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Wednesday, September 8, 2010

अपान मुद्रा













विधिः अँगूठे के अग्रभाग से मध्यमा और अनामिका (छोटी उँगली के पासवाली उँगली) के अग्रभागों को स्पर्श करें। बाकी की दो उँगलियाँ सहजावस्था में सीधी रखें।

अवधिः इस मुद्रा का अभ्यास किसी भी समय, कितनी भी अवधि के लिए कर सकते हैं परंतु प्रतिदिन नियमित रूप से करें।

लाभः इस मुद्रा के अभ्यास से शरीर की अंदरूनी सफाई में मदद मिलती है। आँतों में फँसे मल और विषैले पदार्थों को आसानी से बाहर निकालने में यह मुद्रा काफी असरदार है। इसके फलस्वरूप शारीरिक व मानसिक पवित्रता में वृद्धि होती है और अभ्यासकर्ता में सात्त्विक गुणों का समावेश होने लगता है। मूत्र-उत्सर्जन में कठिनाई, वायुदोष, अम्लदोष (पित्तदोष), पेटदर्द, कब्जियत और मधुमेह जैसी बीमारियों में भी यह मुद्रा काफी लाभदायक सिद्ध हुई है। जिन्हें पसीना न आने के कारण परेशानी होती हो, वे इस मुद्रा के अभ्यास से जल्द ही उससे छुटकारा पा सकते हैं। यदि छाती और गले में कफ जम गया हो तो इस मुद्रा के अभ्यास से ऐसे उपद्रवी कफ को भी सहज ही शरीर से बाहर किया जा सकता है। इसका नियमित अभ्यास कैंसर जैसी भयानक बीमारी की भी रोकथाम करने में सहायक है।


ऋषि प्रसाद, अगस्त 2010


चतुर्मास में जीवनशक्ति बढ़ाने के उपायः

  • साधारणतया चतुर्मास में पाचनशक्ति मंद रहती है। अतः आहार कम करना चाहिए। पन्द्रह दिन में एक दिन उपवास करना चाहिए।
  • चतुर्मास में जामुन, कश्मीरी सेब आदि फल होते हैं। उनका यथोचित सेवन करें।
  • हरी घास पर खूब चलें। इससे घास और पैरों की नसों के बीच विशेष प्रकार का आदान-प्रदान होता है, जिससे स्वास्थ्य पर अच्छा प्रभाव पड़ता है।
  • गर्मियों में शरीर के सभी अवयव शरीर शुद्धि का कार्य करते हैं, मगर चतुर्मास शुद्धि का कार्य केवल आँतों, गुर्दों एवं फेफड़ों को ही करना होता है। इसलिए सुबह उठने पर, घूमते समय और सुबह-शाम नहाते समय गहरे श्वास लेने चाहिए। चतुर्मास में दो बार स्नान करना बहुत ही हितकर है। इस ऋतु में रात्रि में जल्दी सोना और सुबह जल्दी उठना बहुत आवश्यक है।
चातुर्मास :- 30th June'2012 to 24th Nov' 2012
ऋषि प्रसाद, अगस्त 2010

Means to increase vital force/life energy during chaturmaas:


  • Digestion power is usually weakened during the Chaturmaas. Therefore food intake should be reduced. Fasting should be observed once in a fortnight.
  • · Blackberry and Kashmiri apples are available during the chaturmaas. They should be consumed appropriately.
  • · Walk a lot bare footed on lawns and green grass. There occurs a special interaction between the grass and the veins of the legs, which have a beneficial effect on the health.
  • · During summer all of the body parts undergo a cleansing activity, but during the chaturmaas this purification happens only for the intestine, kidney and lungs. Therfore take deep breaths just after waking up, while roaming and while taking bath in mornings and in evenings. Sleeping early and Waking early is very essential in this season.

Chaturmaas: - 30th June'2012 to 25th Nov' 2012

Rishi Prasad, August 2010


Saturday, August 14, 2010

काल सर्प योग

नाग पंचमी (11th Aug 2013) के दिन , जिन को काल सर्प योग है , वे शांति के लिए ये उपाय करे .
पंचमी के दिन पीपल के नीचे, एक दोने में कच्चा दूध रख दीजिये , घी का
दीप जलाए , कच्चा आटा , घी और गुड मिला कर एक छोटा लड्डू बना के रख
दे और ये मन्त्र बोला कर प्रार्थना करें :-

ॐ अनंताय नमः
ॐ वासुकाय नमः
ॐ शंख पालाय नमः
ॐ तक्षकाय नमः
ॐ कर्कोटकाय नमः
ॐ धनंजयाय नमः
ॐ ऐरावताय नमः
ॐ मणि भद्राय नमः
ॐ धृतराष्ट्राय नमः
ॐ कालियाये नमः

काल सर्प योग है तो उस का प्रभाव निकल जाएगा .. तकलीफ दूर होगी
..काल सर्प योग की शांति होगी ...

Kaal Sarp Yog

On the eve of Nag Panchami (11th August 2013), all those who are confounded with Kaal Sarp Yog, can perform the following to bring forth peace in their lives.
On this eve, keep raw milk in a container under a Peepal tree, light a ghee lamp, offer dumplings made of raw flour, ghee and jaggery, and recite the following mantras during prayers:

AUM ANANTAAYA NAMAH
AUM VAASUKAAYA NAMAH
AUM SHANKHA PALAAYA NAMAH
AUM TAKSHAKAAYA NAMAH
AUM KARKOTAKAYA NAMAH
AUM DHANANJAAYA NAMAH
AUM AIRAAVATAAYA NAMAH
AUM MANI BHADRAAYA NAMAH
AUM DRITHARASHTRAAYA NAMAH
AUM KAALIYAAYE NAMAH

Those afflicted with Kaal Sarp Yog will get alleviated from its pangs.... Mind will be at peace.


Shivpur(M. P.) Shri Sureshmaharaj 14 August 2010

Friday, August 13, 2010

बेहोश होने पर( Coma से बहार लाने )

कोई बेहोश हो गया हो तो उसके सिर पर तेल की मालिश करो, पैरों पर तिल का तेल रगड़ो । उस के कानों में "ऐं ऐं" अथवा " " बोलें ।

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Pushkar 9th Aug 2010

नेत्र ज्योति बढाने के लिए

दोनों हाथों के नाखूनों को आपस में रगड़ने से नेत्र ज्योति बदती है ।

Pushkar 9th Aug 2010

Monday, August 9, 2010

विघ्न नाश, रोग नाश एवं कार्य सिद्धि के लिए

गेहूं, चावल , उड़द , मूंग और तिल का आटा गूंधकर, घी डाल के दिया जला दें | हनुमानजी या बरगद या पीपल के पेड़ के नीचे दिया जलाये ।

हनुमानजी के आगे सरसों से ऊपर का दीया जलाये तो रोगों का नाश करने मे मदद मिलेगी |

गणपति जी के प्रतिमा के निकट जलाएंगे तो विघ्न नाश करने में मदद मिलेगी |

पीपल या वट वृक्ष के नीचे हनुमानजी का सुमिरन करके ऊपर युक्त दीया जलाया जाए तो कार्यसिद्धि करने मे मदद मिलेगी |

Sureshanandji -Faridabad

गर्भ की रक्षा

किसी महिला को बार बार गर्भ पात हो जाता हो या बच्चा होने के बाद तुरंत मर जाता हो तो ऐसी महिला डेढ़ – दो महीने तक ऐसा करे :- दोनों टाइम सात्विक भोजन करे, तीखा मिर्च मसाला वाला नहीं खाएरोज सुबह देसी गाय का दूध पिए..ऐसा नहीं की दूध पहले से निकाल के रखा और ग्वाला घर पे ला कर देगा फिर उस महिला ने पिया ऐसा नहीं..वो महिला गौशाला में जाए, साथ में मिश्री का पाउडर तैयार रखेगौशाला में जैसे ही दूध निकाला, तुरंत छाना और मिश्री पाउडर डाल के पी ले, ऐसा डेढ़-दो महीना करे…..रोज भगवान श्रीकृष्ण का ध्यान करे और प्रार्थना करें कि आप ने उत्तरा के गर्भ का रक्षण किया, ऐसे मेरे भी गर्भ की रक्षा करे.. गाय का ताज़ा दूध बिना गरम किया हुआ पीना- ये सर्वोत्तम उपाय है।

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Sureshanandji Jodhpur 6th Aug. 2010