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Wednesday, October 30, 2019

विशिष्ट गुणों से युक्त दही


सब प्रकार के दहियों में गाय के दूध से बना दही श्रेष्ठ और अधिक गुणकारी है | आयुर्वेद शास्त्र ‘भावप्रकाश निघंटु’ में आता है कि ‘गाय के दूध से बना दही सब प्रकार के दहियों में श्रेष्ठ, विशिष्ट गुणोंवाला, रूचि एवं भूख वर्धक, ह्रदय को बल देनेवाला, पुष्टिकारक व वातशामक है |’

रुसी जीव वैज्ञानिक एली मेचनीकोफ़ ने दही पर अनेक प्रयोग करने पर पाया कि दही में दूध के अम्ल से उत्पन्न सूक्ष्म जीवाणु आँतो में विषाणुओं की उत्पत्ति को रोकते हैं | दही भूख तथा पाचनशक्ति को बढ़ता है | अतिसार का उपचार दही से तत्काल होता है | दही से कैंसर की भी चिकित्सा होती है |

ध्यान दें : उपरोक्त गुण पूरी तरह जमे हुए ताजे व खटासहित दही में होते हैं |

सेवन-विधि : दिन में जब भी दही खाना हो तो गाय का घी, मिश्री, मूँग, शहद, आँवला-इनमें से किसीके साथ खायें | दही में नमक नहीं मिलायें | रात्रि में दही नहीं खाना चाहिए |

लोककल्याण सेतु – अक्टूबर २०१९ से

बलवर्धक मलाई



दूध की मलाई बहुत पौष्टिक और शक्तिवर्धक होती है | आयुर्वेद के प्रसिद्ध ग्रंथ ‘भावप्रकाश निघंटु’ के अनुसार ‘मलाई भारी, शीतल, तृप्तिकारक, वीर्यवर्धक तथा पित्त-रक्तविकार और वात को दूर करनेवाली, पुष्टिदायी, स्निग्ध तथा कफ, बल, शुक्र एवं रस-रक्तादि वर्धक होती है |’

मलाई में पीसी मिश्री मिलाकर सुबह खाली पेट खाने से शरीर पुष्ट, सुडौल और शक्तिशाली होता है | इसके सेवन से पेट की जलन, वायु-प्रकोप (गैस), पित्त-प्रकोप, प्यास और पेट में बढ़ी हुई गर्मी का शमन होता है | चेहरे की त्वचा पर मलाई का लेप लगाने से त्वचा कांतिपूर्ण, चिकनी, मुलायम और स्वस्थ रहती है | दुध पीते समय मलाई हटानी नहीं चाहीए | सोने के दो घंटे पहले मलाई के साथ ही दूध पीना चाहिए | दूध और मलाई मिलकर बहुत पौष्टिक और शक्तिवर्धक आहार बन जाता है |

सावधानी : कफ, खाँसी, अपच व कब्ज के रोगी को मलाई का सेवन नहीं करना चाहिए |

लोककल्याण सेतु –अक्टूबर २०१९ से

गौर वर्ण व ओजस्वी-तेजस्वी संतान हेतु


काश्यप ऋषि ने कहा है :
श्वेताया: श्वेत पुं वत्साया गो: क्षीरणे | (का.शा. : १९)

यदि गर्भवती माताएँ श्वेत रंग के बछड़ेवाली श्वेत गाय के दूध का चाँदी के पात्र में सेवन करें तो उनको दीर्घायु, गोरे तथा ओजस्वी, तेजस्वी व स्वस्थ पुत्र की प्राप्ति होती है |

राजस्थान की एक गोपालक संस्था द्वारा यह प्रयोग २५०० महिलाओं पर किया गया | सभीकी सही समय पर प्रसूति हुई | किसी भी महिला को सिजेरियन डिलीवरी (शल्यक्रिया द्वारा प्रसूति) नहीं करवानी पड़ी | सभीके शिशु ओजस्वी, तेजस्वी व स्वस्थ पैदा हुए |

लोककल्याण सेतु – अक्टूबर २०१९ से

ग्रहबाधा व वास्तुदोष दूर करने का अचूक उपाय


आजकल वास्तुदोष-निवारण के नाम पर तीन टॉग के कछुआ, मेंढक की मूर्ति घरों में रखने का रिवाज चल पड़ा है | यह तथाकथित फेंगशुई चीनी गृहसज्जा करना है | यदि भवन में किसी भी प्रकार का वास्तुदोष है तो उसमें एक देशी गाय रख लें, समस्त वास्तुदोष दूर हो जायेंगे | यदि गाय पालना सम्भव न हो तो ड्योढ़ी (दहलीज या द्वार के पास की भूमि) अथवा आँगन में सवत्सा (बछड़ेवाली) गाय का चित्र लगा लें और घर में गोमूत्र या गोमूत्र अर्क का छिड़काव करें |

शनि, राहू-केतु आदि ग्रहों के दोष-निवारण के लिए प्रत्येक मंगलवार या शनिवार को अपने हाथ से आटे की लोई गुड़सहित प्रेमपूर्वक किसी नंदी अथवा गाय को खिलायें | कैसी भी ग्रहबाधा हो, दूर हो जायेगी |

लोककल्याण सेतु – अक्टूबर २०१९ से


मेधावी व निरोगी संतान हेतु अनुभूत प्रयोग


गर्भवती महिला रोज श्रद्धापूर्वक गाय का पूजन कर उसकी कम-से-कम एक परिक्रमा करे, उसे अपने हाथ से रोटी तथा गुड़ खिलाये और सुबह-शाम गोदुग्ध का पान करे तो निश्चित ही आनेवाली संतान फुर्तीली, सशक्त, मेधावी एवं निरोगी होगी और प्रसव भी सहज ढंग से होगा | 

प्रसव-पीड़ा कम होगी | उपरोक्त लाभों के लिए यह प्रयोग प्रतिदिन करना अनिवार्य है | प्रतिदिन सम्भव न हो तो जितने दिन सम्भव हो करे, तब भी लाभ होगा |

लोककल्याण सेतु –अक्टूबर २०१९ से

बाँसुरी की आवाज से गायों में प्रेम, मधुरता व वात्सल्य


गो-दोहन बेला के पूर्व प्रात:काल बाँसुरी की ध्वनि में राग ललित, राग बिभास, भैरवी, आसावरी के स्वर निकालने पर अल्प समय में अतिशीघ्र दूध निकल आता है | यह गुण देशी गाय में ही होता है |

लोककल्याण सेतु – अक्टूबर २०१९ से

शास्त्रों में वर्णित गौ-महिमा


जो प्रतिदिन स्नान करके गौ का स्पर्श करता है, वह मनुष्य सब प्रकार के स्थूल पापों से भी मुक्त हो जाता है | जो गौओं के खुर से उडी हुई धूल को सिर पर धारण करता है, वह मानो तीर्थ के जल में स्नान कर लेता है और सभी पापों से छुटकारा प् जाता है | (पद्म पुराण, सृष्टि खंड, अध्याय:५७)

गौ का स्पर्श करने, सात्त्विक-सदाचारी ब्राह्मण को नमस्कार करने और सद्गुरु, देवता का भलीभाँति पूजन करने से गृहस्थ सारे पापों से छुट जाते हैं | (स्कंद पुराण, प्रभास खंड)

गंडस्पर्श कर लेने मात्र से ही गौएँ मनुष्य के समस्त पापों को नष्ट कर देती हैं और आदरपूर्वक सेवन किये जाने पर अपार सम्पत्ति प्रदान करती हैं | वे ही गायें दान दिये जाने पर सीधे स्वर्ग ले जाती हैं | ऐसी गौओं के समान और कोई भी धन नहीं हैं | (बृहत्पराशर स्मृति)

जो प्यास से व्याकुल हुई गौओं को पानी पीने से विघ्न डालता है, उसे ब्रह्मघाटी समझना चाहिए | (महाभारत, अनुशासन पर्व : २४.७ )

जो एक वर्ष तक प्रतिदिन स्वयं भोजन के पहले दुसरे की गाय को एक मुट्ठी घास खिलाता है, उसका वह व्रत समस्त कामनाओं को पूर्ण करनेवाला होता है | (महाभारत, अनुशासन पर्व : ६९.१२)

प्रतिपदा का  चन्द्र-दर्शन केवल गाय ही कर पाती है | यमदूतों व प्रेतत्माओं को देख लेने में गाय सक्षम है | उनके दिखने पर वह विशिष्ट प्रकार की आवाज निकालने लगती है | गाय रँभाने की तरंगे जहाँ तक पहुँचती हैं वहाँ तक आसुरी शक्तियों का प्रभाव नष्ट हो जाता है |

लोककल्याण सेतु -  अक्टूबर २०१९ से

Monday, October 14, 2019

लक्ष्मी किसको सताती है, किसको सुख देती है ?


जहाँ शराब-कबाब का सेवन, दुर्व्यसन, कलह होता है वहाँ की लक्ष्मी ‘वित्त’ बनकर सताती है, दुःख और चिंता उत्पन्न करती है | जहाँ लक्ष्मी का धर्मयुक्त उपयोग होता है वहाँ वह महालक्ष्मी होकर नारायण के सुख से सराबोर करती हैं |
ऋषिप्रसाद – अक्टूबर २०१९ से

ग्रहपीड़ा से रक्षा तथा आरोग्य व लक्ष्मी प्राप्ति हेतु

दीपावली के दिन लक्ष्मी-पूजन के समय लक्ष्मीजी को गेंदे के फूलों का हार चढ़ाने से धन-सम्पदा एवं आरोग्य की प्राप्ति होती है | जो व्यक्ति भगवान विष्णु को गेंदे के फुल अर्पित करता है, उसका सर्वार्थ कल्याण होता है तथा उसकी ग्रहपीड़ाएँ कम होती हैं |

ऋषिप्रसाद – अक्टूबर २०१९ से    

स्वास्थ्य के लिए वरदान है गौशाला की भूमि में बोया अनाज


स्वास्थ्य के लिए विटामिन ‘बी-१२’ बड़ा महत्त्वपूर्ण होता है | यह बड़ी उम्र में कम बनता है अत: इस उम्र में तो इसकी परम आवश्यकता पडती है | इसके लिए लोग गोलियाँ आदि क्या-क्या खाते हैं | शरीर में डी.एन.ए. एवं लाल रक्तकणों के सुव्यवस्थित निर्माण के लिए तथा तंत्रिका तंत्र के सही कार्य करने हेतु इसकी ख़ास जरूरत होती है |

देशी गाय का गोबर. गोमूत्र, गोभूमि आदि आरोग्य के लिए वरदान हैं | देशी गाय के दूध, दही, छाछ, मक्खन में विटामिन ‘बी-१२’ पाया जाता है | यह देखकर विज्ञानी चकित हुए कि गौ-गोबर से पोषण प्राप्त करके जो चारा, अनाज या सब्जी बनती है उसमें विटामिन ‘बी-१२’ पाया गया | 

गौ-गोबर, गोमूत्र, गोभूमि से पोषित (गौशाला की भूमि में बोया हुआ) जौ, गेहूँ, चावल, चना आदि अन्न, सब्जी भी महत्त्वपूर्ण आहार हो जाते हैं, ‘बी-१२’ से सम्पन्न हो जाते हैं |

ऋषिप्रसाद – अक्टूबर २०१९ से

ब्रह्ममुद्रा


लाभ : ब्रह्ममुद्रा योग की लुप्त हुई क्रियाओं में से एक महत्त्वपूर्ण मुद्रा है | इसके नियमित अभ्यास से –
१] ध्यान,साधना, सत्संग व अध्ययन में मन लगने लगता है |
२] चक्कर आने बंद होते हैं |
३] अनिद्रा और अतिनिद्रा पर स्थायी प्रभाव पड़ता है |
४] नींद से अधिक सपने आने कम हो जाते हैं |
५] मानसिक अवसाद व तनाव कम होते हैं |
६] एकाग्रता बढती है |
७] कम्प्यूटर या लैपटॉप पर कार्य करनेवालों के लिए यह अत्यंत उपयोगी है | इससे गर्दन की मांसपेशियाँ लचीली व मजबूत होती हैं तथा यह सर्वाइकल स्पोंडिलाइटिस में लाभदायी है |
८] मस्तिष्क में रक्तसंचार तेज होता है |
९] थकान एवं आँखों की कमजोरी दूर होती है | इससे यह अध्ययन करनेवाले छात्रों के लिए विशेष लाभप्रद है |

विधि : वज्रासन या पद्मासन में कमर सीधी रखते हुए बैठे | हाथों को घुटनों पर रखें | कंधों को ढीला रख के गर्दन को सिर के साथ ऊपर-नीचे करें | सिर को ऊपर ले जाते समय आरामपूर्वक जितना अधिक पीछे ले जा सकें, ले जायें | श्वास की गति स्वाभाविक रहे | फिर गर्दन को सीधा रखते हुए दायी तरफ इतना घुमायें की ठोड़ी और कंधा एक ही सीध में आ जायें | इस स्थिति में कुछ सेकंड रुकें | फिर इसी प्रकार गर्दन को बायीं तरफ ले जाकर सेकंड रुकें | अंत में गर्दन ढीली छोड़ के गोलाई में चारों तरफ, फिर विपरीत दिशा से चारों तरफ गोल घुमायें | इस कर्म में कानों को कंधों से छुआयें |प्रत्येक क्रिया ५-१० बार खूब धीरे-धीरे करें |

सावधानियाँ : अ] गर्दन को ऊपर-नीचे करते समय झटका न दें |
ब] परी क्रिया के दौरान आँखें खुली रखें |        
क] गर्दन या गले में कोई गम्भीर रोग हो तो चिकित्सक की सलाह से ही करें |

ऋषिप्रसाद – अक्टूबर २०१९ से

शीत ऋतू में स्वास्थ्य-संवर्धन हेतु


(शीत ऋतू : २३ अक्टूबर से १८ फरवरी )
क्या करें
१] मधुर, लवण (नमकयुक्त) और अम्ल (खट्टे)रसयुक्त तथा गरम प्रकृति के व स्निग्ध पदार्थो का सेवन पाचनशक्ति के अनुसार करें |
२] प्रात:काल प्राणायाम करना, दौड़ लगाना या तेज चलना, व्यायाम, योगासन, सूर्यनमस्कार, सूर्यस्नान, मोटे व गर्म कपड़े पहनना, गुनगुने पानी से स्नान पथ्य विहार है |
३] च्यवनप्राश, सौभाग्य शुंठी पाक, अश्वगंधा पाक आदि बल-वीर्यवर्धक व पौष्टिक पदार्थों का सेवन करके वर्षभर के लिए पर्याप्त शक्ति का संचय किया जा सकता है |
४] रात्रि को भिगो के सुबह उबाले हुए देशी चने, गुड, केले, सिंघाड़े, खजूर, खोपरा, सूखे मेवे, उड़द, मेथीदाना, आँवला, मट्ठा आदि का सेवन व दूध में अश्वगंधा चूर्ण, शतावरी चूर्ण अथवा घी डालकर पीना शक्ति व पुष्टि दायक है |
५] इस ऋतू में तिल या सरसों के तेल की मालिश विशेष लाभदायी है | इससे त्वचा के रूखेपन एवं वातविकारों से भी बचाव होता है | मालिश के बाद उबटन ( सप्तधान्य उबटन) से स्नान करना चाहिए | कान व नाक में तिल का तेल या योगी आयु तेल डालने से मस्तिष्क, ज्ञानेन्द्रियाँ व बालों की जड़े पुष्ट होती है |
६] हेमंत ऋतू ( २३ अक्टूबर से २१ दिसम्बर) में हरड चूर्ण में चौथाई से आधा भाग सोंठ का चूर्ण मिलाकर तथा शिशिर ऋतू ( २२ दिसम्बर से १८ फरवरी) में आठवाँ भाग पीपर (पिप्पली) चूर्ण मिला के ४ से ५ ग्राम मिश्रण प्रातः पानी से लेना हितकारी है | ये उत्तम रसायन हैं |

क्या न करें
१] रूखे, कसैले, कडवे, तीखे, शीत प्रकृति के व वायुवर्धक पदार्थों के सेवन से बचें |
२] देर रात तक जागना, सुबह देर तक सोये रहना, श्रम और व्यायाम न करना, देर तक भूखे रहना, बहुत ठंड सहना, रात को देर से भोजन करना और भोजन के तुरंत बाद सो जाना, दिन में सोना, अधिक ठंडे पानी से स्नान करना अपथ्य विहार है |
३] ठंडा पानी, ठंडी हवा, बासी पदार्थों का सेवन, खुले वाहन में सवारी करना, खटाई का अधिक प्रयोग , आइसक्रीम, कोल्ड ड्रिंक्स, सत्तू आदि का सेवन, चित्त को काम, क्रोध, ईर्ष्या, द्वेष से व्याकुल रखना हानिकारक है |
४] इस ऋतू में रुक्ष पदार्थों के सेवन एवं अति अल्पाहार से व अधिक उपवास से शारीरिक धातुओं का ह्रास होकर शरीर दुर्बल हो जाता है |
५] सुबह देर तक सोने एवं नहाने में आलस्य करने से शरीर की बढ़ी हुई गर्मी सिर, आँखों, पेट, पित्ताशय, मूत्राशय, मलाशय आदि अंगों पर बुरा असर करती है, जिससे कई प्रकार के रोग उत्पन्न होते हैं ( सुबह जल्दी स्नान करने से गर्मी बाहर निकल जाती है |)
६] यह ऋतू प्रारम्भ हो जाने मात्र से ही गरिष्ठ व पौष्टिक पदार्थों का सेवन शुरू कर देना उचित नहीं हैं, बल्कि जैसे-जैसे ठंड बढती जाय व भूख बढने लगे वैसे-वैसे युक्तिपूर्वक खान-पान बदलना चाहिए |
७] कार्तिक मास में दाले व करेला न खायें |

ऋषिप्रसाद – अक्टूबर २०१९ से