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Sunday, September 4, 2022

साइड इफेक्ट हुआ हो तो

 आयुर्वेद साइड इफेक्ट न हो ऐसा बताता है। गिलोय का रस ले लिया करो। गिलोय जहां तहां खूब मिलती है। उसकी टहनियों तोड़ के मिक्सी में गुमा दो और सुबह सुबह गिलोय का रस 20 - 25 मिलि. ले लिया करो। कैसा भी साइड इफेक्ट हुआ हो भाग जाएगा।

Thursday, September 1, 2022

जामफल

कई चीजें स्वास्थप्रद होती हैं। कई सब्जियां स्वास्थप्रद होती है जैसे जमफल। त्रिदोष नाशक है। 132 प्रकार की बीमारियों का नाश करता है जामफल लेकिन इसके बीज चबाने नहीं चाहिए। खाली पेट जामफल खाकर फिर खाना खाओ। बहुत सारी बीमारियों की जड़ हटा देगा। पूरा ही त्रिदोष नाशक है।

दांत की मजबूती के लिए

 दांत की मजबूती के लिए गुलाब जीरा पाउडर 15 रुपए की डब्बी मिलती है। इस पाउडर को रात को घिस लो और लार थूकना हो तो थूक लो पर कुल्ला मत करो गुलाब जीरा पाउडर गुलाब के फूलों का ही है। इससे मसूड़े व दांत मजबूत बनते हैं।

बच्चों को कफ रहता हो तो

 बच्चों को कफ रहता हो तो 50 ग्राम शहद व 10 ग्राम लहसुन की चटनी बना कर बच्चों को चटा दें। सर्दी खांसी में तो आराम होगा साथ ही पेट की कृमि भी नष्ट होती है।

Tuesday, August 30, 2022

आम के आम, गुठलियों के दाम

 

आम की गुठली को तोड़कर उसमें निकली गिरी को टुकड़े करके नमक में सेक ले 100 ग्राम लेने से साल भर B12 की कमी नही होगी- पूज्य बापू जी

माघ_वर्षा_सोना_बरसा



सूर्य का प्रवेश मघा_नक्षत्र में हो वर्षा हो तो वर्षा का पानी सोना के समान है।

नेत्र में डालो वह पानी। वह पीने से बच्चों की #किडनी स्वस्थ होगी, बच्चें हष्टपुष्ठ होगे।

भोजन बनाने के काम लाओ तो कहना ही क्या ।

🗓️ 15 अगस्त से 30 अगस्त तक अच्छे बर्तन में (स्टील, तांबा,पीतल कांच के) भर कर रखो। 12 महीने रहेगा तो भी कुछ नहीं होगा जैसे #गंगाजल । माघ का जल जीवन को तृप्त करेगा।

Friday, April 15, 2022

पुण्यदायी तिथियाँ व योग

 



१९ अप्रैल : अंगारकी-मंगलवारी चतुर्थी ( शाम ४:३९ से २० अप्रैल सूर्योदय तक )

२१ अप्रैल : पूज्य संत श्री आशारामजी बापू का अवतरण दिवस अर्थात विश्व सेवा -सत्संग दिवस

२६ अप्रैल : वरूथिनी एकादशी ( सौभाग्य, भोग, मोक्ष प्रदायक व्रत, १०,००० वर्षों की तपस्या के समान फल | माहात्म्य पढने-सुनने से १००० गोदान का फल )

३ मई : अक्षय तृतीया ( पूरा दिन शुभ मुहूर्त), त्रेता युगादि तिथि (स्नान, दान, जप, तप, हवन आदि का अनंत फल)

८ मई : रविवारी सप्तमी ( सूर्योदय से शाम ५:०१ तक ), रविपुष्यामृत योग ( सूर्योदय से दोपहर २:५८ तक)

१२ मई : मोहिनी एकादशी ( व्रत से अनेक जन्मों के मेरु पर्वत जैसे महापापों का भी नाश)

१५ मई : विष्णुपदी संक्रांति ( पुण्यकाल: सूर्योदय से दोपहर १२:३५ तक) (ध्यान, जप व पुण्यकर्म का लाख गुना फल)


ऋषिप्रसाद – अप्रैल २०२२ से

आरोग्यवर्धक जल

 

घर के ईशान कोण में ज्यादा – से – ज्यादा स्थान खुला रहे और उस स्थान पर एक गमले में तुलसी का पौधा लगाकर रखें | तुलसी के गमले के पास मिटटी के कलश में जल भरकर रखें | इस जल को पीने से शरीर में आरोग्य की वृद्धि होती है और मन में पवित्रता, सात्विकता का संचार होता है | 

यदि जल को निहारते हुए पूज्य बापूजी द्वारा बताये गये ॐ नमो नारायणाय | मंत्र का २१ बार जप करके फिर इस जल का पान किया जाय तो यह असाध्य रोगों को भी दूर करने में बहुत मदद करता है | 

(औषधि-सेवन से पूर्व भी इस मंत्र का २१ बार जप विशेष लाभदायी है |) जल में १ – २ तुलसी-पत्ते डालकर जल पीना स्मरणशक्ति और सम्पूर्ण स्वास्थ्य की अनोखी युक्ति है |


ऋषिप्रसाद – अप्रैल २०२२ से

कैसे हो ग्रीष्मजन्य समस्याओं का समाधान ?

 

(ग्रीष्म ऋतू : २० अप्रैल से २० जून)

ग्रीष्म ऋतू का प्रारम्भ होते ही असहनीय गर्मी तथा उससे जुडी समस्याओं, जैसे-थकान, शरीर में तथा पेशाब में जलन, अपच, दस्त, आँख आना,  मूत्र-संक्रमण , चक्कर आना, लू लगना आदि का प्रादुर्भाव होता है |  गर्मी से राहत पाने के लिए लोग आइसक्रीम, फ्रिज का ठंडा पानी, दही, लस्सी, बर्फ, कोल्ड ड्रिंक्स आदि लेना शुरू कर देते है लेकिन क्या इनसे समस्याओं का हल होता है ? नहीं ... इससे तो वायु की वृद्धि होती है और पाचनशक्ति व गर्मी सहने की क्षमता कम हो जाती है |

इन दिनों में शरीर का स्नेह अंश कम होने से शारीरिक बल स्वाभाविक कम हो जाता है, जिससे थकान या कमजोरी महसूस होने लगती है | इसे दूर करने के लिए लोग सूखे मेवे, मिठाइयाँ  आदि पचने में भारी चीजों का सेवन करते हैं या दिन में बार-बार कुछ – न – कुछ खाते रहते हैं | इससे कमजोरी दूर नहीं होती बल्कि शरीर में अपचित आहार रस ( कच्चा रस) बनकर थकान, कमजोरी व रोग बढ़ जाते हैं | ऐसे में सुंदर उपाय है सत्तू | देशी गाय का घी, मिश्री व पानी मिलाकर बनाया जौ का सत्तू स्निग्ध, पौष्टिक व शीघ्र शक्तिदायी है | नींबू-पुदीने की शिंकजी, गन्ने का रस, आम का पना एवं बेल, गुलाब, पलाश व कोकम का शरबत, नारियल पानी, घर पर बनायी ठंडाई आदि पेय पदार्थ तथा खरबूजा, तरबूज, बिना रसायन के पकाये मीठे आम, मीठे अंगूर, अनार, सेब, संतरा, मोसम्बी, लीची, केला आदि फलों का सेवन लाभदायी है | मुलतानी मिट्टी या सप्तधान्य उबटन से स्नान करना, मटके का पानी पीना, रात को देशी गाय के दूध में मिश्री मिलाकर पीना स्वास्थ्यप्रद है |

कुछ लोग दही को ठंडी प्रकृति का समझकर इस ऋतू में उसका भरपूर सेवन करते है किंतु वास्तव में दही गर्म प्रकृति का होता है और साथ ही पचने में भारी भी होता है | अनुचित काल में एवं अनुचित ढंग से दही का सेवन शरीर के स्त्रोतों में अवरोध कर शरीर में सूजन उत्पन्न करता है इसलिए इस ऋतू में दही का सेवन करना वर्तमान व भविष्य में गम्भीर रोगों को निमन्त्रण देना है | छाछ पीनी हो तो दही में ८ गुना जल मिला के, मथ के,  मिश्री, धनिया, जीरा चूर्ण मिलाकर अल्प मात्रा में ले सकते हैं | स्वस्थ व्यक्ति कभी-कभी अल्प मात्रा में घर में बनाया गया ताजा श्रीखंड ले सकते है | ग्रीष्म में साठी के चावल का सेवन उत्तम है |

इस ऋतू में उत्तम स्वास्थ्य के लिए – रात में देर तक जागना, सुबह देर तक सोये रहना, पति-पत्नी का सहवास, धूप का सेवन, अति परिश्रम, अति व्यायाम व अधिक प्राणायाम से बचें |

ऋषिप्रसाद – अप्रैल २०२२ से

शंख व शंखजल के लाभ

 

शंख के कुछ स्वास्थ्य – प्रयोग

पूज्य बापूजी शंख के स्वास्थ्य-हितकारी प्रयोग बताते हुए कहते हैं : “कोई बच्चा तोतला अथवा गूँगा है तो शंख में पानी रख दो | सुबह का रखा हुआ पानी शाम को, शाम का रखा हुआ पानी सुबह को ५० – ५० मि.ली. उस बच्चे को पिलाओ और उसके गले में छोटा-सा शंख बाँध दो | १ – २ चुटकी ( ५० से १०० मि.ग्रा. ) शंख भस्म शहद के साथ सुबह-शाम चटाओ तो वह बच्चा बोलने लग जायेगा | शंख भस्म अन्य कई रोगों में भी एक प्रभावकारी औषधि है |

गर्भिणी स्त्री शंख का पानी पिये तो उसके कुटुम्ब में २-४ पीढ़ियों तक तोतला – गूँगा बच्चा नहीं पैदा होगा | यह हमारे भारत की खोज है, पाश्चत्य विज्ञानियों की खोज नहीं है |   गूँगे और तोतले व्यक्ति को शंख फायदा करता है और शंख -ध्वनि वातावरण को शुद्ध करती है इतना ही नहीं, दूसरे भी बहुत सारे फायदे बताये गये हैं | जहाँ लोगों का समूह इकट्ठा होता है वहाँ शंखनाद पवित्र, सात्विक माना जाता है |

शंखजल का छिड़काव व पान क्यों ?

शंख में जल भरकर उसे पूजा-स्थान में रखे जाने और पूजा – पाठ, अनुष्ठान होने के बाद श्रद्धालुओं पर उस जल को छिड़कने का कारण यह है कि इसमें कीटाणुनाशक शक्ति होती है और शंख में जो गंधक, फॉस्फोरस और कैल्शियम की मात्रा होती है उसके अंश भी जल में आ जाते हैं | इसलिए शंख के जल को छिड़कने और पीने से स्वास्थ्य सुधरता है |

भगवान कहते हैं : “जो शंख में जल लेकर ॐ नमो नारायणाय मंत्र का उच्चारण करते हुए मुझे नहलाता है वह सम्पूर्ण पापों से मुक्त हो जाता है | जो जल शंख में रखा जाता है वह गंगाजल के समान हो जाता है | तीनों लोकों में जितने तीर्थ है वे सब मेरी आज्ञा से शंख में निवास करते है इसलिए शंख श्रेष्ठ माना गया है | जो शंख में फूल, जल और अक्षत रखकर मुझे अर्घ्य देता है  उसे अनंत पुण्य की प्राप्ति होती है | जो वैष्णव मेरे मस्तक पर शख का जल घुमाकर उसे अपने घर में छिडकता है उसके घर में  कुछ भी अशुभ नहीं होता | मृदंग और शंख की ध्वनि तथा प्रणव (ॐकार) के उच्चारण के साथ किया हुआ मेरा पूजन मनुष्यों को सदैव मोक्ष प्रदान करनेवाला है |” (स्कन्द पुराण, वैष्णव खंड)


ऋषिप्रसाद – अप्रैल २०२२ से

कुसंस्कार व पाप मिटानेवाला पुण्यमय स्नान

 

वैशाख मास के अंतिम ३ दिन : १४ से १६ मई

वैशाख मास में कोई तीर्थ का सेवन करता है अथवा प्रभातकाल में ( सूर्योदय के पूर्व) स्नान करता है तो उसके करोड़ो जन्मों के कुसंस्कार और पाप मिट जाते हैं | बड़े-बड़े यज्ञों – अश्वमेध यज्ञ आदि से जो पुण्य प्राप्त होता है वह वैशाख मास के सत्संग, स्नान, दान से प्राप्त हो जाता है | 

जिसने एक महिना वैशाख – स्नान नहीं किया वह महीने के आखिरी ३ दिन ( तेरस, चौदस और पूनम) अगर प्रभातकाल में स्नान कर लेता है तो भी भगवान उसका पूरा मास स्नान में गिन लेते हैं | ऐसे उदार परमात्मा को प्रणाम हो !


ऋषिप्रसाद – अप्रैल २०२२ से

Thursday, March 31, 2022

ग्रीष्म में पौष्टिक व लाभदायी प्रयोग

 

१] २ -३ खजूर तथा २० – २५ किशमिश या मनुक्का ३ – ४ बार अच्छी तरह धोकर रात को मिटटी के पात्र में ( मिटटी – पात्र न हो तो स्टील के पात्र में ) २५० मि.ली. पानी में भिगो दें | किशमिश व मनुक्का कभी-कभी गोमूत्र ( या गोमूत्र अर्क) की कुछ बुँदे पानी में डाल के उससे भी धो सकते हैं | सुबह मसलकर १ चम्मच आँवला या नींबू रस, यथावश्यक मिश्री व सैंधव नमक मिला के पियें | यह शरीर की थकान और कमजोरी दूर करके तुरंत शक्ति प्रदान करनेवाला पौष्टिक पेय है |

२] सौंफ व मिश्री समान मात्रा में कूटकर रखें | १ चम्मच मिश्रण शीतल जल या देशी गोदुग्ध में मिला के सुबह-शाम पियें |यह शीघ्र स्फूर्तिदायक है, साथ ही मस्तिष्क व नेत्रों की कमजोरी, ह्रदयरोग व रक्तविकारों में भी लाभकारी है | सौंफ वात-पित्तशामक, कफ – निस्सारक, जलन, प्यास, उलटी, बवासीर, नेत्ररोग आदि में लाभदायी है | कहा भी गया है :

शीतल जल में डालकर सौंफ गलाओ आप |

मिश्री के संग पान कर मिटे दाह-संताप ||


                                                                                                                 ऋषिप्रसाद – मार्च २०२२ से