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Thursday, October 21, 2010

दीपक की दिशा

दीपक अपने से दक्षिण दिशा की तरफ रखने से प्राण हानि होती है ।
दीपक अपने से नैऋत्य दिशा की तरफ रखने से विस्मृति कारक उर्जा बनती है ।
दीपक अपने से पश्चिम दिशा की तरफ रखने से शांतिदायक होता है ।
दीपक अपने से वायव्य दिशा की तरफ रखने से सम्पत्तिनाशक होता है ।
दीपक अपने से उत्तर दिशा की तरफ रखने से स्वास्थ्य व धन प्रदायक होता है ।
दीपक अपने से ईशान कोण दिशा की तरफ रखने से कल्याणकारक होता है ।

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Paithan -18th Oct 2010

Tuesday, October 19, 2010

लापरवाही से बचने के लिए

लापरवाही के दुर्गुण से बचने में "लं" बीजमंत्र का जप सहायक है, लाभदाई है । रोज़ लं लं लं लं .......इस प्रकार आदर से, तत्परता से कम से कम हज़ार बार जप करने वाला लापरवाह भी सुधर जायेगा ।


Rishi Prasad - Oct 2010

शरीर के अंगों की सुन्नता व थकावट

अंगों में सुन्नता है, नस चढ़ जाती है, थके-थके रहते है । सरसों के तेल की मालिश ४५ मिनट तक करें, फिर स्नान (ना ज्यादा गर्म, ना ज्यादा ठंडा पानी) से कर लें।

Paithan-17th Oct 10

शुभ कर्म करते समय

कोई भी शुभ कर्म करने से पहले संकल्प करके चोटी बांधने से उसका प्रभाव विशेष होता है । महिलाएं चोटी की जगह थोड़ा सा बाल हलके से खींच के रख दो, तो ये sensitive होगा । यहाँ बहुत कुछ उर्जा विकसित होने का और कुदरत के रहस्य प्रकट होने का अन्टीना है ।

Paithan- 17th Oct 10

Monday, October 18, 2010

पटाखों से जलने पर

पटाखों से जलने पर जले हुए स्थान पर कच्चे आलू के पतले पतले चिप्स काट कर रख दें या आलू का रस लगा दें । और कुछ ना लगाये । इससे १-२ घंटे में आराम हो जायेगा । अथवा तो सर्व गुण तेल से भी आराम होता है ।

Urli Kanchan 16th Oct 10

Saturday, October 16, 2010

कब्ज़ में

कब्ज़ में सुबह गुनगुना पानी पेट भरकर पीकर -१० मिनट घूमने से पेट साफ़ हो जाता है

Lok Kalyan Setu -Sep 10

शीतपित्ति का उपचार

सरसों के तेल में आंवला चूर्ण (बिना मिश्री वाला) मिलाकर मालिश करने से शीतपित्ती हमेशा के लिए दूर हो जाती है ।

Lok Kalyan Setu -Sep 10

दांत-मसूड़ों का दर्द

सफ़ेद फिटकरी व सेंधा नमक दोनों बराबर मात्रा में लेकर खूब बारीक पीसें व छान कर रख लें । दांत व मसूड़ों में दर्द होने पर हथेली में इस मिश्रण को लेकर दो-तीन बूँद सरसों का तेल मिलाकर धीरे-धीरे मसाज करें । कुछ देर बाद कुल्ला कर लें। यह प्रयोग सुबह-शाम दोहराएँ । आराम होने पर यह प्रयोग बंद कर दें ।

लोक कल्याण सेतु - Sep 10

विद्यार्थी आचरण

विद्यार्थी जीवन में बच्चों को ठांस-ठांस कर नहीं खाना चाहिये । इससे बुद्धि बैल के जैसी मंद हो जाती है और बीमारियाँ पकडती हैं । जो भोजन अच्छे से पच जाए, उससे ही पौष्टिक तत्व मिल जाते हैं ।

काक चेष्टा बको ध्यानं, श्वान निद्रा तथैव च ।
अल्पहारी गृह त्यागी, विद्यार्थी पंच लक्षणं ॥

Amdavad-5th Oct. 2010

Friday, October 15, 2010

नीम का धुआं

शरद ऋतु रोगों की माँ है । इसलिए इस काल में नीम का धुआं करने के हानिकारक कीटाणु मर जाते हैं । डेंगू में भी ऐसा करना लाभप्रद है ।

Ahmdavad-3rd Oct. 2010

Thursday, October 7, 2010

श्राद्ध कर्म

अगर पंडित से श्राद्ध नहीं करा पाते तो सूर्य नारायण के आगे अपने बगल खुले करके (दोनों हाथ ऊपर करके) बोलें :
"हे सूर्य नारायण ! मेरे पिता (नाम), अमुक (नाम) का बेटा, अमुक जाति (नाम), (अगर जाति, कुल, गोत्र नहीं याद तो ब्रह्म गोत्र बोल दे) को आप संतुष्ट/सुखी रखें । इस निमित मैं आपको अर्घ्य व भोजन करता हूँ ।" ऐसा करके आप सूर्य भगवान को अर्घ्य दें और भोग लगायें ।

Shraaddh ritual :-

If you cannot arrange a priest for the Shraaddh ritual, then stand in front of Surya Narayan, raising both your hands and showing your armpits, say :

"He Surya Narayan ! Please gratify/bless my father (Name), son of (Name), belonging to (Name) caste (If you do not know the caste, lineage or gotra, then say 'Brahma Gotra'). I offer my prostrations and meal with this intention."

After saying this, offer arghya/prostrations and feast to Surya Narayan.

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Hubli 29th Sep 10

Tuesday, October 5, 2010

तुलसी व तुलसी-माला की महिमा

तुलसीदल एक उत्कृष्ट रसायन है। यह गर्म और त्रिदोषशामक है। रक्तविकार, ज्वर, वायु, खाँसी एवं कृमि निवारक है तथा हृदय के लिए हितकारी है।

  • सफेद तुलसी के सेवन से त्वचा, मांस और हड्डियों के रोग दूर होते हैं।
  • काली तुलसी के सेवन से सफेद दाग दूर होते हैं।
  • तुलसी की जड़ और पत्ते ज्वर में उपयोगी हैं।
  • वीर्यदोष में इसके बीज उत्तम हैं तुलसी की चाय पीने से ज्वर, आलस्य, सुस्ती तथा वातपित्त विकार दूर होते हैं, भूख बढ़ती है।
  • जहाँ तुलसी का समुदाय हो, वहाँ किया हुआ पिण्डदान आदि पितरों के लिए अक्षय होता है। यदि तुलसी की लकड़ी से बनी हुई मालाओं से अलंकृत होकर मनुष्य देवताओं और पितरों के पूजनादि कार्य करे तो वह कोटि गुना फल देने वाला होता है।
  • तुलसी सेवन से शरीर स्वस्थ और सुडौल बनता है। मंदाग्नि, कब्जियत, गैस, अम्लता आदि रोगों के लिए यह रामबाण औषधि सिद्ध हुई है।
  • गले में तुलसी की माला धारण करने से जीवनशक्ति बढ़ती है, आवश्यक एक्युप्रेशर बिन्दुओं पर दबाव पड़ता है, जिससे मानसिक तनाव में लाभ होता है, संक्रामक रोगों से रक्षा होती है तथा शरीर स्वास्थ्य में सुधार होकर दीर्घायु की प्राप्ति होती है। शरीर निर्मल, रोगमुक्त व सात्त्विक बनता है। इसको धारण करने से शरीर में विद्युतशक्ति का प्रवाह बढ़ता है तथा जीव-कोशों द्वारा धारण करने के सामर्थ्य में वृद्धि होती है। गले में माला पहने से बिजली की लहरें निकलकर रक्त संचार में रूकावट नहीं आनि देतीं । प्रबल विद्युतशक्ति के कारण धारक के चारों ओर चुम्बकीय मंडल विद्यमान रहता है। तुलसी की माला पहनने से आवाज सुरीली होती है, गले के रोग नहीं होते, मुखड़ा गोरा, गुलाबी रहता है। हृदय पर झूलने वाली तुलसी माला फेफड़े और हृदय के रोगों से बचाती है। इसे धारण करने वाले के स्वभाव में सात्त्विकता का संचार होता है। जो मनुष्य तुलसी की लकड़ी से बनी हुई माला भगवान विष्णु को अर्पित करके पुनः प्रसाद रूप से उसे भक्तिपूर्वक धारण करता है, उसके पातक नष्ट हो जाते हैं।
  • कलाई में तुलसी का गजरा पहनने से नब्ज नहीं छूटती, हाथ सुन्न नहीं होता, भुजाओं का बल बढ़ता है।
  • तुलसी की जड़ें कमर में बाँधने से स्त्रियों को, विशेषतः गर्भवती स्त्रियों को लाभ होता है। प्रसव वेदना कम होती है और प्रसूति भी सरलता से हो जाती है।
  • कमर में तुलसी की करधनी पहनने से पक्षाघात नहीं होता, कमर, जिगर, तिल्ली, आमाशय और यौनांग के विकार नहीं होते हैं।
  • तुलसी की माला पर जप करने से उँगलियों के एक्यूप्रेशर बिन्दुओं पर दबाव पड़ता है, जिससे मानसिक तनाव दूर होता है
  • इसके नियमित सेवन से टूटी हड्डियाँ जुड़ने में मदद मिलती हैं
  • तुलसी की पत्तियों के नियमित सेवन से क्रोधावेश एवं कामोत्तेजना पर नियंत्रण रहता है
  • तुलसी के समीप पड़ने, संचिन्तन करने से, दीप जलने से और पौधे की परिक्रमा करने से पांचो इन्द्रियों के विकार दूर होते हैं

ऋषि प्रसाद, सितम्बर 2010