सुबह नींद में से उठे तो थोड़ी देर चुप बैठे | फिर ऐसा चिंतन करें : ‘आज मै कभी भी फरियाद का चिंतन नहीं करूँगा, अपने मन को दृढ़ रखूँगा क्योंकि मेरे मन की गहराई में मेरे भगवान हैं | भगवान सदा एकरस हैं, दृढ़ हैं तो मन दृढ़ होगा तो उसमें भगवान की सत्ता आयेगी | मेरी बुद्धि को दृढ़ करूँगा, बुरी संगति नहीं करूँगा, बुरे विचारों में नहीं गिरूँगा | मैं भगवान का हूँ, भगवान मेरे हैं | प्रभु ! आप मेरे हैं न ! आप चेतनस्वरूप हैं, आनंदस्वरूप हैं, ज्ञानस्वरूप हैं, आप शांत आत्मा हैं |
इस प्रकार का चिंतन करने से बुद्धि बढ़ेगी | क्या करूँ, कैसे करूँ, मेरा ऐसा हो गया
| .... फिर जो पढ़ा है अथवा जो पढना है उसका थोडा चिंतन करो | चिंतन से बुद्धि का
विकास होता है और चिंता से बुद्धि का विनाश होता है |
सूर्यनारायण को अर्घ्य देना, भगवन्नाम का जप करना, भगवान को एकटक देखते-देखते
फिर उनको आज्ञाचक्र में देखना | इनसे बुद्धि का विकास होता है |
ऋषिप्रसाद – सितम्बर २०२१ से
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