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Tuesday, August 11, 2009

सभी प्रकार की बीमारियों में

  • असाध्य रोगों में सुश्रुत भगवान् (आयुर्वेद ग्रन्थ रचयिता) ने प्राणायाम करके इस मंत्र का जप करने का बताया है :- "अच्युताय गोविन्दाय, अनंताय नाम भेषजाम नश्यन्ति सर्व रोगाणी, सत्यं सत्यं वदाम्यहम l"
  • सुबह सूर्य नारायण के सामने सिर को अच्छी तरह ढककर 7-8 मिनट पेट की तरफ और 8-10 मिनट धूप पीछे की तरफ लगे ऐसे बैठे, उसी में लम्बे श्वास लें और वज्रासन में बैठकर श्वास अंदर-बाहर (पेट अंदर ज्यादा और बाहर कम) करें l
  • सुश्रुत भगवान ने, जिन्होंने आयुर्वेद का ग्रन्थ बनाया उन्होंने लिखा हमारी औषधि, शल्यक्रिया सब जब व्यर्थ हुए तो एक महा-औषधि है-भगवन्नाम का आश्रय, उस से रोग मिटते हैं | वह मंत्र और जपने की विधि इस प्रकार है - श्वास अन्दर लें और मन में बोले: "नासे रोग हरे सब पीरा, जपत निरंतर हनुमंत बीरा" और श्वास छोड़ दें | अब श्वास बाहर रोके और जपे "नासे रोग हरे सब पीरा, जपत निरंतर हनुमंत बीरा "| श्वास अन्दर रोककर एक-सवा मिनट तक जप करें और श्वास छोड़ दें | फिर श्वास बाहर रोक कर ५० सेकंद तक जप करें | ऐसा २-३ बार करें | कितनी भी बीमारी हो, खीचकर जठर में आ जायेगी | डॉक्टर बोलते हैं ठीक नहीं होगा वह भी ठीक होने लगेगा |

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Delhi Guru Punam 07-06-09

कमज़ोर बच्चों के लिए

कमज़ोर बच्चों को गाय के थन से सीधे ही धार बच्चे के मुंह में डालें | प्रतिदिन दो - चार धार बच्चे के मुंह में डालने से बच्चे का स्वास्थ्य धीरे-धीरे ठीक होने लगेगा |

Rishi Prasad - May 1998

Tuesday, July 28, 2009

शराब छुड़ाने का उपाय

जब शराब पीने की इच्छा हो तब किशमिश का १-१ दाना मुंह में डालकर चूसें | किशमिश का शरबत पीने से भी दिमाग को ताकत मिलेगी और धीरे-धीरे शराब छोड़ने की क्षमता आ जायेगी l साथ ही इस मंत्र का जप करें : - " ॐ ह्रीं यं यश्वराये नमः " अथवा जब शराबी निद्रा में हो तो कुटुम्बी उसकी चोटी वाले भाग में देखते हुए मन ही मन इसका जप करें l

Rishi Prasad - Nov. 2005

वायु सम्बन्धी तकलीफ

वायु सम्बन्धी तकलीफ :-
गर्मी के दिनों में शरीर वायु संग्रह करता है और बारिश के दिनों में वायु प्रकोप होता है | वायु सम्बन्धी रोगों में :-
• १०० ग्रा.म. पुराना गुड व ५० ग्रा.म. हरड मिलाकर १-१ ग्रा.म. की गोलियां बना लें और १५ दिन तक सुबह-शाम चूसें और थोडा गुनगुना पानी पी लें l इससे गैस, अजीर्ण, कब्ज़ व बदहजमी में आराम होता है l
• १ लीटर पानी उबालें और जब ७५० मि.ली. हो जाए तो उतार लें और उसे पियें l इससे वायु सम्बन्धी बीमारियाँ दूर होती हैं l
7th June'09, Delhi

Diabetes( मधुमेह) नियंत्रित करने के लिए

Diabetes नियंत्रित करने के लिए :-
सुबह १/२ किलो कच्चा करेला टुकड़े - टुकड़े करके तसले में डाल दें और अपने पैरों से १/२ से ३/४ घंटे तक तक कुचलें जब तक जीभ में कड़वाहट का अहसास ना हो l ७-१० दिन तक ये प्रयोग करें l इससे Diabetes नियंत्रित होती है l
हो सके तो इन दिनों में मेथी की सब्जी खाए या मेथी के दाने रात को भीगा दे और सुबह  खाए | इससे लाभ होगा |

To regulate diabetes

Take about half a kilo of bitter gourd chopped in a large flat plate. Squash them with your feet for 30 to 45 minutes until you start experiencing bitterness in your mouth. Perform this daily for 7-10 days. This is very effective in regulating diabetes.


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- Pujya Bapu ji 07th Jun'09, Delhi

बुद्धि व स्मृतिशक्ति बढ़ाने हेतु

बुद्धि व स्मृतिशक्ति बढ़ाने के लिए भोजन के बाद थोड़ा माखन व मिश्री खाएं | बाजारू माखन नहीं उसमे नमक रहता है, गाय के दूध से बना माखन मिश्री के साथ एक चम्मच लें |

Gurupunam Amdavad, July 2009

Thursday, July 23, 2009

स्मृतिशक्ति बढ़ाने हेतु प्रयोग

५ ममरी बादाम रात को भिगोकर सुबह छिलके उतारके पीस लें | २५० मि.ली. दूध में समभाग पानी, ११ काली मिर्च, पिसे हुए बादाम व मिश्री मिला लें | फिर मिलाया हुआ पानी जल जाने तक उबालें l गुनगुना होने पर 'ॐ श्री सरस्वत्यै नमः' मंत्र जपते हुए चुसकी लेते हुए पिये l इससे यादशक्ति व शारीरिक बल मिलता है l
Lok Kalyan Setu 16.05.09 to 15.06.09

सिरदर्द व गर्मी शमन हेतु

सिरदर्द होता हो या शरीर में गर्मी जैसा लगता हो, तो पैरों तले गाय का घी रगड़ना चाहिए |
9th July '09, Amdavad

Tuesday, July 21, 2009

ग्रहण विधि निषेध

  1. सूर्यग्रहण ( 20th May' 2012)मे ग्रहण से चार प्रहर पूर्व और चंद्र ग्रहण मे तीन प्रहर पूर्व भोजन नहीं करना चाहिये । बूढे बालक और रोगी एक प्रहर पूर्व तक खा सकते हैं ग्रहण पूरा होने पर सूर्य या चंद्र, जिसका ग्रहण हो, उसका शुध्द बिम्ब देख कर भोजन करना चाहिये । (१ प्रहर = ३ घंटे)

  1. ग्रहण के दिन पत्ते, तिनके, लकड़ी और फूल नहीं तोडना चाहिए । बाल तथा वस्त्र नहीं निचोड़ने चाहिये व दंत धावन नहीं करना चाहिये ग्रहण के समय ताला खोलना, सोना, मल मूत्र का त्याग करना, मैथुन करना और भोजन करना - ये सब कार्य वर्जित हैं ।

  1. ग्रहण के समय मन से सत्पात्र को उद्दयेश्य करके जल मे जल डाल देना चाहिए । ऐसा करने से देनेवाले को उसका फल प्राप्त होता है और लेनेवाले को उसका दोष भी नहीं लगता।

  1. कोइ भी शुभ कार्य नहीं करना चाहिये और नया कार्य शुरु नहीं करना चाहिये ।

  1. ग्रहण वेध के पहले जिन पदार्थो मे तिल या कुशा डाली होती है, वे पदार्थ दुषित नहीं होते । जबकि पके हुए अन्न का त्याग करके गाय, कुत्ते को डालकर नया भोजन बनाना चाहिये ।

  1. ग्रहण वेध के प्रारंभ मे तिल या कुशा मिश्रित जल का उपयोग भी अत्यावश्यक परिस्थिति मे ही करना चाहिये और ग्रहण शुरु होने से अंत तक अन्न या जल नहीं लेना चाहिये ।

  1. ग्रहण के समय गायों को घास, पक्षियों को अन्न, जरुरतमंदों को वस्त्र दान से अनेक गुना पुण्य प्राप्त होता है ।

  1. तीन दिन या एक दिन उपवास करके स्नान दानादि का ग्रहण में महाफल है, किंतु संतानयुक्त ग्रहस्थ को ग्रहण और संक्रान्ति के दिन उपवास नहीं करना चाहिये।

  1. 'स्कंद पुराण' के अनुसार ग्रहण के अवसर पर दूसरे का अन्न खाने से बारह वर्षो का एकत्र किया हुआ सब पुण्य नष्ट हो जाता है ।

  1. 'देवी भागवत' में आता है कि भूकंप एवं ग्रहण के अवसर पृथ्वी को खोदना नहीं चाहिये


गठिया और जोडों का दर्द

प्याज के रस को सरसों के तेल में मिलाकर मालिश करने से गठिया और जोडों का दर्द दूर होता है|

हे मेरे प्रभु
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कोई मुसीबत आये तो

अगर कोई मुसीबत आये तो जीभ तालू में लगाकर सामने वाले कि आँखों में देखो और मन में गुरुमंत्र जपो, कम से कम १ मिनट तक, फिर कोई आपका कुछ नहीं बिगाड़ सकता

9th July '09, Amdavad

Tuesday, April 28, 2009

कब क्या न खाएं?

  • भादों और सावन में दही और मठा नहीं खाना चाहिए।
  • कार्तिक मास में करेला और बैगन नहीं खाना चाहिए
  • श्रावण में हरी सब्जियां (जैसे पालक) नहीं खाना चाहिए , (क्योंकि उनमें जंतु होते हैं)
  • भाद्रपद में दही नहीं खाना चाहिए
  • आश्विन में दूध और कार्तिक में दाल नहीं खाना चाहिए।
  • सूर्यास्त के बाद तिल की कोइ भी वास्तु का प्रयोग नहीं करनी चाहिए।
  • अमावस्या , रविवार और पूनम को तिल का तेल हानिकारक होता है
  • रविवार को तुलसी, अदरक, लाल मिर्च और लाल सब्जी नहीं खाना चाहिए।
  • आँवला रविवार, शुक्रवार और षष्ठी को नहीं खाना चाहिए।·
  • तृतीया तिथि को परवल नहीं खाना चाहिए (तृतीया को परवल खाने से शत्रुओं की वृद्धि होती है)·
  • चतुर्थी को मूली नहीं खाना चाहिए (चतुर्थी को मूली खाने से धन-नाश होता है)
  • अष्टमी को नारियल नहीं खाना चाहिए (अष्टमी नारियल खाने से बुद्धि कमजोर होगा, रातको नारियल नहीं खाना चाहिए)
  • त्रयोदशी को बैगन नहीं खाना चाहिए ( त्रयोदशी को बैंगन खाने से पुत्र नाश या पुत्र से दुख मिलता है)·
  • श्रावण में हरड़ और कार्तिक में मूली स्वास्थ्य के लिए अच्छा है (श्रावण में जठराग्नि कम होने से पेट के बीमारियाँ ज्यादा होती हैं, इसलिए हरड़ खाना चाहिए)
  • भाद्रपद में दूध या दूध से बनी हुई खीर स्वास्थ्य के लिए अच्छा है, इससे शरीर का पित्त निकल जाता है