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Friday, December 17, 2010

पेटदर्द

त्रिफला चूर्ण में मिश्री मिलाकर गुनगुने पानी से लेने से पेटदर्द ठीक हो जाता है।

Stomach-ache :-

Take Triphala churna mixed with rock sugar in luke warm water helps alleviate stomach ache. 

लोक कल्याण सेतु, नवम्बर 2010

मसूड़ों के दर्द में


तुलसी और चमेली के पत्ते चबाने से मसूड़ों के दर्द में आराम मिलता है।

Pain in the gums

Chewing Basil and Chameli leaves provides relief from pain in the gums of teeth.

लोक कल्याण सेतु, नवम्बर 2010

बल-वीर्यवर्धक प्रयोगः

मुलहठी चूर्ण व अश्वगंधा चूर्ण 5-5 ग्राम लेकर उसमें थोड़ा सा घी मिला के चाटें और ऊपर से 1 गिलास मिश्री मिला हुआ दूध पी लें। यह प्रयोग लगातार 60 दिनों तक सुबह शाम करने से बल-वीर्य की वृद्धि होती है और शरीर पुष्ट होता है।

लोक कल्याण सेतु, नवम्बर 2010

शरीर की दुर्बलता

गुलाब की पंखुड़ियों से बना गुलकन्द रक्त को बढ़ाकर शरीर की दुर्बलता को कम करता है। हृदय व मस्तिष्क को शक्ति तथा शीतलता प्रदान करता है।

Physical weakness

Gulkhand prepared using rose petals helps increase the blood formation and drives away weakness in the body. It invigorates the heart and brain and also, has a soothing effect on the body.

लोक कल्याण सेतु, नवम्बर 2010

स्वप्न दोष में

दो खूब पके केलों का गूदा निकाल कर खूब फेंट लें। फिर उसमें हरे आँवलों का रस 1 तोला (11.5 ग्राम) तथा शुद्ध शहद 1 तोला मिलाकर सुबह शाम चाटें। कुछ ही दिनों के प्रयोग से स्वप्नदोष दूर हो जाता है।

लोक कल्याण सेतु, नवम्बर 2010

सफेद आक या मदार के औषधीय प्रयोग

जोड़ों का दर्दः आक की बंद कलियाँ, अडूसे के सूखे पत्ते, काली मिर्च और सोंठ सभी को समान मात्रा में मिलाकर कूट पीस लें और इसमें पानी के छींटे मारकर मटर के बराबर गोलियाँ बना लें। एक गोली सूर्यास्त के बाद गर्म पानी से सेवन करें। जब तक जोड़ों के दर्द में आराम न मिले तब तक सेवन करें। जोड़ों के दर्द के लिए यह सस्ता और बहुत ही लाभप्रद नुस्खा है।क

दादः आक का दूध और शहद बराबर मात्रा में मिलाकर दाद पर लगाने से दाद मिट जाती है।

अँगूठा पकनाः अँगूठा पकने पर दर्द व जलन के कारण बेचैनी होती है। निम्नलिखित प्रयोग से बिना चीरफाड़ के इससे छुटकारा मिलता है।

प्रयोग विधिः अँगूठे पर आक के दूध की कुछ बूँदें टपकाकर ऊपर से आक का पत्ता बाँध दें। तीन घंटे के अंतर से यह प्रक्रिया दोहराते रहें। इससे अँगूठा पककर मवाद बाहर निकल आयेगा। जब तक मवाद निकलता रहे तब तक यह प्रक्रिया दोहराते रहें। बाद में नीम के पत्ते डालकर उबाले हुए पानी से घाव को धो लें, फिर नीम की पत्तियों को पीसकर बाँध दें। घाव भरकर ठीक हो जायेगा।

लोक कल्याण सेतु, नवम्बर 2010

Tuesday, December 14, 2010

सूर्यग्रहण

चन्द्रग्रहण और सूर्यग्रहण(20th May'2012) के समय संयम रखकर जप-ध्यान करने से कई गुना फल होता है। श्रेष्ठ साधक उस समय उपवासपूर्वक ब्राह्मी घृत का स्पर्श करके 'ॐ नमो नारायणाय' मंत्र का आठ हजार जप करने के पश्चात ग्रहणशुद्ध होने पर उस घृत को पी ले। ऐसा करने से वह मेधा (धारणाशक्ति), कवित्वशक्ति तथा वाकसिद्धि प्राप्त कर लेता है।


देवी भागवत में आता हैः सूर्यग्रहण या चन्द्रग्रहण के समय भोजन करने वाला मनुष्य जितने अन्न के दाने खाता है, उतने वर्षों तक अरुतुन्द नामक नरक में वास करता है। फिर वह उदर रोग से पीड़ित मनुष्य होता है फिर गुल्मरोगी, काना और दंतहीन होता है। अतः सूर्यग्रहण में ग्रहण से चार प्रहर (12 घंटे) पूर्व और चन्द्र ग्रहण में तीन प्रहर ( 9 घंटे) पूर्व भोजन नहीं करना चाहिए। बूढ़े, बालकक और रोगी डेढ़ प्रहर (साढ़े चार घंटे) पूर्व तक खा सकते हैं। ग्रहण पूरा होने पर सूर्य या चन्द्र, जिसका ग्रहण हो, उसका शुद्ध बिम्ब देखकर भोजन करना चाहिए।


ग्रहण वेध के पहले जिन पदार्थों में कुश या तुलसी की पत्तियाँ डाल दी जाती हैं, वे पदार्थ दूषित नहीं होते। जबकि पके हुए अन्न का त्याग करके उसे गाय, कुत्ते को डालकर नया भोजन बनाना चाहिए।


ग्रहण के स्पर्श के समय स्नान, मध्य के समय होम, देव-पूजन और श्राद्ध तथा अंत में सचैल(वस्त्रसहित) स्नान करना चाहिए। स्त्रियाँ सिर धोये बिना भी स्नान कर सकती हैं।


ग्रहणकाल में स्पर्श किये हुए वस्त्र आदि की शुद्धि हेतु बाद में उसे धो देना चाहिए तथा स्वयं भी वस्त्रसहित स्नान करना चाहिए।


ग्रहण के समय गायों को घास, पक्षियों को अन्न, जररूतमंदों को वस्त्र और उनकी आवश्यक वस्तु दान करने से अनेक गुना पुण्य प्राप्त होता है।


ग्रहण के समय कोई भी शुभ या नया कार्य शुरू नहीं करना चाहिए।


ग्रहण के समय सोने से रोगी, लघुशंका करने से दरिद्र, मल त्यागने से कीड़ा, स्त्री प्रसंग करने से सूअर और उबटन लगाने से व्यक्ति कोढ़ी होता है। गर्भवती महिला को ग्रहण के समय विशेष सावधान रहना चाहिए।


भगवान वेदव्यास जी ने परम हितकारी वचन कहे हैं- सामान्य दिन से चन्द्रग्रहण में किया गया पुण्यकर्म (जप, ध्यान, दान आदि) एक लाख गुना और सूर्य ग्रहण में दस लाख गुना फलदायी होता है। यदि गंगा जल पास में हो तो चन्द्रग्रहण में एक करोड़ गुना और सूर्यग्रहण में दस करोड़ गुना फलदायी होता है।


ग्रहण के समय गुरुमंत्र, इष्टमंत्र अथवा भगवन्नाम जप अवश्य करें, न करने से मंत्र को मलिनता प्राप्त होती है।




Rishi Prasad-Dec 2010