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Saturday, January 20, 2018

यकृत (लीवर) के स्वास्थ्य के लिए

रात्रि को ४-५ खजूर पानी में भिगो दे | सुबह शहद के साथ मिलाकर १०-१५ दिन लेने से यकृत (लीवर) सवस्थ होता है |

- ऋषि प्रसाद  जनवरी २०१८

लक्ष्मीप्राप्ति व घर में सुख-शांति हेतु

  • तुलसी-गमले की प्रतिदिन एक प्रदक्षिणा करने से लक्ष्मीप्राप्ति में सहायता मिलती है |
  • तुलसी के थोड़े पत्ते पानी में डाल के उसे सामने रखकर भगवद्गीता का पाठ करे | फिर घर के सभी लोग मिल के भगवन्नाम - कीर्तन करके हास्य - प्रयोग करे और वह पवित्र जल सब लोग ग्रहण करे | यह प्रयोग करने से घर के झगड़े मिटते है, शराबी की शराब छुटती है और घर में सुख शांति का वास होता है |
- ऋषि प्रसाद  जनवरी २०१८

स्मृतिवर्धक चूर्ण

इस चूर्ण को गाय कके घी के साथ एक-एक चम्मच सुबह - शाम नियमित रूप से लेने से स्मरणशक्ति और धारणाशक्ति का अत्याधिक विकास होता है |
प्राप्ति स्थान : संत श्री आशारामजी आश्रम व समिति के सेवाकेंद्र |

 - ऋषि प्रसाद  जनवरी २०१८

Thursday, January 18, 2018

सर्दियों में पुष्टिवर्धक प्रयोग

सर्दियों में पुष्टिवर्धक खुराक बनाओ | काले तिल ले लो, थोडा गुड डाल के चिक्की बनाओ | १० ग्राम चिक्की चबा-चबा के खाओ, ज्यादा नहीं | इससे मसूड़े मजबूत होंगे, दॉत मजबूत होंगे, पेशाब - सबंधी तकलीफ नहीं होंगी और शारीर मजबूत और पुष्ट होगा |
(यह प्रयोग सर्दियों में  खली पेट करना लाभदायक है |)

- ऋषि प्रसाद  जनवरी २०१८

Wednesday, January 17, 2018

क्या खाना, क्या नहीं खाना ?

पनीर दूध को विकृत करके बनाया जाता है | अतः उसका सेवन स्वास्थ्य के लिए हानिकारक है | यह पचने में अति भारी, कब्ज करनेवाला एवं अभिष्यंदी (स्त्रोतों में अवरोध पैदा करनेवाला ) है| यह चरबी, कफ, पित्त एवं सूजन उत्पन्न करनेवाला होता है |

इसके स्थान पर दूध को विकृत किये बिना दूध - चावल का खीर बना सकते है, जो स्वादिष्ट, पोषक एवं सात्विक आहार है |

- ऋषि प्रषाद जनवरी २०१८

Thursday, January 5, 2017

आम की मंजरी काफी हितकारी

आयुर्वेद वसंत पंचमी के बाद गर्म तथा वीर्यवर्धक, पचने में भारी पदार्थों का सेवन कम कर देने और आम की मंजरी को रगड़कर मलने व खाने की सलाह देता है |

आम की मंजरी शीत, कफ, पित्तादि में फायदेमंद तथा रुचिवर्धक है | अतिसार, प्रमेह, रक्त-विकार से रक्षा करती है तथा जहरीले दोषों को दूर करने में उपयोगी है |



स्त्रोत – ऋषि प्रसाद – जनवरी – २०१७ से 

बुद्धिबल बढाने का अचूक उपाय

बुद्धि बढाने के लिए लोग क्या – क्या नहीं करते, क्या – क्या दवाइयाँ व टॉनिक नहीं खाते परंतु लाभ नहीं होता |  पूज्य बापूजी सनातन संस्कृति के अनमोल खजाने से अचूक युक्ति बता रहें हैं : “बुद्धिबल बढाने के लिए ‘यजुर्वेद’ (३२.१४) में एक मंत्र आता है :

यां मेधां देवगणा: पितरश्चोपासते |
तया मामद्य मेधयाग्ने मेधाविनं कुरु स्वाहा ||

‘हे मेधावी परमात्मा ! जिस मेधा – बुद्धि की प्रार्थना, उपासना और याचना हमारे देवगण, ऋषिगण तथा पितृगण सर्वदा से करते चले आये हैं, वही मेधा, वही बुद्धि हमें प्रदान कीजिये |’

ऐसी प्रार्थना कर पहली ऊँगली (तर्जनी) अँगूठे के नीचे और तीन ऊँगलीयाँ सीधी करके पालथी मारकर बैठ जाओ | ॐकार का गुंजन करो | ललाट पर तिलक करने की जगह पर थोड़ी देर अनामिका ऊँगली घिसो | वहाँ ॐकार या भगवान को निहारने की भावना करो | बायें नथुने से गहरा श्वास लो, भीतर रोककर भगवन्नाम का सुमिरन करो और दायें नथुने से श्वास छोड़ दो | अब दायें से गहरा श्वास लो, थोडा रोके रखो और जप करो : हरि ॐ.....हरि ॐ.....शांति.... ‘जो पाप-ताप हर ले वह मेरा हरि है | ‘ॐ’ मतलब अखिल ब्रह्मांड का समर्थ प्रभु ! उसमें मेरी बुद्धि शांत होकर सर्वगुण-सम्पन्न होगी | हे प्रभु ! हमारी बुद्धि ऋषि, मुनि, पितर, देव जैसा चाहते हैं वैसी बने | हरि ॐ .... हरि ॐ....’ मन में ऐसा चिंतन करो | बायें नथुने श्वास बाहर निकाल दो | ऐसे एक – दो प्राणायाम और करो | फिर थोडा समय शांत बैठे रहो |”



स्त्रोत – ऋषि प्रसाद – जनवरी – २०१७ से 

गुरुकृपा निरंतर चाहते हो तो ....

गुरुकृपा अथवा भगवत्कृपा का निरंतर अनुभव करना चाहते हो तो सत्संग मिलने पर मिथ्या आग्रह, दुराग्रह न करो, स्वच्छंद (मनमुखी) होकर कर्म न करो, प्रमाद में शक्ति तथा आलस्य में समय नष्ट न करो और विषयासक्ति का त्याग करो | 

शारीरिक, मानसिक और आत्मिक उन्नति के लिए वासना – विकारों का त्याग अत्यावश्यक है |



स्त्रोत – ऋषि प्रसाद – जनवरी – २०१७ से 

परमात्मा में मन नहीं लगता तो –

पूज्य बापूजी कहते हैं : ‘आशा –तृष्णा के कारण मन परमात्मा में नहीं लगता | जो- जो दुःख, पीड़ाएँ, विकार हैं वे आशा – तृष्णा से ही पैदा होते हैं | आशा – तृष्णा की पूर्ति में लगना मानो अपने – आपको सताना है और इसको क्षीण करने का यत्न करना अपने को वास्तव में उन्नत करना है |

मन में कुछ आया और वह कर लिया तो इससे आदमी अपनी स्थिति से गिर जाता हैं परन्तु शास्त्रसम्मत रीति से, सादगी और संयम से आवश्यकताओं को पूरा करें, आशाओं – तृष्णाओं को न बढायें | आवश्यकताएँ सहज में पूरी होती हैं | 

मन के संकल्प – विकल्पों को दीर्घ ॐकार की ध्वनि से अलविदा करता रहे और नि:संकल्प नारायण में टिकने का समय बढाता रहे | ‘श्री योगवासिष्ठ’ बार – बार पढ़े | कभी – कभी श्मशान जा के अपने मन को समझाये, ‘शरीर यहाँ आकर जले उससे पहले अपने आत्मस्वभाव को जान ले, पा ले बच्चू ! ब्राह्मी स्थिति प्राप्त कर ले बच्चू !’

यदि इस प्रकार अभ्यास करके आत्मपद में स्थित हो जाय तो फिर उसके द्वारा संसारियों की भी मनोकामनाएँ पूरी होने लगती हैं |”


स्त्रोत – ऋषि प्रसाद – जनवरी – २०१७ से 

बच्चे – बच्चियाँ को गंदगी के बचने के लिए

अपने बच्चे – बच्चियाँ वहाँ की गंदगी से बचें इसलिए ‘दिव्य प्रेरणा – प्रकाश’ पुस्तक बार – बार पढ़ें | रात्रि को सोने से पूर्व २१ बार ‘ॐ अर्यमायै नम:’ मंत्र का जप करना तथा तकिये पर अपनी माँ का नाम (केवल ऊँगली से ) लिखकर सोना, सुबह स्नान के बाद ललाट पर तिलक करना और पढाई के दिनों में एवं अवसाद (डिप्रेशन) के समय प्राणायाम करने चाहिए | 

सर्वांगासन करके गुदाद्वार का जितनी देर सम्भव हो संकोचन करें और ‘वीर्य ऊपर की ओर आ रहा है ....’ ऐसा चिंतन करें | देर रात को न खायें, कॉफ़ी-चाय के आदि के व्यसन में न पड़ें और सादा जीवन जियें, जिससे अपनी जीवनीशक्ति की रक्षा हो | 

सुबह थोड़ी देर भगवत्प्रार्थना – स्मरण करते हुए शांत हो जाओ | बुद्धि में सत्त्व बढ़ेगा तो बुद्धि निर्मल होगी, गड़बड़ से मन को बचायेगी और मन इन्द्रियों को नियंत्रित रखेगा |



स्त्रोत – ऋषि प्रसाद – जनवरी – २०१७ से 

घर में बरकत व समृद्धि के अचूक उपाय

१] घर की साफ़ – सफाई सुबह करनी चाहिए | रात को घर में झाड़ू लगाने से लक्ष्मी की बरकत क्षीण हो जाती है | इसलिए गृहस्थियों को रात्रि को झाड़ू नहीं लगानी चाहिए |

२] भोजन में से गाय, पक्षियों, जीव-जन्तुओं का थोडा हिस्सा रखनेवाले के धन – धान्य में बरकत रहती है |


स्त्रोत – ऋषि प्रसाद – जनवरी – २०१७ से 

घर से बाहर निकलते समय

१] कभी यात्रा में जायें या किसीसे मिलने जायें तो भूखे या निराहार होकर नहीं मिलें | कुछ खा – पीकर जायें, तृप्त हो के जायें तो मिलने पर भाव में तृप्ति आयेगी |

२] कहीं यात्रा में जाने में घर से विदाई के समय थोडा – सा दही या मट्ठा लेना गृहस्थियों के लिए शुभ माना जाता है  |


स्त्रोत – ऋषि प्रसाद – जनवरी – २०१७ से