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Tuesday, August 11, 2020

कृतज्ञता व्यक्त करने और अंदर की सुरक्षा हेतु श्राद्धकर्म

 (श्राद्ध पक्ष : १ से १७ सितम्बर )

श्राद्ध पक्ष के दिन ऋषियों के प्रति, अपने माँ-बाप के प्रति श्रद्धा व कृतज्ञता व्यक्त करने, अनाहत चक्र को विकसित करने और अंदर की सुरक्षा के दिन है |

जैसा दोगे, वैसा मिले गा

हमारे भौतिक कल्याण के लिए माँ-बाप ने खून-पसीना एक किया | आध्यात्मिक उत्थान के लिए ऋषियों ने चमड़ी घिस डाली, खून-पसीना एक कर डाला, जीवन की सुख-सुविधाएँ छोडकर एकांत अरण्य में रहें | ऐसे महापुरुषों ने हमारे उत्थान के अलग-अलग तरीके बनाये | उन्होंने तुम्हारे लिए बहुत सारा किया है तो तुम भी उनके प्रति कृतज्ञता व्यक्त करो | कृतज्ञता को स्थूलरूप में दिखाने के जो दिन है वे श्राद्ध के दिन कहे जाते हैं | तुम जो देते हो वह पाते हो | तुम श्रद्धा करते हो, पितरों को देते हो, ऋषियों का तर्पण करते हो तो तुमको भी उनका आशीर्वाद लौट मिलता है | श्राद्ध करने से तुम्हारे धन का सामाजिकरण होता है  और तुम्हारा कृतज्ञता में खर्च होता है |

इसका अवश्य ध्यान रखें

श्राद्ध के दिन श्राद्धकर्ता को तेल लगाना मना है | उस दिन किसी ऐसे बड़े व्यक्ति को नहीं बुलाना चाहिए जिस पर ध्यान देना पड़े | उस पर ध्यान दोगे तो जिनका श्राद्ध करते हो उनका अपमान होता है | आँसू बहाते –बहाते अगर श्राद्ध किया जाय तो वह प्रेतों को चला जाता है | अत: आँसू बहाकर श्राद्ध नहीं करना चाहिए |

भोजनद्वारा ब्राह्मण को तृप्त करें

तुम खीर बनाओ, भोजन बनाओ पर यह जरूरी नहीं है कि तुम १० ब्राह्मणों को ही खिलाओ, २ या १ ब्राह्मण को खिलाओ, जो व्यसनमुक्त, परोपकारी, सदाचारी, सज्जन हो | ब्राह्मण जितना सुयोग्य, रसोई बनानेवाला जितना सुयोग्य (शुद्धि एवं पवित्रता आदि का ध्यान रखनेवाला ), वातावरण जितना एकांत और पवित्र उतना उस श्राद्ध का मूल्य होता है |

श्राद्ध का भोजन करनेवाला ब्राह्मण भोजन करते समय मौन रहे | बोलेगा तो प्राणशक्ति, मन:शक्ति क्षीण होती है | भोजन करानेवाला भी जन की प्रशंशा करे : महाराज ! यह हलवा देखो, बहुत बढ़िया बना है .... यह खीर ऐसी है ....’ इस प्रकार ब्राह्मण को खाने के लिए लालायित करके संतुष्ट करे ( किंतु ब्राह्मण के बार-बार मना करने के बाद भी बहुत हठ करके इतना भोजन न परोस दें कि जूठन छूटे या वे नाराज हों |)

तुम धनसे, जमीन-जागीर से अथवा बाहर की सूचनाओं के तथाकथित ज्ञान से किसीको संतुष्ट नहीं कर सकते | किसीको ५०-१०० रूपये दो तो कहेगा : ‘ठीक है, बहुत है....’ पर अंदर माँग है | तुमने २-४ बीघा जमीन दान दी तो बोलेगा : ‘ ठीक है |’ पर दूसरी भी ले ने की उसके पास योग्यता है | वह भीतर से पूरा तृप्त नहीं हैं | एक भोजन ही ऐसा है कि तुम खिलाते जाओ तो व्यक्ति भीतर और बाहर से तृप्त हो जाता है | दो चची ज्यादा जाती होगी तो बोलेगा : ‘बस, बस, बस !...’

कुछ भी न हो तो ऐसे करें श्राद्ध

यदि तुम्हारे पास दरिद्रता नाच रही हो, खाने-पीने का द्रव्य नहीं हो तो श्राद्ध की पद्धति ऐसा नहीं कहती कि श्राद्ध में इतना – इतना करो ही | तुम नदी के किनारे अथवा नल के नीचे स्नान आदि करके जल से अंजलि भर के उसमें थोड़े-से तिल डालो तो डालो, नहीं तो ऐसे ही उन पितरों का सुमिरन करके तर्पण कर दो | तुममें प्रेम और श्रद्धा होगी तो उससे भी वे तृप्त हो जायेंगे और तुम्हें आशीर्वाद देंगें |

(श्राद्ध से संबंधित विस्तृत जानकारी हेतु पढ़ें आश्रम से प्रकाशित पुस्तक ‘श्राद्ध महिमा’ |)


ऋषिप्रसाद – अगस्त २०२० से     

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