Search This Blog

Tuesday, March 10, 2015

पुष्टिवर्धक प्रयोग

छोटे बच्चे और गर्भवती माताएँ १५ से २५ ग्राम भुनी हुई मूँगफली पुराने गुड के साथ खायें तो उन्हें बहुत पुष्टि मिलती हैं | जिन माताओं का दूध पर्याप्त मात्रा में न उतरता हो, उनके लिए भी इनका सेवन लाभप्रद है |

-लोक कल्याण सेतु – फरवरी – २०१५ से

अनेक रोगों की एक दवा – कंद-सब्जियों में श्रेष्ठ : सूरन

सूरन (जमीकंद)पचने में हलका,कफ एवं वात शामक, रुचिवर्धक, शूलहर, मासिक धर्म बढानेवाला व बलवर्धक हैं | सफेद सूरन अरुचि, मंदाग्नि, कब्ज, पेटदर्द, वायुगोला, आमवात तथा यकृत व् प्लीहा के मरीजों के लिए एवं कृमि, खाँसी व् श्वास की तकलीफवालों के लिए उपयोगी हैं | सूरन पोषक रसों के अवशोषण में मदद करके शरीर में शक्ति उत्पन्न करता हैं | बेचैनी, अपच, गैस, खट्टी डकारे, हाथ-पैरों का दर्द आदि में तथा शरीरिक रुप से कमजोर व्यक्तियों के लिए सूरन लाभदायी हैं |

सूरन की लाल व सफेद इन दो प्रजातियों में से सफेद प्रजाति का उपयोग सब्जी के रूप में विशेष तौर पर किया जाता हैं |

बवासीर में रामबाण औषधि

- सूरन के टुकड़ों को पहले उबाल लें और फिर सुखाकर उनका चूर्ण बना लें | यह चूर्ण ३२० ग्राम, चित्रक १६० ग्राम, सौंठ ४० ग्राम, काली मिर्च २० ग्राम एवं गुड १ किला – इन सबको मिलाकर देशी बेर जैसी छोटी-छोटी गोलियाँ बना लें | इसे ‘सूरन वटक’ कहते हैं | प्रतिदिन सुबह-शाम ३ – ३ गोलियाँ खाने से बवासीर में खूब लाभ होता हैं |

- सूरन के टुकड़ों को भाप में पका लें और टिल के तेल में सब्जी बनाकर खायें एवं ऊपर से छाछ पियें | इससे सभीप्रकार की बवासीर में लाभ होता हैं | यह प्रयोग ३० दिन तक करें | खूनी बवासीर में सूरन की सब्जी के साथ इमली की पत्तियाँ एवं चावल खाने से लाभ होता हैं |

सावधानी – त्वचा-विकार, ह्रदयरोग, रक्तस्त्राव एवं कोढ़ के रोगियों को सूरन का सेवन नही करना चाहिए | अत्यंत कमजोर व्यक्ति के लिए उबाला हुआ सूरन पथ्य होने पर भी इसका ज्यादा मात्रा से निरंतर सेवन हानि करता हैं | सूरन के उपयोग से यदि मुँह आना, कंठदाह या खुजली जैसा हो तो नींबू अथवा इमली का सेवन करें |

-लोक कल्याण सेतु – फरवरी – २०१५ से

जोड़ों का दर्द मिटायें, पुष्टि पायें

१०० – १०० ग्राम हल्दी, मेथी व सौंठ का चूर्ण और ५० ग्राम अश्वगंधा चूर्ण सभी को मिलाकर रख लें | २ ग्राम चूर्ण सुबह-शाम भोजन के १ घंटा बाद गुनगुने पानी के साथ लें | इससे जोड़ों का दर्द,गठिया, कमरदर्द व् अन्य वाट रोगों में लाभ होता हैं एवं शरीर पुष्ट होता हैं |

                                                                                        ऋषिप्रसाद – फरवरी २०१५ से

ह्रदय के लिए हितकर पेय

रात को भिगोये हुए ४ बादाम सुबह छिलका उतारकर १० तुलसी पत्तों और ४ काली मिर्च के साथ अच्छी तरह पीस लें | फिर आधा कप पानी में इनका घोल बना के पीने से विभिन्न प्रकार के ह्रदयरोगों में लाभ होता है | इससे मस्तिष्क को पोषण मिलता है व् रक्त की वृद्धि भी होती हैं |

- ऋषिप्रसाद – फरवरी २०१५ से

औषधीय गुणों से भरपूर सहजन

सहजन (मुनगा) की फली खाने में मधुर कसैली एवं स्वादिष्ट तथा पचने में हलकी, गर्म तासीरवाली एवं जठराग्नि प्रदीप्त करनेवाली होती है | इसके फुल तथा कोमल पत्तों की सब्जी बनायी जाती है | सहजन कफ अता वायु शामक होने से श्वास, खाँसी, जुकाम आदि कफजन्य विकारों तथा आमवात, संधिवात, सुजनयुक्त दर्द आदि वायुरोंगों में विशेष पथ्यकर हैं | यकृत एवं तिल्ली वृद्धि, मूत्राशय एवं गुर्दे की पथरी, पेट के कृमि, फोड़ा, मोटापा, गंडमाला (कंठमाला), गलगंड (घेघा) – इन व्याधियों में इसका सेवन हितकारी हैं | सहजन में विटामिन ‘ए’ प्रचुर माता में पाया जाता हैं आयुर्वेद के मतानुसार सहजन वीर्यवर्धक तह ह्दय एवं आँखों के लिए हितकर हैं |

औषधीय प्रयोग –

- सहजन की पत्तियों के ३० मि.ली. रस में १ चम्मच शहद मिलाकर रात को सोने से पूर्व २ माह तक लेने से रतौधी में लाभ होता है | यह प्रयोग सर्दियों में करना हितकर हैं |

- लोह तत्त्व की कमी से होनेवाली रक्ताल्पता (एनीमिया) व विटामिन ‘ए’ की कमी से होनेवाले अंधत्व में पत्तियों की सब्जी (अल्प मात्रा में ) लाभकारी हैं |

- पत्तों को पानी में पीसकर हकला गर्म करके जोड़ों पर लगाने से वायु की पीड़ा मिटती हैं |

- सहजन के पत्तों का रस लगाकर सिर धोने से बालों की रुसी में लाभ होता हैं |

सावधानी – सब्जी के लिए ताज़ी एवं गुदेवाली फली का ही प्रयोग करें | सुखी बड़े बीजवाली एवं ज्यादा रेशेवाली फली पेट में अफरा करती हैं | गर्म (पित्त) प्रकृति के लोगों के लिए तथा पित्तजन्य विकारों में सहजन निषिद्ध हैं | सहजन की पत्तियों का उपयोग पित्त-प्रकृतिवाले व्यक्ति वैद्यकीय सलाह से करें | गुर्दे की खराबी में इसका उपयोग नहीं करना चाहिए |

- ऋषिप्रसाद – फरवरी २०१५ से

Saturday, March 7, 2015

केमिकल रंग छूटाने के लिए


यदि किसीने आप पर रासायनिक रंग लगा दिया हो तो तुरंत ही बेसन, आटा, दूध, हल्दी व् तेल के मिश्रण से बना उबटन रंगे हुए अंगों पर लगाकर रंग को धो डालना चाहिए | यदि उबटन लगाने से पूर्व उस स्थान को नींबू से रगड़कर साफ़ कर लिया जाय तो रंग छूटने में और अधिक सुगमता होती है |
- पूज्य बापूजी (स्त्रोत :ऋषि प्रसाद मार्च 2005 )

Tuesday, February 3, 2015

शक्ति का भंडार – गाजर

गाजर के गुणों पर दृष्टी डालें तो पता चलता है कि यह प्रकृतिप्रदत्त एक अनमोल उपहार हैं | गाजर मे शरीर को स्वस्थ रखनेवाले तत्त्व पाये जाते हैं | यह शारीरिक एवं बौद्धिक विकास में लाभकारी हैं | इससे नेत्रज्योति व स्मरणशक्ति में भी वृद्धि होती है | इसमें लौह व गंधक (सल्फर) होने से रक्त की वृद्धि व शुद्धि में मदद मिलती है | प्राकृतिक चिकित्साचार्यों ने इसे ‘गरीबों का सेब’ कहकर नवाजा है |

गाजर - रस के लाभकारी प्रयोग


आरोग्यशक्तिवर्धक : गाजर में ;विटामिन बी काम्प्लेक्स’ होता है जो पाचन-संस्थान को शक्तिशाली बनाता है व पेट के अनेक रोगों में लाभकारी हैं | यह भोजन पचाने में मदद करता है तथा मल साफ़ लाता है | लम्बी बीमारी के बाद उसकी क्षतिपूर्ति करने में गाजर का रस बहुत ही प्रभावकारी है | यह रोगी को चुस्त, तरोताजा और शक्तिशाली बनाता हैं |

मस्तिष्क – शक्तिवर्धक :
इससे मस्तिष्क को शक्ति मिलती है व थकान दूर होती है | यह अनिद्रा रोग में लाभकारी है |

माताओं के लिए :
माताओं को सगर्भावस्था में गाजर का रस पीते रहने से शरीर में लौह तथा कैल्सियम की कमी नहीं रहती | दुग्धपान करानेवाली माताओं को भी रोज सुबह गाजर का रस पीना चाहिए | इससे उनके दूध की गुणवत्ता बढती है |

दाँतो की मजबूती :
७० मि.ली. गाजर का रस प्रतिदिन पीने से मसूड़ों व दाँतो की जड़ मजबूत बनती है और दाँतो के रोग पैदा नहीं होते |

नेत्रज्योति की वृद्धि :
१२५-१२५ मि.ली. पालक और गाजर का रस मिलाकर सेवन करते रहने से दृष्टि की कमजोरी दूर हो जाती है |

लाल रक्तकण बढाने हेतु : २५० मि .ली. गाजर के रस में पालक का रस मिलाकर पीये |

बच्चों की दुर्बलता दूर करने हेतु : २ - ३ चम्मच गाजर-रस दुर्बल बच्चों को प्रतिदिन ३ बार पिलाने से बच्चे ह्रष्ट-पुष्ट हो जाते हैं |

दुग्धपान करते बच्चों के लिए :
बच्चों को गाजर का रस पिलाने से उनके दाँत सरलता से निकलते है और दूध भी ठीक से पचता है |

गाजर - रस के औषधीय प्रयोग


कैंसर : गाजर में पाया जानेवाला केरोटिन नामक औषधीय तत्त्व कैंसर-नियन्त्रण में उपयोगी है | ल्यूकेमिया (ब्लड कैंसर) और पेट के कैंसर में यह अधिक लाभप्रद है |

चर्मरोग : गाजर का रस कीटाणुनाशक है और संक्रमण को दूर करता है | इससे रक्त शुद्ध होकर खुजली, फोड़े-फुंसियों व कील-मुँहासो में लाभ होता है | रोगी के पीले चेहरे का रंग गुलाबी हो जाता है |

कब्ज : २५० मि.ली. गाजर के रस में ५० मि.ली. पालक का रस और थोडा-सा नींबू का रस मिलाकर पियें | नमक न मिलायें |

मात्रा : एक बार में एक गिलास (२५० मि.ली. ) से अधिक रस न पिये |

सावधानी – १] गाजर खाने के बाद तुरंत पानी न पिये | २) गाजर के बीच का पीला भाग निकालकर ही गाजर का उपयोग करना चाहिए |

- लोककल्याण सेतु – जनवरी २०१५ से

Friday, January 16, 2015

मानसिक रोगों का घरेलु उपचार

सौंफ, बादाम, गुलाब के सूखे फुल, खसखस, कालीमिर्च – सभी समान मात्रा में लेकर पीस लें और आवश्यकतानुसार मिश्री मिलाकर रख लें | सुबह १ चम्मच मिश्रण पानी में घोलकर सेवन करें | साथ में सुबह ५ – ५ बूँद देशी गाय का घी दोनों नथुनों में डालें | इससे सभी प्रकार के मानसिक रोगों में लाभ होता है |

- ऋषिप्रसाद –जनवरी २०१५ से

स्वास्थ्य के घरेलू सरल उपाय

आधासीसी – १२ ग्राम पुराना गुड ६ ग्राम देशी घी के साथ सूर्योदय से पहले तथा शाम को सूर्यास्त से पहले खाने से आधे सिर के दर्द में आराम मिलता हैं |

बच्चों का कृमि-रोग - बच्चों को रात को सोने से पहले १ अखरोट खिलाकर गुनगुना पानी पिलायें | पेट के कीड़े पाखाने के साथ निकल जाते है |

- ऋषिप्रसाद –जनवरी २०१५ से

वीर्यरक्षक व पुष्टिवर्धक गोखरू

वीर्यक्षीणता, स्वप्नदोष, शीघ्रपतन व् दुर्बलता आदि समस्याओं में गोखरू विशेष लाभदायी है | बल-वीर्य व मांस वर्धक होने के साथ यह शौच साफ़ लाता हैं | यह गुर्दे व मूत्र संबंधी रोगों को दूर करता है तथा प्रमेह (गोनोरिया), सुजाक, शोथ (सुजन) एवं ह्रदय-विकारों में लाभकारी है |

१०० – १०० ग्राम गोखरू, शतावरी तथा तालमखाना का चूर्ण और ३०० ग्राम पीसी मिश्री मिलाकर रख लें | १ – १ चम्मच मिश्रण दूध के साथ सुबह-शाम लेने से शीघ्रपतन व वीर्यक्षीणता दूर होती है तथा शरीर ह्रष्ट-पुष्ट बनता है |



-          ऋषिप्रसाद –जनवरी २०१५ से

रसायन चूर्ण व टैबलेट - अमृत द्रव

रसायन चूर्ण व टैबलेट

गोखरू, आँवला तथा गिलोय को समभाग मिलाकर यह विशेष रसायन योग बनाया जाता हैं | यह चूर्ण पौष्टिक, बलप्रद, खुलकर पेशाब लानेवाला एवं वीर्यदोष दूर करनेवाला हैं | जीर्णज्वर तथा धातुगत ज्वर दूर करता है | उदररोग, आँतों के दोष, मूत्रसंबंधी विकार, स्वप्नदोष तथा धातुसंबंधी बीमारियों में लाभ करता हैं | पाचनतंत्र, नाडीतंत्र तथा ओज-वीर्य की रक्षा करता है | छोटे=बाद, रोगी-निरोगी सभी इसका सेवन कर सकते हैं | रसायन चूर्ण बड़ी उम्र में होनेवाली व्याधियों का नाश करता हैं | शक्ति, स्फूर्ति एवं ताजगी तथा दीर्घ जीवन देन्नेवाला है | ४० वर्ष की उम्र से बड़े प्रत्येक व्यक्ति को तो निरोग रहने हेतु हररोज इसका सेवन विशेष रूप से करना चाहिए |

यह रसायन चूर्ण के नाम से सभी संत श्री अशारामजी आश्रमों तथा सेवाकेन्द्रों पर उपलब्ध है |

अमृत द्रव


यह एक बहुत ही असरकारक औषधि है | इसके प्रयोग से सर्दी-जुकाम, खाँसी, सिरदर्द तथा गले एवं दाँत के रोगों में लाभ होता है |

प्रयोग विधि – २ से ५ बूँद (बच्चों के लिए १ – २ बूँद) दवा १ कप गुनगुने पानी में डालकर सुबह – शाम पिये |

- ऋषिप्रसाद –जनवरी २०१५ से

लाभकारी मुद्रा – मासिक धर्म नियमित करनेवाली असरकारक मुद्रा

लाभ – इसके नियमित अभ्यास से –

१) मासिक धर्म से संबंधित समस्याएँ दूर हो जाती है |

२) मांसपेशियों और नाड़ियों को आराम मिलता है, जिससे दबाव, तनाव व् क्रोध के आवेग को नियंत्रित करने की क्षमता बढती है |

३) अतिस्राव में भी नियन्त्रण होता है |

४) पेट को शीतलता मिलती है और मस्तिष्क की कोशिकाओं को सक्रिय करने में सहायता होती है |

विधि – दोनों हाथो की ऊँगलियों को इस तरह फँसाएँ कि दोनों अंगूठों के अग्रभाग आपस में जुड़े हुए हों | दाहिने हाथ की तर्जनी को बायें हाथ की तर्जनी और मध्यमा के बीच फँसा दें | दाहिने हाथ की मध्यमा को बायें हाथ की मध्यमा और अनामिका के ऊपर से ले जाकर कनिष्ठिका के नीचे फँसा दें | दाहिने हाथ की अनामिका बायें हाथ की मध्यमा और अनामिका के नीचे रहेगी | अब दाहिने हाथ की कनिष्ठिका को बायें हाथ की कनिष्ठिका के नाख़ून के ऊपर रखें |

- ऋषिप्रसाद –जनवरी २०१५ से