Search This Blog

Sunday, March 22, 2020

पंचमहाभूतों के तन्मात्रों की रचना

पंचमहाभूतों के सात्त्विक तन्मात्र से मन और ज्ञानेन्द्रियाँ बनती हैं, राजस तन्मात्र से कर्मेन्द्रियाँ और प्राण बनते हैं तथा तामस तन्मात्र से विषय और बाह्य पदार्थ बनते हैं |  

मन चार प्रसिद्ध हैं : मन, बुद्धि, चित्त, अहंकार | इसीको अंत:करण-चतुष्टय कहते हैं |

ज्ञानेन्द्रियाँ पाँच है : श्रोत (कान), त्वक (त्वचा), चक्षु (नेत्र), रसना (जिव्हा) और घ्राण (नासिका) |

कर्मेन्द्रियाँ पाँच है : वाक्, पाणि (हाथ), पाद (पैर), उपस्थ (जननेंद्रिय) और पायु (गुदा) |

प्राण दस है : इनमें पाँच मुख्य प्राण है – प्राण, अपान, समान, उदान और व्यान |       

पाँच उपप्राण हैं  - नाग, कूर्म, कृकल, देवदत्त और धनंजय |


ऋषिप्रसाद – मार्च २०२० से

No comments: