Search This Blog

Thursday, May 23, 2013

सुख – सम्पदा और श्रेय की प्राप्ति - वैशाखी पूर्णिमा



25th May 2013
   वैशाखी पूर्णिमा को ‘धर्मराज व्रत’ कहा गया है | यह पूर्णिमा दान-धर्मादि के अनेक कायर करने के लिए बड़ी ही पवित्र तिथि है | इस दिन गरीबों में अन्न, वस्त्र, टोपियाँ, जूते-चप्पल, छाते, छाछ या शरबत, सत्संग के सत्साहित्य आदि का वितरण करना चाहिए | अपने स्नेहियों, मित्रों को सत्साहित्य, सत्संग की वीसीडी, डीवीडी, मेमोरी कार्ड आदि भेंट में दे सकते हैं |
   इस दिन यदि तिलमिश्रित जल से स्नान कर घी, शर्करा और तिल से भरा हुआ पात्र भगवान विष्णु को निवेदन करें और उन्हींसे अग्नि में आहुति दें अथवा तिल और शहद का दान करें, टाइल के तेल के दीपक जलाये, जल और तिल से तर्पण करें अथवा गंगादि में स्नान करें तो सब पापों से निवृत हो जाते है | यदि उस दिन एक समय भोजन करके पुरम-व्रत करें तो सब प्रकार की सुख-सम्पदाएँ और श्रेय की प्राप्ति होती है |

वैशाख मास के अंतिम ३ दिन दिलायें महापुण्य पुंज
    ‘स्कंद पुराण’ के अनुसार वैशाख मास के शुक्ल पक्ष में अंतिम ३ दिन, त्रयोदशी से लेकर पूर्णिमा तक की तिथियाँ बड़ी ही पवित्र और शुभकारक हैं | इनका नाम ‘ पुष्करिणी ’ है, ये सब पापों का क्षय करनेवाली हैं |  जो सम्पूर्ण वैशाख मास में ब्राम्हमुहूर्त में पुण्यस्नान, व्रत, नियम आदि करने में असमर्थ हो, वाह यदि इन ३ तिथियों में भी उसे करे तो वैशाख मास का पूरा फल पा लेता है |
    वैशाख मास में लौकिक कामनाओं का नियमन करने पर मनुष्य निश्चय ही भगवान विष्णु का सायुज्य प्राप्त कर लेता है | जो वैशाख मास में अंतिम ३ दिन ‘गीता’ का पाठ करता है, उसे प्रतिदिन अश्वमेध यज्ञ का फल मिलता है | जो इन तीनों दिन ‘श्रीविष्णुसहस्रनाम’ का पाठ करता है, उसके पुण्यफल का वर्णन करने में तो इस भूलोक व स्वर्गलोक में कौन समर्थ हैं | अर्थात् वाह महापुण्यवान हो जाता है | जो वैशाख के अंतिम ३ दिनों में ‘भागवत’ शास्त्र का श्रवण करता है, वाह जल में कमल के पत्तों की भांति कभी पापों में लिप्त नहीं होता | इन अंतिम ३ दिनों में शास्त्र-पठन व पुन्य्कर्मों से कितने ही मनुष्यों ने देवत्व प्राप्त कर लिया और कितने ही सिद्ध हो गये | अत: वैशाख के अंतिम दिनों में स्नान, दान, पूजन अवश्य करना चाहिए |

25th May - Baisaakhi Purnima
Baisaakhi Purnima is also called as "King of all religious vows". This is an extremely holy day for offering donations and engaging in pious activities. One should distribute food, clothing, caps, footwear, umbrella, buttermilk or cordial, literature on discourses among the poor. You may even gift religious literature, vcds-dvds of satsang, memory card, etc.. to your friends or loved ones.

On this day, one must bathe with water augmented with sesame seeds and then offer oblation of ghee, sugar and sesame to Lord Vishnu, or offer the same oblations to a pyre or donate a container of sesame seeds and honey, light a lamp of sesame oil, offer tarpan to your ancestors using water ans sesame or you may also bathe in river Ganga to get rid of past sins. If can observe the supreme vow of taking meal only once in the day, he gets blessed by the best forms of happiness - prosperity and glory.

The last three days of Baisaakh month offer the greatest virtues

As per Skanda Puranas, the last three days on the waxing cycle of moon i.e. from Trayodashi till full moon are considered very holy and auspicious. They are designated as "Pushkarini". They assist in washing away our past sins. One who is incapable of getting up early at Brahmamuhurta for holy bath and practices... then maintaining that discipline even for these three days will benefit him equivalent to the austerities conducted  for the entire month.

In the Baisaakh month, one gains closeness to Lord Vishnu by virtue of abstaining from worldly desires. One who recites Bhagwad Gita in the last three days of the Baisaakh month, he gains fruits of performing the Ashwamegh rites. One who recites VishnuSahashranaam in the last three days of the Baisaakh month, none from this earthly realm or even heavens are capable of extolling the virtues from it. Thus, the person becomes exceptionally holy. One who listens to Bhaagvat scriptures in the last three days of the Baisaakh month, he gains the ability to live in this world like a lotus leaves in water, never getting embroiled in sins around him. On these last three days, so many people have attained to Godliness and attained Sidhhis, accomplishments. So, in these last three days of the Baisaakh month, one must take part in bathing, donation, service and prayers.
- Rishi Prasad May 2013 
     
 

Wednesday, May 15, 2013

हनुमान जयंती - दीप दान महिमा -

गेहूँ, तिल, उड़द, मूंग और चावल.. इन पाँचों के आटे से मिलाकर दिया बनाया जाये और वो जलाकर हनुमानजी के नाम से मंदिर में, पीपल या बड के पेड़ या घर में ही रखा जाये तो बड़ा शुभ माना जाता है |

इससे मनोरथो की सिद्धि होती है|

भक्ति बढ़ाने की भावना से हनुमानजी की राम भक्ति सच्ची है तो मेरी भी मेरे अराध्य के चरणों में, मेरे सद्गुरु के चरणों में मेरी भक्ति सच्ची हो, दृढ हो | मेरा जीवन उपासनामय हो | मैं इच्छानिवृति का रास्ता कभी न छोडू, मैं गुरु की उपासना का रास्ता कभी न छोडू | मेरे भक्ति में दृढ़ता है इसलिए हनुमानजी के जयंती को हनुमान से नाम से पाँच अन्न का आटा मिलाकर अगर दीपक बनाया जाये और हनुमानजी के नाम से जलाया जाय तो बड़ा शुभ मानाया जाता है | सरसों का तेल का और घी का भी दिया कर सकते है |

Hanuman Jayanti - Virtue of donating lamps

Wheat grains, sesame, urad, moong and rice... Make a paste of all their flour and make a small earthen lamp and light it in front of a Hanuman temple, Peepal tree or even keeping it inside the home or under a banyan tree is considered very auspicious.

This brings forth accomplishment of true desires.

With the intent of augmenting devotion, remind yourself that Hanumanji's devotion to Lord Rama is true, similarly may I establish my prayers and devotion at my true Guru's feet too in full earnest. May my life become a hub of spiritual practice. May I never wander from the path of renunciation. May my devotion enhance, so I am offering this lamp made of flour from five grains to Lord Hanumanji. Performing this rite is considered very auspicious on eve of Hanuman Jayanti. You can use mustard oil or ghee to light the lamp.
Listen Audio

- Shri Sureshanandji Vapi 24th April' 2013

पानी पीने वक़्त श्वासों की गति –

पानी पीना हो तो दायाँ श्वास बंद रखके पीना चाहिये | अगर प्यास लगे.. फिर भी दायाँ स्वर चल रहा है तो दायाँ स्वर बंद रखकर पानी पीना चाहिये तो शरीर बलवान रहता है, कमजोर नहीं रहता है शरीर और बड़ी उम्र में भी शरीर में दम रहता है | इससे स्वप्न दोष से बचने में भी लाभ होता है |

Observing breath while drinking water

One must drink water while keeping the right nostril closed. If you are thirsty... even then if the right nostril is flowing then block that nostril while drinking water. This ensures a sturdy body and drives away weakness, especially at old age. It also assists in overcoming nocturnal emissions.

Listen Audio

- Shri Sureshanandji Vapi 24th April' 2013

मोटापा से बचने हेतु –

शरीर का वजन ज्यादा लगे किसी को तो उसको नींबू का शरबत दोपहर के भोजन के एक घंटे के बाद पीना चाहिये | नींबू, शहद थोडा-सा और संतकृपा चूर्ण ( जो आश्रम में मिलता है ) मिलाकर वो पीये तो उससे वजन कम हो सकता है |

Overcoming obesity

If you have a large built, heavy body, then you should drink lemon cordial in the afternoon around one hour after lunch. Lemon, a little honey and Santkripa Churna (available at ashram) all mixed together will work wonders to reduce body weight.
Listen Audio


- Shri Sureshanandji Vapi 24th April' 2013

Tuesday, May 14, 2013

वासना से बचने :

ॐकार’ मंत्र वासना मिटाने में बड़ा शक्तिशाली है और जिसको वासना मिटानी है तो जो ज्यादा वासना है उसको सामने रखें और लंबा श्वास लें, भगवान का चिंतन करें | समझो, काम विकार है तो ‘ॐ अर्यमायै नमः’का जप करे |

Protect yourself from desires :-

"AUM" matra is tremendously capable of eradicating desires. If you are keen on removing desires, then take a deep breath and meditate on God. Say, you are plagued with lust, then recite "AUM ARYAMAYEI NAMAH".

Listen Audio

- Pujya Bapuji Haridwar 2nd May' 2013

मन स्थिर करने - एकग्रता बढ़ाने

मन स्थिर करना हो तो अंकुश का ध्यान करें | हाथी को अंकुश लगाते है ना तो हाथी नियंत्रित होता है | तो मन भी हाथी जैसा है तो अंकुश का ध्यान करें|
दूसरा तरीका छोटी ऊँगली धरती पे रख दे.. ... अंगूठा ऊपर और छोटी ऊँगली नीचे धरती पर थोड़ी देर रखें | अब मैं स्थिर होऊँगा| मेरी चंचलता मिटेगी | ॐ ओमम्म्म्मम्म्म्म ...बाद में आँखों की पलके न हिले.. ऐसा १ मिनट देखे| मन एकाग्र होने लगेगा | पढाई में चमत्कार होगा और भगवान की भक्ति भी बढ़ेगी अथवा तो फिर प्राणायम, ध्यान करके गर्दन पीछेवाले, आगेवाले प्राणायम करके फिर बैठ जाये होठ बंद करें, जीभ ऊपर भी न लगे और नीचे भी न लगे.. बीच में खड़ी रहे और श्वासोश्वास की गिनती करें| चंचलता दूर, एकाग्रता बढ़ेगी| श्वासोश्वास गिनें.. एकग्रता बढ़ेगी |

Improve concentration - steady the mind

If you want to steady your mind, meditate on a hook. Just as an elephant gets bound by hooking it to a post. Similarly, mind too is like an elephant, meditate to hook it.

Another approach is to rest the little finger on the ground with thumb pointing upwards for some time. Now I am steady. My fickleness is waning away. AUM ... AUMMMM... Then dont move your eyelids... Meditate for one minute atleast. Mind will start getting focussed. You will start excelling in your studies and augment devotion towards God as well.

You can also do a couple of pranayam, then the exercise which involves moving your neck forward and backwards and then sit for meditation with lips closed, tongue neither sticking to the top nor hanging at bottom... rather steady at centre. Count your breath. Mental wavering wanes away... concentration will improve. Count your breath... concentration will improve.

Listen Audio

- Pujya Bapuji Haridwar 1st May' 2013

Wednesday, May 8, 2013

बुद्धि विकसित करने के लिए -

बुद्धू से बुद्धू हो ये मंत्र जप करें तो बुद्धि विकसित होगी | अगर काले तिल और चावल मिलाकर १० माला आहुति देकर मंत्र करें तो ३ दिन में तो तुम्हारी क्या-क्या योग्यता विकसित होगी |

वो मंत्र है – ॐ गं गणपतये नम: |

१ माला रोज जप करें | ४० दिन के बाद उसके बुद्धि में परिवर्तन होके ही रहेगा | १ माला रोज करें विद्यार्थी परीक्षा में अच्छे मार्क लायेगा | व्यापारी निर्णय अच्छे करेगा, ऑफिसर निर्णय अच्छे करेगा | जो शरीर का सार तत्त्व है, वो ज्ञानतंत्र में मंत्र के प्रभाव से, इष्ट के प्रभाव से जागेगा, बुद्धि का विकास होगा ...

To augment intellect
A dumbest of dumb person can also develop his intellect by chanting this mantra. If you offer oblations of mixture of black sesame seeds and rice, and chant 10 malas of this mantra, within three days you will observe miraculous improvements in your personality. That mantra is : AUM GAM GANAPATAYE NAMAH.

Chant one mala every day.After 40 days, the intellect will enhance miraculously. If a student does one mala everyday, he will secure good marks. A businessman or officer doing this mala would inspire him to take good decisions. This intellectual mantra has a positive impact on the core essence of human body and by grace of God, your intellect will begin to enhance.
- Pujya Bapuji

अक्षय फलदायी “अक्षय तृतीया”

वैशाख शुक्ल तृतीया की महिमा मत्स्य, स्कंद, भविष्य, नारद पुराणों व महाभारत आदि ग्रंथो में है । इस दिन किये गये पुण्यकर्म अक्षय (जिसका क्षय न हो) व अनंत फलदायी होते है, अत: इसे 'अक्षय तृतीया' कहते है । यह सर्व सौभाग्यप्रद है ।

यह युगादि तिथि यानी सतयुग व त्रेतायुग की प्रारम्भ तिथि है । श्रीविष्णु का नर-नारायण, हयग्रीव और परशुरामजी के रूप में अवतरण व महाभारत युद्ध का अंत इसी तिथि को हुआ था ।
इस दिन बिना कोई शुभ मुहूर्त देखे कोई भी शुभ कार्य प्रारम्भ या सम्पन्न किया जा सकता है । जैसे - विवाह, गृह - प्रवेश या वस्त्र -आभूषण, घर, वाहन, भूखंड आदि की खरीददारी, कृषिकार्य का प्रारम्भ आदि सुख-समृद्धि प्रदायक है ।

प्रात:स्नान, पूजन, हवन का महत्त्व

इस दिन गंगा-स्नान करने से सारे तीर्थ करने का फल मिलता है । गंगाजी का सुमिरन एवं जल में आवाहन करके ब्राम्हमुहूर्त में पुण्यस्नान तो सभी कर सकते है । स्नान के पश्चात् प्रार्थना करें :
माधवे मेषगे भानौं मुरारे मधुसुदन ।
प्रात: स्नानेन में नाथ फलद: पापहा भव ॥
'हे मुरारे ! हे मधुसुदन ! वैशाख मास में मेष के सूर्य में हे नाथ ! इस प्रात: स्नान से मुझे फल देनेवाले हो जाओ और पापों का नाश करों ।'
सप्तधान्य उबटन व गोझरण मिश्रित जल से स्नान पुण्यदायी है । पुष्प, धुप-दीप, चंदनम अक्षत (साबुत चावल) आदि से लक्ष्मी-नारायण का पूजन व अक्षत से हवन अक्षय फलदायी है ।

जप, उपवास व दान का महत्त्व -
इस दिन किया गया उपवास, जप, ध्यान, स्वाध्याय भी अक्षय फलदायी होता है । एक बार हलका भोजन करके भी उपवास कर सकते है । 'भविष्य पुराण' में आता है कि इस दिन दिया गया दान अक्षय हो जाता है । इस दिन पानी के घड़े, पंखे, ओले (खांड के लड्डू), पादत्राण (जूते-चप्पल), छाता, जौ, गेहूँ, चावल, गौ, वस्त्र आदि का दान पुण्यदायी है । परंतु दान सुपात्र को ही देना चाहिए । पूज्य बापूजी के शिष्य पूज्यश्री के अवतरण दिवस से समाज सेवा के अभियानों में नए वर्ष का नया संकल्प लेते है । अक्षय तृतीया के दिन तक ये अभियान बहार में आ जाते है, जिससे उन्हें अक्षय पुण्य की प्राप्ति होती है ।

पितृ-तर्पण का महत्त्व व विधि -

इस दिन पितृ-तर्पण करना अक्षय फलदायी है । पितरों के तृप्त होने पर घर ने सुख-शांति-समृद्धि व दिव्य संताने आती है ।

विधि : इस दिन तिल एवं अक्षत में श्रीविष्णु एवं ब्रम्हाजी को तत्त्वरूप से पधारने की प्रार्थना करें । फिर पूर्वजों का मानसिक आवाहन कर उनके चरणों में तिल, अक्षत व जल अर्पित करने की भावना करते हुए धीरे से सामग्री किसी पात्र में छोड़ दें तथा भगवान दत्तात्रेय, ब्रम्हाजी व विष्णुजी से पूर्वजों की सदगति हेतु प्रार्थना करें । 

आशीर्वाद पाने का दिन -
इस दिन माता-पिता, गुरुजनों की सेवा कर उनकी विशेष प्रसन्नता, संतुष्टि व आशीर्वाद प्राप्त करें । इसका फल भी अक्षय होता है ।

अक्षय तृतीया का तात्त्विक संदेश- 

'अक्षय' यानी जिसका कभी नाश न हो । शरीर एवं संसार की समस्त वस्तुएँ नाशवान है, अविनाशी तो केवल परमात्मा ही है । यह दिन हमें आत्म विवेचन की प्रेरणा देता है । अक्षय आत्मतत्त्व पर दृष्टी रखने का दृष्टिकोण देता है । महापुरुषों व धर्म के प्रति हमारी श्रद्धा और परमात्म प्राप्ति का हमारा संकल्प अटूट व अक्षय हो - यही अक्षय तृतीया का संदेश मान सकते हो ।  


Akshaya Tritiya Brings never-diminishing Fruits (13th May)
The greatness of Akshaya Tritiya, i.e. the third lunar day of the bright fortnight of the month of Vaishakha is described in Holy Scriptures such as the Matsya, Skanda, Bhavishya and Narada Puranas, the Mahabharata etc. The meritorious deeds performed on  this day produce imperishable result and infinite returns. That is why it is known as Akshaya Tritiya. It enhances good fortunes. This also marks the beginning of the Satya Yuga and the Treta Yuga. It is the birthdat of Nara-Narayana, Hayagriva and Parashurama, the divine incarnations of Lord Vishnu. On this day of Akshaya Tritiya, Veda Vyasa along with Ganesha started writing the great epic of Mahabharata.
It is one of the three auspicious days as per the Hindu electional astrology. So any auspicious act can be initiated and completed on this day without choosing a Muhurta (auspicious time for a venture) from the Panchaanga (almanac). Such acts as marriage, house-entering, making new purchases of – clothes, gold ornaments, a house, a vehicle, a piece of land, etc.; and beginning of some agricultural work when done on this day bring happiness and prosperity.
Importance of bathing, worshipping and doing hawan in the morning.
The act of bathing in the river Ganga on this days accrues religious merits equal to that earned by visiting all pilgrim places. In case it is not possible, one can definitely earn religious merits by bathing in theBrahma Muhurta (two hours before sunrise) at home itself by first remembering mother Ganga with reverence and invoking her blessed presence in the bath-water. Do pray after taking your bath:
माधवे मेषगे भानौं मुरारे मधुसुदन ।
प्रात: स्नानेन में नाथ फलद: पापहा भव ॥
Meaning: “ O Lord Murari! O Lord Madhusudana! Please be the giver of religious merits of bathing in the early morning with the Sun in the constellation of Aries, and thereby destroy all my sins!
The practice of bathing after applying the unguent made from the powders of seven grains and mixing pious urine of the Desi cow to the batch water gives religious merits. One can earn never-diminishing religious merits by worshipping Lord Narayana and His consort Goddess Lakshmi with flowers, essence, pious lamp, sandalwood paste, unbroken rice, etc. and doing havan with unbroken rice.
Importance of Japa, Fast and Donation
Doing Japa, keeping fast, practicing meditation, self-study, etc. on this day gives never-diminishing fruits as well. One can keep fast even by having a single light meal in a day. The ‘Bhavishya Purana’ states that the religious gifts bestowed on this day become inexhaustible. The donation of specific items like a pitcher, a fan, Oles (balls of sugar), sandals, an umbrella, barley, wheat, rice, cow, clothes etc. imparts religious merits. However, donation ought to be given to a truly deserving and virtuous person. On the most auspicious occasion of Pujyashree’s incarnation day itself the disciples of Pujya Bapuji make a new resolve to begin fresh campaigns of social service in the new year; and by Akshay Tritiya such benevolent campaigns reach their altruistic peak, which endow them with never-diminishing religious merits.
Offering of water to ancestors on this day yields never-diminishing religious merits. Satisfaction of the ancestors paves the way for peace, happiness and prosperity as well as for the birth of divine souls in the family.
Procedure: Invite Lord Vishnu and Lord Brahma in their subtle forms to the sesame seeds and unbroken rice respectively. Then invoke your ancestors and pour the mixture of sesame seeds, unbroken rice and water into a vessel thinking as if you are offering that to your ancestors. Thereafter, pray to Lords Dattatreya, Brahmaji and Vishnuji for the emancipation of your ancestors.
A Day of Receiving Blessings
On this auspicious day one should serve parents and elders to satisfy them and get their blessings.
The Spiritual Import of Akshaya Tritiya
The term ‘Akshay’ means imperishable. Everything, including your body and the things of this entire world are perishable. The Supreme Self or the Lord Supreme alone is imperishable. This day inspires us for Self-analysis. It gives us the right perspective to keep our gaze focused on the imperishable Self. The real message of ‘Akshaya Tritiya’ is to keep our faith in great men and Dharma unswerving, and our resolve or attaining God indestructible.




- Rishi Prasad April 2013 

कोई कष्ट हो तो –


हमारे जीवन में बहुत समस्याएँ आती रहती हैं, मिटती नहीं हैं ।, कभी कोई कष्ट, कभी कोई समस्या | ऐसे लोग शिवपुराण में बताया हुआ एक प्रयोग कर सकते हैं कि, कृष्ण पक्ष की चतुर्थी (मतलब पुर्णिमा के बाद की चतुर्थी ) आती है | उस दिन सुबह छः मंत्र बोलते हुये गणपतिजी को प्रणाम करें कि हमारे घर में ये बार-बार कष्ट और समस्याऐं आ रही हैं वो नष्ट हों |
छः मंत्र इस प्रकार हैं
ॐ सुमुखाय नम: : सुंदर मुख वाले; हमारे मुख पर भी सच्ची भक्ति प्रदान सुंदरता रहे ।
ॐ दुर्मुखाय नम: : मतलब भक्त को जब कोई आसुरी प्रवृति वाला सताता है तो भैरव देख दुष्ट घबराये
ॐ मोदाय नम: : मुदित रहने वाले, प्रसन्न रहने वाले । उनका सुमिरन करने वाले भी प्रसन्न हो जायें ।
ॐ प्रमोदाय नम: : प्रमोदाय; दुसरों को भी आनंदित करते हैं । भक्त भी प्रमोदी होता है और अभक्त प्रमादी होता है, आलसी । आलसी आदमी को लक्ष्मी छोड़ कर चली जाती है । और प्रमोदी को जो प्रमादी न हो, लक्ष्मी स्थायी होती है ।
ॐ अविघ्नाय नम:
ॐ विघ्नकरत्र्येय नम: 

Drive away troubles from your life

Human life is infested with many troubles. We are always confronted with one problem or the other. People who have lot of troubles in their life can do one experiment prescribed in Shiva Puran. According to Shiva Puran, on the fourth day of the waning moon cycle (means four days after a full moon night), one should bow his head to lord Ganesha, chant these six mantras and pray to him to remove the obstacles in ones life. Those six mantras as follows:

AUM SUMUKHAYA NAMAH one having a beautiful face. May our face also be endowed with the beauty of devotion.
AUM DURMUKHAYA NAMAH one who does not let evil tendencies harm or disturb his devotees
AUM MODAAYA NAMAH one who is always joyful and all those who pray to him are also joyful
AUM PRAMODAYA NAMAH one who always impart joy and happiness to others. A devotee always remains in bliss whereas an agnostic is lazy.An agnostic is devoid of lashmi where as lakshmi stays with one who is devoted to lord.

AUM AVIGHNAAYA NAMAH
AUM VIGHNAKARTRYEYA NAMAH  


Listen Audio


- Shri Sureshanandji Dewas 16th April' 2013

नवरात्रियों की सप्तमी तिथि –



नवरात्रियों के दिनों में जप, सुमिरन विशेष किया जाता है | और वृत्तोत्सव ग्रंथ के अनुसार और  भविष्यपुराण में आता है कि, चैत्र मास के शुक्ल पक्ष की सप्तमी को जप करें |
मंत्र इसप्रकार है ॐ धात्रेय नम: ॐ धात्रेय नम: |  ॐ धात्रेय नम:  | ॐ धात्रेय नम:
इस मंत्र से भगवान का पूजन, सूर्यनारायण को अर्घ्य देने से आयु, आरोग्य और ऐश्वर्य की विशेष वृद्धि होती है |

The seven lunar day of Navratri

On the days of Navratri, it is beneficial to do excess japa and remembrance of God. And as per Vrittottar scripture and Bhavishya Purana, one must do japa on seventh lunar day of Navratri and recite the following mantra.
AUM DHATREEYA NAMAH |

Praying to God using this mantra and offering oblations to Lord SuryaNarayan helps to augment longevity, health and distinction in society. 


- Shri Sureshanandji Dewas 16th April' 2013

स्वभाव चंचल हो तो -



चंचल स्वभाव है,ऐसा चिंतन करके मैं शांत आत्मा हूँ, चिद्ग्न आत्मा हूँ, चैतन्य आत्मा हूँ | चंचलता मन में उसको जाननेवाला चल मन को जाननेवाला अचल मेरा आत्मा-परमात्मा है...  ॐ.. ॐ... ॐ ... थोड़े दिन में ठीक हो जाएगा

If you are fickle minded

If you are fickle minded, meditate as if you are a calm soul, all encompassing, eternal soul. The One who knows that my fluctuating mind is none other but my own steady supreme soul.... AUM... AUM... AUM... In a few days, you shall see the improvement. 


- Pujya Bapuji Haridwar 1st May' 2013