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Monday, February 14, 2022

शारीरिक – मानसिक आरोग्य हेतु संजीवनी बूटी : पैदल भ्रमण

 


प्रात: पैदल भ्रमण एक सुंदर व्यायाम है | यह संजीवनी बूटी के समान गुणकारी है | भ्रमण करते हुए वायु स्नान या सेवन से शरीर में तेज, ओज, बल, कांति, स्फूर्ति, उत्साह एवं आरोग्य का संचार होता है, चित्त प्रसन्न होता है |

 

एक कहावत है : सौ दवा, एक हवा | ऋग्वेद ( मंडल १०, सूक्त १८६, मंत्र १ ) में प्रार्थना की गयी है : हमारे ह्रदय के लिए शातिदायक, वैभवकारक, औषधिरूप वायु प्राप्त हो अर्थात हमें निरोग, पुष्टिकारक व आयुवर्धक उत्तम वायु मिलती रहे |

 

पैदल भ्रमण दिनचर्या कका एक अंग हो

भारत में प्राचीन काल से ही पैदल चलने का प्रचलन है | इसीका परिणाम है कि हमारे देश के लोग उतने मोटे व बीमार नहीं होते जितने पाश्चात्य देशों के होते हैं | बच्चे हों या बुजुर्ग, महिला हो या पुरुष सभी आयु-वर्ग के व्यकित्यों के लिए प्रात: पैदल भ्रमण नि:शुल्क औषधि है |

पूज्यश्री कहते है : “प्रात: ब्राह्ममुहूर्त में वातावरण में निसर्ग की शुद्ध एवं शक्तियुक्त वायु का बाहुल्य होता है, जो स्वास्थ्य के लिए हितकारी है |

 

भ्रमण शरीर के पृष्ट-भाग कि मांसपेशियों को मजबूत प्रदान करता है | यह रक्तवाहिकाओं को खोल देता है, जिससे मांसपेशियों में ऑक्सीजन और पोषक तत्त्वों की मात्रा बढ़ जाती है | पैदल भ्रमण पीठ के निचले भाग की मांसपेशियों में जमा विषाक्त द्रव्यों को निकालकर लचीलापन प्रदान करता है | यह कैंसर, ह्रदयरोग, कमर-दर्द, श्वास आदि रोगों में लाभदायी है | शोधकर्ताओं के अनुसार पैदल चलने से शरीर में एंडोर्फिन नामक रसायन की मात्रा बढती है जो प्राकृतिक दर्द-निरोधक है | प्रचुर मात्रा में भ्रमण चिंता, उदासी, थकान, उत्साह का अभाव आदि तनाव के लक्षणों में काफी कमी ला देता है | इससे एकाग्रता, प्रश्न हल करने की शक्ति, स्मृति व संज्ञानात्मक क्रियाओं में वृद्धि होती है |

 

पैदल भ्रमण का उत्तम समय क्या और कितना करें भ्रमण ?

पैदल भ्रमण का उत्तम समय क्या और कितना करें भ्रमण ? सायंकाल कर सकते है | प्रात: भ्रमण से दिनभर स्फूर्ति बनी रहती है |

२ -३ मील ( ३ से ५ कि.मी.) चल सकें तो अच्छा, नहीं तो प्रात:काल गुनगुना या सामान्य पानी पीकर खुली हवा में आरम्भ में आधा किलोमीटर से २ -३ किलोमीटर तो कोई भी स्वस्थ व्यक्ति आसानी से टहल सकता है |

 

हो सके तो कुछ समय पंजो के बल चलें | इससे पेट में संचित मलो का सरलता से निष्कासन होगा | जहाँ तक हो सके अकेले ही भ्रमण करें |

 

वसंत ऋतू (१८ फरवरी से १९ अप्रैल) आने पर शीत ऋतू में शरीर में संचित हुआ कफ प्रकुपित होने से जठराग्नि मंद हो जाती है | आयुर्वेद शास्त्रों के अनुसार वसंत ऋतू में पैदल चलना बहुत ही हितकारी है | वसन्ते भ्रमणं पथ्यम | पैदल भ्रमण से शरीर में मृदुता, हलकापन व स्फूर्ति आती है और भूख भी खुलकर लगती है |

 

ऋषिप्रसाद – फरवरी २०२२  

 

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