इस मंत्र के जप कर के हाथ उठाकर सूर्य नारायण को पितृ की तृप्ति एवं सदगति के लिए प्राथना करें । स्वधा ब्हमाजी की मानस पुत्री हें। इस मंत्र के जप से पितृ की तृप्ति अवश्य होती है और श्राद्ध में जो त्रुटी रह गई हो वे भी पूर्ण हो जाती है।
श्राद्ध पक्ष - 29th Sep to 15th Oct'2012
- पूज्य बापूजी Patiala 24 Sep, 2011
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