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Friday, April 15, 2022

पुण्यदायी तिथियाँ व योग

 



१९ अप्रैल : अंगारकी-मंगलवारी चतुर्थी ( शाम ४:३९ से २० अप्रैल सूर्योदय तक )

२१ अप्रैल : पूज्य संत श्री आशारामजी बापू का अवतरण दिवस अर्थात विश्व सेवा -सत्संग दिवस

२६ अप्रैल : वरूथिनी एकादशी ( सौभाग्य, भोग, मोक्ष प्रदायक व्रत, १०,००० वर्षों की तपस्या के समान फल | माहात्म्य पढने-सुनने से १००० गोदान का फल )

३ मई : अक्षय तृतीया ( पूरा दिन शुभ मुहूर्त), त्रेता युगादि तिथि (स्नान, दान, जप, तप, हवन आदि का अनंत फल)

८ मई : रविवारी सप्तमी ( सूर्योदय से शाम ५:०१ तक ), रविपुष्यामृत योग ( सूर्योदय से दोपहर २:५८ तक)

१२ मई : मोहिनी एकादशी ( व्रत से अनेक जन्मों के मेरु पर्वत जैसे महापापों का भी नाश)

१५ मई : विष्णुपदी संक्रांति ( पुण्यकाल: सूर्योदय से दोपहर १२:३५ तक) (ध्यान, जप व पुण्यकर्म का लाख गुना फल)


ऋषिप्रसाद – अप्रैल २०२२ से

कुसंस्कार व पाप मिटानेवाला पुण्यमय स्नान

 

वैशाख मास के अंतिम ३ दिन : १४ से १६ मई

वैशाख मास में कोई तीर्थ का सेवन करता है अथवा प्रभातकाल में ( सूर्योदय के पूर्व) स्नान करता है तो उसके करोड़ो जन्मों के कुसंस्कार और पाप मिट जाते हैं | बड़े-बड़े यज्ञों – अश्वमेध यज्ञ आदि से जो पुण्य प्राप्त होता है वह वैशाख मास के सत्संग, स्नान, दान से प्राप्त हो जाता है | 

जिसने एक महिना वैशाख – स्नान नहीं किया वह महीने के आखिरी ३ दिन ( तेरस, चौदस और पूनम) अगर प्रभातकाल में स्नान कर लेता है तो भी भगवान उसका पूरा मास स्नान में गिन लेते हैं | ऐसे उदार परमात्मा को प्रणाम हो !


ऋषिप्रसाद – अप्रैल २०२२ से

Monday, February 14, 2022

इन तिथियों व योगो का लाभ अवश्य लें

 


२३ फरवरी : बुधवारी अष्टमी ( शाम ४:५७ से २४ फरवरी सूर्योदय तक)

२७ फरवरी : त्रिस्पृशा-विजया एकादशी  ( इस दिन उपवास से १००० एकादशी व्रतों का फल)

१ मार्च : महाशिवरात्रि व्रत, रात्रि- जागरण, शिव-पूजन (निशिथकाल : रात्रि १२:२६ से १:१५ तक)

२ मार्च: द्वापर युगादि तिथि ( स्नान, दान-पुण्य, जप, हवन से अनंत फल की प्राप्ति होती है |)

१३ मार्च : रविपुष्यामृत योग ( रात्रि ८:०६ से १४ मार्च सूर्योदय तक)

१४ मार्च : आमलकी एकादशी ( व्रत करके आँवले के वृक्ष के पास रात्रि-जागरण, उसकी १०८ या २८ परिक्रमा करने से सब पापों का नाश व १००० गोदान का फल ), षडशीति संक्रान्ति ( पुण्यकाल : दोपहर १२:४८ से सूर्यास्त तक) (ध्यान, जप व पुण्यकर्म का ८६,००० गुना फल )

 

ऋषिप्रसाद – फरवरी २०२२ से

महाशिवरात्रि व्रत की महिमा

 


महाशिवरात्रि – १ मार्च २०२२

भगवान् शिवजी कहते हैं कि ‘जो सांगोपांग से ( विधि-विधानसहित), संयम से, ब्रह्मचर्य – व्रत पालकर, झूठ-कपट का त्याग करके महाशिवरात्रि का व्रत करता है उसको वर्षभर की शिव-पूजा का फल होगा |’ तो लोगों को फल होता है |

महाशिवरात्रि व्रत का फल

सूतजी शौनकजी से कहते हैं : ‘जिनको आत्मज्ञान का सत्संग श्रवण – मनन को नहीं मिलता है उनको विधिपूर्वक श्रद्धा-भक्ति से शिव-पूजा, शिव-व्रत करना चाहिए | श्रद्धा-भक्ति से किया हुआ शिवजी का पूजन-सुमिरन देर-सवेर उनको आत्मशिव कि विद्या देनेवाले सत्संग में पहुँचा देता है और सत्यस्वरूप व्यापक शिव का साक्षात्कार करा देता है |’

घर को ही बना लें शिवालय     

आप अपने घर में साधन-भजन, पूजा का एक ऐसा कमरा बनाइये जिसमें संसार कि खटपट न हो | फिर वहाँ शिवलिंग की स्थापना करते हैं तो ठीक है अथवा भगवान जिनके ह्रदय में नृत्य कर रहा है, वाणी उच्चार रहा है ऐसे किन्ही ब्रह्मवेत्ता महापुरुष का श्रीचित्र लगा दो जिनमें आपकी श्रद्धा है | रोज थोडा-बहुत ध्यान, जप करिये | कभी- कभार उधर फुल रख दें, दिया जला दें, धूप कर दें | धूप रसायन युक्त कृत्रिम सुगंधवाली अगरबत्तियों का नहीं, ये तो गडबड करती हैं, देशी गाय के गोबर के कंडे के ऊपर थोडा गूगल रख दें या कोयले के ऊपर थोड़ी हबन—सामग्री रख दें अथवा गौ-चंदन धूपबत्ती जला दें | वहाँ आप नियम से मंत्रजप, साधन-भजन करेंगे तो उस जगह को आप थोड़े ही दिनों में शिव मन्दिर पायेंगे |

 

फिर जब संसार कि विडंबना, मुसीबतें आयें तो आप हाथ-पैर धो के उस पूजा के कमरे में आकर थोड़ी प्रार्थना करें | ५ – ७ मिनट ॐकार का दीर्घ उच्चारण करके मानसिक जप व ध्यान करें | यदि रात्रि का समय है तो ध्यान करते-करते ध्यान का जो भाव बना है उसी भाव  शयन कर लें | रात्रि को स्वप्न में आपके प्रश्न का उत्तर आ जायेगा, नहीं तो प्रभात को जरुर आयेगा | एक दिन नहीं तो दूसरे दिन आयेगा, उत्तर आयेगा अथवा समस्या का ऐसे ही समाधान हो जायेगा, यह बिल्कुल सच्ची व पक्की बात है !

 

विशेष लाभदायी है इन दिनों का उपवास    

सूतजी कहते हैं : ‘सोमवार की अष्टमी और कृष्ण पक्ष कि चतुर्दशी को कोई उपवास करें तो उस पर शिवजी विशेष प्रसन्न रहते हैं | महाशिवरात्रि सबसे बलवान व्रत है, करोड़ों हत्याओं का पाप जिसके सिर पर है वह भी अगर विधिवत महाशिवरात्रि का पूजन –अर्चन करता है, भले मन्दिर में न जाय, अपने घर पर ही अर्चन या मानसिक पूजन करें तो उसके रोग-शोक, पाप-ताप भगवान शिव की कृपा से नष्ट हो जाते हैं और उसका ह्रदय प्रफुल्लित व पुण्यमय हो जाता है |’

अष्टमी व चतुर्दशी का उपवास ग्रह – नक्षत्र के हिसाब से हमारे आरोग्य और भक्तिभाव के लिए भी अच्छा है |

 

शिवजी से क्या माँगे ?

शिवजी से यही माँगे कि ‘हे भोलेनाथ ! ऐसी कृपा करो कि शिवस्वरूप का अनुभव करानेवाला सत्संग हमें मिलता रहें हमें शिव-तत्त्व में जगे हुए संतों का सान्निध्य मिले|’

 

महाशिवरात्रि के दिन संकल्प करना चाहिए :

 

देवदेव ! महादेव! नीलकंठ ! नमोऽस्तुते |

कर्तुमिच्छाम्यहं देव ! शिवरात्रिव्रतं तव ||

तव प्रभावाद्देवेश ! निर्विघ्नेन भवेदिति |

कामाध्या: शत्रवो मां वै पीड़ां कुर्वन्तु नैव हि ||

 

‘देवदेव ! महादेव ! नीलकंठ ! आपको नमस्कार है | हे देव ! मैं आपका शिवरात्रि-व्रत करना चाहता हूँ | हे देवेश ! आपके प्रभाव से मेरा व्रत निर्विघ्न पूर्ण हो | इस बीच काम, क्रोध आदि शत्रु मुझे पीड़ित न करें ?’

यह प्रार्थना करके व्रत का आरम्भ करना चाहिए और व्रत पूर्ण करने के बाद दूसरे  दिन सुबह शिव-तत्व को जाननेवाले महापुरुषों का अभिवादन करना चाहिए | अगर ऐसे महापुरुष नहीं मिलते हैं तो मन-ही-मन उनका अभिवादन और पूजन करने से हमारे अंतरात्मा शिव का प्रसाद शीघ्र प्रकट होगा |

इससे सभीको फायदा होगा

शिवजी कहते हैं कि “लिंग का पूजन ॐकार-जप करके और मूर्ति का पूजन ‘ॐ नम:शिवाय’ जप करके करें |”

महाशिवरात्रि का जागरण बड़ा प्रभाव रखता है | इससे चित्त में प्रसन्नता आती ऐ और उसका विकास होता है | मन-ही-मन शिवजी को बिल्वपत्र चढ़ा दो, शिवलिंग पर जल चढ़ा दो, चल जायेगा | १० मिनट होंठों से फिर १० मिनट कंठ से, फिर १० मिनट ह्रदय से जप करो | मन इधर-उधर जाता है तो जोर से ‘हरि ओऽ ऽ..... म ऽ ऽ.....’, शिव ओऽ ऽ..... म ऽ ऽ.....’ ऐसा उच्चारण करो | सुबह, शाम और रात को आधा-आधा घंटा ऐसी साधना करो | इससे सभी को फायदा होगा |

 

ऋषिप्रसाद – फरवरी २०२२ से

Friday, January 7, 2022

इन तिथियों व योगों का लाभ अवश्य लें

 


१७ जनवरी : माघ स्नानारम्भ

२८ जनवरी : षट्तिला एकादशी (स्नान, उबटन, जलपान, भोजन, दान व होम में तिल के उपयोग से पाप-नाश)

३१ जनवरी : सोमवती अमावस्या ( दोपहर २:१९ से १ फरवरी सूर्योदय तक) (तुलसी की १०८ परिक्रमा करने से दरिद्रता नाश)

५ फरवरी : वसंत पंचमी ( इस दिन सारस्वत्य मन्त्र का जप विशेष लाभदायी, अधिक-से-अधिक जप करें |)

७ फरवरी : माघ शुक्ल सप्तमी ( प्रात: पुण्यस्नान व व्रत करके गुरु-पूजन करने से सम्पूर्ण माघ-स्नान के फल व वर्षभर के रविवार व्रत के पुण्य की प्राप्ति तथा सम्पूर्ण पापों का नाश व सुख-सौभाग्य की वृद्धि )

९ फरवरी : बुधवारी अष्टमी (सूर्योदय से सुबह ८:३२ तक)

१२ फरवरी : जया एकादशी (व्रत से ब्रह्महत्यातुल्य पाप व पिशाच्यत्व का नाश)

१३ फरवरी : विष्णुपदी संक्रान्ति (पुण्यकाल :सूर्योदय से दोपहर १२.:५३ तक) (ध्यान, जप व पुण्यकर्म का लाख गुना फल)

१४ फरवरी : मात्रृ – पितृ पूजन दिवस, माघ शुक्ल त्रयोदशी इस दिन से माघी पूर्णिमा (१६ फरवरी) तक प्रात: पुण्यस्नान तथा दान, व्रत आदि पुण्यकर्म करने से सम्पूर्ण माघ-स्नान का फल |)

ऋषिप्रसाद – जनवरी २०२२ से

 

       

अर्घ्य देकर करें अभीष्ट की सिद्धि

 

(भीमाष्टमी : ८ फरवरी)

वसूनामवताराय शन्तनोरात्मजाय च |

अर्घ्य ददामि भीष्माय आबालब्रह्मचारिणे ||

इस मन्त्र से भीष्माष्टमी के दिन भीष्मजी को तिल, गंध, पुष्प, गंगाजल व कुश मिश्रित  अर्घ्य देने से अभीष्ट सिद्ध होता है |

ऋषिप्रसाद – जनवरी २०२२ से

Saturday, December 11, 2021

इन तिथियों व योगों का लाभ अवश्य लें

 


१६ दिसम्बर : षडशीति संक्रांति (पुण्यकाल : सूर्योदय से दोपहर १२:३४त्क) (ध्यान, जप व पुण्यकर्म का ८६,००० गुना फल)

२५ दिसम्बर : तुलसी पूजन दिवस (इस अवसर पर तुलसी का पूजन, परिक्रमा आई करें तथा उसके समीप जप, पाठ, कीर्तन, सत्संग-श्रवण करके भगवद-विश्रांति पायें |  विश्वगुरु भारत कार्यक्रम ( २५ दिसम्बर से १ जनवरी)

२६ दिसम्बर : रविवारी सप्तमी ( सूर्योदय से रात्रि ८:०९ तक)

३० दिसम्बर :सफल एकादशी ( सर्व कार्य सफल करनेवाला , सुख भोग व मोक्ष प्रदायक व्रत)

९ जनवरी : रविवारी सप्तमी ( सूर्योदय से दोपहर ११:१० तक)

१३ जनवरी : पुत्रदा एकादशी ( पुत्र की इच्छा से इसका व्रत करनेवाला पूत पाकर स्वर्ग का अधिकारी भी हो जाता है |)

१४ जनवरी : मकर संक्रांति (पुण्यकाल : दोपहर २:३० से सूर्यास्त तक)

१५ जनवरी : चतुर्दशी-आर्द्रा नक्षत्र योग ( रात्रि १:५८ से १६ जनवरी रात्रि  २:०९ अर्थात १६ जनवरी ००:५८ अच से १७ जनवरी २:०९ अच ) ) ॐकार-जप अक्षय फलदायी)

ऋषिप्रसाद – दिसम्बर २०२१ से

Sunday, November 21, 2021

इन तिथियों व योगों का लाभ अवश्य लें

 


२३ नवम्बर : अंगारकी – मंगलवारी चतुर्थी ( सूर्योदय से रात्रि १२-५६ तक )

२५ नवम्बर : गुरुपुष्यामृत योग ( सूर्योदय से शाम ६-५० तक ) ( ध्यान, जप, दान, पुण्य महाफलदायी )

३० नवम्बर : उत्पत्ति एकादशी ( धन, धर्म व मोक्ष प्रदायक व्रत )

७ दिसम्बर : मंगलवारी चतुर्थी ( सूर्योदय से रात्रि ११ – ४२ तक )

१४ दिसम्बर : श्रीमदभागवदगीता जयंती, मोक्षदा एकादशी ( पापहारी, कामानापुरक व्रत| इसके पुन्य्दान से नीच योनि में पड़े पितर मोक्ष पाते हैं | माहात्म्य पड़ने-सुनने से वाजपेय यज्ञ का फल मिलता है | )

ऋषिप्रसाद – नवम्बर २०२१ से

Sunday, September 5, 2021

पुण्यदायी तिथियाँ व योग

 


६ सितम्बर : सोमवती अमावस्या ( सुबह ७:३९ से ७ सितम्बर सुबह ६:२२ तक )  तुलसी की १०८ परिक्रमा करने से दरिद्रता – नाश



१० सितम्बर : गणेश चतुर्थी, चन्द्र-दर्शन निषिद्ध (चंद्रास्त :रात्रि ९:२०)  (इस दिन ‘ॐ गं गणपतये नम: |’ का जप करने और गुड़मिश्रित जल से गणेशजी को स्नान कराने एवं दूर्वा व सिंदूर की आहुति देने से विघ्न-निवारण होता हैं तथा मेधाशक्ति बढती है | इस दिन चन्द्र-दर्शन से कलंक लगता है | यदि भूल से भी चन्द्रमा दिख जाय तो उसके कुप्रभाव को मिटाने के लिए bit.ly/syamantakmanikatha इस लिंक पर दी गयी ‘स्यमंतक मणि की चोरी की कथा’ पढ़े तथा ब्रह्मवैवर्त पुराण के निम्नलिखित मंत्र का २१, ५४ या १०८ बार जप करके पवित्र किया हुआ जल पियें |

सिंह: प्रसेनमवधीत सिंहों जाम्बवता हत: |

सुकुमारक मा रोदीस्तव ह्येष स्यमन्तक: ||

१२ सितम्बर : रविवारी सप्तमी (शाम ५:२२ से १३ सितम्बर सूर्योदय तक)

१७ सितम्बर : पद्मा एकादशी (व्रत करने व महात्म्य पढने-सुनने से सब पापों से मुक्ति), षडशीति संक्रांति (पुण्यकाल :सूर्योदय से दोपहर १२:३४ तक) (ध्यान, जप व पुण्यकर्म का ८६,००० गुना फल)

२९ सितम्बर : बुधवारी अष्टमी (सूर्योदय से रात्रि ८:३० तक)

३० सितम्बर : गुरुपुष्यामृत योग (रात्रि १:३३ [अर्थात १ अक्टूबर १:३३ AM] से १ अक्टूबर सूर्योदय तक ) ध्यान, जप, दान, पुण्य महाफलदायी |

२ अक्टूबर : इंदिरा एकादशी ( बड़े-बड़े पापों का नाशक तथा नीच योनि में पड़े हुए पितरों को भी सदगति देनेवाला व्रत )



७ अक्टूबर : पूज्य संत श्री आशारामजी बापू का ५८ वाँ आत्मसाक्षात्कार दिवस, शारदीय नवरात्र प्रारम्भ

१३ अक्टूबर : बुधवारी अष्टमी (सूर्योदय से रात्रि ८:०८ तक)

१५ अक्टूबर : विजयादशमी (पूरा दिन शुभ मुहूर्त), विजय मुहूर्त (दोपहर २:१५ से ३:०१ तक) (संकल्प, शुभारम्भ, नूतन कार्य, सीमोल्लंघन के लिए), दशहरा, गुरु-पूजन, अस्त्र-शस्त्र-शमी वृक्ष-आयुध-वाहन पूजन


ऋषिप्रसाद एवं लोककल्याणसेतु – अगस्त -सितम्बर  २०२१ से

श्राद्धकर्म व उसके पीछे का सूक्ष्म रहस्य

 

श्राद्ध पक्ष – २० सितम्बर से ६ अक्टूबर तक


जिन पूर्वजों ने हमें अपना सर्वस्व देकर विदाई ली, उनकी सदगति हो ऐसा सत्सुमिरन करने का अवसर यानी ‘श्राद्ध पक्ष’ |

श्राद्ध पक्ष का लम्बा पर्व मनुष्य को याद दिलाता है कि ‘यहाँ चाहे जितनी विजय प्राप्त हो, प्रसिद्धि प्राप्त हो परंतु परदादा के दादा, दादा के दादा, उनके दादा चल बसे, अपने दादा भी चल बसे और अपने पिताजी भी गये या जाने की तैयारी में हैं तो हमें भी जाना हैं |’

श्राद्ध हेतु आवश्यक बातें

जिनका श्राद्ध करना है, सुबह उनका मानसिक आवाहन करना चाहिए | और जिस ब्राह्मण को श्राद्ध का भोजन कराना है उसको एक दिन पहले न्योता दे आना चाहिए ताकि वह श्राद्ध के पूर्व दिन संयम से रहे, पति – पत्नी के विकारी व्यवहार से अपने को बचा ले | फिर श्राद्ध का भोजन खिलाते समय –

देवताभ्य: पितृभ्यश्च महयोगिभ्य एव च |

नम: स्वधायै स्वाहायै नित्यमेव नमो नम: || 

(अग्निपुराण :११७.२२ )

यह श्लोक बोलकर देवताओं को, पितरों को, महयोगियों को तथा स्वधा और स्वाहा देवियों को नमस्कार किया जाता है और प्रार्थना की जाती है कि ‘मेरे पिता को, माता को..... (जिनका भी श्राद्ध करते हैं उनको ) मेरे श्राद्ध का सत्त्व पहुँचे, वे सुखी व प्रसन्न रहें |’

श्राद्ध के निमित्त गीता के ७ वें अध्याय का माहात्म्य पढ़कर पाठ कर लें और उसका पुण्य जिनका श्राद्ध करते हैं उनको अर्पण कर दें, इससे भी श्राद्धकर्म सुखदायी और साफल्यदायी होता है |

श्राद्ध करने से क्या लाभ होता है ?

आप श्राद्ध करते हैं तो –

१)   आपको भी पक्का होता है कि ‘हम मरेंगे तब हमारा भी कोई श्राद्ध करेगा परंतु हम वास्तव में नहीं मरते, हमारा शरीर छूटता है |’ तो आत्मा की अमरता का, शरीर के मरने के बाद भी हमारा अस्तित्व रहता है इसका आपको पुष्टीकरण होता है |

२)     देवताओं, पितरों, योगियों और  स्वधा-स्वाहा देवियों के लिए सद्भाव होता है |

३)  भगवतगीता का माहात्म्य पढ़ते है, जिससे पता चलता है कि पुत्रों द्वारा पिता के लिए किया हुआ सत्कर्म पिता की उन्नति करता है और पिता की शुभकामना से पुत्र-परिवार में अच्छी आत्माएँ आती हैं |

ब्रह्माजी ने सृष्टि करने के बाद देखा कि ‘जीव को सुख-सुविधाएँ दीं फिर भी वह दु:खी है’ तो उन्होंने यह विधान किया कि एक-दूसरे का पोषण करो | आप देवताओं-पितरों का पोषण करो, देवता-पितर आपका पोषण करेंगे | आप सूर्य को अर्घ्य देते हैं, आपले अर्घ्य के सद्भाव से सूर्यदेव पुष्ट होते हैं और यह पुष्टि विरोधियों, असुरों के आगे सूर्य को विजेता बनाती है | जैसे रामजी को विजेता बनाने में बंदर, गिलहरी भी काम आये ऐसे ही सूर्य को अर्घ्य देते हैं तो सूर्य विजयपूर्वक अपना दैवी कार्य करते हैं, आप पर प्रसन्न होते हैं और अपनी तरफ से आपको भी पुष्ट करते हैं |

देवान्भावयतानेन ते देवा भावयन्तु व: |

परस्परं भावयन्त: श्रेय: परमवाप्स्यथ ||     

गीता :३.११

‘तुम इस यज्ञ (ईश्वरप्राप्ति के लिए किये जानेवाले कर्मों ) के द्वारा देवताओं को तृप्त करो और (उनसे तृप्त हुए ) वे देवगण तुम्हें तृप्त करें | इस प्रकार (नि:स्वार्थ भाव से ) एक-दूसरे को तृप्त या उन्नत करते हुए तुम परम कल्याण को प्राप्त हो जाओगे |’

देवताओं का हम  पोषण करें तो वे सबल होते हैं और सवल देवता वर्षा करने, प्रेरणा देने, हमारी इन्द्रियों को पुष्ट करने में लगते हैं | इससे सबका मंगल होता है |


ऋषिप्रसाद – सितम्बर २०२१ से


Wednesday, August 4, 2021

पुण्यदायी तिथियाँ व योग

 


१७ अगस्त : विष्णुपदी संक्रांति ( पुण्यकाल : सूर्योदय से दोपहर १२:४६ तक) (ध्यान, जप व पुण्यकर्म का लाख गुना फल )

१८ अगस्त : पुत्रदा एकादशी ( पुत्र की इच्छा से इसका व्रत करनेवाला पुत्र पाकर स्वर्ग का अधिकारी भी हो जाता है |)

२२ अगस्त : रक्षाबंधन ( इस दिन धारण किया हुआ रक्षासूत्र सम्पूर्ण रोगों तथा अशुभ कार्यों का विनाशक है | इसे वर्ष में एक बार धारण करने से मनुष्य वर्षभर रक्षित हो जाता है | - भविष्य पुराण )

२९ अगस्त : रविवारी सप्तमी ( सूर्योदय से रात्रि ११:२६ तक)

३० अगस्त : अजा एकादशी ( समस्त पापनाशक व्रत, माहात्म्य पढने-सुनने से अश्वमेध यज्ञ का फल )

६ सितम्बर : सोमवती अमावस्या (सुबह ७:३९ से ७ सितम्बर सुबह ६:२२ तक ) ( तुलसी की १०८ परिक्रमा करने से दरिद्रता - नाश )

 


१० सितम्बर : गणेश चतुर्थी, चन्द्र – दर्शन निषिद्ध ( चंद्रास्त : रात्रि ९:२० ) ( इस दिन ‘ॐ गं गणपतये नम: |’ का जप करने और गुड़मिश्रित जल से गणेशजी को स्नान कराने एवं दुर्वा व सिंदूर की आहुति देने से विघ्न- निवारण होता है तथा मेधाशक्ति बढती है | इस दिन चन्द्र-दर्शन से कलंक लगता हिया | यदि भूल से भी चन्द्रमा दिख जाय तो उसके कुप्रभाव को मिटाने के लिए  shorturl.at/koKY3 इस लिंक पर दी गयी ‘स्यमंतक मणि की चोरी की कथा’ पढ़ें तथा ब्रह्मवैवर्त पुराण के निम्नलिखित मंत का २१, ५४, या १०८ बार जप करके पवित्र किया हुआ जल पियें |

 सिंह : प्रसेनमधीत् सिंहों जाम्बवता हत: |

सुकुमारक मा रोदीस्तव ह्येष स्यमन्तक: ||

 

१२ सितम्बर : रविवारी सप्तमी ( शाम ५:२२ से १३ सितम्बर सूर्योदय तक )

 

ऋषिप्रसाद – अगस्त २०२१ से    

 

सौ गुना फलदायी ‘शिवा चतुर्थी’

 

(१० सितम्बर )

भविष्य पुराण के अनुसार ‘भाद्रपद मास के शुक्ल पक्ष की चतुर्थी का नाम ‘शिवा’ है | इस दिन किये गये स्नान , दान, उपवास, जप आदि सत्कर्म सौ गुना हो जाते हैं | इस दिन जो स्त्री अपने सास – ससुरे को गुड के तथा नमकीन पूए खिलाती है वह सौभाग्यवती होती है | पति की कामना करनेवाली कन्या को विशेषरूप से यह व्रत करना चाहिए |’

ऋषिप्रसाद – अगस्त २०२१ से

Friday, July 16, 2021

पुण्यदायी तिथियाँ व योग

 


१६ जुलाई : संक्रांति ( पुण्यकाल : सूर्योदय से शाम ४:५५ तक )

२० जुलाई : देवशयनी एकादशी (महान पुण्यमय, स्वर्ग एवं मोक्ष प्रदाता तथा पापनाशक व्रत), चतुर्मास व्रतारम्भ

२३ जुलाई : गुरुपूर्णिमा, ‘ऋषि प्रसाद ‘ जयंती, विद्यालाभ योग

२७ जुलाई : अंगारकी – मंगलवारी चतुर्थी ( सूर्योदय से रात्रि २:२९ तक )

४ अगस्त : कामिका एकादशी ( इसका व्रत व रात्रि -जागरण करनेवाला मनुष्य न तो कभी भयंकर यमराज का दर्शन करता है और न कभी दुर्गति में ही पड़ता है |)

८ अगस्त : रविपुष्यामृत योग ( सूर्योदय से सुबह ९:२० तक )

१५ अगस्त : रविवारी सप्तमी ( सूर्योदय से सुबह ९:५२ तक)

ऋषिप्रसाद – जुलाई २०२१ से

जीवन को प्रेमाभक्ति, ज्ञान व माधुर्य से भरने का अवसर

 चतुर्मास : २० जुलाई से १५ नवम्बर

चतुर्मास शुरू हो जाता है देवशयनी एकादशी से और कार्तिक की देवउठी एकादशी तक रहता है | इन ४ महीनों में भगवान नारायण योगनिद्रा में, ब्रह्मसुख में , एकांत में, सागर में शयन करते हैं तो जल का तेज, प्रभाव बढ़ जाता है | ऐसे ही साधक श्वासोच्छ्वास में अजपाजप करके ब्रह्मसुख के करीब जाता है  तो ऊसके मन-बुद्धि का प्रभाव बढ़ जाता है | इन ४ महीने में शादी – विवाह और सकाम कर्म करनेवाले को घाटा पड़ेगा किन्तु उपवास, मौन, जप, दान, ध्यान और प्रात: स्नान विशेष हितकारी, पुण्यदायी, साफल्यदायी हैं |

इन ३ महीनों में भोग-विलास, पति-पत्नी का संबंध, स्पर्श ज्यादा हानि करेगा और जीवन संयमी रहा तो जैसे भगवान नारायण ब्रह्म में विराजते हैं ऐसे ही आपको भी ब्रह्मचिंतन, ब्रह्मध्यान, ब्रह्मविश्रांति में बड़ी मदद मिलेगी |

चतुर्मास में विशेष लाभदायी

·      चतुर्मास में सूर्योदय के पहले नदी-स्नान, तालाब-स्नान, सागर-स्नान करें अथवा तो बाल्टी में ३ बिल्वपत्र डालकर घुमा दें या तिल, आँवला और जौ का चूर्ण बना के रखें | थोडा-सा मिश्रण बाल्टी में दाल दें या कटोरी में घोल बना के शरीर पर रगड़ दें फिर ‘ॐ नम:शिवाय, ॐ नम: शिवाय...’ अथवा ‘ब्रह्म ही जलरूप बन के आया हैं’, ऐसा चिंतन करके स्नान करें तो यह पुण्यदायी, पापनाशक, आत्मिक तेजवर्धक स्नान होगा | इसके सभी तीर्थों के स्नान का फल प्राप्त होगा | सप्तधान्य उबटन १ में जौ और तिल है अत: वह उबटन भी स्नान के लिए सुखदायी, आनंददायी होता है | और भक्त को हाथ में जल लेकर ‘यह भगवान विष्णु का चरणोदक है’ ऐसा समझ के वह जल सिर  पर डालना चाहिए | किसी कारण वह नहीं नहा सकता हो तो फिर मानसिक, मांत्रिक अथवा भस्म का स्नान भी किया जा सकता है |

·        दीपदान करनेवाले की बुद्धि, विचार व व्यवहार में ठीक ज्ञान-प्रकाश की वृद्धि होती है |

·    पलाश के पत्तो पर भोजन करनेवाले व्यक्ति की बुद्धि सात्त्विकता- प्रधान होती है और उसे भवान की प्रियता प्राप्त होती है |

·        चतुर्मास में सप्ताह में एक दिन उपवास नहीं कर सकें तो १५ दिन में १ दिन उपवास तो नितांत जरूरी है |

यह अवसर चूकना नहीं चाहिए

  • ४ मास तक भगवान अपने बेसामान, बेसाथी और बेमन भाव में रहते हैं | इन दिनों आप भी ऐसे रहेंगे तो यह आध्यात्मिक उन्नति में मददरूप होगा | अपने जीवन को भगवान की प्रेमाभक्ति से, भगवान के ज्ञान व माधुर्य से भरने का अवसर यह चतुर्मास हैं |
  • तपस्या, साधन-भजन करने का यह चातुर्मास का अवसर चूकना नहीं चाहिए | मैंने किया था ४० दिन का अनुष्ठान, शायद वह चातुर्मास ही होगा जहाँ तक मुझे याद है | और उन ४० दिनों में मुझे जो शक्तियाँ मिली, जो खजाना मिला उसे बाँटते – बाँटते ५० साल हो गये किंतु अब भी उसमें कोई कमी नहीं लग रही है |


ऋषिप्रसाद – जुलाई २०२१ से


Wednesday, June 23, 2021

पुण्यदायी तिथियाँ

 


५ जुलाई : योगिनी एकादशी ( महापापों को शांत कर महान पुण्यदायी तथा ८८००० ब्राह्मणों को भोजन कराने का फल प्रदान करनेवाला व्रत )


८ जुलाई : चतुर्दशी-आर्द्रा नक्षत्र योग (रात्रि ८:५९ से ९ जुलाई प्रात: ५:१७ तक ) (ॐकार का जप अक्षय फलदायी )


११ जुलाई : रविपुष्यामृत योग ( सूर्योदय से रात्रि २:२२ तक)


१३ जुलाई : मंगलवारी चतुर्थी (सुबह ८:२५ से १४ जुलाई सूर्योदय तक )


ऋषिप्रसाद – जून २०२१ से