Search This Blog

Thursday, January 5, 2017

आम की मंजरी काफी हितकारी

आयुर्वेद वसंत पंचमी के बाद गर्म तथा वीर्यवर्धक, पचने में भारी पदार्थों का सेवन कम कर देने और आम की मंजरी को रगड़कर मलने व खाने की सलाह देता है |

आम की मंजरी शीत, कफ, पित्तादि में फायदेमंद तथा रुचिवर्धक है | अतिसार, प्रमेह, रक्त-विकार से रक्षा करती है तथा जहरीले दोषों को दूर करने में उपयोगी है |



स्त्रोत – ऋषि प्रसाद – जनवरी – २०१७ से 

बुद्धिबल बढाने का अचूक उपाय

बुद्धि बढाने के लिए लोग क्या – क्या नहीं करते, क्या – क्या दवाइयाँ व टॉनिक नहीं खाते परंतु लाभ नहीं होता |  पूज्य बापूजी सनातन संस्कृति के अनमोल खजाने से अचूक युक्ति बता रहें हैं : “बुद्धिबल बढाने के लिए ‘यजुर्वेद’ (३२.१४) में एक मंत्र आता है :

यां मेधां देवगणा: पितरश्चोपासते |
तया मामद्य मेधयाग्ने मेधाविनं कुरु स्वाहा ||

‘हे मेधावी परमात्मा ! जिस मेधा – बुद्धि की प्रार्थना, उपासना और याचना हमारे देवगण, ऋषिगण तथा पितृगण सर्वदा से करते चले आये हैं, वही मेधा, वही बुद्धि हमें प्रदान कीजिये |’

ऐसी प्रार्थना कर पहली ऊँगली (तर्जनी) अँगूठे के नीचे और तीन ऊँगलीयाँ सीधी करके पालथी मारकर बैठ जाओ | ॐकार का गुंजन करो | ललाट पर तिलक करने की जगह पर थोड़ी देर अनामिका ऊँगली घिसो | वहाँ ॐकार या भगवान को निहारने की भावना करो | बायें नथुने से गहरा श्वास लो, भीतर रोककर भगवन्नाम का सुमिरन करो और दायें नथुने से श्वास छोड़ दो | अब दायें से गहरा श्वास लो, थोडा रोके रखो और जप करो : हरि ॐ.....हरि ॐ.....शांति.... ‘जो पाप-ताप हर ले वह मेरा हरि है | ‘ॐ’ मतलब अखिल ब्रह्मांड का समर्थ प्रभु ! उसमें मेरी बुद्धि शांत होकर सर्वगुण-सम्पन्न होगी | हे प्रभु ! हमारी बुद्धि ऋषि, मुनि, पितर, देव जैसा चाहते हैं वैसी बने | हरि ॐ .... हरि ॐ....’ मन में ऐसा चिंतन करो | बायें नथुने श्वास बाहर निकाल दो | ऐसे एक – दो प्राणायाम और करो | फिर थोडा समय शांत बैठे रहो |”



स्त्रोत – ऋषि प्रसाद – जनवरी – २०१७ से 

गुरुकृपा निरंतर चाहते हो तो ....

गुरुकृपा अथवा भगवत्कृपा का निरंतर अनुभव करना चाहते हो तो सत्संग मिलने पर मिथ्या आग्रह, दुराग्रह न करो, स्वच्छंद (मनमुखी) होकर कर्म न करो, प्रमाद में शक्ति तथा आलस्य में समय नष्ट न करो और विषयासक्ति का त्याग करो | 

शारीरिक, मानसिक और आत्मिक उन्नति के लिए वासना – विकारों का त्याग अत्यावश्यक है |



स्त्रोत – ऋषि प्रसाद – जनवरी – २०१७ से 

परमात्मा में मन नहीं लगता तो –

पूज्य बापूजी कहते हैं : ‘आशा –तृष्णा के कारण मन परमात्मा में नहीं लगता | जो- जो दुःख, पीड़ाएँ, विकार हैं वे आशा – तृष्णा से ही पैदा होते हैं | आशा – तृष्णा की पूर्ति में लगना मानो अपने – आपको सताना है और इसको क्षीण करने का यत्न करना अपने को वास्तव में उन्नत करना है |

मन में कुछ आया और वह कर लिया तो इससे आदमी अपनी स्थिति से गिर जाता हैं परन्तु शास्त्रसम्मत रीति से, सादगी और संयम से आवश्यकताओं को पूरा करें, आशाओं – तृष्णाओं को न बढायें | आवश्यकताएँ सहज में पूरी होती हैं | 

मन के संकल्प – विकल्पों को दीर्घ ॐकार की ध्वनि से अलविदा करता रहे और नि:संकल्प नारायण में टिकने का समय बढाता रहे | ‘श्री योगवासिष्ठ’ बार – बार पढ़े | कभी – कभी श्मशान जा के अपने मन को समझाये, ‘शरीर यहाँ आकर जले उससे पहले अपने आत्मस्वभाव को जान ले, पा ले बच्चू ! ब्राह्मी स्थिति प्राप्त कर ले बच्चू !’

यदि इस प्रकार अभ्यास करके आत्मपद में स्थित हो जाय तो फिर उसके द्वारा संसारियों की भी मनोकामनाएँ पूरी होने लगती हैं |”


स्त्रोत – ऋषि प्रसाद – जनवरी – २०१७ से 

बच्चे – बच्चियाँ को गंदगी के बचने के लिए

अपने बच्चे – बच्चियाँ वहाँ की गंदगी से बचें इसलिए ‘दिव्य प्रेरणा – प्रकाश’ पुस्तक बार – बार पढ़ें | रात्रि को सोने से पूर्व २१ बार ‘ॐ अर्यमायै नम:’ मंत्र का जप करना तथा तकिये पर अपनी माँ का नाम (केवल ऊँगली से ) लिखकर सोना, सुबह स्नान के बाद ललाट पर तिलक करना और पढाई के दिनों में एवं अवसाद (डिप्रेशन) के समय प्राणायाम करने चाहिए | 

सर्वांगासन करके गुदाद्वार का जितनी देर सम्भव हो संकोचन करें और ‘वीर्य ऊपर की ओर आ रहा है ....’ ऐसा चिंतन करें | देर रात को न खायें, कॉफ़ी-चाय के आदि के व्यसन में न पड़ें और सादा जीवन जियें, जिससे अपनी जीवनीशक्ति की रक्षा हो | 

सुबह थोड़ी देर भगवत्प्रार्थना – स्मरण करते हुए शांत हो जाओ | बुद्धि में सत्त्व बढ़ेगा तो बुद्धि निर्मल होगी, गड़बड़ से मन को बचायेगी और मन इन्द्रियों को नियंत्रित रखेगा |



स्त्रोत – ऋषि प्रसाद – जनवरी – २०१७ से 

घर में बरकत व समृद्धि के अचूक उपाय

१] घर की साफ़ – सफाई सुबह करनी चाहिए | रात को घर में झाड़ू लगाने से लक्ष्मी की बरकत क्षीण हो जाती है | इसलिए गृहस्थियों को रात्रि को झाड़ू नहीं लगानी चाहिए |

२] भोजन में से गाय, पक्षियों, जीव-जन्तुओं का थोडा हिस्सा रखनेवाले के धन – धान्य में बरकत रहती है |


स्त्रोत – ऋषि प्रसाद – जनवरी – २०१७ से 

घर से बाहर निकलते समय

१] कभी यात्रा में जायें या किसीसे मिलने जायें तो भूखे या निराहार होकर नहीं मिलें | कुछ खा – पीकर जायें, तृप्त हो के जायें तो मिलने पर भाव में तृप्ति आयेगी |

२] कहीं यात्रा में जाने में घर से विदाई के समय थोडा – सा दही या मट्ठा लेना गृहस्थियों के लिए शुभ माना जाता है  |


स्त्रोत – ऋषि प्रसाद – जनवरी – २०१७ से 

इन तिथियों का लाभ जरुर लें

२३ जनवरी : षट्तिला एकादशी ( स्नान, उबटन, जलपान, भोजन, दान व होम में तिल का उपयोग पापों का नाश करता है | )

३१ जनवरी : मंगलवारी चतुर्थी ( सूर्योदय से १ फरवरी प्रात: ३-४१ तक)

३ फरवरी : अचला सप्तमी ( स्नान, व्रत करके गुरु का पूजन करनेवाला सम्पूर्ण माघ मास के स्नान का फल व वर्षभर के रविवार व्रत का पुण्य पा लेता है | यह सम्पूर्ण पापों को हरनेवाली व सुख –सौभाग्य की वृद्धि करनेवाली है | )

७ फरवरी : जया एकादशी ( इस दिन का व्रत ब्रह्महत्या जैसे पाप व पिशाचत्व का नाशक है तथा प्रेतयोनि से रक्षा करता है | )

९ फरवरी : गुरुपुष्यामृत योग ( सुबह १०-४८ से १० फरवरी सूर्योदय तक )

१२ फरवरी : विष्णुपदी संक्रांति ( पुण्यकाल : दोपहर १२-५३ से सूर्यास्त तक ) ( इस दिन किये गये जप – ध्यान व पुण्यकर्म का फल लाख गुना होता है | - पद्म पुराण )

१४ फरवरी : मंगलवारी चतुर्थी ( सूर्यादय से १५ फरवरी प्रात: ५ – ५१ तक ), मातृ - पितृ पूजन दिवस


स्त्रोत – ऋषि प्रसाद – जनवरी – २०१७ से 

अमृतफल आँवला

अमृत के समान लाभकारी होने शास्त्रों में आँवला ‘अमृतफल’ कहा गया है | यह मनुष्य का धात्री ( माँ ) की तरह पोषण करता है, अत: इसे ‘धात्रीफल’ भी कहा जाता है |

आँवला युवावस्था को दीर्घकाल तक बनाये रखनेवाला, शरीर को पुष्ट करनेवाला, बल, वीर्य, स्मृति, बुद्धि व कान्ति वर्धक, भूख बढ़ानेवाला, शीतल, बालों के लिए हितकारी तथा ह्रदय व यकृत (लीवर) हेतु लाभप्रद है | यह कब्ज, दाह, मूत्र संबंधी तकलीफों, थकावट, खून की कमी, पित्तजन्य सिरदर्द, पीलिया, उलटी आदि रोगों में लाभदायी है |

चर्मविकारों में आँवला खायें तथा आँवला रस में थोडा पानी मिला के पूरे शरीर को रगड़ दें, फिर स्नान करें तो लाभ होता है | आँवला चूर्ण का उबटन लगाने से शरीर कांतिमय बनता है, पानी में रस मिलाकर बाल धोने से बाल काले व मजबूत बनते हैं |

आधुनिक अनुसंधानों के अनुसार इसमें प्रचुर मात्रा में विटामिन ‘सी’ एवं एंटी ऑक्सीडेंट पाये जाते हैं, जिससे यह ह्रदय से संबंधित रक्तवाहिनियों के रोग (Coronary Artery Disease)  उच्च रक्तचाप, मधुमेह, कैंसर आदि रोगों में लाभप्रद है एवं इसके नियमित सेवन से इन रोगों से रक्षा होती है |

आँवले के अनुभूत घरेलू प्रयोग
१] सूखा आँवला और काले तिल समभाग लेकर बारीक चूर्ण बना लें | ५ ग्राम चूर्ण घी या शहद के साथ प्रतिदिन चाटने से वृद्धावस्थाजन्य कमजोरी दूर होकर नवशक्ति प्राप्त होती है |

२] ३० मि.ली. आँवले का रस पानी में मिला के भोजन के साथ सेवन करने से पाचनक्रिया तेज होती है | इससे ह्रदय व मस्तिष्क को बल व शक्ति मिलती है तथा स्वास्थ्य सुधरता है |

३] १५ – १५ मि.ली. शहद व आँवला रस, २० मि.ली. घी व १५ ग्राम मिश्री मिलाकर प्रात: सेवन करें | इससे वृद्धावस्थाजन्य कमजोरी व मूत्रसंबंधी तकलीफें दूर होती हैं एवं शरीर में ऊर्जा का संचार होता है |


स्त्रोत – ऋषि प्रसाद – जनवरी – २०१७ से 

सेहत बनाये, विविध रोगों से छुटकारा दिलाये : खजूर

खजूर को ‘सर्दियों का मेवा’ कहा जाता है | पूर्णरूप से परिपक्व खजूर मांसल एवं नर्म होती है और सेवन हेतु उत्तम मानी जाती है | यह मधुर रसयुक्त, वायु एवं पित्त के रोगों में लाभदायी, शीतल,भोजन में रूचि बढ़ानेवाली, ह्रदय के लिए हितकर, बलवर्धक एवं पौष्टिक है | जब पूर्णरूप से पकने से पहले ही खजूर को तोड़ लिया जाता है तो ऐसी खजूर कड़ी होती है, यह हलकी गरम होती है |

१] खजूर में शीघ्र पचनेवाली शर्करा जैसे कि ग्लूकोज व फ्रुक्टोज प्रचुर मात्रा में पायी जाती है | इसके सेवन से शीघ्र ही ऊर्जा का संचार होता है |

२] इसमें विटामिन ‘ए’ व ‘बी’ पाये जाने से आँखों, त्वचा व आँतों के लिए विशेष लाभदायी है | यह कोलेस्ट्रॉल को कम करने व रतौंधी में लाभदायी है |

३] प्रचुर मात्रा में लौह तत्त्व, पोटैशियम, कैल्शियम, मैगनीज, ताँबा आदि खनिज तत्त्व होने से यह हड्डियों, दाँतों, मांसपेशियों एवं नाड़ी – तंत्र को मजबूत बनाने में उपयोगी है | खून व रोगप्रतिकारक शक्ति बढ़ाती है | कैंसर से सुरक्षा करने में सहायक है |

४] इसमें फैटी एसिड्स व प्रचुर मात्रा में रेशे पाये जाते हैं जिससे यह ह्रदयरोग, कब्ज, आँतों के कैंसर आदि विभिन्न रोगों से रक्षा करती है |

मात्रा : ५ से ७ खजूर अच्छी तरह धोकर रात को भिगो के सुबह खायें | बच्चों के लिए २ से ४ खजूर पर्याप्त हैं | दूध या घी में मिलाकर खाना विशेष लाभदायी है |

(परिपक्व व उत्तम खजूर सभी संत श्री आशारामजी आश्रमों व समितियों के सेवाकेन्द्रों पर उपलब्ध हैं | )


स्त्रोत – ऋषि प्रसाद – जनवरी – २०१७ से 

दुबले – पतले लोगों के लिए – पुष्टिवर्धक लड्डू (पाक)

विधि : उड़द, गेहूँ, जौ व चने का ५०० – ५०० ग्राम आटा घी में भून लें | २ किलो शक्कर की चाशनी में भूने हुए आटे को डाल के छोटे – छोटे लड्डू बना लें | आवश्यकतानुसार पिस्ता, बादाम, इलायची डाल दें | सुबह – शाम १ – १ लड्डू अथवा अपनी पाचनशक्ति के अनुकूल मात्रा में खूब – चबा – चबाकर खायें | ऊपर से एक गिलास मीठा दूध पी लें |

लाभ : यह शक्ति, बल व वीर्यवर्धक, चुस्ती-फुर्ती देनेवाला और शरीर को सुडौल बनानेवाला है | सेवनकाल में आसन- व्यायाम नित्य करें | 

अधिक मसालेदार, तले व खट्टे पदार्थो ( विशेषरूप से इमली एवं अमचुर ) से परहेज रखें |



स्त्रोत – ऋषि प्रसाद – जनवरी – २०१७ से 

पौष्टिक गुणों से युक्त तिल की बर्फी

१ – १ कटोरी तिल व मूँगफली अलग – अलग सेंक लें व एक सूखा नारियल – गोला किस लें | ५०० ग्राम गुड़ की दो तार की चाशनी बनाकर इन सबकी बर्फी जमा लें |


स्वादिष्ट व पौष्टिक गुणों से युक्त यह बर्फी शीत ऋतू में बहुत लाभकारी है |



स्त्रोत – ऋषि प्रसाद – जनवरी – २०१७ से