडके तो ठीक है, नहीं तो अपनी गीली हथेलियाँ आँखों पर रखें तो भी नेत्र के रोग मिटते है | दोनों हथेलियाँ रगड़कर ॐ ॐ ॐ मेरी आरोग्यशक्ति जगे, नेत्रज्योति जगे .... ऐसा करके आँखों पर रखने से भी आँखों की ज्योति बरकरार रहती है और आँखों के रोग मिटते हैं |

घर के झगड़े मिटाने और सुख-शांति पाने के उपाय

 

१)     शनिदेव स्वयं कहते हैं कि ‘जो शनिवार को पीपल को स्पर्श करते है, उसको जल चढ़ाता है, उसके सब कार्य सिद्ध होंगे तथा मुझसे उसको कोई पीड़ा नहीं होगी |’ ग्रहदोष और ग्रहबाधा जिनको भी लगी हो, वे अपने घर में ९ अंगुल चौड़ा और ९ अंगुल लम्बा कुमकुम का स्वस्तिक बना दें तो ग्रहबाधा की जो भी समस्याएँ है, दूर हो जायेगी |

२)     स्नान के बाद पानी में देखते हुए ‘हरि ॐ शांति इस पावन मंत्र की एक माला करके वह पानी घर या जहाँ भी अशांति आदि हो, छिडक दे और थोडा बचाकर पी लें फिर देख लो तुम्हारा जीवन कितना परिवर्तित होता है |

भाग्य के कुअंक मिटाने की युक्ति

 

आसन बिछाकर प्रणव (ॐकार) का ३ मिनट ह्रस्व (जल्दी-जल्दी) व दीर्घ और ५ मिनट प्लुत ( दीर्घ से अधिक लम्बा ) उच्चारण करना चाहिए | कभी कम-ज्यादा हो जाय तो डरना नहीं | ४० दिन का यह नियम ले लो तो बहुत सारी योग्यताएँ जो सुषुप्त है, वे विकसित हो जायेंगी |  मन की चंचलता मिटने लगेगी, बुद्धि के दोष दूर होने लगेंगे | सदा करते रहो तो बहुत अच्छा |

अपने भाग्य की रेखा बदलनी हो, अपनी ७२,००० नाड़ियों की शुद्धि करनी हो और अपने मन और बुद्धि को मधुमय करना हो तो संध्या के समय १०-१५ मिनट विद्युत-कुचालक आसन बिछाकर जप करें | भाग्य के कुअंक मिटा देगा यह प्रयोग |

अनमोल युक्तियाँ – पूज्य बापूजी

 


उत्तम संतान के लिए : घर में देशी गाय की सेवा अच्छा उपाय है |

यम के भय से मुक्ति : शिव पुराण व स्कंद पुराण में कहा गया है कि गौ- सेवा करने और सत्पात्र को गौ- दान करने से यम का भय नहीं रहता |

पाप – ताप से मुक्ति : जब गायें जंगल से चरकर वापस घर को आती है, उस समय को गोधूलि-वेला कहा जाता है | गाय के खुरों से  उठनेवाली धूलराशि समस्त पाप – तापों को दूर करनेवाली है |

ग्रहबाधा – निवारण : गायों को नित्य गोग्रास देने तथा सत्पात्र को गौ-दान करने से ग्रहों के अनिष्ट – निवारण में मदद मिलती है | 


Friday, July 16, 2021

पुण्यदायी तिथियाँ व योग

 


१६ जुलाई : संक्रांति ( पुण्यकाल : सूर्योदय से शाम ४:५५ तक )

२० जुलाई : देवशयनी एकादशी (महान पुण्यमय, स्वर्ग एवं मोक्ष प्रदाता तथा पापनाशक व्रत), चतुर्मास व्रतारम्भ

२३ जुलाई : गुरुपूर्णिमा, ‘ऋषि प्रसाद ‘ जयंती, विद्यालाभ योग

२७ जुलाई : अंगारकी – मंगलवारी चतुर्थी ( सूर्योदय से रात्रि २:२९ तक )

४ अगस्त : कामिका एकादशी ( इसका व्रत व रात्रि -जागरण करनेवाला मनुष्य न तो कभी भयंकर यमराज का दर्शन करता है और न कभी दुर्गति में ही पड़ता है |)

८ अगस्त : रविपुष्यामृत योग ( सूर्योदय से सुबह ९:२० तक )

१५ अगस्त : रविवारी सप्तमी ( सूर्योदय से सुबह ९:५२ तक)

ऋषिप्रसाद – जुलाई २०२१ से

भय लगे तो क्या करें ?

 

भय मन को लगता है , चिंता चित्त को लगती है, बीमारी शरीर को लगती है, दुःख मन को होता है.... हम है अपने-आप, हर परिस्थिति के बाप ! हम प्रभु के, प्रभु हमारे, ॐ .... ॐ ..... ॐ ..... ॐ.... आनंद, ॐ माधुर्य ॐ |’ जब भी भय लगे बस ऐसा ॐ ... ॐ..... ॐ.... हा हा हा ( हास्य-प्रयोग करना ).... फिर ढूँढना – ‘ कहाँ है भय ? कहाँ तू लगा है देखें बेटा ! कहाँ रहता है बबलू ! कहाँ है तू भय ?’ तो भय भाग जायेगा | भय को भगाने की चिंता मत कर, प्रभु के रस में रसवान हो जा |

 

ऋषिप्रसाद – जुलाई २०२१ से

क्रोध से हानियाँ और उससे बचने के उपाय

 

पद्म पुराण में आता है : ‘जो पुरुष उत्पन्न हुए क्रोध को अपने मन से रोक लेता है, वह उस क्षमा के द्वारा सबको जीत लेता है | जो क्रोध और भय को जीतकर शांत रहता है, पृथ्वी पर उसके समान वीर और कौन है ! क्षमा करनेवाले पर एक ही दोष लागू होता है, दूसरा नहीं, वह यह कि क्षमाशील पुरुष को लोग शक्तिहीन मान बैठते हैं | किंतु इसे दोष नहीं मानना चाहिए क्योंकि बुद्धिमानो का बल क्षमा ही है |  क्रोधी मनुष्य जो जप, होम और पूजन करता है वह सब फूटे हुए घड़े से जल की भाँति नष्ट हो जाता है |’

क्रोध से बचने के उपाय :

१)     एकांत में आर्तभाव से व सच्चे ह्रदय से भगवान से प्रार्थना कीजिये कि ‘हे प्रभो ! मुझे क्रोध से बचाइये |’

२)     जिस पर क्रोध आ जाय उससे बड़ी नम्रता से, सच्चाई के साथ क्षमा माँग लीजिये |

३)     सात्त्विक भोजन करे | लहसुन, लाल मिर्च एवं तली हुई चीजों से दूर रहें | भोजन चबा-चबाकर कम-से-कम २५ मिनट तक करें | क्रोध की अवस्था में या क्रोध के तुरंत बाद भोजन न करें | भगवत्पाद साँईं श्री लीलाशाहजी ,महाराज भोजन से पूर्व हास्य-प्रयोग करने को कहते थे | अपने आश्रमों में भी भोजन से पूर्व हास्य-प्रयोग किया जाता है, साथ ही श्री आशारामायणजी की कुछ पंक्तियों का पाठ और जयघोष भी किया जाता है तो कभी ‘जोगी रे .....’ भजन की कुछ पंक्तियाँ गायी जाती हैं | इस प्रकार रसमय होकर फिर भोजन किया जाता है | इस प्रयोग को करने से क्रोध से सुरक्षा तो सहज में ही हो जाती है और साथ-ही-साथ चित्त भगवद आनंद, माधुर्य से भी भर जाता है |

ऋषिप्रसाद – जुलाई २०२१ से

उन्नतिकारक कुंजियाँ

 

१)     सात्त्विक भोजन में तुलसी का एकाध दल रख के भगवान को भोग लगा के फिर भोजन करो और चबा-चबा करो | इससे तुम्हारा मन पवित्र होगा, शरीर निरोग रहेगा, बुद्धि का विकास होगा उअर बुद्धि में ज्ञानयोग पाने की इच्छा होगी |

२)     व्यर्थ का बोलना, व्यर्थ का खाना, व्यर्थ के विकारों को पोषण देना – यह तुमको जिस दिन अच्छा न लगे उस दिन समझ लेना कि भगवान की, सदगुरु की और हमारे पुण्यों की – तीनों की कृपा एक साथ उतर रही है |

ऋषिप्रसाद – जुलाई २०२१ से

कालसर्पयोग दूर करने का उपाय

कालसर्पयोग बड़ा दुःख देता है लेकिन सद गुरु – पूजन से, गुरु-ध्यान से, गुरुमंत्र के जप और सदगुरु के आदर से कालसर्पयोग चला जाता है | नहीं तो कितना भी पूजा-पाठ कराओ, हजारों रूपये खर्च करो और इससे कालसर्पयोग थोडा-बहुत कम हुआ भी हो तो भी थोड़ी तो समस्या बनी रहती है किंतु गुरुपूनम के दिन अथवा किसी भी दिन सदगुरु  का मानसिक पूजन करके उनकी प्रदक्षिणा करे तो कालसर्पयोग का प्रभाव खत्म हो जाता है |


ऋषिप्रसाद – जुलाई २०२१ से

रक्ताल्पता में उत्तम लाभ देनेवाले उत्पाद

 


१] रजत मालती : १ से २ गोली सुबह खाली पेट दूध से लें |



२] आँवला-चुकंदर शरबत : १५ से २० मि.ली. शरबत २०० मि.ली. गुनगुने पानी में मिलाकर खाली पेट लें |

३] द्राक्षावलेह : १ – १ चम्मच दिन में २ बार भोजन के साथ लें |

४] आँवला रस : १० से २० मि.ली. सुबह-शाम खाली पेट लें |

५] घृतकुमारी रस : ४ चम्मच सुबह खाली पेट लें | शाम को भोजन से १ – २ घंटे पहले भी ले सकते हैं |

ऋषिप्रसाद – जुलाई २०२१ से

अभागे ‘आलू’ से सावधान !

 

“आलू रद्दी - से - रद्दी  कंद है | इसका सेवन स्वास्थ्य के लिए हितकारी नहीं है | तले हुए आलू का सेवन तो बिल्कुल ही न करें | आलू का तेल व नमक के साथ संयोग विशेष हानिकारक है | जब अकाल पड़े, आपातकाल हो और खाने का कुछ न मिले तो आलू को आग में भूनकर केवल प्राण बचाने के लिए खायें |” – पूज्य  बापूजी

आचार्य चरक ने सभी कंदों में आलू को सबसे अधिक अहितकर बताया है | आलू को तेल में तलने से वह विषतुल्य काम करता है | आधुनिक अनुसंधानो के अनुसार उच्च तापमान पर या अधिक समय तक आलू को तेल में तलने से उसमें स्वाभाविक ही एक्रिलामाइड का स्तर बढ़ता है, जो कैंसर-उत्पादक तत्त्व सिद्ध हुआ है | कुछ शोधकर्ताओं ने तले हुए आलू के अधिक सेवन से मृत्यु-दर में वृद्धि होती पायी | इसका सेवन मोटापा व मधुमेह का भी कारण बन सकता है |

आलू का भूलकर भी सेवन न करें | पहले के खाये हुए आलू का शरीर पर कुप्रभाव पड़ा हो तो उसे निकालने के लिए रात को ३-४ ग्राम त्रिफला चूर्ण या ३-४ त्रिफला टेबलेट पानी से लेना हितकारी रहेगा |

ऋषिप्रसाद – जुलाई २०२१ से

अनेक बीमारियों में अत्यंत लाभदायी त्रिदोषशामक त्रिफला रसायन

 

यह त्रिदोषशामक तथा स्मृति, बुद्धि, बल, वीर्य व नेत्रज्योति वर्धक है एवं अनेक बीमारियों में अत्यंत लाभदायी है |

इसके सेवन से शरीर में से विषाक्त द्रव्य निकल जाते हैं और महामारी से सुरक्षित होने में मदद मिलती है | तीव्र दवाइयों के साइड इफेक्ट्स भी इस रसायन के सेवन क्षीण होता जाते हैं |

सेवन-विधि : ११ ग्राम त्रिफला रसायन सुबह खाली पेट गुनगुने पानी से ४० दिन तक लें | इसके सेवन के बाद २ घंटे तक कुछ न लें |

त्रिफला रसायन बनाने की विधि : १७५ ग्राम त्रिफला चूर्ण, १७५ ग्राम देशी गाय का पिघला हुआ घी व ९० ग्राम शुद्ध शहद लेकर अच्छी तरह मिला लें और काँच या संगमरमर के पात्र में भर लें |

(उपरोक्त मात्राएँ ४० दिन के प्रयोग के लिए दिन में एक समय सेवन अनुसार दी हैं | जिन्हें ‘त्रिफला रसायन कल्प करना हो वे सुबह-शाम ११ – ११ ग्राम रसायन का सेवन करें तथा त्रिफला रसायन बनाने हेतु उपरोक्त सामग्री दुगनी मात्रा में लें | पथ्य-पालन आदि विस्तृत जानकारी हेतु पढ़े नवम्बर २०२० स्वास्थ्य टिप्स )

ऋषिप्रसाद – जुलाई २०२१ से