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Monday, August 20, 2012

गुरुदेव का स्मरण–प्रेम–अनुष्ठान –

गुरुदेव की ध्यान की एम्. पी. थ्री वगैरह सुनते हुये कभी गुरुदेव की तस्वीर को देखते रहे | फिर आँखों के द्वारा ऐसी भावना की कि मेरे गुरुदेव को मेरे भीतर ही ले जा रहा हूँ | मन से दूसरी चिंताएं और दूसरे लोगों का चिंतन नहीं निकलता हो ना ! तो गुरुदेव की तस्वीर को देखते देखते ये भाव किया कि मैं मेरे गुरुदेव को भीतर ले जा रहा हूँ और भीतर जो भी कचरा है मेरे-तेरे का वो जाये बाहर| ये भी कर सकते हैं | कभी अनुष्ठान किया जाए तो केवल माला का ही नहीं गुरुदेव के ही सुमरन-ध्यान-प्रेम आदि का अनुष्ठान २१ दिन, ११ दिन, ७ दिन| दिन में तीन बार गुरुदेव के सामने बैठ जाये और उनकी तस्वीर को निहारते –निहारते उन्ही में खो जाये | दूरी, भेद और भिन्नता को मिटाये, शरणागती और प्यार को सजीव बनाये | कभी ऐसा भी एक अनुष्ठान क्यों ना किया जाए |

Anushthaan - Remembrance of Gurudev and his Eternal Love

Meditate on Gurudev's picture while listening to meditation music mp3. Then imagine that I am inviting Gurudev inside me through my eyes. If you are troubled by different thoughts and are not able to get rid of thoughts about other people, then stare at Gurudev's portrait and imagine that I am drawing Him into myself and any garbage inside me is simultaneously thrown out! Sometimes one should try to do an anushthaan not only of malas but also of remembrance-love for Gurudev for 21 days, 11 days or 7 days. Atleast for three times a day, sit in front of Gurudev's portrait and dissolve yourself in His thoughts while staring at the portrait. This practice will eradicate the pangs of duality and evolve your submission and love. Let us all do one such anushthaan...

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- Shri Sureshanandji Surat 10th Aug' 2012

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