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Thursday, February 7, 2019

शिवरात्रि का व्रत की ३ महत्त्वपूर्ण बातें

महाशिवरात्रि वस्त्र-अलंकार से इस देह को सजाने का, मेवा-मिठाई खाकर जीभ को मजा दिलाने का पर्व नहीं है | यह देह से परे देहातीत आत्मा में आत्मविश्रांति पाने का पर्व है, संयम और तप बढ़ाने का पर्व है | महाशिवरात्रि का व्रत ठीक से किया जाय तो अश्वमेध यज्ञ का फल होता है | इस व्रत में ३ बातें होती है :

१] उपवास :उप’ माने समीप | आप शिव के समीप, कल्याणस्वरूप अन्तर्यामी परमात्मा के समीप आने की कोशिश कीजिये, ध्यान कीजिये | महाशिवरात्रि के दिन अन्न-जल या अन्न नहीं लेते हैं | इससे अन्न पचाने में जो जीवनशक्ति खर्च होती है वह बच जाती है | उसको ध्यान में लगा दें | इससे शरीर भी तंदुरुस्त रहेगा |

२] पूजन : आपका जो व्यवहार है वह भगवान के लिए करिये, अपने अहं या विकार को पोसने के लिए नहीं | शरीर को तंदुरुस्त रखने हेतु खाइये और उसकी करने की शक्ति का सदुपयोग करने के लिए व्यवहार कीजिये, भोग भोगने के लिए नहीं | योगेश्वर से मिलने के लिए आप व्यवहार करेंगे तो आपका व्यवहार पूजन हो जायेगा |
महाशिवरात्रि हमें सावधान करती हैं कि आप जो भी कार्य करें वह भगवत हेतु करेंगे तो भगवान की पूजा हो जायेगी |
३] जागरण : आप जागते रहें | जब ‘मैं’ और ‘मेरे’ का भाव आये तो सोच लेना कि ‘यह मन का खेल है |’ मन के विचारों को देखना | क्रोध आये तो जागना कि ‘क्रोध आया है |’ तो क्रोध आपका खून या खाना खराब नहीं करेगा | काम आया और जग गये कि ‘यह कामविकार आया है |’ तुरंत आपने हाथ-पैर धो लिये, रामजी का चिन्तन किया, कभी नाभि तक पानी में बैठ गये तो कामविकार में इतना सत्यानाश नहीं होगा |

आप जगेंगे तो उसका भी भला होगा, आपका भी भला होगा | तो जीवन में जागृति की जरूरत है |

ऋषिप्रसाद – फरवरी २०१९ से 

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