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Tuesday, August 11, 2020

पुण्यदायी तिथियाँ

 

२२ अगस्त : गणेश चतुर्थी ( चन्द्र-दर्शन निषिद्ध, चन्द्रास्त – रात्रि ९:४९) (इस दिन ‘ॐ गं गणपतये नम: |’ का जप करने और गुड़मिश्रित जल से गणेशजी को स्नान कराने एवं दूर्वा व सिंदूर की आहुति देने से विघ्न-निवारण होता है तथा मेधाशक्ति बढती है |


इस दिन चन्द्र-दर्शन से कलंक लगता है | यदि भूल से भी चन्द्रमा दिख जाय तो उसके कुप्रभाव को मिटाने के लिए इस लिंक पर दि गयी ‘सय्मंतक मणि की चोरी की कथा’ पढ़ें : ब्रह्मवैवर्त पुराण के निम्न मंत्र का २१, ५४ या १०८ बार जप करके पवित्र किया हुआ जल पियें |



सिंह: प्रसेनमवधीत  सिंहो जाम्बवताहत: |

सुकुमारक मारोदीस्तव ह्येषस्यमन्तक: ||

२६ अगस्त : बुधवारी अष्टमी ( सूर्योदय से सुबह १०:४० तक)

२९ अगस्त : पद्मा एकादशी (व्रत करने व माहात्म्य पढ़ने – सुनने से सब पापों से मुक्ति )

से १७ सितम्बर : महालय श्राद्ध

१३ सितम्बर : रविपुष्यामृत योग (शाम ४:३४ से १४ सितम्बर सूर्योदय तक), इंदिरा एकादशी (बड़े-बड़े पापों का नाशक तथा नीच योनि में पड़े हुए पितरों को भी सद्गति देनेवाला व्रत )

१६ सितम्बर : षडशिति संक्रांति (पुण्यकाल : दोपहर १२:३४ से सूर्यास्त) (ध्यान, जप व पुण्यकर्म का ८६,००० गुना फल )

१७ सितम्बर : सर्व पित्री अमावस्या का श्राद्ध

१८ सितम्बर से १६ अक्टूबर : पुरुषोत्तम मास ( इसमें केवल ईश्वर के उद्देश्य से जो जप, सत्संग, कीर्तन, व्रत, उपवास, स्नान, दान, पूजन किये जाते हैं उनका अक्षय फल होता है |)


ऋषिप्रसाद – अगस्त २०२० से               

 

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