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Monday, July 14, 2014

सुख-शांति व बरकत के उपाय


· तुलसी को रोज जल चढायें तथा गाय के घी का दीपक जलायें |

· सुबह बिल्वपत्र पर सफेद चंदन का तिलक लगाकर संकल्प करके शिवलिंग पर अर्पित करें तथा ह्र्द्यपुर्वक प्रार्थना करें |


-लोककल्याण सेतु – जून २०१४ से

For happiness and prosperity
- Offer water to Tulsi everyday and light lamp made of cow's clarified butter.
- In the morning, apply white sandalwood paste to Bel leaves and offer it to Shivlinga and pray ardently.
- Lok Kalyan Setu - June 2014



सरल प्रयोग

 वर्षाऋतूजन्य व्याधियों से रक्षा व रोगप्रतिकारक शक्ति बढ़ाने हेतु गोमूत्र सर्वोपरि है | सूर्योदय से पूर्व ४० से ५० मि.ली. ताजा गोमूत्र कपडे से ७ बार छानकर पीने से अथवा २५ से ३० मि.ली. गोझरण अर्क पानी में मिलाकर पीने से शरीर के सभी अंगों की शुद्धि होकर ताजगी, स्फूर्ति व कार्यक्षमता में वृद्धी होती है |

· दूध में सोंठ चूर्ण मिलाकर सेवन करने से ह्रदयगत पीड़ा का नाश होता है |

· त्रिमधुर (शर्करा, गुड़ व शहद ) में डुबोई हुई दूर्वा का गायत्री मंत्र से हवन करने पर मनुष्य सब रोगों से छुट जाता है | (अग्नि पुराण: २८०.५ )

· गिलोय अत्यंत वीर्यप्रद है | इसका क्वाथ (काढ़ा) पीने से अत्यंत असाध्य वातरोग भी दूर होता है | इसके स्वरस, कल्क, चूर्ण या क्वाथ का दीर्घकाल तक सेवन करने से रोगी वातरक्त रोग से छुटकारा पा जाता है |

· गिलोय के क्वाथ और कल्क से सिद्ध घृत जीर्णज्वर का विनाशक है |

-लोककल्याण सेतु – जून २०१४ से

बथुआ खायें रोग भगायें

बथुआ (चाकवत) रुचिकर, पाचक, रक्तशोधक, दर्दनाशक, त्रिदोषशामक, शीतवीर्य तथा बल एवं शुक्राणु वर्धक है | वनस्पति विशेषज्ञों के अनुसार बथुए में लौह, सोना, क्षार, पारा, कैरोटिन, कैल्शियम, फॉस्फोरस, पोटेशियम, प्रोटीन, वसा तथा विटामिन ‘सी’ व ‘बी - २’ पर्याप्त मात्रा में पाये जाते हैं | बथुआ नेत्र, मूत्र व पेट संबंधी विकारों में विशेष लाभदायी है | बथुए की सब्जी, रस या उसका उबाला हुआ पानी पीने से पेट, यकृत, तिल्ली व गुर्दे (किडनी) से संबधित अनेक प्रकार के रोग, बवासीर व पथरी के रोग में लाभ होता है |

बथुए का साग

बथुए का साग बनाते समय कम-से-कम मसाले व घी – तेल का प्रयोग करना चाहिए | गाय के घी व जीरे का छौंक लगाकर सेंधा नमक डाल के बनाया गया बथुए का साग खाने से नेत्रज्योति बढती है | आँखों की लाली व सूजन उतर जाती है |

यह अमाशय को ताकत देता है | इससे कब्ज दूर होता है और वायुगोला व सिरदर्द भी मिट जाता है | शरीर में शक्ति आती है व स्फूर्ति बनी रहती है |

कच्चे रस के प्रयोग

१] बथुए के १०० मि.ली. रस में स्वादानुसार नमक मिला के रोज दो बार १० दिन तक पीने से पेट के कृमि मर जाते है |

२] एक गिलास रस में शहद मिलाकर रोज पीने से पथरी टूटकर निकल जाती है | इससे यकृत की क्रियाशीलता भी बढती है |

३] मूत्राशय, गुर्दे (किडनी) और पेशाब से संबंधित रोगों में बथुए का रस पीने से लाभ होता है |

बथुए के उबाले पानी का प्रयोग

१] ५० ग्राम बथुआ १ गिलास पानी में उबालकर छान के पीने से स्रियों को मासिक धर्म खुलकर आता है |

२] बथुए के पानी से दर्द्वाले घुटने का सेंक करें और बथुए की सब्जी खायें | इससे कुछ सप्ताह में ही घुटनों का दर्द ठीक हो जाता है |

                                                                                                         -लोककल्याण सेतु – जून २०१४ से

जल है औषध समान

अजीर्णे भेषजं वारि जीर्णे वारि बलप्रदम |
भोजने चामृतं वारि भोजनान्ते विषप्रदम ||


‘अजीर्ण होने पर जल-पान औषधवत हैं | भोजन पच जाने पर अर्थात भोजन के डेढ़- दो घंटे बाद पानी पीना बलदायक है | भोजन के मध्य में पानी पीना अमृत के समान है और भोजन के अंत में विष के समान अर्थात पाचनक्रिया के लिए हानिकारक है |’ (चाणक्य नीति :८.७)

विविध व्याधियों में जल-पान

१) अल्प जल-पान : उबला हुआ पानी ठंडा करके थोड़ी-थोड़ी मात्रा में पीने से अरुचि, जुकाम, मंदाग्नि, सुजन, खट्टी डकारें, पेट के रोग, नया बुखार और मधुमेह में लाभ होता है |

२) उष्ण जल-पान : सुबह उबाला हुआ पानी गुनगुना करके दिनभर पीने से प्रमेह, मधुमेह, मोटापा, बवासीर, खाँसी-जुकाम, नया ज्वर, कब्ज, गठिया, जोड़ों का दर्द, मंदाग्नि, अरुचि, वात व कफ जन्य रोग, अफरा, संग्रहणी, श्वास की तकलीफ, पीलिया, गुल्म, पार्श्व शूल आदि में पथ्य का काम करता है |

३) प्रात: उषापान : सूर्योदय से २ घंटा पूर्व, शौच क्रिया से पहले रात का रखा हुआ पाव से आधा लीटर पानी पीना असंख्य रोगों से रक्षा करनेवाला है | शौच के बाद पानी न पियें |

औषधिसिद्ध जल

१) सोंठ-जल : दो लीटर पानी में २ ग्राम सोंठ का चूर्ण या १ साबूत टुकड़ा डालकर पानी आधा होने तक उबालें | ठंडा करके छान लें | यह जल गठिया, जोड़ों का दर्द, मधुमेह, दमा, क्षयरोग (टी.बी.), पुरानी सर्दी, बुखार, हिचकी, अजीर्ण, कृमि, दस्त, आमदोष, बहुमुत्रता तथा कफजन्य रोगों में खूब लाभदायी है |

२) अजवायन-जल : एक लीटर पानी में एक चम्मच (करीब ८.५ ग्राम) अजवायन डालकर उबालें | पानी आधा रह जाय तो ठंडा करके छान लें | उष्ण प्रकृति का यह जल ह्दय-शूल, गैस, कृमि, हिचकी, अरुचि, मंदाग्नि,पीठ व कमर का दर्द, अजीर्ण, दस्त, सर्दी व बहुमुत्रता में लाभदायी है |

३) जीरा-जल : एक लीटर पानी में एक से डेढ़ चम्मच जीरा डालकर उबालें | पौना लीटर पानी बचने पर ठंडा कर छान लें | शीतल गुणवाला यह जल गर्भवती एवं प्रसूता स्रियों के लिए तथा रक्तप्रदर, श्वेतप्रदर, अनियमित मासिकस्त्राव, गर्भाशय की सूजन, गर्मी के कारण बार-बार होनेवाला गर्भपात व अल्पमुत्रता में आशातीत लाभदायी है |

ध्यान दें :

१)भूखे पेट, भोजन की शुरुवात व अंत में, धुप से आकर, शौच, व्यायाम या अधिक परिश्रम व फल खाने के तुरंत बाद पानी पीना निषिद्ध है |

२) अत्यम्बूपानान्न विपच्यतेन्नम अर्थात बहुत अधिक या एक साथ पानी पीने से पाचन बिगड़ता है | इसलिए मुहुर्मुहर्वारी पिबेदभूरी | बार-बार थोडा-थोडा पानी पीना चाहिए | (भावप्रकाश, पूर्व खंड: ५.१५७)

३) लेटकर, खड़े होकर पानी पीना तथा पानी पीकर तुरंत दौड़ना या परिश्रम करना हानिकारक है | बैठकर धीरे-धीरे चुस्की लेते हुए बायाँ स्वर सक्रिय हो तब पानी पीना चाहिए |

४) प्लास्टिक की बोतल में रखा हुआ, फ्रिज का या बर्फ मिलाया हुआ पानी हानिकारक है |

५) सामान्यत: १ व्यक्ति के लिए एक दिन में डेढ़ से दो लीटर पानी पर्याप्त है | देश-ऋतू-प्रकृति आदि के अनुसार यह मात्रा बदलती है |

-ऋषिप्रसाद – जून २०१४

सरल एवं लाभदायक - व्यान मुद्रा


विधि : अँगूठा, तर्जनी (अँगूठे के पासवाली ऊँगली) व मध्यमा (सबसे बडी ऊँगली)- इन तीनों के अग्रभाग एक-दुसरे से मीलायें | अनामिका व कनिष्ठिका ऊंगलियाँ सीधी रखें |

लाभ : (१) रक्त- परिसंचरण नियमित होता हैं तथा ह्रदयरोगों में लाभदायी है |

(२) इस मुद्रा का नियमित अभ्यास उच्च रक्तचाप का रामबाण उपाय है | उच्च रक्तचाप एवं निम्न रक्तचाप पर नियंत्रण हेतु इस मुद्रा के अभ्यास के साथ एक अन्य प्रयोग करें :

जिव्हाबंध : जिव्हा का अग्रभाग तालू में लगायें और दोनों आँखों की पुतलियाँ भौहों की ओर ले जायें | इसके बाद सिंह मुद्रा अर्थात जिव्हा को मुँह से अधिक-से-अधिक बाहर निकालें और आँखों की पुतलियाँ भौंहों की और ले जायें | उपरोक्त दोनों क्रियाएँ अदल-बदलकर ५ – ५ बार करें | उच्च रक्तचापवालों के लिए तो यह आशीर्वादरूप है |

(३) गर्भिणींयों के लिए भी यह वरदानरूप है |

विशेष: इस सुंदर मुद्रा-विज्ञान का आधार हैं हमारे दोनों हाथ, जिनमे भगवत्शक्ति का निवास है | अत: ऊंगलियों की निरर्थक खींचातानी व उन पर आघात नही करने चाहिए | इनसे शरीर, मन या मस्तिष्क को हानि पहुँच सकती है | कभी कभी स्मरणशक्ति को भी आघात पहुँच सकता है | हमारे ऋषियों ने हमारा कितना खयाल रखा है कि प्रतिदिन सुबह करदर्शन करने का नियम हमारे लिए बना दिया :

कराग्रे वसते लक्ष्मी: करमध्ये सरस्वती |
करमूले तु गोविंद: प्रभाते करदर्शनम् ||


                                                                                                               -ऋषिप्रसाद – जून २०१४

Simple and effective - Vyaan Mudra
Procedure: Point the tips of Thumb, Index finger and Middle finger together. Leave the Ring finger and Little finger straight
Benefits:
1. It normalizes blood pressure and is effective against heart ailments.
2. This is a highly effective technique against high blood pressure. If suffering from very high/low blood pressure, do the following as well:
JIHWABANDH: Connect the tip of your tongue to the upper palate and set your eyesight towards the eyebrows. After this, like a lion, set out your tongue as much as feasible and leave your eyesight focused towards the eyebrows. Above two techniques are to be alternately repeated 5 times each. This technique is like a blessing for those suffering from high blood pressure.
3. This mudra is also beneficial for pregnant ladies.
Special note: These wonderful mudras are based on the fact that heavenly powers reside in both our hands. So, fingers must not be pulled or injured casually. This can have adverse impact on physical and mental well being. Sometimes it can also affect the memory. Our Rishis have taken so much care of us that they have blessed us with the divine rule of KAR-DARSHAN (viewing the palm) which we should make it a practice everyday.
KARAGRE VASATE LAKSHMI KARAMADHYE SARASWATI |
KARAMULE TU GOVINDAM PRABHAATE KARADARSHANAM ||
- Rishi Prasad - June 2014

कालसर्पयोग से मुक्ति का सरल उपाय


किसी पर कालसर्पयोग होता है तो बेचारा मुसीबतों में आ जाता है लेकिन जो मेरे शिष्य हैं उन्हें कालसर्पयोग की विदाई करने के लिए कोई पूजा-पाठ या लम्बा-चौड़ा विधि-विधान नहीं कराना है केवल ‘कालसर्पयोग निवृति अर्थे जपे विनियोग: |’ ऐसा विनियोग करके अपने गुरुमंत्र की माला जपो और गुरूजी को देखो | ७ दिन रोज ११-११ माला जप करो | कालसर्पयोग कट जाता है |

                                                                                                                           -ऋषिप्रसाद – जून २०१४

Freedom from KaalSarp Yog
One under the influence of KaalSarp Yog suffers hugely but those who are my disciples need not perform ant rituals or long drawn practices. You only need to pray "KAALSARP NIVRITTI ARTHE JAPE VINIYOGAH". Make this humble request at the beginning of recital of your rosary and stare at your Guru. For seven day continuously, recite 11-11 malas daily. Any bad influence of KaalSarp Yog will vanish.
- Rishi Prasad - June 2014

स्वास्थ्य व दीर्घायु हेतु सरल उपाय

सूर्योदय के समय जठराग्नि तथा पाचक ग्रंथियों सक्रिय होती हैं और सूर्यास्त के समय मंद पड जाती हैं | सूर्यास्त के पूर्व भोजन करने से श्वास व ह्रदय संबंधी रोग, वायुविकार, अजीर्ण तथा अनिद्रा आदि रोग नहीं होते | रात्रि के समय भोजन करने से अनेक रोग हो जाते हैं | यदि प्राणी पहले ही रोगी है और रात का भोजन देर से करता है तो रोग की उग्रता बढ़ जाती है | अत: रोगी-निरोगी सभीके लिए देर रात्रि का भोजन त्याज्य है |

-ऋषिप्रसाद – जून २०१४

Simple technique for good health and long life
During sunrise, digestive system and digestion power gets activated and wanes away during sunset. By taking dinner before sunset, one can completely avoid breath and heart related ailments, wind ailments,indigestion and insomnia. Many illness spawn simply from taking late dinner at night. 
If someone is already quite ill and then if he consumes dinner late at night, his illness assumes magnified proportions. So, for both the ill and healthy people alike, it is absolutely essential to abstain from late night eating habits.
- RishiPrasad - June 2014

घर में सुख-सम्पदा व बरकत का अचूक उपाय

सुबह जब घर में भोजन बने तो सबसे पहलेवाली रोटी अन्य रोटियों से थोड़ी बड़ी बनायें और इसे अलग निकाल लें | इस रोटी के चार बराबर टुकड़े कर लें और इन चारों पर कुछ मीठा जैसे – खीर, गुड़ या शक्कर रख दें |

सबसे पहले एक टुकड़ा गाय को खिला दें और भगवान से प्रार्थना करें | धर्मग्रंथों के अनुसार गाय में सभी देवताओं का निवास होता है इसलिए सबसे पहले रोटी गाय को ही दी जाती हैं |

फिर दूसरा टुकड़ा कुत्ते को खिला दें |’शिवपुराण’ के अनुसार ‘कुत्ते को रोटी खिलाते समय बोलना चाहिए कि ‘यमराज के मार्ग का अनुसरण करनेवाले जो श्याम और शबल नाम के दो कुत्ते हैं, मैं उनके लिए यह अन्न का भाग देता हूँ | वे इस भोजन को ग्रहण करें |’ इस श्वानबलि कहते हैं |’ रोटी के तीसरे भाग को कौओं को खिला दें और बोलें : ‘पश्चिम, वायव्य, दक्षिण और नैऋत्य दिशा में रहनेवाले जो पुन्यकर्मा कौए हैं, वे मेरे इस दिये हुए भोजन को ग्रहण करें |’ इसे काकबलि कहते हैं | अब रोटी का अंतिम टुकड़ा एवं कुछ अन्न घर पर आये किसी भिक्षु को दे दें |

यह छोटा-सा उपाय रोज करने से आपको औदार्य सुख (उदारता का सुख) मिलेगा और आपकी किस्मत कुछ ही दिनों में बदल जायेगी |

-ऋषिप्रसाद – जून २०१४

Infallible technique for prosperity at home

When you prepare roti bread at home in the morning, make the first one larger than the rest and keep it separate. Make four slices out of it and apply something sweet on each of these four pieces - example, jaggery, sugar or milk porridge.
Feed the first piece to a cow and pray to cow. As per all our religious scriptures, all Gods reside in the body of cow. So, the first piece must be fed to a cow.
Feed the second piece to a dog. As per "ShivPuran", one must say while feeding dogs that "I offer this piece to the two dogs, Shyam and Shabal who follow the path of Yamraaj. May thee accept this offering." This is also called as Shwanbali.
Feed the third piece to crows and say, "May all holy crows residing in west, south west, south, north west corners accept this offering." This is also called as Kakbali.
Feed the last piece along with some grains to an ascetic who appears at your door step.
By this simple exercise, you shall receive peace of mind due to growing compassion and your fortunes will begin to grow soon.
- RishiPrasad June 2014

Thursday, June 5, 2014

रुचिकर व पोषक नारियल पानी


सुबह चाय के बदले नारियल पानी में नींबू का रस निचोड़कर पीने से शरीर की सारी गर्मी मूत्र एवं मॉल के साथ निकल जाती है और रक्त शुद्ध होता है | बच्चों में कृमि तथा उलटी में भी यह नीबूयुक्त पानी लाभकारी है | हृदय, यकृत एवं गुर्दे के रोगों में यह लाभप्रद है | यह दवाइयों के विषैले असर को नष्ट कर देता है |
दक्षिण भारत में स्तनपान करनेवाली माँ का दूध कम हो जाने पर गाय के दूध में नारियल पानी मिलाकर पिलाते हैं | इससे शिशु नारियल के पानी के कारण गाय के दूध को पचा लेता  हैं |
हैजे में नारियल का पानी आशीर्वादस्वरुप हैं | हैजे के विषाक्त कीटाणु आँतों में जाते हैं | नारियल का पानी उन सबको निकाल देता हैं | साथ ही शरीर में कम हुए सोडियम एवं पोटैशियम की पूर्ति कर जलीय अंश की वृद्धि करता हैं | "स्कुल ऑफ़ ट्रॉपिकल मेडिसिन" के विशेषज्ञों का मत हैं कि हैजे में पोटैशियम सॉल्ट के इंजेक्शन देने के बजाय नारियल पानी में निहित प्राकृतिक पोटैशियम देना लाभदायी हैं | 
टाइफाइड, कोलाइटिस, चेचक, पेचिश व अतिसार में नारियल का पानी अधिक हितकारी होता हैं | गर्भवती महिलाएँ यदि रोज नारियल पानी पीती हैं तो बालक सुंदर पैदा होता हैं | 
१०० ग्राम नारियल पानी में निम्नानुसार तत्त्व पाये जाते हैं :
कार्बोहाइड्रेट - ३.७१ ग्राम, प्रोटीन - ०.७२ ग्राम, लौह - ०.२९ मि.ग्राम, कैल्शियम - २४ मि. ग्राम, फॉस्फोरस - २० मि. ग्राम, सोडियम - १०५ मि. ग्राम, पोटैशियम -२५० मि. ग्राम, विटामिन 'सी' -२.४ मि. ग्राम, ऊर्जा - १९ किलो कैलोरी 
इनके अलवा मैग्नेशियम तथा क्लोरीन आदि खनिज तत्त्व भी होते हैं |
 
- Rishi Prasad May 2014

मोसंबी का रस


यह बल व रक्त वर्धक, शक्तिदायक एवं रोगप्रतिकारक शक्ति बढ़ानेवाला है | बीमार लोगों के लिए मोसंबी अमृत के समान है | 
शरीर थकने व मन के ऊब जाने पर मोसंबी अथवा इसके रस का सेवन करें तो थकान,बेचैनी दूर होकर स्फूर्ति व प्रसन्नता बढ़ती है | मोसंबी का रस यकृत, आँतों तथा पाचनतंत्र को शुद्ध करके उन्हें सतेज बनाता है | 
मोसंबी चूसने से दाँतों की सफाई होती है व भोजन सरलता से पचता है | सर्दी - जुकामवालों को मोसंबी का रस हलका गर्म करके उसमें २ - ४ बूँद अदरक के रस की डालकर पीना चाहिए | 
रस की मात्रा : २५० - ५०० मि.ली.
 
 Rishi Prasad May 2014

 
 
 
 

गर्मियों में बलप्रद व स्वास्थ्यवर्धक आम


पका आम बहुत ही पौष्टिक होता है | इसमें प्रोटीन,विटामिन व खनिज पदार्थ, कार्बोहाइड्रेट तथा शर्करा विपुल मात्रा में होते हैं |
आम मीठा, चिकना, शौच साफ़ लानेवाला, तृप्तिदायक, ह्रदय को बलप्रद, वीर्य की शुद्धि तथा वृद्धि करनेवाला हैं | यह वायु व पित्त नाशक परंतु कफकारक है तथा कांतिवर्धक, रक्त की शुद्धि करनेवाला एवं भूख बढ़ानेवाला है | इसके नियमित सेवन से रोगप्रतिकारक शक्ति बढती है |
शुक्रप्रमेह आदि विकारों के कारण जिनको संतानोत्पत्ति न होती हो, उनके लिए पाक आम लाभकारक है | कलमी आम की अपेक्षा देशी आम जल्दी पचनेवाला, त्रिदोषशामक व विशेष गुणयुक्त है | रेशासहित, मीठा, पतली या छोटी गुठलीवाला आम उत्तम माना जाता है | यह आमाशय, यकृत, फेफड़ों के रोग तथा अल्सर, रक्ताल्पता आदि में लाभ पहुँचाता है | इसके सेवन से रक्त,मांस आदि सप्तधातुओं तथा वासा की वृद्धि और हड्डियों का पोषण होता है | यूनानी डॉक्टरों के मतानुसार पका आम आलस्य दूर करता है, मूत्र साफ़ लाता है, क्षयरोग (टी.बी.)मिटाता है तथा गुर्दें व मूत्राशय के लिए शक्तिदायक है |
औषधि-प्रयोग
भूखवृद्धि : आम के रस में घी और सौंठ डालकर सेवन करने से जठराग्नि प्रदीप्त होता है | वायु रोग या पाचनतंत्र की दुर्बलता : आम के रस में अदरक मिलाकर लेना हितकारी है |
शहद के साथ पके आम के सेवन से प्लीहा, वायु और कफ के दोष तथा क्षयरोग दूर होता है | 
आम का पना : केरी (कच्चा आम ) को पानी में उबालें अथवा गोबर के कंडे की आग में दबा दें | भून जाने पर छिलका उतार दें और गूदा मथकर उसमें गुड, जीरा, धनिया, काली मिर्च तथा नमक मिलाकर दोबारा मथें | आवश्यकता अनुसार पानी मिलायें और पियें |
लू लगने पर : उपरोक्त आम का पना एक-एक कप दिन में २ - ३ बार पियें |
भुने हुए कच्चे आम के गूदेको पैरों के तलवों पर लगाने से भी लू से राहत मिलती है |
वजन बढ़ाने के लिए : पके और मीठे आम नियमित रूप से खाने से दुबले - पतले व्यक्ति का वजन बढ़ सकता है | 
दस्त में रक्त आने पर : छाछ में आम की गुठली का २ से ३ ग्राम चूर्ण मिलाकर पीने से लाभ होता है | 
पेट के कीड़े : सुबह चौथाई चम्मच आम की गुठलियों का चूर्ण गर्म पानी के साथ लेने से पेट के कीड़े मर जाते है |
प्रदर रोग : आम की गुठली का २ से ३ ग्राम चूर्ण शहद के साथ चाटने से रक्त-प्रदर में लाभ होता है | 
दाँतों के रोग : आम के पत्तों को खूब चबा-चबाकर थूकते रहने से कुछ ही दोनों में दाँतों का हिलना और मसूड़ों से खून आना बंद हो जाता है | आम की गुठली की गिरी के महीन चूर्ण का मंजन करने से पायरिया ठीक होता है | 
घमौरियाँ : आम की गुठली के चूर्ण से स्नान करने से घमौरियाँ दूर होती है | 
पुष्ट और सुडौल शरीर : यदि एक वक्त के आहार में सुबह या शाम केवल आम चूसकर जरा-सा अदरक लें तथा डेढ -दो घंटे के बाद दूध पियें तो ४० दिन में शरीर पुष्ट व सुडौल हो जाता | आम और दूध एक साथ खाना आयुर्वेद की दृष्टि से विरुद्ध आहार है | इससे आगे चलकर चमड़ी के रोग होते है | 
सावधानी : खाने के पहले आम को पानी में रखना चाहिए | इससे उसकी गर्मी निकल जाती है | भूखे पेट आम नहीं खाना चाहिए | अधिक आम खाने से गैस बनती है और पेट के विकार पैदा होते है | कच्चा, खट्टा तथा अति पका हुआ आम खाने से लाभ के बजाय हानि हो सकती है | कच्चे आम के सीधे सेवन से कब्ज व मंदाग्नि हो सकती है | 
बाजार में बिकनेवाला डिब्बाबंद आम का रस स्वास्थ्य के लिए हितकारी नहीं होता है | लम्बे समय तक रखा हुआ बासी रस वायुकारक, पचने में भारी एवं ह्रदय के लिए अहितकर है | 
 
Rishi Prasad May 2014

Wednesday, April 23, 2014

घर के कलह-क्लेश दूर करने का उपाय


जिसको घर में कलह, क्लेश मिटाना हो, रोग या शारीरिक दुर्बलता मिटानी हो, वह नीचे की चौपाई की पुनरावृत्ति किया करे :

बुद्धिहीन तनु जानिके, सुमिरौं पवन - कुमार |
बल बुधि बिद्या देहु मोहिं, हरहु कलेस बिकार ||


Tips to avert numerous issues at home
Those who are troubled with numerous issues at home, or are diseased, physically weak, they should recite the following:
BUDDHIHEEN TANU JAANIKE, SUMIRAUN PAVAN KUMAR |
BAL BUDDHI VIDYA DEHU MOHI, HARAU KLESHA VIKAAR ||


-Rishi Prasad April ' 2014