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Saturday 15 June 2013

व्याधीनुसार रस – चित्किसा

खून बढ़ाने के लिए : अनार, मोसंबी, अंगूर, पालक, टमाटर, बिट, सेफ, रसबेरी का रस, रात को भिगोकर रखे
हुये किसमिस या काले अंगूर के पानी का सुबह सेवन, इलायची, केला आदि का सेवन, खजूर का सेवन आदि
उपयुक्त है |

आम्लपित्त (Acidity) : आँवला, एलोवेरा, गाजर, पालक, ककड़ी का रस, फलों का रस ज्यादा प्रमाण
में लेना चाहिए | अंगूर, मोसंबी और दूध लाभदायी है |

पिंपल के व्रण : नींबू, आँवला, ताज़ी हल्दी, नीम, पमकिन, एलोवेरा, प्याजऔर पालक का रस लाभदायी है |

फोड़ी-फुँसी : आँवला, नीम के पत्ते और फूल, एलोवेरा, पालक, ककड़ी, गोबी का रस और नारियल का दूध लाभदायी है |

वेदनादायी मासिक हो तो : अंगूर, एलोवेरा, आँवला और रसबेरी का रस लाभदायी है |

नेत्र ज्योतिवर्धक : आँवला, गाजर, और हरी धनिया का रस गुणकारी है | दूध,घी और बादाम लाभदायी है |

अनिद्रा : अंगुर और सेब का रस आधा से एक ग्राम पीपलामुल दूध के साथ लें |

वजन बढ़ाने के लिए : आम, पालक, गाजर, बिट और नारियल का दूध, खजूर, दूध, घी, दही, सुखा मेवा,
अंगूर, और सेब लाभदायी है |

सिरदर्द : आँवला, अनार, अंगूर, मोसंबी, सेब, ककड़ी का रस, नारियल पानी लाभदायी है |

वजन घटाने के लिए : १ नींबू और २५ तुलसी के पत्ते, १ ग्लास थोडा सा गरम वाला पानी, १ चम्मच शहद हफ्ते
में २–३ दिन सुबह खाली पेट लेने से फायदा होता है | रविवार के दिन ये  प्रयोग नहीं करना |

रस के प्रमाण : एलोवेरा, अनार, अंगूर, नींबू, आँवला, ताज़ी हल्दी, नीम के पत्ते और फूल, पमकिन, ककड़ी, गोबी, प्याज और पालक का रस, नारियल का दूध : १५ से २५ मि.ली. और दूसरे फल के रस का प्रमाण : २५ से ५० मि.ली.

सावधानी : १) सूर्यास्त के बाद फलों का रस नही लेना चाहिए |
२) खाना खाने से पहले और बाद में फलों के रस का सेवन नहीं करना क्योकि पाचन क्रिया खराब होती है |
३) फलों का रस दूध के साथ नहीं सेवन करना |

विशेष : इलेक्ट्रॉनिक उपकरण का उपयोग करने के बजाय खल से कुटकाट और सूती कपड़ों में से छान कर फलों का रस निकालने से उसका औषधि गुणधर्मों का विशेष लाभ होता है |

- Lok Kalyan Setu May 2013

व्रत की तिथि का समय -

व्रत की तिथि हमेशा सूर्योदय से लेकर याने आज के सूर्योदय से अगले दिन के सूर्योदय तक व्रत की तिथि मानी
जाती है |

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- Shri Sureshanandji

सुबह संकल्प फलित करने हेतु –

रोज सुबह सुबह जब सूरज उदय होने में थोड़ी देर बाकी होती है | उस समय  सुबह नहा–धोकर सुबह छत पर

बैठकर...... आकाश में जब सूरज उदय का समय होता है तब पूरब दिशा में लालिमा दिखती है तो उस समय
उस तरफ थोड़ी देर देखा (उगते हुये सूरज को नहीं देखना ) अभी सूर्योदय नहीं हुआ है लालिमा छायी हो, उजाला
हो गया है | उस तरफ देखते हुये जो जप, ध्यान और संकल्प कोई भी करते है  ना, वो भगवान और गुरु
जल्दी पूरा करते है | बहुत फायदा होता है, चाहे भक्ति बढ़ाने का, चाहे घर में कोई कष्ट है उसको नष्ट करने का,
चाहे कोई मन में दुर्गुण है उसको मिटाने का या शरीर में रोग है उसको  मिटाने का | भगवान और गुरु
निष्काम भक्तों को प्यार करते है और सकाम भक्तों को भी प्यार करते है |

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- Shri Sureshanandji Haridwar 25th May' 2013

सफेद दाग हो तो –

सफ़ेद दाग हो तो कार्तिक मास के हर रविवार को नमक मिर्च बिना का भोजन और सूर्य भगवान की पूजा तिल के तेल का दीपक दिखा के करे, लोटे में गुलाब की पंखुड़ियाँ,शक्कर, चावल, तिल आदि डालकर अर्घ्य दे |

होमियोपेथी दवा अपने आश्रम में मिलती है, वो लें तो सफेद दाग बीमारी जल्दी दूर होती है और शामा तुलसी
(थोड़े काले-काले पत्ते होते है शामा तुलसी के) वो पत्ते जहाँ सफेद दाग है वहाँ रगड दिया करें, उसका रस लगा
दिया करें |

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- Shri Sureshanandji Haridwar 25th May' 2013

कर्ज हो तो –

किसी के सिर पर कर्जा है तो एक सफेद कपड़ा ले लिया और पाँच फूल गुलाब के ले लिए |एक फुल हाथ में लिया और गायत्री मंत्र बोल देना :
ॐ भू र्भुव: स्व: तत्सवितुर्वरेण्यं भर्गो देवस्य धीमहि धियो यो न: प्रचोदयात् |

और कपड़े पर रख दिया | ऐसे पाँचो फुल गायत्री मंत्र जपते हुये कपडे पर रख दिये और कपड़े को गठान लगाईं और प्रार्थना पूर्वक कि मेरे सिर पर जो भार है.. हे भगवान, हे भागीरथी गंगा !! वो भार भी बह जाये, दूर हो जाये, नष्ट हो जाये ऐसा करके जो कपड़ा बाँधा है फूल रखकर वो बहा दे |

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- Shri Sureshanandji Haridwar 25th May 2013

Hysteria (वातोन्माद) हो तो –

Hysteria का रोग हो तो अपने आश्रम की औषधि लें और कार्तिक मास की हर रविवार को मंदिर में या सूर्य भगवान के आगे दीप दान करें  और सरसों के दाने छोड़ दे या सरसों के तेलों का दिया रख दें |

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- Shri Sureshanandji Haridwar 25th May' 2013

गिरावट से रक्षा पाने हेतु –

आसुरी बुद्धि, मोहिनी बुद्धि, राक्षसी बुद्धि... वो मनुष्यों को गिरा देती है | इसलिए दीक्षा लेते तो १० माला नियमपूर्वक जपे तो गिराने का प्रारब्ध आयेगा तो फिर भी सुरक्षित हो जाएगा | १० से २० माला जो जपता है ना उसको गिराने की परिस्थिति भगा देगी लेकिन फिर खड़ा हो जाएगा | जप छोड़ दिया तो उसको तो गिरना ही है ना ...गुरुमंत्र, गुरुध्यान छोड़ दिया गिरना ही गिरना | नहीं तो गुरुमंत्र और गुरुध्यान कितना ही गिरा दे कोई... उसको उठा लेगा |

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-Pujya Bapuji

गंगा में क्या न करें –

कई लोग गंगा में कपड़े धोते है, मैले कपड़े धोते है, साबुन लगाकर नाहते है, घर में पड़ा हुआ पुराना कचरा – सूखे

हुये फूल, सडे हुई अगरबत्ती की राख वो गंगा में अर्पण कर देते है | ये सब गंगा में अर्पण नहीं करना चाहिए |
अपने मैले कपड़े गंगा में नहीं धोने चाहिए, साबुन लगाकर गंगा में नहीं नहाना चाहिए, कुल्ला नहीं करना चाहिए | गंगा मैल धोने के लिए नहीं है, गंगा पाप धोने के लिए है |

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-Shri Sureshanandji Haridwar 25th May' 2013

आर्थिक तकलीफ हो तो –

जिनके घर में आर्थिक तकलीफ बहुत रहती है तो शिवपुराण में विद्येश्वर संहिता में बताया है कि कृतिका नक्षत्र से युक्त सोमवार को जप ज्यादा करना चाहिए और उस दिन अर्थ प्राप्ति हेतु संकल्प करके गुरुपूजन और शिवजी का पूजन विशेष करें जैसे शिवलिंग पर दूध, जल आदि चढाते है, बेलपत्र, फूल चढ़ाकर अपना गुरुमंत्र का जप करें |

2013 में कृतिका नक्षत्र और सोमवार का योग ऐसे रहेंगे :
७ मई २०१३,
२३ सितम्बर २०१३ (श्याम को ७ बजे से) और श्याम को शिवलिंग पर दूध नहीं चढाते तो बेलपत्र और फूल
चढ़ा दें और गुरुमंत्र का जप करें |
२१ अक्टूबर २०१३ (सुबह सूर्योदय से रात तक )
१८ नवम्बर २०१३ (सुबह सूर्योदय से दोपहर १:३० तक )

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 - Shri Sureshanandji Haridwar 25th May' 2013

आर्थिक परेशानी से बचने हेतु –

हर महीने में शिवरात्रि (मासिक शिवरात्रि - कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी) को आती है | तो उस दिन जिसको घर में
आर्थिक कष्ट रहते है वो श्याम के समय या संध्या के समय जप-तप करें, दीप-दान शिवमंदिर में कर दें
और रात को जब १२ बज जायें तो थोड़ी देर जाग कर जप और एक पाठ हनुमान चालीसा का करें |
तो आर्थिक परेशानी दूर हो जायेगी |

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- Shri Sureshanandji Haridwar 26th May 2013

Friday 14 June 2013

‘त्रिस्पृशा' का महायोग

हजार एकादशियों का फल देनेवाला व्रत
 (त्रिस्पृशा निर्जला एकादशी : २० जून)

एक ‘त्रिस्पृशा एकादशी के उपवास से एक हजार एकादशी व्रतों का फल प्राप्त होता है तथा इसी प्रकार द्वादशी में पारण करने पर हजार गुना फल माना गया है । इस एकादशी को रात में जागरण करनेवाला भगवान विष्णु के स्वरूप में लीन हो जाता है ।

‘पद्म पुराण' में आता है कि देवर्षि नारदजी ने भगवान शिवजी से कहा : ‘‘सर्वेश्वर ! आप त्रिस्पृशा नामक व्रत का वर्णन कीजिये, जिसे सुनकर लोग कर्मबंधन से मुक्त हो जाते हैं ।"

महादेवजी : ‘‘विद्वन् ! देवाधिदेव भगवान ने मोक्षप्राप्ति के लिए इस व्रत की सृष्टि की है, इसीलिए इसे ‘वैष्णवी तिथि कहते हैं । भगवान माधव ने गंगाजी के पापमुक्ति के बारे में पूछने पर बताया था : ‘‘जब एक ही दिन एकादशी, द्वादशी तथा रात्रि के अंतिम प्रहर में त्रयोदशी भी हो तो उसे ‘त्रिस्पृशा' समझना चाहिए । यह तिथि धर्म, अर्थ, काम और मोक्ष देनेवाली तथा सौ करो‹ड तीर्थों से भी अधिक महत्त्वपूर्ण है । इस दिन भगवान के साथ सद्गुरु की पूजा करनी चाहिए ।"

यह व्रत सम्पूर्ण पाप-राशियों का शमन करनेवाला, महान दुःखों का विनाशक और सम्पूर्ण कामनाओं का दाता है । इस त्रिस्पृशा के उपवास से ब्रह्महत्या जैसे महापाप भी नष्ट हो जाते हैं । हजार अश्वमेध और सौ वाजपेय यज्ञों का फल मिलता है । यह व्रत करनेवाला पुरुष पितृ कुल, मातृ कुल तथा पत्नी कुल के सहित विष्णुलोक में प्रतिष्ठित होता है । इस दिन द्वादशाक्षर मंत्र (ॐ नमो भगवते वासुदेवाय) का जप करना चाहिए । जिसने इसका व्रत कर लिया उसने सम्पूर्ण व्रतों का अनुष्ठान कर लिया ।

One Ekadashi vow that offers virtues equivalent to thousands of same
(Trisparsha Nirjala Ekadashi: 20 June)

One Trisparsha Ekadashi vow can offer the virtues equivalent to fasting on thousand Ekadashi days and for one who fulfills his vow on the twelfth lunar day receives this thousand manifold benefit. One who stays awake on the night of Ekadashi obtains repose in the enlightening form of Lord Narayana.

In 'Padma Purana', Devrishi Naradji requests Lord Shiva: "Oh Almighty! Please elaborate on the vow of Trisparsha Ekadahsi, listening which one receives final emancipation from this world."

Lord Shiva says: "Oh The Learned! The Lord himself has created this vow to offer salvation. As a result, it is also known as 'Vaishnavi Tithi'. On being enquired about salvation from sins, Lord Madhav exclaimed to Mother Ganga once: When the eleventh, twelfth lunar period fall on same day with the last eight hours of night falling on the thirteenth day, it must be considered as 'Trisparsha'. This pious day is more significant than any virtuous deeds, donations, acts or any of the hundred crore pilgrimages. On this day, one must offer prayers to Gurudev alongside Lord."

This vow can obliterate all cycles of past sins, alleviates the deepest pangs of life and grant all desires. Observing fast on this day, can even grant salvation to one who is guilty of murdering a saint. Offers the virtues of performing thousand Ashwamegh rites and hundred Vajpeya rites. One who performs this vow establishes himself in Vishnu Loka along with his father's lineage, mother's lineage and wife's lineage. One should recite the 12 syllable mantra - AUM NAMO BHAGAVATE VAASUDEVAYA. One who performs this vow becomes beneficiary of the fruits of all religious vows.

- Rishi Prasad May 2013

Wednesday 12 June 2013

आँवला रस

आँवला रस वार्धक्य निवृति व यौवन-सुरक्षा करनेवाला तथा पित्त व वायु द्वारा होने वाली ११२ बिमारियों को मार भागने वाली सर्वश्रेष्ठ रसायन है | इसके रस से शरीर में शीघ्र ही शक्ति, स्फूर्ति, शीतलता व ताजगी का संचार होता है | यह अस्थियों, दाँत व बालों की जड़ों को मजबूत बनाता है | आँवला रस रक्त व शुक्रधातु की वृद्धि करता है | इसके नियमित सेवन से नेत्रज्योति बढती है तथा मस्तिष्क व ह्रदय को ताजगी, ठंडक व शक्ति मिलती है | यह वृद्धावस्था को दूर रख चिरयौवन व दीर्घायुष्य प्रदान करता है | आँवला रस आँखों व पेशाब की जलन, अम्लपित्त, श्वेतप्रदर, बवासीर आदि पित्तजन्य अनेक विकारों को दूर करता है |

विशेष प्रयोग :
•    आँवले के रस में २ ग्राम अश्वगंधा चूर्ण व मिश्री मिला के लेने से शरीरपुष्टि, वीर्यवृद्धि एवं वंध्यत्त्व में लाभ होता है | स्त्री-पुरुषों के शरीर में शुक्रधातु की कमी का रोग निकल जाता है और संतानप्राप्ति की ऊर्जा बढ़ती है |
•    २–४ ग्राम हल्दी मिला के लेने से स्वप्नदोष, मधुमेह व पेशाब में धातु जाना आदि में लाभ होता है |
•    मिश्री के साथ लेने से स्त्रियों के अधिक मासिक व श्वेतप्रदर रोगों में लाभ होता है |
•    १०-१५ मि.ली. रस में उतना ही पानी मिला के मिश्री, शहद अथवा शक्कर का मिश्रण करके भोजन के बीच में लेने वाला व्यक्ति कुछ ही सप्ताह में निरोगी काय व बलवृद्धि का एहसास करता है, ऐसा कइयों का अनुभव है (वैध्य सम्मत)|

  मात्रा :१५-२० मि.ली. रस (आगे-पीछे २ घंटे तक दूध न लें | रविवार व शुक्रवार को न लें |)

•    सप्तमी, नवमी, अमावस्या, रविवार, सूर्यग्रहण, चन्द्रग्रहण तथा संक्राति – इन तिथियों को छोडकर बाकी के दिन आँवले का रस शरीर पर लगाकर स्नान करने से आर्थिक कष्ट दूर होता है | (स्कंद पुराण, वैष्णव खंड)
•    मृत व्यक्ति की हड्डियाँ आँवले के रस से धोकर किसी भी नदी में प्रवाहित करने से उसकी सद्गति होती है | (स्कंद पुराण, वैष्णव खंड)


Amla Juice
Amala juice is the best rasayana that prevents ageing and preserves youthfulness. It eradicates 112 diseases caused by Pitta and Vata disorders. Amla juice instantly provides strength, energy, coolness and freshness to the body. It strengthens bones, teeth and hair-roots. It is haematinic and semen-promoting. Its regular use improves eyes, burning micturition, acidity, leucorrhoea, menorrhagia, piles, etc.

Special uses:
  • Taking Amla juice mixed with 2 grams of Ashwagandha powder (Withania somnifera) and sugar candy nourishes the body, increases semen quantity and is useful in cases of infertility. It cures the deficiency of reproductive fluids in both sexes; and provides reproductive energy.
  • Taking Amla juice mixed with 2-4 grams of turmeric powder is beneficial in wet dreams, diabetes and discharges of semen along with urine, etc.
  • Taking Amla juice mized with sugar candy is useful in cases of leucorrhoea and menorrhagia.
  • Taking Amla juice 10-15 ml mixed with equal quantity of water and sweetened by sugar candy, honey or unrefined sugar in the middle of the meal, makes the body strong and healthy. This has been experienced by many.
Quantity: 15-20 ml of Amla juice (If you want drink milk, maintain an interval of at least two hours before or after taking amla juice. Don’t take Amla juice on Friday and Sunday)
  • Taking bath after applying Amla juice on the body; barring on the seventh and ninth lunar days, no-moon day, Sunday, Solar and Lunar Eclipses and Sankaranti; removes financial difficulties. (Skanda Purana, Vaishnav Khanda)
  • Leaving the bones of a deceased person, washed with Amla juice, into any river is good for his/her afterlife. (Skanda Purana, Vaishnav Khanda)   
- Rishi Prasad June 2013