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Wednesday, August 28, 2019

पुण्यदायी तिथियाँ



२ सितम्बर : गणेश/कलंक चतुर्थी ( चन्द्रदर्शन निषिद्ध, चंद्रास्त – रात्रि ९:२६)

९ सितम्बर : पद्मा एकादशी (व्रत करने व माहात्म्य पढने –सुनने से सब पापों से मुक्ति )

१७ सितम्बर : मंगलवारी चतुर्थी ( शाम ४:३३ से १८ सितम्बर सूर्योदय तक ). षडशीति संक्रांति  ( पुण्यकाल: दोपहर १:०४ से सूर्यास्त ) (ध्यान, जप व पुण्यकर्म का ८६,००० गुना फल )

ऋषिप्रसाद – अगस्त २०१९ से   



विघ्न-निवारण व मेधाशक्ति की वृद्धि हेतु


गणेश चतुर्थी के दिन ‘ॐ गं गणपतये नम: |’ का जप करने और गुड़मिश्रित जल से गणेशजी को स्नान कराने एवं दुर्गा व सिंदूर की आहुति देने से विघ्न-निवारण होता है तथा मेधाशक्ति बढती है |

ऋषिप्रसाद – अगस्त २०१९ से

बुद्धिमान, धनवान, धर्मात्मा व दीर्घजीवी संतान हेतु


मनु महाराज कहते हैं कि किसी स्त्री को दीर्घजीवी, यशस्वी, बुद्धिमान, धनवान, संतानवान ( पुत्र-पौत्रादि संतानों से युक्त होनेवाला), सात्त्विक तथा धर्मात्मा पुत्र चाहिए तो श्राद्ध करे और श्राद्ध में पिंडदान के समय बीच का ( पितामह संबंधी) पिंड उठाकर उस स्त्री को खाने को दे दिया | ‘आधत्त पितरो गर्भ कुमारं पुष्करस्त्रजम |’ (पितरो ! आप लोग मेरे गर्भ में कमलों की माला से अलंकृत एक सुंदर कुमार की स्थापना करें |) इस मंत्र को प्रार्थना करते हुए स्त्री पिंड को ग्रहण करे | श्रद्धा-भक्तिपूर्वक यह विधि करने से उपरोक्त गुणोंवाला बच्चा होगा |

(इस प्रयोग हेतु पिंड बनाने के लिए चावल को पकाते समय उसमें दूध और मिश्री भी डाल दें | पानी एवं दूध की मात्रा उतनी ही रखें जिससे उस चावल का पिंड बनाया जा सके | पिंडदान – विधि के समय पिंड को साफ़-सुथरा रखें | उत्तम संतानप्राप्ति के इच्छुक दम्पति आश्रम की समितियों के सेवाकेन्द्रों पर उपलब्ध पुस्तक दिव्य शिशु संस्कार अवश्य पढ़ें |)

ऋषिप्रसाद – अगस्त २०१९ से

पित्त-संबंधी समस्याओं हेतु


१] जिनको पित्तवृद्धि की तकलीफ है वे अगर थोड़ी भी भुखमरी करें तो उनके मणिपुर केंद्र में क्षोम पैदा होता है और पित्त बढ़ता है | स्वभाव में क्रोध, आँखों में जलन आदि समस्याएँ उनको घेर लेती हैं | ऐसे लोग पित्त-शमन के लिए घी व मिश्री मिश्रित भोजन लें व बेल या ताड़ का फल खाकर पानी पियें |    

२] पित्तजन्य व्याधियों मिटाने के लिए २ चम्मच पिसा हुआ धनिया और थोड़ी मिश्री ठंडे पानी में घोलकर पीने से कितना भी बढ़ा हुआ पित्त हो, उसका शमन हो जायेगा |

३] २ – ३ ग्राम तिल का चूर्ण और मिश्री मिलाकर चबा-चबा के खायें | तिल पचने में भारी होते हैं लेकिन पित्तवाले के लिए तिल और मिश्री का मिश्रण चबा के खाना पित्तशामक होता है |

४] पित्त के कारण सिर में दर्द हो तो गाय के शुद्ध घी को गुनगुना करके नस्य लें | इससे पित्त शमन होता है, सिरदर्द गायब हो जायेगा |

५] दही खट्टा न हो और उसमें थोड़ी-सी मिश्री मिली हो तो वह भी पित्तशमन करेगा |


ऋषिप्रसाद – अगस्त २०१९ से

क्या करें, क्या न करें


क्या करें
१] भोजन नियमित समय पर ( सुबह ९ से ११ तथा शाम को ५ से ७ बजे के बीच ), सीमित मात्रा में, पचने में हलका व रुक्ष करें | सलाद व सब्जियों का उपयोग अधिक करें | गेहूँ का उपयोग कम करें, जौ, ज्वार या बाजरे की रोटी लें |
२] प्राणायाम, आसन, तेजी से चलना या दौड़ना, तैरना आदि व शारीरिक श्रम नियमित करें | सप्ताह में एक दिन उपवास जरुर करें |
३] तखत पर पतला बिस्तर बिछाकर सोना, तिल या सरसों के तेल से मालिश करना व सामान्यतया लम्बे-गहरे श्वास लेना लाभकारी हैं |
४]  प्रात:काल गुनगुने पानी में शहद तथा नींबू का रस मिलाकर लें | गर्म-गर्म अन्न, गर्म पानी तथा चावल के माँड का सेवन करें |
५] शहद, आँवला चूर्ण, गोमूत्र अर्क, त्रिफला चूर्ण, शुद्ध शिलाजीत, तथा सोंठ आदि का सेवन हितकारी है |
   [ ये सभी उत्पाद आश्रम की समितियों के सेवाकेन्द्रों पर उपलब्ध हैं |]

क्या न करें
१] पचने में भारी, मधुर व शीतल आहार का सेवन, अधिक मात्रा में भोजन व निद्रा तथा व्यायाम व परिश्रम का अभाव आदि कारणों से शरीर स्थूल होता है | अत: इनसे बचें |
२] दिन में सोना, लगातार बैठे रहना, देर रात को भोजन करना, भोजन में नमक का अधिक प्रयोग, गद्दों पर तथा ए.सी. या कूलर की हवा में सोना, आरामप्रियता आदि का त्याग करें |
३] कार्बोहाइड्रेट की अधिकतावाले पदार्थ जैसे – चावल, शक्कर, गुड़, आलू, शकरकंद व इनसे बने हुए व्यंजन तथा स्निग्ध पदार्थ जैसे –घी, तेल व इनसे बने हुए पदार्थ एवं दही, दूध से बने खोया (मावा), मिठाई आदि व्यंजन और सूखे मेवे व फास्ट फ़ूड के सेवन से बचें |
४] अधिक तनाव भी अति स्थूलता का कारण हो सकता है अत: इससे बचें | इसके लिए सत्संग, ध्यान आदि का आश्रय लें |
५] बार-बार खाने तथा भोजन के बाद तुरंत नींद लेने या स्नान करने से बचें | (अति भुखमरी भी न करें |)

ऋषिप्रसाद – अगस्त २०१९ से

स्वास्थ्यवर्धक एवं पथ्यकर करेला


करेला कड़वा, पित्त व कफ शामक, रक्तशुद्धिकर, मल-निस्सारक एवं मूत्रजनन है | करेले की सब्जी खाने या रस पीने से पाचनशक्ति मजबूत होती है | रक्ताल्पता में इसके रस का सेवन करना हितकारी है | जले हुए स्थान पर इसके रस का लेप करने से जलन शांत होती है | यह अरुचि, भूख की कमी, आमदोष, कृमि, रक्तविकार, खून की कमी, खाँसी, दमा, मासिक धर्म की कमी, मोटापा आदि में लाभदायी है |

सूजन, गठिया, वातरक्त, यकृत व तिल्ली की वृद्धि एवं पुराने चर्मरोग, बुखार, अजीर्ण, मधुमेह, बवासीर, वातरोग, प्रमेह (मूत्र-संबंधी विकारों ), शरीर में दर्द, हाथीपाँव, घेंघा, सूजाक, विसर्प, मुँह व कान के रोग, नेत्रदृष्टि की कमजोरी, कफजन्य रोगों आदि में करेले की सब्जी का सेवन लाभकारी है |

मधुमेह में यह उत्तम कार्य करता है | इससे रक्तगत शर्करा कम होती है तथा सूक्ष्म मल एवं आमदोष का नाश होता है तथा सूक्ष्म मल एवं आमदोष का नाश होता है | यकृत तथा आमाशय की क्रिया सुधरती है तथा अग्न्याशय उत्तेजित होकर इंसुलिन का स्राव बढ़ता है |

आधुनिक अनुसंधानों के अनुसार करेले में विटामिन ए, बी, सी तथा कैल्शियम, फॉस्फोरस, लौह आदि खनिज पाये जाते हैं |

औषधीय प्रयोग
१] संधिवात व गठिया में : करेलों को आग पर भून के भुरता बनाकर दिन में एक बार १०० ग्राम तक यह भुरता खायें | १० दिन तक यह प्रयोग करने से स्नायुगत वात, संधिवात आदि में लाभ होता है | करेले के रस को गर्म करके दर्दवाले स्थान पर प्रतिदिन २ – ३ बार लेप करना भी लाभदायी है |
२] तिल्ली की वृद्धि : १ कप पानी में करेले का २५ मि.ली. रस मिला के दिन में १ – २ बार पीने से तिल्ली का बढ़ना कम हो जाता है |
] अम्लपित्त : करेले के भुरते में सेंधा नमक मिला के भोजन के साथ खाने से अम्लपित्त दूर होता है |
४] मोटापा : करेले के २० – ३० मि.ली. रस में एक नींबू का रस मिला के सुबह सेवन करने से मोटापा कम होता है |
५] मंद बुखार, शरीर में दर्द, भूख न लगना व आँखे भारी होना : करेले के छोटे-छोटे टुकड़े करके रातभर ठंडे पानी में भिगोकर रखें | इस पानी को दिनभर में थोडा-थोडा पिये तो लाभ होता है |
६] मधुमेह : करेलों को काट के कुछ देर तक पैरों से कुचलें | यह प्रयोग मधुमेह में बहुत लाभकारी है | ( प्रयोग – विधि जानने हेतु पढ़ें ऋषिप्रसाद, दिसम्बर २०१८ का पृष्ठ ३२ )

विशेष : प्राय: सब्जी बनाते समय करेले के हरे छिलके व कड़वा रस निकाल दिया जाता है | इससे करेले के गुण बहुत कम हो जाते हैं अत: छिलके उतारे बिना तथा कड़वापन दूर किये बिना सब्जी बनानी चाहिए |
ऋषिप्रसाद – अगस्त २०१९ से

भूल से चन्द्र-दर्शन हो जाय तो ...... गणेश चतुर्थी – २ सितम्बर २०१९


भाद्रपद मास की शुक्ल चतुर्थी को चन्द्र-दर्शन से कलंक लगता है | इस वर्ष गणेश चतुर्थी  (२ सितम्बर ) के दिन चन्द्रास्त रात्रि ९:२६ बजे है | 
अत: इस समय तक चन्द्र-दर्शन न करें | दि भूल से चन्द्रमा दिख जाय तो श्रीमदभागवत के १०वें स्कंध के ५६-५७ वें अध्याय में दी गयी ‘स्यमंतक मणि की चोरी’ की कथा का आदरपूर्वक पठन-श्रवण करें | इससे अच्छी तरह कुप्रभाव मिटता है | 

तृतीया (१ सितम्बर ) तथा पंचमी (३ सितम्बर) के चन्द्रमा का दर्शन कर लें, यह कलंक-निवारण में मददरूप है |

(अधिक जानकारी हेतु आश्रम की समितियों के सेवाकेन्द्रों पर उपलब्ध पुस्तक ‘क्या करें, क्या न करें ?’ का पृष्ठ ४९  देखें |)


ऋषिप्रसाद – अगस्त २०१९ से

Monday, July 22, 2019

औषधीय रूप से भी महत्वपूर्ण है – दूर्वा



भारतीय संस्कृति में दूर्वा (दूब) को पवित्र माना जाता है एवं धार्मिक कार्यों में इसका उपयोग पूजन-सामग्री के रूप में किया जाता है | यह न केवल धार्मिक दृष्टि से उपयोगी है बल्कि औषधीय रूप से भी महत्वपूर्ण है | दूर्वा दो प्रकार की होती है – श्वेत और हरी |

हरी दूब शीतल, पचने में हलकी, कसैली, मधुर एवं रक्तशुद्धिकर, मूत्रवर्धक व कफ-पित्तशामक होती है | आधुनिक अनुसंधानों के अनुसार इसमें विटामिन ‘सी’ व फॉस्फोरस, मैग्नेशियम, कैल्सियम, पोटैशियम, सोडियम आदि खनिज तत्त्व पाये जाते हैं |

यह प्यास की अधिकता, जलन, विसर्प आदि में लाभप्रद है | शरीर में बढ़ी हुई भारी उष्णता को कम करने एवं शरीर को बल देने का बड़ा गुण दूर्वा में है | भगवान को अर्पण करने के निमित्त दुर्वा का स्पर्श होता है | इससे सहज में ही शरीर की उष्णता कम होती है | दूर्वा को पानी में ४ घंटे रख के वह पानी पीने से उष्णता कम होती है |

घाव को भरने व जलन को कम करने के गुण के कारण जख्म, फोड़ा, बवासीर, चर्मरोग आदि में दूर्वा के रस का लेप करना लाभदायी है | शीतपित्त, पित्त के कारण होनेवाला सिरदर्द आदि में इसका लेप करें |

दुर्वा का ताजा रस पुराने अतिसार व पतले दस्तों में उपयोगी है | इसके सेवन से पेचिस, सूजाक, रक्तपित्त तथा दिमागी कमजोरी, उन्माद, मिर्गी आदि मानसिक रोगों में लाभ होता है | मधुमेह, अल्सर आदि बीमारियों में भी यह लाभदायी है |

औषधीय प्रयोग

१] मासिक धर्म का अधिक आना व गर्भपात : दूर्वा का १० मि.ली. रस मिश्री के साथ सुबह-शाम कुछ दिनों तक लगातार लेने से मासिक धर्म का अधिक आना तथा बार-बार गर्भपात होना आदि समस्याओं में लाभ होता है | इससे गर्भाशय को शक्ति प्राप्त होती है तथा गर्भ को पोषण मिलता है |

२] खून बवासीर : दूर्वा के १० मि.ली. रस में २ ग्राम नागकेसर चूर्ण मिला के सुबह-शाम लेने से बवासीर में बहानेवाला खून बंद हो जाता है |

३] शीतपित्त : दूर्वा और हल्दी को पीसकर रस निकल के पूरे शरीर पर लेप करने से शीतपित्त में लाभ होता है |

४] रक्तप्रदर : मासिक धर्म में अत्यधिक रक्तस्त्राव होने पर दूर्वा के आधा कप रस में मिश्री मिला के सुबह-शाम लें |

५] पेशाब के साथ खून आना : दूर्वा के १५ – २० मि.ली. रस में मिश्री मिला के दिन में दो बार पियें |

६] आँव पड़ना : आँव पड़ने व पेटदर्द की समस्या में दूर्वा के ३ – ४ चम्मच रस में एक चुटकी सोंठ चूर्ण मिला के दिन में दो बार पीने से लाभ होता है |

ध्यान दें : उपरोक्त सभी लाभ देशी दूर्वा के हैं, न कि भू-सुदर्शनीकरण में काम आनेवाली संकरित घास के | दूर्वा शीतल होने से अल्प मात्रा में ही लें |

लोककल्याणसेतु – जुलाई २०१९ से

कोई समस्या या कष्ट –चिंता हो तो


घर में कोई समस्या हो, कष्ट-चिंता हो तो पूजा की जगह पर जो आपका गुरुमंत्र, इष्टमंत्र हो अथवा जिस भगवन्नाम में आपकी श्रद्धा हो वह मन में बोलते-बोलते हाथ से अपने चारों ओर एक घेरा बनाओ और उस घेरे में बैठकर वह मंत्र जपो | 

फिर धारणा करो कि ‘गुरुमंत्र अथवा भगवन्नाम का आभामंडल मेरे चारों तरफ है | कौन मुझे दु:खी कर सकता है ? हरि ॐ ॐ ॐ ......’ इससे बहुत लाभ होगा |



ऋषिप्रसाद – जुलाई २०१९ से     
  

इससे आपला मन लगने लगेगा


यदि दूकान अथवा व्यवसाय-स्थल पर आपका मन नहीं लगता है तो इसके लिए आप जिस स्थान पर बैठते हैं वहाँ थोडा-सा कपूर जलायें, अपनी पसंद के पुष्प रखें और स्वस्तिक या ॐकार को अपलक नेत्रों से देखते हुए कम-से-कम ५ – ७ बार ॐकार का दीर्घ उच्चारण करें | 

अपने पीछे दीवार पर ऊपर ऐसा चित्र लगायें जिसमें प्राकृतिक सौंदर्य हो, ऊँचे –ऊँचे पहाड़ हों परंतु वे नुकीले न हों और न ही उस चित्र में जल हो अथवा यथायोग्य किसी स्थान पर आत्मज्ञानी महापुरुषों, देवी-देवताओं के चित्र लगायें | इससे आपका मन लगने लगेगा |

ऋषिप्रसाद – जुलाई २०१९ से

वर्षा ऋतू में विशेष लाभकारी उत्पाद

१[ अफरा में :


* हरड रसायन : २ – २ गोलियाँ सुबह-शाम भोजन के बाद चूसें |

* हिंगादि हरड चूर्ण अथवा संतकृपा चूर्ण : १ – १ चमच सुबह-शाम खाली पेट गुनगुने पानी से लें |

२] जोड़ों का दर्द :

* रामबाण बूटी : चौथाई चम्मच सुबह-शाम गुनगुने पानी से लें |

* अश्वगंधा टेबलेट : २ – २ गोलियाँ सुबह-शाम खाली पेट पानी के साथ लें |

* स्पेशल मालिश तेल : हलका गर्म करके मालिश करें |

] वार्धक्यजन्य जोड़ों का दर्द :

* शिलाजीत कैप्सूल : १-१ कैप्सूल १०-१५ दिन तक सुबह – शाम दूध से लें |

४] भूख की कमी :

* पंचरस : ३ चम्मच रस सुबह खाली पेट अथवा शाम को भोजन से १ – २ घंटे पहले ले सकते हैं |

* घृतकुमारी रस : ४ चम्मच सुबह खाली पेट लें तथा शाम को भोजन से १-२ घंटे पहले भी ले सकते हैं |

* लीवर टॉनिक टेबलेट व सिरप : सुबह-शाम खाली पेट २ – २ गोलियाँ गुनगुने पानी से लें या १ – २ चम्मच सिरप लें |

* संजीवनी टेबलेट : २ गोलियाँ सुबह खाली पेट चूसकर लें |


उपरोक्त औषधियाँ हेतु प्राप्ति – स्थान: संत श्री आशारामजी आश्रम की समितियों के सेवाकेन्द्र |


-ऋषिप्रसाद – जुलाई २०१९ से

वर्षा ऋतू के विविध रोगों में लाभदायी पुदीना


वर्षा ऋतू में वात दोष कुपित हो जाता है और पाचनशक्ति अधिक दुर्बल हो जाती है | इस ऋतू  में वात-पित्तजनित व अजीर्णजन्य रोगों का प्रार्दुभाव होता है | दस्त, पेचिश, मंदाग्नि, अफरा, गठिया, संधियों में सूजन आदि बीमारियाँ होने की सम्भावना रहती है | अत: इस ऋतू में वातशामक व जठराग्नि-प्रदीपक पदार्थों का सेवन करना लाभदायी है |

पुदीना एक ऐसी औषधि है जो अपने वात-कफशामक व पाचक गुणों के कारण वर्षा ऋतू में होनेवाले अनेक रोगों में गुणकारी है | इसमें रोगप्रतिकारक शक्ति तथा पाचक रसों को उत्पन्न करने का विशेष गुण है | यह रुचिकारक, स्फूर्ति व प्रसन्नता वर्धक है | 

पुदीने के इन गुणों का लाभ सहज में पा सकें इस उद्देश्य से संत श्री आशारामजी आश्रम की समितियों के सेवाकेन्द्रों पर पुदीना अर्क उपलब्ध कराया गया है | 

यह अरुचि, मंदाग्नि, अफरा, अजीर्ण, दस्त, उलटी, संग्रहणी, पेचिश, पेटदर्द आदि में भी लाभदायी है | प्रसव के पश्चात पुदीने का सेवन करने से गर्भाशय को शक्ति मिलती है तथा दूध की वृद्धि होती है, साथ ही प्रसूति-ज्वर से रक्षा होती है | मुख की दुर्गंध दूर करने के लिए इसके रस या अर्क को पानी में मिला के कुल्ले करने चाहिए |


-            ऋषिप्रसाद – जुलाई २०१९ से

बालों के उत्तम स्वास्थ के लिए


क्या करें


] सिर में नियमित तेल लगाने से बाल स्वस्थ, लम्बे, काले व घने होने के साथ उनमें मजबूती व कोमलता आती है | इसके लिए नारियल, तिल, आँवला-भृंगराज* आदि के तेल लाभकारी हैं |

२] शिकाकाई, रीठा व आँवला पाउडर* को रात में एक बर्तन में भिगो दें | प्रात: इस पानी से बाल धोने से बालों को सफेद होने व झड़ने से रोकने में मदद मिलती है |

३] सप्ताह में कम-से-कम दो बार सिर में मुलतानी मिट्टी* लगाने से बालों की विविध समस्याओं में लाभ होता है |

४] बालों में रुसी हो या बाल झड़ते हों तो सप्ताह में २-३ बार घृतकुमारी रस बालों की जड़ों में लगायें |

५] नाक में प्रतिदिन २-२ बूँद योगी आयु तेल डालने से बालों की जड़ें मजबूत होती है |

क्या न करें  

१] अधिक ठंड या गर्मी में सिर खुला रखकर बाहर न घूमें |

२] पापड़, अचार आदि उष्ण, तीक्ष्ण व अम्ल रसयुक्त आहार का अधिक सेवन, स्निग्ध पदार्थो के सेवन का अभाव, बाल गीले रखना, जोर लगा के कंघी करना, तरह-तरह के बाजारू तेल, शैम्पू, डाई का प्रयोग बालों पर हानिकारक प्रभाव डालते हैं |

३] कुछ-कुछ बाल सफेद हों तो उन्हें उखाड़ें नहीं बल्कि चुनकर काट दें | बाल उखाड़ने से यह समस्या तेजी से बढती है |

४] अति व्यायम, अति अल्पाहार, बालों की उचित देखभाल न करना, मानसिक तनाव, क्रोध, शोक व चिंता के कारण बाल जल्दी सफेद होते हैं व झड़ते हैं |

५] कब्ज न होने दें | अनिद्रा व अनियमित दिनचर्या से बचें |


ऋषिप्रसाद – जुलाई २०१९ से


स्वास्थ्य- लाभकारी कुंजियाँ


१] जिनको घुटनों का दर्द होता हो, शरीर जकड़ता हो ऐसे लोग क्या करें ? 
१०-१० ग्राम काली मिर्च व सोंठ कूट लें और २० ग्राम जीरा सेंककर इसमें मिला दें | इस मिश्रण में १०-१० ग्राम सेंधा व काला नमक मिला के रख दें |

कभी-कभी भोजन के पहले डेढ़ से दो ग्राम मिश्रण नींबू के रस में मिलाकर चाट लें | इसके आधा-एक घंटे के बाद भोजन करें | इससे बदहजमी अथवा जोड़ों का दर्द या शरीर में थकान हो तो आराम होगा | लेकिन यह ज्यादा दिन न खायें, कभी-कभार खायें |

२] सोंठ, आँवला और काले मुनक्के का मिश्रण बनाकर काढ़ा बना लें * अथवा ऐसे ही खा लें तो वायु और पित्त के प्रकोप से होनेवाली बीमारियों का शमन होता है | 

* सोंठ. आँवला और काले मुनक्के समभाग ले के उन्हें दरदरा पीस के मिश्रण बना लें | ४०० मि.ली. पानी में २० मिश्रण मिला के उबालें, १०० मि.ली. पानी शेष रहने पर छान लें |


-ऋषिप्रसाद – जुलाई २०१९ से

स्वास्थ्य का आधार : पथ्य – अपथ्य विवेक


पथ्ये सति गदार्तस्य किमौषधनिषेवणै: |
पथ्येऽसति गदार्तस्य किमौषधनिषेवणै: ||

पथ्य हो तो औषधियों के सेवन की क्या आवश्यकता है ? पथ्य न हो तो औषधियों का कोई फल ही नहीं है | अत: सदैव पथ्य का ही सेवन करना चाहिए |

पथ्य अर्थात हितकर | हितकर का सेवन व अहितकर-अहितकर का त्याग करने हेतु पदार्थो के गुण-धर्मो का ज्ञान होना आवश्यक है |

चरक संहिता के यज्ज: पुरुषीय अध्याय में ऐसे हितकर-अहितकर पदार्थो का वर्णन करते हुए श्री चरकाचार्यजी कहते हैं : धान्यों में लाल चावल, दालों में मूँग, शाकों में जीवंती (डोडी), तेलों में तिल का तेल, फलों में अंगूर, कंदों में अदरक, नमकों में सैंधव (सेंधा ) व जलों में वर्षा का जल स्वभाव से ही हितकर हैं |

·    जीवनीय द्रव्यों में देशी गाय का दूध, रसायन द्रव्यों में देशी गोदुग्ध-गोघृत का नित्य सेवन, आयु को स्थिर रखनेवाले द्रव्यों में आँवला, सदा पथ्यकर द्रव्यों में हर्रे (हरड), बलवर्धन में षडरसयुक्त भोजन, आरोग्यवर्धन में समय पर भोजन, आयुवर्धन में ब्रह्मचर्य, थकान दूर करने में स्नान, आरोग्यवर्धक भूमि में मरुभूमि व शारीरिक पुष्टि में मन की शांति सर्वश्रेष्ठ है |

·     सर्व रोगों के मूल आम ( अपक्व आहाररस ) को उत्पन्न करने में अधिक भोजन, रोगों को बढ़ाने में दुःख, बल घटाने में एक रसयुक्त भोजन, पुंसत्वशक्ति घटाने में नमक का अधिक सेवन मुख्य कारण है |

·       अनारोग्यकर भूमि में समुद्र-तट का प्रदेश व पूर्णत: अहितकर कर्मों में अत्यधिक परिश्रम प्रमुख है |

अपना कल्याण चाहनेवाले बुद्धिमान मनुष्य को हित-अहित का विचार करके हितकर का ही सेवन करना चाहिए |


ऋषिप्रसाद – जुलाई २०१९ से


Sunday, June 23, 2019

पुण्यदायी तिथियाँ



२१ जून : दक्षिणायन आरम्भ (पुण्यकाल : सूर्योदय से सूर्यास्त तक ) (ध्यान, जप व पुण्यकर्म कोटि-कोटि गुना अधिक व अक्षय फलदायी )

२९ जून : योगिनी एकादशी (महापापों को शांत कर महान पुण्य देनेवाला तथा ८८००० ब्राह्मणों को भोजन कराने का फल देनेवाला व्रत )

४ जुलाई : गुरुपुष्यामृत योग (सूर्योदय से रात्रि २-३० तक )

१२ जुलाई : देवशयनी एकादशी (महान पुण्यमय, स्वर्ग एवं मोक्ष प्रदाता तथा पापनाशक व्रत ), चातुर्मास व्रतारम्भ

१६ / १७ जुलाई : खंडग्रास चन्द्रग्रहण (भूभाग में ग्रहण-समय : गुरुपूर्णिमा की रात्रि में १-३१ से ४-३० तक )


ऋषिप्रसाद – जून २०१९ से


स्वच्छ और मजबूत दाँतों व स्वस्थ मसूड़ों के लिए असरकारक औषधियाँ


इन औषधियों से पायें अनेक लाभ:

  • दाँतों और मसूड़ों के दर्द को दूर कर उन्हें बनायें मजबूत |
  • दाँतों का हिलना, उनमें कीड़ें लगना, छिद्र होना, मैल जमना, सड़न होना, खून निकलना आदि में      लाभदायी |
  • मसूड़ों में सूजन, पीब निकलना, मुँह से दुर्गंध आना, मुँह के छाले तथा जिह्वा, तालू और होंठों के सभी रोगों में लाभ होता है |



-           ऋषिप्रसाद – जून २०१९ से

हर प्रकार के सुलगते सवालों व ढेरों समस्याओं का हल आश्रम का इष्टग्रंथ श्री योगवासिष्ठ महारामायण (भाग १ से ४ )



सहज में दुःख दूर करके परमात्मा के दिव्य आनंद से जीवन को सराबोर करनेवाला अदभुत सदग्रंथ | इससे जानिये – क्या है सृष्टि का मूल और कैसे हुई जगत की उत्पत्ति ? आत्मसाक्षात्कार करने का सबसे सरल उपाय |

चारों भागों का मूल्य : रु ७२५ ( डाक खर्च बिल्कुल मुफ्त !)

ऋषिप्रसाद – जून २०१९ से

शांति के साथ आर्थिक सम्पन्नता लाने हेतु


सोते समय किसी सफेद कागज में थोडा-सा कपूर रखें और प्रात: उसे घर से बाहर जला दें | इससे घर में शांति के साथ आर्थिक सम्पन्नता आती है | 

(कपूर संत श्री आशारामजी आश्रम की समितियों के सेवाकेन्द्रों पर उपलब्ध है |)

ऋषिप्रसाद – जून २०१९ से

लक्ष्मी के नाराज होने के कारण


१] कमल-पुष्प, बिल्वपत्र को लाँघने अथवा पैरों से कुचलने पर लक्ष्मी रुष्ट होकर चली जाती हैं |

२] जो निर्वस्त्र होकर स्नान करता है, नदियों, तालाबों के जल में मल-मूत्र त्यागता है उसको लक्ष्मी अपने शत्रु कर्ज के हवाले कर देती हैं |

३] जो भूमि या भवन की दीवारों पर अनावश्यक लिखता है, कुत्सित अन्न खाता है उस पर भी लक्ष्मी कृपा नहीं करती हैं |

४] जो पैर से पैर रगडकर धोता है, अतिथियों का सम्मान नहीं करता, याचकों को दुत्कारता है, पशु-पक्षियों को चारा, दाना आदि नहीं डालता है, गाय पर प्रहार करता है ऐसे व्यक्ति को लक्ष्मी तुरंत छोड़ देती हैं |

५] जो संध्या के समय घर-प्रतिष्ठान में झाड़ू लगाता है, जो प्रात:  एवं संध्याकाल में ईश्वर की आराधना नहीं करता, तुलसी के पौधे की उपेक्षा, अनादर करता है उसको लक्ष्मी उसके दुर्भाग्य के हाथों में सौंप देती हैं |

ऋषिप्रसाद – जून २०१९ से