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Thursday, June 14, 2012

कारोबार में बरकत पाने के लिये :-

गो सेवा भी होगी और एक फायेदा भी होगा एक प्रयोग से जिनकी अपनी दुकान है, अपनी फैक्ट्री, अपना कारोबार है वो लोग रोज़ नही तो हर बुधवार को गो माता को हरा चारा खिलाये हरा घांस हर बुधवार को दे उनको लाभ होगा गो सेवा भी होगी बुधवार बुधवार को |

For prosperity at work

Those who are involved in trading, working in factories or have their own business , all will be highly benefited by offering green grass and fodder to cows on every Wednesday, if not daily. This will also be a great service to our cows. So, remember this service, every Wednesday.

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- Shri Sureshanadji Haridwar 8th May' 2012

कर्जे से मुक्ति :-

अब चतुर्दशी तिथि का महत्व कृषण पक्ष की, ये उनके लिए है जो सेवा, पूजा, सुमिरन करते है पर उनके सिर पे कर्जा है और बेचारे ब्याज भरते है, आर्थिक परेशानी से दबे है, परेशान है | वो कृषण पक्ष की चतुर्दशी को शाम को जब सूर्यास्त हुआ एक ५ बत्ती वाला दीपक शिव मंदिर में जला दे बैठके गुरु मन्त्र का जप करें ताकि सिर पर से ये भर उतर जाये |

Mitigation of loans:-

The significance of the fourteenth lunar day in Krishna paksha is immense for those who routinely do service, prayers, remembrance and have large loans in their name, paying large interest on it and are deeply distressed by it. On the evening of fourteenth lunar day in Krishna paksha, after the sunset, light a lamp which has 5 light holders in Shiva mandir and then do japa of Guru Mantra so that you are alleviated from this fear.

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- Shri Sureshanandji Haridwar 7th May' 2012

Wednesday, June 13, 2012

किशमिश विशेष :-

ये ऋतु थोडा शारीर में से बल क्षीण करने वाली है | जीवनी शक्ति कमजोर करनी वाली ऋतु गर्मी और बारिश इस ऋतु में किशमिश वरदान है | किशमिश में क्या फायदे होते है - किशमिश का स्वाभाव मधुर है, उसका परिणाम शीतल है वायु, पित्त और काफ इन तीनो दोषों को शमन करने का शक्ति किशमिश में है | दूध तो कियो को वायु करता है लेकिन किशमिश में दूध के सरे गुण है लेकिन वायु का दोष नही | और आज कल जो दूध महंगा है उसके हिसाब से किशमिश सस्ती है | क्यूंकि दूध जितना पिये और जो बने उससे किशमिश थोड़े में ही उतना बना देती है |

खाने की रीत :-
किशमिश १५ से ५० ग्राम तक अच्छी तरह से धोकर थोड़ी देर फिर शुद्ध पानी में फिर जयादा चबा चबा कर मजे से खायें, दूध में तो ना जाने कितना कितना गड़बड़ी और प्रीसरवेटिव पड़ता है| किशमिश में वो सब मुसीबतें नहीं |

फायदे :-
खाने से खून बनता है, वायु दोष दूर होता है, पित्त दूर होता है, काफ दूर होता, और हृदय के लिये बड़ा हितकारी है और हार्ट अटैक को दूर रखेगा | दूध के लगभग सभी तत्व किशमिश में पाये जाते है | दूध की अपेक्षा पचने में किशमिश आधा समय लेता है आधी ताकत लगाता है | वृद्ध अवस्था में किशमिश का उपयोग बल और आयु बढ़ने वाला होता है, दुर्बल और खून की कमी वालों के लिए ये किशमिश एक टोनिक और वरदान है | १०० किशमिश में ८ मिली ग्राम लोह तत्व, ८७ मिली ग्राम कैलशियम और ३०८ कैलोरी (ऊर्जा ) पायी जाती है | किशमिश की शर्करा शीघ्र
पच जाने के कारण इसे खाने के बाद उत्साह और प्रसन्ता और शक्ति तुरंत प्राप्त होती है |

Raisins(Kishmish) special:-

In summer and rainy season, body becomes slightly weak. In these seasons, raisins are a boon. Raisins have numerous qualities: it is sweet by nature, it is soothing as a result which helps alleviate the bad effects of the all three, Vayu, Pitta and Cough. Having milk may cause Vayu(wind) problems for some, but raisins have all the qualities of milk without the side effects of wind. Also, as compared to the rising prices of milk, raisin is cheaper now. This is because a small of amount of raisins can provide the same benefit as against the normal volume of milk consumption.

Eating procedure:
Wash 15-50 grams of raisins thoroughly in purified water and then relish it while chewing properly. Nowdays milk is found to have so many abnormalities and preservatives. However, there is no such fear with raisins.

Benefits:
Eating raisins enhances blood formation, alleviates vices of Vayu (wind), Pitta (bile), Cough, strengthens the heart and keeps heart attack at bay. Raisins have almost all the qualities of milk. Raisins take half as much time to digest as compared to milk. In old age, raisins help improve the body vigour and longevity. For weak and anaemic patients, raisins act as a tonic and are a real blessing. 100 raisins is found to have 8 milligrams of iron, 87 milligrams of calcium and 307 calories energy. Due to easy digestion of its sugar content, one feels energetic, pleased and enthusiastic after eating raisins.

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- Pujya Bapuji Mumbai 3rd June 2012

पित्त-नाश व बलवृधि के लिए:

पित्त-नाश व बलवृधि के लिए:

पीपल के कोमल पत्तों का मुरब्बा बड़ी शक्ति देता है | इसके सेवन से शरीर की कई प्रकार की गर्मी-संबंधी बीमारियाँ चली जाती है | यह किडनी की सफाई करता है | पेशाब खुलकर आता है | पित्त से होने वाली आँखों की जलन दूर होती है | यह गर्भाशय व मासिक संबंधी रोगों में लाभकारी है | इसके सेवन से गर्भपात का खतरा दूर हो जाता है |

पीपल के पत्ते ऐसे नहीं तोड़ना चाहिए | पहले पीपल देवता को प्रणाम करना कि महाराज ! औषध के लिए हम आपकी सेवा लेते हैं, कृपा करना |’ पीपल को काटना नहीं चाहिए | उसमें सात्विक देवत्व होता है |

मुरब्बा बनाने की विधि:

पीपल के २५० ग्राम लाल कोमल पत्तों को पानी से धोकर उबाल लें, फिर पीसकर उसमें समभाग मिश्री व ५० ग्राम देशी गाय का घी मिलाकर धीमी आँच पर सेंक लें | गाढ़ा होने पर ठंडा करके सुरक्षित किसी साफ बर्तन ( काँच की बरनी उत्तम है ) में रख लें |

सेवन-विधि: १०-१० ग्राम सुबह-शाम दूध से लें |


Alleviate Pitta and increase body vigour :-

Marmalade made from soft leaves of Peepal tree provides vitality to the body. Consuming this removes many heat related diseases. This also cleanses the kidney and allows urination without obstruction. Excessive burning of eyes due to Pitta can also be treated using this marmalade. This is beneficial in pregnancy and menstrual related issues. Consuming this negates any fear of miscarriage.

One must never pluck leaves from Peepal tree casually. First, pray to Peepal God, " Oh, Lord, I am using this for medicinal purposes, Please bless us". One must never cut a Peepal tree as holy God-element resides in it.

Procedure for making marmalade:-
Wash thoroughly 250 grams of soft, tender red leaves of Peepal tree and boil them in water. Then grind this and add equal proportion of rock sugar and 50 grams of aboriginal cow ghee, then put this on slow heat. Once the mixture becomes dense, cool the mixture and store it in a sealed container (glass container is ideal).

Medication advice:
Take 10-10 grams of this marmalade everyday in the morning and evening with milk.

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- Lok Kalyan Setu March 2012

Tuesday, June 5, 2012

कमजोरी दूर करने :

जो बुड्ढी माईयाँ है, कमजोर माईयाँ है उनको रेशे वाले आम खिलाओ गुठली से जो पैदा होते हैं ये कलमी आम नहीं रेशे वाले आम, आम खाएं है ना उसमे रेशे रेशे हो बुढ़ापे में भी जवानी लायेंगे, संजीवनी २-२ गोलियाँ लें बुड्ढ़े लोग तो जवान बनेंगे पराधीनता नहीं रहेगी बुड्ढ़े-बुजर्गों की सेवा करने का भी आनंद है कर्त्तव्य भी है आनंद भी है |

To overcome weakness:-

All aged ladies or weak ladies should have fibrous mangoes which are grown from mango seeds. Not the Kalmi mangoes. It brings youthfulness even in old age. Also, take 2-2 tablets of Sanjivani which makes one younger and more independent in daily activities. Know that serving aged people is our duty and also provides great joy.

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- पूज्य बापूजी Haridwar 8th May' 2012

कर्जे के भार से बचें :

उबटन वाला स्नान
१ गेहूँ
२ चावल ( जो ज्वार खाते हों वो ज्वार और जो चावल खाते हों वो चावल ले सकते हैं )
३ मूँग
४ चना
५ उड़द
६ जौं
७ तिल कर्जे के भार से छुड़ाने में बड़ा काम करेगा | सप्त धान उबटन का स्नान रोज करो | बहुत मदद मिलेगी .... गृह पीड़ा दूर होगी बहुत फायदा होगा |
For relief from debt:-

Taking bath using Ubtan (Powdered mixture made of Wheat, Rice, Jau, Sesame, Chickpea, Urad, Moong) can be highly beneficial for relieving monetary debts. One must daily take bath using Ubtan. Its very useful..... also helps to appease pain caused by domestic issues.
- श्री सुरेशानंदजी Haridwar 7th May' 2012

कभी स्नान ना कर सकें तो :

तुलसी के पौधे की मिटटी इतनी पवित्र है कि कोई आदमी घर में बहुत बीमार हो नहा नही सकता हो तो आप उसको तुलसी की मिटटी का तिलक कर दो वो आदमी नहाया हुआ जैसा पवित्र माना जायेगा | (मेरे से एक मिलिट्री में काम करने वाले भाई ने पूछा था कि हम ऐसी जगहों पर रहते हैं जहाँ बर्फ ही बर्फ होती है पानी तो होता नहीं नहाये कैसे, इतनी ठण्ड होती है माईनस में होता है टेम्परेचर क्या करें ? नियम कैसे करें ? मैंने कहा आश्रम में आये हो तुलसी की मिटटी ले जाओ जितने दिन रहना पड़े उसका तिलक कर लो नहाये हुए के सामान माने जाओगे पवित्र तुलसी की मिटटी इतनी शुद्ध है | ) इसका मतलब ये नही है कि और भी कोई सोचे की वाह बढ़िया आईडिया है कभी नहाना नही और तुलसी की मिटटी का तिलक कर दो हो गया पवित्र हो गये हम तो |

If you cannot take a bath:-

The soil of Tulsi (Basil) plant is so pure and holy that if any one is very ill and cannot take a bath, then after applying the soil of Tulsi on his forehead, he can considered as clean as if he has taken a shower. (I was once asked by a military personnel that he had to work in remote places where there is snow all around with no water in sight. Then how do we take a bath in such cold weather where there is sub zero temperature? How do we ensure our daily prayer routines? Then I told him to take some soil from Tulsi plant as you are now here at the ashram. Whenever you apply tilak on your forehead with this, you can be treated as pure as having taken a shower.)

However, knowing this must not be an excuse for one not to take a bath and misconstrue the use of the soil of Tulsi plant.

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- श्री सुरेशानंदजी Haridwar 7th May' 2012

गंगा में स्नान करते वक़्त का मन्त्र :

भक्त गंगा में " ॐ नमो गंगाये विश्व रुपिने नारायणाय स्वाहा: " ये मन्त्र बोलते हुए ही लगाओ विशेष फायदा होगा मैं हर साल बोलता हूँ कई लोग नये आते हैं इसलिए | जब भी गंगा में नहाओ ये मन्त्र बोलना |

Mantra during taking a bath in river Ganga:-

All devotees must recite this mantra while taking a bath in river Ganga:" AUM NAMO GANGAYE VISHVA RUPINE NARAYANAYE SWAHAH" .
Reciting this mantra is highly beneficial.I say it every year and request you all to say it as well whenever you take a bath in river Ganga.

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- श्री सुरेशानंदजी Haridwar 7th May' 2012

धूप बनाने की विधि मनोकामना हेतु :

अपने घर में धूप-दीप रोज करो गूगल, घी, शक्कर, सूखे नारियल का पाउडर थोड़ा मिला के अंगारे जलाकर धूप करो | आसपास गोशाला हो तो गाये के गोबर के कंडे ले आओ वो सुबह शाम जलाकर बहनें घर में थोड़ा धूप कर दे जहाँ पूजा पाठ करते हो वहाँ धूप दीप कर दें अपने घर का वातावरण सुगंधि बनाये | स्कन्द पुराण में लिखा है जो गूगल घी, घी भी अगर भैंस का हो धूप में वो प्रयोग करें | ऐसा करने वाले की मनोकामना पूरी होती है, ऐसा मैंने स्कन्द पुराण का वचन पढ़ा है |

Procedure for Incense for fulfilling wishes:-

Everyday at home burn incense made of Gugol, Ghee, Sugar, dry coconut powder along with lighting a lamp. If there is a cow shed nearby, then all sisters are requested to light incense made of cow dung cakes in the morning and evening at the place of prayer to create an aromatic ambience at home. It is written and claimed in Skanda Purana that all desires are fulfilled for one who lights incense at home made of Gugol, Ghee; even ghee made from Buffalo is acceptable.

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- श्री सुरेशानंदजी Haridwar 7th May' 2012

गर्भवती माता के लिए :

गर्भवती बहन हो कोई माँ बनने वाली हो उसको हर ५-७ दिन में मलाई वाला जो नारियल आता है ना उसकी मलाई मिश्री पाउडर के साथ खिलाओ उसका बच्चा हृष्ट- पुष्ट और बलवान होगा |

For pregnant women:-

All pregnant ladies who are expecting, should consume pulp (malai) from a good coconut along with rock sugar, once every 5-7 days. The expectant kid will be strong and healthy.

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- श्री सुरेशानंदजी Haridwar 7th May' 2012

बेटी की शादी में अड़चन :

बेटी की शादी नहीं हो रही तो गुरुवार को और पूनम को आश्रम में कर सके तो आश्रम में बड़दादा या पीपल की १०८ परिक्रमा करें तो बेटी की शादी में जो अडचनें आ रही हैं, वो दूर हो जाएँगी बेटी खुद करे | गुरुवार को और पूनम को पीपल और बड़ के फेरे फिरने से विशेष फायदा होता है |

Having troubles in daugther's marriage:-

If you are having trouble in getting your daughter married, then circumambulate the Vad Dada or Peepal tree in our ashram for 108 times on Thursays and on full moon days. Doing this will appease all hinderances you are having with your daughter's marriage. Even your daughter should do this herself. Circumambulating the Vad Dada or Peepal tree on Thursdays and on full moon days is considered supremely beneficial.

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- श्री सुरेशानंदजी Haridwar 7th May' 2012

Saturday, June 2, 2012

धन और स्वास्थ्य की कमी दूर करने

जिन लोगों के घर में धन ओर स्वास्थ्य सम्बन्धी कमी का एहसास नित्य होता है, पैसों
की भी कमी रहती है ओर स्वास्थ्य में भी... कभी कोई बीमार तो कभी कोई बीमार रहता हो उनके लिए पद्म पुराण में बताया है- वैशाख मास का एक प्रयोग |
वैशाख मास की बहुत महिमा बताई है | वैशाख मास के शुक्ल पक्ष की सप्तमी को
पद्म पुराण में उसको शर्करा सप्तमी कहा गया है ओर वो शर्करा सप्तमी २८ अप्रैल २०१२ शनिवार को है । उस दिन पानी में सफ़ेद तिल मिलाकर
भगवन्नाम सुमरन करते हुए स्नान करें | फिर सूर्य भगवान की ओर मुख करके सूर्यदेव और माँ गायत्री को प्रणाम करें | सूर्य भगवान को इन मंत्रों से प्रणाम करें-

ॐ नम: सवित्रे | ॐ नम: सवित्रे | ॐ नम: सवित्रे |
विश्व देव मयो यस्मात वेदवादी ति पठ्यसे |
त्वमेवा मृतसर्वस्व मत: पाहि सनातन ||

ये मंत्र बोलकर सूर्यनारायण को व अन्य देवों को मन ही मन प्रणाम करें | अर्घ्य तो देते ही हैं | सूर्य भगवान को जो अर्घ्य ना दे वो आदमी हिंदू कहलाने के लायक नहीं है |

ये कर लिया २८ अप्रैल को फिर दूसरे दिन
२९ तारीख़ को हो सके तो अपने हाथों से दूध चावल की खीर बनाकर उसमें थोड़ा घी डालकर.. थोड़ा-सा भले ज्यादा ना डाल सके एक चम्मच डाल दे और किसी को .. १-२ व्यक्तियों को खिला दें | कोई ब्राह्मण हो, कोई साधू-महात्मा हो | खीर के साथ थोड़ा रोटी सब्जी दे दें किसी को १ व्यक्ति को भी ।
अगर ब्राह्मण न मिले, कोई साधू ना मिले
तो छोटी बच्चियों को खिला दे | कन्या को खिला दो तो भी अच्छा है |

ऐसा करने से ऐश्वर्य और आरोग्य दोनों की वृद्धि होती है |

वैशाख शुक्ल सप्तमी को ही सुख और आरोग्य की वृद्धि के लिए पद्म पुराण में इस सप्तमी को 'कमल सप्तमी' भी कहा गया है | हो सके तो उस दिन १ कमल का फूल मिल जाये तो लोटे में जल भरा और कमल का पुष्प लोटे में डाल दिया और सूर्य भगवान को अर्घ्य दिया | कमल ना मिले तो कमल के जगह अक्षत भी डाल सकते हैं | कुमकुम वाले अक्षत कर लिए और लोटे में डाल दिए क्योंकि वैदिक कर्मकांड में जो भी वस्तु उपलब्ध ना हो उस स्थान पर अक्षत लेने का विधान है | ये अपने देश के ग्रंथो की बड़ी दया है हम पर | ग्रंथो के रचयिता भगवान वेदव्यासजी की भी बड़ी कृपा है हम पर | इस तीर्थ धाम में हम भगवान वेदव्यासजी को भी बार-बार प्रणाम करते हैं | तो कमल ना मिला तो चावल तो सबके घर में होते ही है | कुमकुम वाले चावल लोटे में डाल दिए और सूर्य भगवान को जल देते समय ये मंत्र बोलेंगे, साथ में सब बोलना -
नमस्ते पद्म हस्ताय नमस्ते विश्व धारणे ||
दिवाकर नमस्तुभ्यम प्रभाकर नमोस्तुते ||
२८ अप्रैल वैशाख
शुक्ल सप्तमी का खूब-खूब फायदा उठाइये और उस दिन जप भी खूब करिये गुरु मंत्र का |
भविष्योत्तर पुराण में वैशाख मास के
शुक्ल पक्ष की सप्तमी को 'निम्ब सप्तमी' भी कहते हैं | उस दिन सूर्य देव को प्रणाम करके नीम् के पत्ते भी खाएं तो रोगों से मुक्ति प्राप्त होती है | जिनके शरीर में बीमारियाँ रहती हो पेट की, सिर दर्द की कोई भी तकलीफ रहती हो और वो कमबख्त मिट नहीं रही है, बड़ा परेशान कर रही है वो तकलीफ तो आप नीम के पत्ते वैशाख शुक्ल सप्तमी को सूर्य भगवान को अर्घ्य देकर प्रणाम करके फिर ये मंत्र बोलते हुए नीम के पत्ते खाएं । ये मंत्र बोलकर नीम के पत्ते खाने से आरोग्य की प्राप्ति हो सकती है हम दृढता से करें -
आजकल लोग अंग्रेजी बडबड करते है पर देव भाषा संस्कृत है | वो घर में बोली जानी चाहिए थी पर अब संस्कृत में आप और हम नहीं बोल सकते तो कम से कम ये संस्कृत के वैदिक-पौराणिक मंत्र बोलते हुए ये नियम करें तो घर में भी सुख-शांति बढती है |
निम्ब पल्लव भद्रनते सुभद्रं तेस्तुवई सदा |
ममापि कुरु भद्रं वै त्राशनाद रोगा: भव ||

ये बोलकर नीम के पत्ते खा लेना | कोमल-कोमल धो कर खाना और उस दिन हो सके तो रात को पलंग पर नहीं धरती पर बिस्तर बिछाकर कम्बल आदि बिछाकर
उस पर आराम करना| जिनको
कोई भी रोग है वो यह करें |

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- Shri Sureshanandji Ayodhya 18th April' 2012