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Thursday, February 3, 2011

नौकरी धंधा सेट ना होता हो तो |

नौकरी धंधा ना मिलता हो,सेट ना  होता हो तो इतवार को नमक बिना का खाना खाएं|
घर से आर्थिक परेशानी भागने लगेगी| बीमारी नहीं टिकेगी|
 इतवार के दिन सिर या शरीर में तेल नहीं लगायें|
 सूर्यदेव को जल देकर ही कुछ खाएं-पियें |
सात जन्मों तक दरिद्रता नहीं आएगी और शरीर में बीमारी नहीं होगी|



श्री सुरेशानंदजी, शाजापुर,मध्य प्रदेश, ३० जनवरी २०११|










Wednesday, February 2, 2011

मासिक धर्म सम्बन्धी जानकारी

मासिक आने पर तुरंत स्नान कर लेना चाहिये। अगर रात को आये तो रात को झट से स्नान करके सूखे तौलिये से पोंछ लें । इस दिनों ज्यादा गर्म ना खाएं । अगर ज्यादा आता है या बंद नहीं होता तो ठन्डे पानी से स्नान करें या ठन्डे पानी में बैठे और मिश्री चूसें ।

Nanded 8th January 2011

खून की कमी

भोजन के १/२ घंटे बाद अंगूर का रस या भीगी हुई द्राक्ष या किशमिश का मिक्सी में जिस बना कर पियें ।
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Adilabad 9th Jan. 2011

सांप के काटने पर(जहर उतारने)

सांप के काटने पर, हरा पीपल का पत्ता लें, और उसकी डंडी (एक ऊँगली में ३ पोरे होते हैं) १ पोरे जितनी दोनों कानो में डालें, ज्यादा अंदर ना डालें, इससे कान का पर्दा फटने का डर होता है । डंडी अंदर डाल कर ॐ नमः शिवाय.......ॐ गरल....गरल......गरल ......गरल बोलते रहें। इसी कुछ समय में सांप का ज़हर उतर जायेगा । और बाद में वो पत्ते बकरी खाये तो मरेगी .... इस लिए कही फेकना मत .... उन्हें ज़मीन में गाड लेना ।
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Shahjapur 30th Jan 2011

Thursday, January 27, 2011

स्वास्थ्यवर्धक सौंफ

मस्तिष्क संबंधी रोगों में सौंफ अत्यंत गुणकारी है। यह मस्तिष्क की कमजोरी के अतिरिक्त दृष्टि-दुर्बलता, चक्कर आना एवं पाचनशक्ति बढ़ाने में भी लाभकारी है। इसके निरंतर सेवन से दृष्टि कमजोर नहीं होती तथा मोतियाबिंद से रक्षा होती है।

उलटी, प्यास, जी मिचलाना, पित्त-विकार, जलन, पेटदर्द, अग्निमांद्य, पेचिश, मरोड़ आदि व्याधियों में यह लाभप्रद है।

सौंफ, धनिया व मिश्री का समभाग चूर्ण 6 ग्राम की मात्रा में भोजन के बाद लेने से हाथ-पाँव तथा पेशाब की जलन, अम्लपित्त (एसिडिटी) व सिरदर्द में आराम मिलता है।

सौंफ और मिश्री का समभाग चूर्ण मिलाकर रखें। दो चम्मच मिश्रण दोनों समय भोजन के बाद एक से दो माह तक खाने से मस्तिष्क की कमजोरी दूर होती है तथा जठराग्नि तीव्र होती है।

बच्चों के पेट के रोगों में दो चम्मच सौंफ का चूर्ण दो कप पानी में अच्छी तरह उबाल लें। एक चौथाई पानी शेष रहने पर छानकर ठण्डा कर लें। इसे एक-एक चम्मच की मात्रा में दिन में तीन-चार बार पिलाने से पेट का अफरा, अपच, उलटी (दूध फेंकना), मरोड़ आदि शिकायतें दूर होती हैं।

स्रोतः लोक कल्याण सेतु, दिसम्बर 2010, पृष्ठ संख्या 18, अंक 162

Tuesday, January 25, 2011

खूनी बवासीर)

काले तिल के चूर्ण में मक्खन मिलाकर खाने से रक्तार्श (खूनी बवासीर) नष्ट हो जाती है।

ऋषि प्रसाद, जनवरी 2011

नपुंसकता

एक भाग गोखरू चूर्ण में दस भाग तिल का चूर्ण मिलाके 5 से 10 ग्राम मिश्रण बकरी के दूध में उबाल कर, मिश्री मिला के पीने से षढंतानपुंसकता (Impotency) नष्ट होती है।


ऋषि प्रसाद, जनवरी 2011

वातजनित रोगों में

पेट मे वायु के कारण दर्द हो रहा हो तो तिल को पीसकर, गोला बनाकर पेट पर घुमायें।

वातजनित रोगों में तिल में पुराना गुड़ मिलाकर खायें।


ऋषि प्रसाद, जनवरी 2011