२८ जनवरी : मंगलवारी चतुर्थी ( सुबह ८:२३ से २९ जनवरी सूर्योदय तक )
३० जनवरी : वसंत पंचमी ( इस दिन सारस्वत्य मंत्र का अधिक-से-अधिक जप करना
चाहिए |)
१ फरवरी : अचला सप्तमी (प्रात: पुन्यस्नान, व्रत करके गुरु-पूजन करनेवाला
सम्पूर्ण माघ मास के स्नान का फल व वर्षभर के रविवार व्रत का पुण्य पा लेता है |
यह सम्पूर्ण पापों को हरनेवाली व सुख-सौभाग्य की वृद्धि करनेवाली है |)
५ फरवरी : जया एकादशी (व्रत से ब्रह्महत्यातुल्य पाप व पिशाचत्व का नाश होता
है |)
७ फरवरी : माघ शुक्ल त्रयोदशी [इस दिन से माघी पूर्णिमा (९ फरवरी) तक प्रात:
पुण्यस्नान तथा दान, व्रत आदि पुण्यकर्म करने से सम्पूर्ण माघ-स्नान का फल मिलता
है | - पद्म पुराण ]
१९ फरवरी : विजया एकादशी (व्रत से इस लोक में विजयप्राप्ति होती है और परलोक भी अक्षय बना रहता है |)
२१ फरवरी :
महाशिवरात्रि व्रत, रात्रि-जागरण, शिव-पूजन (निशीथकाल : रात्रि १२-२७ से १-१७ तक )
२३ फरवरी : द्वापर
युगादि तिथि (स्नान, दान-पुण्य, जप, हवन से अनंत फल की प्राप्ति |)
१ मार्च : रविवारी
सप्तमी (दोपहर ११-१७ से २ मार्च सूर्योदय तक )
ऋषिप्रसाद और लोककल्याण
सेतु – जनवरी २०२० से
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