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Friday 3 February 2012

14 फरवरी 2012 - श्रीवत्‍स नामक दिव्ययोग

इस साल 14 फरवरी को मंगलवार और विशाखा नक्षत्र के शुभ संयोग के कारण श्रीवत्‍स नामक दिव्ययोग बन रहा है | उस दिन जो लोग जप-तप करेंगे, कर्जे से छूटने का जल्दी योग बन सकता है | ये योग सब उत्तम कार्यो में सिद्धि देने वाला है | उस दिन जप करें, पाठ करें ...गजेन्द्र मोक्ष का, आदित्य ह्रदय स्त्रोत्र का पाठ करें | हो सके तो उस दिन नमक -मिर्च न खाये | फीका भोजन .. ढूध -रोटी आदि खा लें ...इससे आर्थिक कष्ट दूर करने में मदद मिलेगी |

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- श्री सुरेशानंदजी Chittorgarh 29th Jan' 2012


महाशिवरात्रि - भाग्य की रेखा बदलने हेतु ( युवा विशेष)

20 फरवरी 2012 को महाशिवरात्रि है | जिनकी उम्र 15 से 45 साल के अन्दर है..उनको अगर कोई बीमारी नहीं है...शुगर नहीं है... हो सके तो हिम्मत दिखाकर ... सुबह के सूर्योदय से लेकर अगले दिन के सूर्योदय तक पानी भी न पिए... भाग्य की रेखा न बदले तो मुझे कहना ...महा शिवरात्रि के सूर्योदय से अगले दिन के सूर्योदय तक निर्जला उपवास | जो ज्यादा दुबले -पतले हो वे ये न करें | जो बराबर ठीकठाक हो वे जरुर करें ... बहुत फायदा होगा..युवान भाई-बहनों को तो मैं आग्रहपूर्वक कहुंगा कि महाशिवरात्रि के दिन निर्जला उपवास जरुर करें और रात को फिर सो मत जाओ ..रात को २-३-४ बजे तक जगकर जप करें | युवा भाई-बहनें खास हिम्‍मत करें और जप करो तो पूर्व और उत्तर के बीच ..ईशान कोण पड़ता है..उधर मुंह कर के जप करना |

और एक माला महामृत्युंजय मंत्र की अपने गुरुदेव को दक्षिणा दो और प्राथना करें " हे भोला नाथ ! हमारे बापूजी हमें प्रीति देते है..ज्ञान देते है ..शक्ति देते है ..दीक्षा देते है ...ऐसे हमारे गुरुदेव का स्वास्थ्‍य बढ़िया रहे और हमारे गुरुदेव की आयु खूब -खूब लंबी हो " रात को १२ बजे ..१२:३० बजे ..१ बजे जब भी करना चाहो तब करना जरूर | ये पवित्र तिथि के दिन अपना भजन ..भक्ति बढ़ाने के दिन है | इस का जरुर से फायदा उठाये |

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- श्री सुरेशानंदजी Chittorgarh 29th Jan' 2012

दुःख, चिंता, भय, बीमारी भगाने की तरकीब

जब चिंता आये, भय आये, शोक आये, बीमारी आये तो हरि ................................... जप करके देवमानव हास्य करें | ये डंडा दिखा दो तो फिर चिंता रहेगी ? भय रहेगा क्या ? जब भी दुःख आये, चिंता आये तब आप डंडे बाजी जान लों हट-हच-हट करके भगाए या देव मानव हास्य करके |
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-पूज्य बापूजी Chittorgarh 29th Jan' 2012

घर में सुख शांति के लिए

घर में सुख शांति के लिए " ॐ शांति " " ॐ आनंद" जपे | जप विशेष तिथियों को इसका खास लाभ लें |
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-पूज्य बापूजी Chittorgarh 29th Jan' 2012

दमे का दम निकल जाये

जिन को दमे की तकलीफ़ है दाए नाक से श्वांस ले, रोके...ॐ ..ॐ.. ॐ..जपें और बायें नाक से छोड़ दें | ऐसा २-३ बार करें | और आश्रम के वैद्य डॉक्टर से बूटी ले ले ...एक महीने में दमे का दम निकल जाये | डॉक्टर लोग नहीं मिटा सकते ...अंग्रेजी दावा से दमा नहीं मिटता ..आश्रम की बूटी से एक महीने में दमा मिट जाता है |

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-पूज्य बापूजी Chittorgarh 29th Jan' 2012

जप में मन स्‍थिर करने के लिये क्या करें?

कभी-कभी मन में जप करें..बस में ...कार में कहीं जा रहे हो... मन से जप करें और मन से ही गिनती करें | नहीं तो कई बार हम बोलते है कि मेरा तो मन में जप चल रहा है पर फिर मनोराज भी होता है... मन ईधरउधर भी चला जाता है...इसलिए मन से जप करें तो मन से गिनती भी करें ...ऊगलियों पर नहीं..मन से जप और मन से गिनती से भी मन जप में लग जाता है | दूसरा उपाय है कि एक बार मंत्र होठों से बोले दूसरी बार मन से बोले | इससे भी मन स्थिर हो जाता है |

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- श्री सुरेशानंदजी Chittorgarh 29th Jan' 2012

Wednesday 1 February 2012

समस्त पाप नाशक स्तोत्र

समस्त पाप नाशक स्तोत्र
पुष्करोवाच
विष्णवे विष्णवे नित्यं विष्णवे विष्णवे नमः ।
नमामि विष्णुं चित स्थमहंकारगतिं हरिम् ॥
चित्तस्थमीशमव्यक्तमनन्तमपराजितम् ।
विष्णुमीडयमशेषेण अनादिनिधनं विभुम् ।।
विष्णुश्चित्तगतो यन्मे विष्णुर्बुद्धिगतश्च यत् ।
च्चाहंकारगो विष्णुर्यव्दिष्णुमॅयि संस्थितः
करोति कर्मभूतोऽसौ स्थावरस्य चरस्य
तत् पापं नाशमायातु तस्मिन्नेव हि चिन्तिते
ध्यातो हरति यत् पापं स्वप्ने दृष्टस्तु भावनात्
तमुपेन्द्रमहं विष्णुं प्राणतातिॅहरं हरिम्
जगत्यस्मिन्निराधारे मज्जमाने तमस्यधः
हस्तावलम्बनं विष्णुं प्रणमामि परात्परम्
सर्वेश्वरेश्वर विभो परमात्मन्नधोक्षज
हृषीकेश हृषीकेश हृषीकेश नमोऽस्तु ते
नृसिंहानन्त गोविंद भूतभावन केशव
दुरुक्तं दुष्कृतं ध्यातं शमयाधं नमोऽस्तु ते
यन्मया चिन्तितं दुष्टं स्वचित्तवशवर्तिना
अकार्यँ महदत्युग्रं तच्छ्मं नय केशव
ब्रह्मण्यदेव गोविंद परमार्थपरायण
जगन्नाथ जगध्दतः पापं प्रश्मयाच्युत
यथापरह्मे सायाह्मे मध्याह्मे तथा निशि
कायेन मनसा वाचा कृतं पापमजानता
जानता हृषीकेश पुण्डरीकाक्ष माधव
नामत्रयोच्चारणतः पापं यातु मम क्षयम्
शरीरं में हृषीकेश पुण्डरीकाक्ष माधव
पापं प्रशमयाध त्वं वाक्कृतं मम माधव
यद् भुंजन यत् स्वपंस्तिष्ठन् गच्छन् जाग्रद यदास्थितः
कृतवान् पापमधाहं कायेन मनसा गिरा
यत् स्वल्पमपि यत् स्थूलं कुयोनिनरकावहम्
तद् यातु प्रशमं सर्वं वासुदेवानुकीर्तनात्
परं ब्रहम परं धाम पवित्रं परमं यत्
तस्मिन् प्रकीर्तिते विष्णौ यत् पापं तत् प्रणश्यतु
यत् प्राप्य निवतॅन्ते गन्धस्पशाॅदिवजिॅतम्
सूरयस्तत् पदं विष्णोस्तत् सर्वं शमयत्वधम्
( अग्नि पुराण : १७२.)

माहात्म्यं :-
पापप्रणाशनं स्त्रोत्रं यः पठेच्छृणुयादपि
शारीरैमॉनसैवॉग्जैः कृतैः पापैः प्रमुच्यते
सर्वपापग्रहादिभ्यो याति विष्णोः परं पदम्
तस्मात् पापे कृते जप्यं स्त्रोत्रं सवॉधमदॅनम्
प्रायश्चित्तमधौधानां स्त्रोत्रं व्रतकृते वरम्
प्रायश्चित्तैः स्त्रोत्रजपैर्व्रतैनॅश्यति पातकम्
( अग्नि पुराण : १७२.१९ -२१ )


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- Rishi Prashad April 2004 (No :136)

Friday 27 January 2012

वसंत पंचमी


वसंत पंचमी माँ सरस्वती का प्रागट्य दिवस है । सारस्वत्य मंत्र लिए हुए जो भी साधक है , सरस्वती माँ का पूजन करें और सफेद गाय का दूध मिले अथवा गाय के दूध की खीर बनाकर सरस्वती माँ को भोग लगाये । सफेद पुष्पों से पूजन करें और जिन विद्यार्थियों ने मेरे से सारस्वत्य मंत्र लिया है वे तो खास जीभ तालू पर लगाकर सारस्वत्य मंत्र का जप उस दिन करें तो वे प्रतिभासम्पन्न आसानी से हो जायेंगे ।



वसंत पंचमी सरस्वती माँ का आविर्भाव दिवस है । जो भी पढ़ते हो और शास्त्र आदि या जो भी ग्रन्थ, उनका आदर-सत्कार-पूजन करो । और भ्रूमध्य में सूर्यदेव का ध्यान करो । जिससे पढ़ाई-लिखाई में आगे बढ़ोगे ।

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-पूज्य बापूजी

Wednesday 25 January 2012

सूर्य किरणों से लाभ


धूप-सूर्य किरणों में रखे हुए पानी से स्नान करें तो अनेक रोगों में लाभ होता है धूप में रखे पानी, दूध, गेंहू, तेल, अनाज, खाद्य सामग्री भी उसका उपयोग करने से विटामिन्स डी विपुल मात्रा में आने से शरीर स्वस्थ रहेगा विटामिन-डी की कमी से सूखा रोग, क्षय, धातु की तकलीफ़, संक्रामक रोग, नस-नाड़ी की दुर्बलता, दूर होती है


डॉक्टर सोले ने कहा " केन्सर और नाशी भगंदर की बीमारी सूर्य किरणों से दूर हो गयी "। डॉक्टर हर्निज कहता है " TB के रोगियों को सूर्य चिकिसा से बाद और कोई चिकिसा नहीं " ।


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-पूज्य बापूजी अहमदाबाद 12th Jan'2012

सुबह धरती पर पैर रखते वक़्त

सुबह नींद में से उठें तो धरती पर पैर रखने से पहले उसको प्रणाम करें ....और बोलें "विष्णुपत्नी नमस्तुभ्यं, पादस्पर्श क्षमस्व मे । " ..... ये भी न बोल सके तो " हे भगवान विष्णु की पत्नी ..धरती माता ! आप को मेरा प्रणाम है "
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- श्री सुरेशानंदजी अहमदाबाद 13th Jan' 2012

श्रद्धा -भक्ति बढ़ाने हेतु

गीता के १२ वें अध्याय का दूसरा () और बीसवां (२०) श्लोक .. केवल दो श्लोक का पाठ कर के... भगवद गीता हाथ में रख कर..हम शुभ संकल्प करें कि " हे भगवन ! आप ने ये दो श्लोकों में जो परम श्रद्धा की बात बताई है वो हमारी हमारे गुरु चरणों में हो जाये " तो वो वचन भगवन के हैं ...भगवान सत्स्वरूप हैं तो उनके वचन भी सत है और हम उन वचनों का पाठ कर के संकल्प करें तो जो सचमुच अपने गुरु में श्रद्धा भक्ति बढ़ाना चाहते हैं उनका संकल्प भी ऐसा ही हो जाएगा

शोल्क :-
मय्यावेश्य मनो ये मां नित्ययुक्ता उपासते।
श्रद्धया परयोपेतास्ते मे युक्ततमा मताः।।2।।

श्री भगवान बोलेः मुझमें मन को एकाग्र करके निरन्तर मेरे भजन-ध्यान में लगे हुए जो भक्तजन अतिशय श्रेष्ठ श्रद्धा से युक्त होकर मुझ सगुणरूप परमेश्वर को भजते हैं, वे मुझको योगियों में अति उत्तम योगी मान्य हैं।(2)

ये तु धर्म्यामृतमिदं यथोक्तं पर्युपासते।
श्रद्दधाना मत्परमा भक्तास्तेऽतीव मे प्रियाः।।20।।

परन्तु जो श्रद्धायुक्त पुरुष मेरे परायण होकर इस ऊपर कहे हुए धर्ममय अमृत को निष्काम प्रेमभाव से सेवन करते हैं, वे भक्त मुझको अतिशय प्रिय हैं।(20)

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- श्री सुरेशानंदजी अहमदाबाद 16th Jan' 2012