कई साधक जप करते, उस के बाद गौ-मुखी आसन पर रख देते…आसन के उपर गौ-मुखी ना रखिए… क्योंकि हम जब आसन पर बैठते हैं तब हमारी चरणों की धूलि (पैर की मिट्टी) आसन पर लग जाती है l और जो आप पाठ करते है गुरुगीता, गजेन्द्र मोक्ष, आदित्यह्रदय स्तोत्र, अदि पाठ करने की पुस्तकों भी आसन पे न रखे अपने आसन से इन चीजो को थोड़ी उची रखे ....
कई साधक भाई बहेनों को ये नहीं पता होता कि आसन और गौ-मुखी हम धो भी सकते हैं … कितने वर्षों तक गौ-मुखी को मैला रखते हैं l
Rekha Didi, Saharanpur-26th Sep. 2011
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