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Friday, January 7, 2022

कलह, धन-हानि व रोग-बाधा से परेशान हों तो ....

 

घर में कलहपूर्ण वातावरण, धन-हानि एवं रोग-बाधा से परेशानी होती हो तो आप अपने घर में मोरपंख कि झाड़ू या मोरपंख पूजा-स्थल में रखें | 

नित्य नियम के बाद मन-ही-मन भगवन्नाम या गुरुमंत्र का जप करते हुए इस पंख या झाड़ू को प्रत्येक कमरे में एवं रोग-पीड़ित के चारों तरफ गोल-गोल घुमाये |

कुछ देर ‘ॐकार ‘ का कीर्तन करें-करायें | ऐसा करने से समस्त प्रकार की नकारात्मक ऊर्जा समाप्त होती है तथा ऊपरी एवं बुरी शक्तियों का प्रभाव भी दूर हो जाता है |

ऋषिप्रसाद – जनवरी २०२२ से

Tuesday, November 30, 2021

बरकत लाने व सुखमय वातावरण बनाने हेतु

 

जिस घर में भगवान का, ब्रह्मवेत्ता संत का चित्र नहीं है वह घर स्मशान है | जिस घर में माँ-बाप, बुजुर्ग व बीमार का खयाल नहीं रखा जाता उस घर से लक्ष्मी रूठ जाती है |बिल्ली, बकरी व झाड़ू कि धूलि घर में आने से बरकत चली जाती है | गाय के खुर कि धूलि से, सुह्र्दयता से , ब्रह्मज्ञानी सत्पुरुष के सत्संग से घर का वातावरण स्वर्गमय, सुखमय, मुक्तिमय हो जाता है |


लोककल्याण सेतु – नवम्बर २०२१ से 

Sunday, September 5, 2021

अन्नपूर्णा प्रयोग

 

प्रति पूर्णिमा को घर के अन्न – भंडार के स्थान पर कपास तेल का दीपक जलायें | इसके प्रभाव से घर की रसोई में बहुत बरकत होती है | यह अन्नपूर्णा प्रयोग हैं |


ऋषिप्रसाद – सितम्बर २०२१ से

Saturday, December 5, 2020

दरिद्रा देवी कहाँ निवास करती है ?

 


समुद्र-मंथन करने पर लक्ष्मीजी की बड़ी बहन दरिद्रा देवी प्रकट हुई | वे लाल वस्त्र पहने हुए थी | उन्होंने देवताओं से पूछा : “मेरे लिए क्या आज्ञा हैं ?”

तब देवताओं ने कहा : “जिनके घर में प्रतिदिन कलह होता हो उन्हीं के यहाँ हम तुम्हें रहने के लिए स्थान देते हैं | तुम अमंगल को साथ लेकर उन्हीं घरों में जा बसों | जहाँ कठोर भाषण किया जाता हो, जहाँ के रहनेवाले सदा झूठ बोलते हों तथा जो मलिन अंत:करणवाले पापी संध्या के समय सोते हों, उन्हींके घर में दुःख और दरिद्रता प्रदान करती हुई तुम नित्य निवास करो | महादेवी ! जो खोटी बुद्धिवाला मनुष्य पैर धोये बिना ही आचमन करता है, उस पापपरायण मानव की ही तुम सेवा करो ( अर्थात उसे दुःख-दरिद्रता प्रदान करो )|” ( पुद्मपुराण, उत्तर खंड, अध्याय २३२)

(हमारा आचार -व्यवहार व रहन-सहन कैसा हो यह जानने हेतु पढ़ें आश्रम से प्रकाशित सत्साहित्य ‘मधुर व्यवहार व ‘क्या करें , क्या न करे ?”)

ऋषिप्रसाद – दिसम्बर २०२० से

Tuesday, November 10, 2020

आर्थिक लाभ,बुद्धिलाभ और पुण्यलाभ एक साथ

 

(सोमवती अमावस्या : १४ दिसम्बर )

दरिद्रता मिटाने हेतु

जिनको रोजी – रोटी में बरकत न पडती हो वे सोमवती अमावस्या के दिन मौन रहकर प्रात: स्नान करें तो १००० गोदान का फल मिलेगा  और पीपल देवता की १०८ परिक्रमा करें तथा प्रार्थना करें : ‘हे वृक्षराज ! आपकी जड़ में ब्रह्मा,  मध्य में विष्णु और शिखर में शिव तत्व हैं, आपको मेरा नमस्कार है | आप मेरे द्वारा की हुई पूजा को स्वीकार करें और मेरे पापों का हरण करें |’  इससे आरोग्य भी प्राप्त होगा |

ऐसे ही तुलसी की १०८ परिक्रमा करें और प्रार्थना करें : ‘हे तुलसी माँ ! आप मेरे घर की दरिद्रता – दीनता नष्ट करें |’

दरिद्रता मिटाने के लिए तथा जो नौकरीवाले लोग हैं याजो काम-धंदे में विफल हुए हैं अथवा जिनको किसीसे कुछ लेना बनता है और रुका हुआ है उनके लिए यह बहुत जरूरी है |

पायें जप का दस लाख गुना लाभ

सोमवती अमावस्या को किया हुआ जप सूर्यग्रहण के समान १० लाख गुना फलदायी होता है | चौदस की रात्रि को जप करते-करते सोना और सुबह उठकर थोडा शांतमय जप में बैठना | जप की संख्या बढ़ाना नहीं, जप के अर्थ में शांत होते जाना |

करोड़ काम छोडकर सोमवती अमावस्या को हरि का भजन और तुलसी की परिक्रमा तुम्हे करनी ही चाहिए | कोई महिला मासिक धर्म में हो तो उसको छुट है , बाकी के लोग यह जरुर करना | इससे आपको बहुत लाभ होगा | आर्थिक  लाभ होगा, बुद्धिलाभ होगा और पुण्यलाभ भी होगा |


ऋषिप्रसाद – नवम्बर २०२० से


Saturday, October 17, 2020

लक्ष्मीप्राप्ति हेतु साधना

दीपावली के दिन से तीन दिन तक अर्थात भाईदूज तक एक स्वच्छ कमरे में दीपक जलाकर एवं सम्भव हो तो गौ-गोबर और अन्य औषधियों से बनी धूपबत्ती जला के, पीले वस्त्र धारण करके पश्चिम की तरफ मुँह करके बैठे | ललाट पर तिलक ( हो सके तो केसर का ) कर स्फटिक मोतियों से बनी माला द्वारा नित्य प्रात:काल इस मन्त्र की दो मालाएँ जपें :

ॐ नमो भाग्यलक्ष्म्यै च विद्महे |

अष्टलक्ष्म्यै च धीमहि |

तन्नो लक्ष्मी: प्रचोदयात |

तेल का दीपक व धूपबत्ती लक्ष्मीजी की बायीं ओर, घी का दीपक दायी ओर एवं नैवेद्य आगे रखा जाता है | लक्ष्मीजी को तुलसी तथा मदार (आक) या धतूरे का फूल नहीं चढाना चाहिए, नहीं तो हानि होती है | घर में लक्ष्मीजी के वास, दरिद्रता के विनाश और आजीविका के उचित निर्वाह हेतु यह साधना करनेवाले पर लक्ष्मीजी प्रसन्न होती है |

                                                                   

                                                                                                             ऋषिप्रसाद – अक्टूबर २०२० से 

Thursday, September 10, 2020

धन, आरोग्य एवं शाति की प्राप्ति के लिए

 

जो व्यक्ति चतुर्मास में अथवा अधिक ( पुरुषोत्तम) मास में भगवान् विष्णु पर कनेर के पुष्प अर्पित करता है, उस पर लक्ष्मीजी की सदैव कृपा बनी रहती है | उसे आरोग्य एवं शाति की प्राप्ति होती है तथा उसके संकट दूर होते है |


ऋषिप्रसाद – सितम्बर २०२० से

Tuesday, August 11, 2020

कोई आपको शत्रु मान के परेशान करता हो तो ...

 

कोई आपको शत्रु मान के परेशान करता हो तो प्रतिदिन प्रात:काल पीपल के नीचे वृक्ष के दक्षिण की ओर अरंडी के तेल का दीपक लगायें तथा थोड़ी देर गुरुमंत्र या भगवन्नाम जपें और उस व्यक्ति को भगवान सद्बुद्धि दें तथा मेरा, उसका-सबका मंगल हो ऐसी प्रार्थना करें | कुछ दिनों तक ऐसा करने से शत्रु शनै: शनै : दब जाते हैं व शत्रु पीड़ा धीरे-धीरे दूर हो जाती है |


ऋषिप्रसाद – अगस्त २०२० से

Sunday, June 23, 2019

शांति के साथ आर्थिक सम्पन्नता लाने हेतु


सोते समय किसी सफेद कागज में थोडा-सा कपूर रखें और प्रात: उसे घर से बाहर जला दें | इससे घर में शांति के साथ आर्थिक सम्पन्नता आती है | 

(कपूर संत श्री आशारामजी आश्रम की समितियों के सेवाकेन्द्रों पर उपलब्ध है |)

ऋषिप्रसाद – जून २०१९ से

लक्ष्मी के नाराज होने के कारण


१] कमल-पुष्प, बिल्वपत्र को लाँघने अथवा पैरों से कुचलने पर लक्ष्मी रुष्ट होकर चली जाती हैं |

२] जो निर्वस्त्र होकर स्नान करता है, नदियों, तालाबों के जल में मल-मूत्र त्यागता है उसको लक्ष्मी अपने शत्रु कर्ज के हवाले कर देती हैं |

३] जो भूमि या भवन की दीवारों पर अनावश्यक लिखता है, कुत्सित अन्न खाता है उस पर भी लक्ष्मी कृपा नहीं करती हैं |

४] जो पैर से पैर रगडकर धोता है, अतिथियों का सम्मान नहीं करता, याचकों को दुत्कारता है, पशु-पक्षियों को चारा, दाना आदि नहीं डालता है, गाय पर प्रहार करता है ऐसे व्यक्ति को लक्ष्मी तुरंत छोड़ देती हैं |

५] जो संध्या के समय घर-प्रतिष्ठान में झाड़ू लगाता है, जो प्रात:  एवं संध्याकाल में ईश्वर की आराधना नहीं करता, तुलसी के पौधे की उपेक्षा, अनादर करता है उसको लक्ष्मी उसके दुर्भाग्य के हाथों में सौंप देती हैं |

ऋषिप्रसाद – जून २०१९ से

Tuesday, December 11, 2018

आयुष्य, आरोग्य, ऐश्वर्य, सम्पत्ति और कीर्ति बढने के लिए




ॐ ह्रीं घृणि: सूर्य आदित्य: क्लीं ॐ |
सुख-सौभाग्य की वृद्धि करने एवं दुःख-दारिद्र्य को दूर करने के लिए तथा रोग व दोष के शमन के लिए इस प्रभावकारी मंत्र की साधना रविवार के दिन से करने चाहिए | रविवार को खुले आकाश के नीचे पूर्व की ओर मुख करके शुद्ध ऊन के आसन पर अथवा कुशासन पर बैठकर काले तिल, जौ, गूगल, कपूर और घी मिश्रित शाकल (हवन-सामग्री) तैयार करके आम की लकड़ियों से अग्नि को प्रदीप्त क्र उपरोक्त मंत्र से १०८ आहुतियाँ दें | तत्पश्च्यात सिद्धासन लगाकर इसी मंत्र का १०८ बार जप करें | जप करते समय दोनों भौहों के मध्य भाग में भगवान सूर्य का ध्यान करते रहें | इस तरह ११ दिन तक करने से यह मंत्र सिद्ध हो जाता है | इस साधना में रविवार का व्रत (बिना नमक का, तेलहीन भोजन सूर्यास्त से पहले दिन में एक ही बार करना अनिवार्य है |)

इसके बाद प्रतिदिन स्नान के बाद ताम्र-पात्र में जल भरकर उपरोक्त मंत्र से सूर्य को अर्घ्य दें | जमीन पर जल न गिरे इसलिए नीचे दूसरा ताम्र-पात्र रखें | तत्पश्च्यात इस मंत्र का १०८ बार जप करें | मात्र इतना करने से आयुष्य, आरोग्य, ऐश्वर्य, सम्पत्ति और कीर्ति उत्तरोत्तर बढती हैं |

ऋषिप्रसाद – दिसम्बर २०१८ से

Monday, September 10, 2018

वास्तुशास्त्र के अनुसार ईशान-स्थल की महत्ता


कमरे में पूर्व व उत्तर दिशा के बीचवाले कोने से कमरे की पूर्वी दीवाल की लम्बाई का एक तिहाई भाग व उत्तरी दीवाल की लम्बाई का एक तिहाई भाग लेकर जो आयताकार स्थल बनता है, वह ‘ईशान-स्थल’ कहलाता है | १२ X १८ के कमरे का ईशान-स्थल ४ X ६ का होगा | खुले भूमिखंड के विषय में भी ऐसे ही समझना चाहिए |

सुख-शांतिप्रदायक ईशान-स्थल
सुख-शांति और कल्याण चाहनेवाले बुद्धिमानों को अपने घर, दुकान या कार्यालय में ईशान-स्थल पर अपने इष्टदेव, सदगुरु का श्रीचित्र लगा के वहाँ धूप-दीप, मंत्रोच्चार तथा साधना-ध्यान पूर्व अथवा उत्तर की ओर मुख करके करना चाहिए | यह विशेष सुख-शांतिदायक है |

सुख-समृद्धि में वृद्धि हेतु
भूमिखंड के ईशान कोण तथा पूर्व एवं उत्तर दिशा में खाली भाग अधिक होना चाहिए और इन भागों में अपेक्षाकृत वजन में हलके व कम ऊँचाईवाले पेड़-पौधे लगाने चाहिए | भूमिखंड के ईशान-स्थल में तुलसी, बिल्व व आँवला लगाना सुख-समृद्धिकारक है |

ज्ञानार्जन में सहायता व सत्प्रेरणा हेतु
विद्यार्थियों के लिए भी ईशान कोण बड़े महत्त्व का है | पूर्व एवं उत्तर दिशाएँ ज्ञानवर्धक दिशाएँ तथा ईशान-स्थल ज्ञानवर्धक स्थल है | जो विद्यार्थी ईशान-स्थल पर बैठ के पूर्व या उत्तर दिशा की ओर मुख करके पढ़ता है, उसे ज्ञानार्जन में विशेष सहायता मिलती है | पूर्व की ओर मुख करने से विशेष लाभ होता है | अध्ययन-कक्ष में सदगुरु या ब्रह्मज्ञानी महापुरुषों के श्रीचित्र लगाने चाहिए, इससे सत्प्रेरणा मिलती है |

-          ऋषिप्रसाद – सितम्बर २०१८ से

Thursday, July 12, 2018

व्यापार में वृद्धि हेतु ....


विवार को गंगाजल लेकर उसमें निहारते हुए २१ बार गुरुमंत्र जपें, गुरुमंत्र नहीं लिया हो तो गायत्री मंत्र जपें | फिर इस जल को व्यापार-स्थल पर जमीन एवं सभी दीवारों पर छिडक दें | ऐसा लगातार ७ रविवार करें, व्यापार में वृद्धि होगी |

ऋषिप्रसाद – जुलाई २०१८ से

Tuesday, June 12, 2018

आर्थिक कष्ट निवारण हेतु .....


रविवार, सप्तमी, नवमी, अमावस्या, सूर्यग्रहण, चन्द्रग्रहण तथा संक्रांति – इन तिथियों को छोडकर बाकी के दिन आँवले का रस शरीर पर लगाकर स्नान करने से आर्थिक कष्ट दूर होता है | (स्कंद पुराण, वैष्णव खंड)

ऋषिप्रसाद – जून २०१८ से

Sunday, May 6, 2018

जानिये दीपक जलाने की सही विधि, पाइये शुभ लाभ

दीपक की बत्ती या लौ पूर्व दिशा की ओर रखने से आयुवृद्धि, पश्चिम की ओर दुःखवृद्धि, दक्षिण की ओर हानि और उत्तर की ओर रखने से धन-लाभ होता है | लौ दीपक के मध्य में रखना शुभ फलदायी है | 

इसी प्रकार दीपक के चारों ओर लौ प्रज्वलित करना भी शुभ है किंतु यदि लौ की संख्या सम ( २,४,६ ....) हो तो ऊर्जा-वहन की क्रिया रुक जाती है | लौ की संख्या विषम (१,३,५ ....) रखना लाभदायक है |


ऋषिप्रसाद – मई २०१८ से 

किन बातों से होती है लक्ष्मी की हानि

कुचैलिनं दन्तमलोपधारिणं बह्राशिनं निष्ठुरवाक्यभाषिणीम् |
सूर्योदये ह्यस्तमयेऽपि शायिनं विमुत्र्चति श्रीरपि चक्रपाणिम् ||

‘जो मलिन वस्त्र धारण करता है, दाँतों को स्वच्छ नहीं रखता, अधिक भोजन करनेवाला है, कठोर वचन बोलता है, सूर्योदय तथा सूर्यास्त के समय भी सोता है, वह यदि साक्षात् चक्रपाणि विष्णु हों तो उन्हें भी लक्ष्मी छोड़ देती हैं |’ (गरुड़ पुराण : ११४.३५)


ऋषिप्रसाद – मई २०१८ से 

आर्थिक कष्ट निवारण हेतु

एक लोटे में जल, दूध, गुड़ और काले तिल मिलाकर हर शनिवार को पीपल के मूल में चढ़ाने तथा ॐ नमो भगवते वासुदेवाय |’ मंत्र जपते हुए पीपल की ७ बार परिक्रमा करने से आर्थिक कष्ट दूर होता है |



ऋषिप्रसाद – मई २०१८ से 

Tuesday, April 3, 2018

आर्थिक परेशानी दूर करने हेतु

भोजन से पूर्व गीता के १५वें अध्याय का पाठ करें तथा दक्षिण की तरफ सिर करके सोयें, इससे आर्थिक परेशानी दूर होगी |


ऋषिप्रसाद – अप्रैल २०१८ से 

Monday, March 19, 2018

बरकत लाने की सरल कुंजियाँ

बाजार भाव अचानक बढ़ने-घटने से, मंदी की वजह से या अन्य कारणों से कईयों का धंधा बढ़ नहीं पाता | ऐसे में आपके काम-धंधे में भी बरकत का खयाल रखते हुए कुछ सरल उपाय प्रस्तुत कर रही है |

१] ईशान कोण में तुलसी का पौधा लगाने व पूजा- स्थान पर गंगाजल रखने से बरकत होती है |

२] दुकान में बिक्री कम होती हो तो कनेर का फूल घिस के उसका ललाट पर तिलक करके दुकान पर जायें तो ग्राहकी बढ़ेगी |

३] रोज भोजन से पूर्व गोग्रास निकालकर गाय को खिलाने से सुख-समृद्धि व मान-सम्मान की वृद्धि होती है |

४] ईमानदारी से व्यवहार करें | ईमानदारी से उपार्जित किया हुआ धन स्थायी रहता है |



ऋषिप्रसाद – मार्च २०१८ से 

Saturday, November 5, 2016

बोधायन ऋषि प्रणित – दरिद्रतानाशक प्रयोग

२८ दिन ( ४ सप्ताह ) तक सफेद बछड़ेवाली सफेद गाय के दूध की खीर बनायें | 

खीर बनाते समय दूध को ज्यादा उबालना नहीं चाहिए | चावल पानी में पकायें, फिर दूध डालकर एक – दो उबाल दे दें | उस खीर का सूर्यनारायण को भोग लगायें | 

सूर्यनारायण का स्मरण करें और खीर को देखते – देखते  एक हजार बार -

ॐकार मंत्र:, गायत्री छंद: , भगवान नारायण ऋषि:, अन्तर्यामी परमात्मा देवता, अन्तर्यामी प्रीत्यर्थे, परमात्मप्राप्ति अर्थे जपे विनियोग: | 

इससे ब्रह्मचर्य की रक्षा होगी, तेजस्विता बढ़ेगी तथा सात जन्मों की दरिद्रता दूर होकर सुख – सम्पदा की प्राप्ति होगी |


स्त्रोत – ऋषिप्रसाद – फरवरी २०१६ से