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Friday, January 18, 2019

पुण्यदायी तिथियाँ


२१ जनवरी –   रविपुष्यामृत योग (प्रात: ५ – २२ से सूर्योदय तक )

२७ जनवरी -   रविवारी सप्तमी ( सूर्योदय से दोपहर ३ - ०३ तक )

३१ जनवरी -   षटतिला एकादशी (स्नान, उबटन, जलपान, भोजन, दान व होम में तिल के उपयोग से पाप-नाश )

४ फरवरी – सोमवती अमावस्या (सूर्योदय से रात्रि  २ -३४ )  (तुलसी की १०८ परिक्रमा करने से दरिद्रता –नाश )

१३ फरवरी – बुधवारी अष्टमी ( सूर्योदय से दोपहर ३ – ४७ )  विष्णुपदी संक्रांति ( पुण्यकाल : सूर्योदय से सुबह ८ – ५० तक), (ध्यान, जप आदि का लाख गुना फल )

१४ फरवरी – मातृ-पितृ  पूजन दिवस

१६ फरवरी – जया एकादशी ( व्रत से ब्रह्महत्यातुल्य पाप व पिशाचत्व नाश )

१७ फरवरी – रविपुष्यामृत योग ( शाम ४ - ४६ से  १८ फरवरी सूर्योदय तक ), माघ शुक्ल त्रयोदशी [ इस दिन से माघी पूर्णिमा ( १६ फरवरी) तक स्नान, दान, व्रत आदि पुण्यकर्म करने से सम्पूर्ण माघ-स्नान का फल]

 ऋषिप्रसाद – जनवरी २०१९ से
   

शुद्ध शिलाजीत कैप्सूल (१००% शुद्ध )


शुद्ध शिलाजीत शरीर के सभी अंगो को बल व मजबूती प्रदान करती है | यह युवा व वृद्ध – दोनों अवस्थाओं में ऊर्जा देनेवाला तथा शक्ति, बुद्धि व स्मृति वर्धक एवं हड्डियों को मजबूत करनेवाला उत्तम रसायन है | शारीरिक कमजोरी, मूत्र –संबंधी रोग, खून की कमी, पथरी, जोड़ों का दर्द एवं ह्रदय की पीड़ा आदि रोगों में लाभदायी है |

बाजारू विज्ञापन देखकर अपनी जेब खाली न करें | यह कैप्सूल शुद्ध, सात्त्विक, सस्ता व विश्वसनिय है |

ऋषिप्रसाद – जनवरी २०१९ से

कठोर या चंचल स्वभाव बदलने की कुंजी


स्वभाव कठोर है तो कमल का ध्यान करें, स्वभाव कोमल हो जायेगा | चंचल स्वभाव है तो ऐसा चिंतन करें कि “मैं शांत आत्मा हूँ, चिद्घन आत्मा हूँ, चैतन्य आत्मा हूँ.... चंचलता मन में है, उसको जाननेवाला, चल मन को जाननेवाला अचल मेरा आत्मा-परमात्मा है | ॐ ॐ ॐ....”  थोड़े दिन में स्वभाव ठीक हो जायेगा |

ऋषिप्रसाद – जनवरी २०१९ से


घर सुरक्षित रहने के लिए


घर में संक्रांति ( जब सूर्य अगली राशि में प्रवेश करते हैं ) के समय (रविवार को छोडकर) देशी गाय का गोमूत्र अथवा गोमूत्र अर्क पानी में मिलाकर छिड़काव करने से घर हर प्रकार से सुरक्षित रहता है | घर में सभी सदस्यों में परम बना रहता है | 

( हर महीने में एक संक्रांति होती है | आश्रम के कैलेंडर, डायरी आदि में देखें |  गोमूत्र अर्क सत्साहित्य सेवाकेन्द्रों पर उपलब्ध है |)

ऋषिप्रसाद – जनवरी २०१९ से

घर में शांति आने का अद्भुत चमत्कार


शुद्ध घी या तेल के तेल का दीपक जलाकर गहरा श्वास ले के रोकें फिर ‘ॐ तं नमामि हरिं परम् |’ मंत्र बोले | ऐसा १५ – २० मिनट नियत समय, नियत स्थान पर कुटुम्ब के सभी लोग करें | ३ – ४ दिन में अद्भुत चमत्कार होगा, घर में शांति होगी |

ऋषिप्रसाद – जनवरी २०१९ से

शीत ऋतू के अपने आहार –विहार


क्या करें
१] हरड चूर्ण घी में भूनकर नियमितरुप से लेने तथा भोजन में घी का उपयोग करने से शरीर बलवान होकर दीर्घायुष्य की प्राप्ति होती है |
२] सर्दियों में प्रतिदिन सुबह खाली पेट १५ से २५ ग्राम काले तिल चबाकर खाने व ऊपर से पानी पीने से शरीर पुष्ट होता है व दाँत मृत्युपर्यन्त दृढ़ रहते हैनं |
३] सूर्यकिरणें सर्वरोगनाशक व स्वास्थ्यप्रदायक हैं | रोज सुबह सिर को ढककर ८ मिनट सूर्य की ओर मुख व १० मिनट पीठ करके बैठे |
४] शीतकाल में व्यायाम व योगासन विशेष जरूरी हैं | इन दिनों जठराग्नि बहुत प्रबल रहने से समय पर पाचन-क्षमता अनुरूप उचित मात्रा में आहार लें अन्यथा शरीर को हानि होगी |

क्या न करें
१] अति श्रम करनेवाले, दुर्बल, उष्ण प्रकृतिवाले एवं गर्भिणी को तथा रक्त व पित्त दोष में हरड का सेवन नहीं करना चाहिए |
२] तिल और दूध का सेवन एक साथ नहीं करना चाहिए और रात्रि को तिल व तिल के तेल से बनी वस्तुएँ खाना वर्जित है |
३] सूर्यकिरणों में अधिक समय तक सिर को ढके बिना रहना व तेज धुप में बैठना स्वास्थ्य के लिए हानिकारक है |
४] दिन में सोना, देर रात तक जागना, अति ठंड सहन करना, अति उपवास आदि शीत ऋतू में वर्जित है | बहुत ठंडे जल से स्नान नहीं करना चाहिए |

ऋषिप्रसाद – जनवरी २०१९६ से


कैसे रखे सर्दी को दूर ?



v कुछ लोगों को सर्दी सहन नही होती, थरथराते हैं, दाँत से दाँत बजते हैं, हाथ काँपते हैं | वे कड़ाही में थोडा-सा घी डाल दें और फिर उसमें गुड़ गला दें | जितना गुड डाले उतनी सोंठ डाल दें | समझो २५ ग्राम गुड़ है तो २४५ ग्राम सोंठ डाल दी | उसे घी में गला के सेंक दें | १ -१ चम्मच सुबह-शाम चाटने से सर्दी झेलने की ताकत आ जायेगी |
v राई पीस के शहद के साथ पैरों के तलवों में लगा दें तो भी सर्दी में ठिठुरना बंद हो जायेगा |

ऋषिप्रसाद – जनवरी २०१९ से

सर्दियों में पुष्टि के विशेष प्रयोग


v सर्दियों में सुबह ४ से ५ खजूर को घी में सेंककर खा लें | ऊपर से इलायची, मिश्री व २ ग्राम अश्वगंधा चूर्ण डालकर उबाला हाउ दूध पियें | इससे रक्त, मांस व शुक्र धातु की वृद्धि होती है |
v २ से ३ बादाम रात को पानी में भिगो दें | सुबह छिलके निकाल के बारीक पीस लें व दूध में मिला के उबालें | इससे मिश्री और  ५ – १० ग्राम घी मिला के लेने से बल-वीर्य की वृद्धि होती है एवं मस्तिष्क की शक्ति बढती है |
v कृश एवं दुर्बल व्यक्ति बीज निकले ५ खजूर घी में सेंककर सुबह चावल के साथ खाये | इससे वजन एवं बल में वृद्धि होती है |

ऋषिप्रसाद – जनवरी २०१९ से

कब्ज से राहत देनेवाली अनमोल कुंजियाँ


v प्रात: पेट साफ़ नहीं होता हो तो गुनगुना पानी पी के खड़े हो जायें और ठुड्डी को गले के बीचवाले खड्डे में दबायें व हाथ ऊपर करके शरीर को खींचे | पंजों के बल कूदें | फिर सीधे लेट जायें, श्वास बाहर छोड़ दें व रोके रखें और गुदाद्वार को  ३० – ३२ बार अंदर खींचे, ढीला छोड़े, फिर श्वास लें | इसको स्थलबस्ती बोलते हैं | ऐसा तीन बार करोगे तो लगभग सौ बार गुदा का संकुचन-प्रसरण हो जायेगा | इससे अपने-आप पेट साफ़ होगा | और कब्ज के कारण होनेवाली असंख्य बीमारियों में से कोई भी बीमारी छुपी होगी तो वह बाहर हो जायेगी |
v सैकड़ों पाचन-संबंधी रोगों को मिटाना हो तो सुबह ५ से ७ बजे के बीच सूर्योदय से पहले-पहले पेट साफ़ हो जाय.... नहीं तो सूर्य की पहली किरणें शरीर पर लगें; सूर्यस्नान करने से भी पेट साफ़ होने में मदद मिलती है |
v कई लोग जैसे कुर्सी पर बैठा जाता है, ऐसे ही कमोड ( पाश्च्यात्य पद्धति का शौचालय ) पर बैठकर पेट साफ़ करते हैं | उनका पेट साफ़ नहीं होता, इससे नुक्सान होता है | शौचालय सादा अर्थात जमीन पर पायदानवाला होना चाहिए | शौच के समय आँतों पर दबाव पड़ना चाहिए, तभी पेट अच्छी तरह से साफ़ होगा | पहले शरीर का वजन बायें पैर पर पड़े फिर दायें पैर पर पड़े | इस प्रकार दोनों पैरों पर दबाव पड़ने से उसका छोटी व बड़ी – दोनों आँतों पर प्रभाव होता है, जिससे पेट साफ़ होने में मदद मिलती है | तो पैरों पर वजन हो इसी ढंग से शौचालय में बैठे |दाया स्वर चलते समय मल-त्याग करने से एवं बायाँ स्वर चलते समय मूत्र-त्याग करने से स्वास्थ्य सुदृढ़ होता है |

ऋषिप्रसाद – जनवरी २०१९ से

तलवों में मालिश के चमत्कारी लाभ


दायें पैर के तलवे की बायीं हथेली से और बायें पैर के तलवे की दाहिनी हथेली से रोज (प्रत्येक तलवे की ) २ - ४ मिनट सरसों के तेल या घी से मालिश करें | यह प्रयोग न केवल कई रोगों से बचा सकेगा बल्कि अनेक साध्य-असाध्य रोगों में भी लाभ करेगा |

हथेलियो व तलवों में शरीर के विभिन्न अंगों से संबंधित प्रतिबिम्ब केंद्र पाये जाते हैं | अपनी ही हथेली से आपने तलवों की मालिश करने से इन पर दबाव पड़ता है, जिससे शरीर के सभी अवयवों पर अच्छा प्रभाव पड़ता है |

कब करें : प्रात: खाली पेट व्यायाम के बाद, शाम के भोजन से पूर्व या दो घंटे बाद, सोने से पहले- अनुकूलता-अनुसार दिन में एक बार करें |

लाभ : इस क्रिया के निरंतर अभ्यास से –
१] शरीर के विभिन्न अवयवों की कार्यक्षमता बढती है तथा हानिकारक द्रव्यों का ठीक से निष्कासन होने लगता है |
२] रक्त-संचालन की गडबडीयॉ दूर होती हैं |
३] अंत:स्रावी ग्रन्थियों की कार्यप्रणाली में सुधार होने से कई रोगों का शमन होता है |
४] स्नायुतंत्र के विकार दूर होते हैं |
५] नेत्रज्योति बढती है |
६] तलवों का खुरदरापन, रूखापन, सूजन आदि दूर होकर उनमें कोमलता व बल आता है |

यदि स्वस्थ व्यक्ति भी यह क्रिया सप्ताह में २ – ३ बार रात्रि में सोते समय करें तो उसका स्वास्थ्य बना रहेगा |

ऋषिप्रसाद – जनवरी २०१९ से

मनुष्य कितना भी पतित हो वह महान बन सकता है


‘ॐऽऽऽ....’ उच्चारण किया और जितनी देर उच्चारण किया उतनी देर शांत हो जाय, ध्यान में डूबता जाय | अगर ऐसा १०-१५ मिनट सुबह-शाम करे, गुरुगीता का पाठ करे, युवाधन-सुरक्षा के नियमों पर अमल करे और भगवान् को, सदगुरु को एकटक देखे, उनसे बातें करे, प्रेरणा ले फिर अंतर में डुबकी मारे तो कितना भी पतित, कैसा भी गिरा हुआ व्यक्ति हो, उसका पतन बंद होने लगेगा, मन पवित्र होने लगेगा | वह मंगल के रास्ते चल पड़ेगा | - पूज्य बापूजी

ऋषिप्रसाद – जनवरी २०१९ से


माघ मास के विशेष लाभकारी अंतिम ३ दिन


त्रिवेणी त्रिदोष से मुक्त कर देती है | तीन अवस्थाओं – जाग्रत, स्वप्न, सुषुप्ति में जो बंधन और आकर्षण है उससे भी मुक्त कर देती है, त्रिवेणी का स्नान ऐसा है | एक मास इन्द्रिय –संयमपूर्वक प्रयाग-स्नान सभी पापों से मुक्ति देता है और फिर वह माघ में हो तो और विशेष फलदायी है |

किसी कारण से एक मास नहीं भी कर सके, वार्धक्य है, ठंडी नहीं सह सकते तो त्रयोदशी से माघी पूर्णिमा तक ३ दिन स्नान कर लें तब भी चित्त शुद्ध, पवित्र हो जाता है और पवित्र, शुद्ध चित्त की पहचान है कि ह्रदय में निर्विकारी नारायण का आनंद आने लगे |

ऋषिप्रसाद – जनवरी २०१९ से